काशी विश्वनाथ मंदिर में PNG का पहला कनेक्शन, अन्नपूर्णा रसोईघर में शुरू आपूर्ति

First PNG connection at Kashi Vishwanath Temple, supply begins at Annapurna kitchen
वाराणसी: गैस सिलेंडर संकट के बीच श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर परिसर स्थित अन्नपूर्णा रसोईघर में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) आपूर्ति का शुभारंभ किया गया है. यह मंदिर परिसर में पीएनजी का पहला कनेक्शन है, जिसे स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है. GAIL (India) Limited द्वारा स्थापित इस कनेक्शन की जानकारी मंदिर न्यास के कार्यकारी अधिकारी विश्वभूषण मिश्रा ने दी. उन्होंने बताया कि कई तकनीकी और भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद यह कार्य महज नौ दिनों के रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया.

पाइपलाइन बिछाने का कार्य सुनियोजित
संकरी और भीड़भाड़ वाली गलियों, भारी पैदल आवाजाही और भूमिगत सेवाओं के बीच पाइपलाइन बिछाने का कार्य सुनियोजित तरीके और सुरक्षा मानकों के पालन के साथ सफलतापूर्वक किया गया. अन्नपूर्णा रसोईघर में प्रतिदिन लगभग 15 हजार श्रद्धालुओं के लिए भोजन तैयार किया जाता है. पहले यहां प्रतिदिन करीब 15 वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों (लगभग 450 सिलेंडर प्रति माह) का उपयोग होता था. अब पीएनजी आपूर्ति शुरू होने से एलपीजी पर निर्भरता पूरी तरह समाप्त हो गई है.

पीएनजी आपूर्ति का शुभारंभ
पीएनजी आपूर्ति का शुभारंभ मंदिर प्रशासन की ओर से शंभु लाल, एसडीएम बनारस, तथा सुशील कुमार, महाप्रबंधक (जीएम), जो वाराणसी सीजीडी परियोजना का नेतृत्व कर रहे हैं, की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया. इस अवसर पर गेल की ओर से गौरी शंकर मिश्र (महाप्रबंधक), सुरेश तिवारी (महाप्रबंधक), कालाधर नारायण (महाप्रबंधक – संविदा एवं खरीद), उदित सिन्हा (महाप्रबंधक – वित्त), नवाज़िश अली अंसारी (उप महाप्रबंधक – परियोजनाएँ), जो वाराणसी में पाइपलाइन बिछाने के कार्य की जिम्मेदारी भी देख रहे हैं, चंदन कुमार (मुख्य प्रबंधक – परिचालन एवं अनुरक्षण), प्रवीण सिंह (मुख्य प्रबंधक – स्टील) तथा देबाशीष साहू (वरिष्ठ अधिकारी – विपणन) उपस्थित रहे.
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इस बदलाव से न केवल ईंधन प्रबंधन अधिक सुरक्षित और सुगम हुआ है, बल्कि यह पर्यावरण के अनुकूल और किफायती भी साबित होगा. मंदिर प्रशासन के अनुसार, यह पहल भविष्य में अन्य धार्मिक एवं सार्वजनिक स्थलों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है. बता दें कि गैस सिलेंडर संकट से अन्नपूर्णा रसोई भी प्रभावित हुई थी. इसके बाद आनन फानन गेल से समझौता हुआ और पीएनजी की आपूर्ति सुनिश्चित हुई.




