प्रो.चतुर्वेदी- स्मृति-ग्रंथ केवल श्रद्धांजलि नहीं, अपितु ज्ञान के स्थायी स्रोत

Prof. Chaturvedi- Memorial texts are not just tributes but a permanent source of knowledge.
वाराणसी: इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के क्षेत्रीय केन्द्र, वाराणसी में आज शुक्रवार को प्रख्यात विदुषी प्रो. कमल गिरि की स्मृति में प्रकाशित ग्रंथ “कमला - द स्प्लेंडर ऑफ इंडियन आर्ट एंड कल्चर” का लोकार्पण किया गया. यह आयोजन भारतीय कला इतिहास कांग्रेस, गुवाहाटी के संयुक्त तत्त्वावधान में सम्पन्न हुआ, जिसमें देशभर के विद्वानों, शोधार्थियों एवं कला-जगत से जुड़े विद्वानों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही. समारोह की अध्यक्षता प्रख्यात दार्शनिक एवं शिक्षाविद प्रो. प्रघोत कुमार मुखोपाध्याय ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी, कुलपति, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय उपस्थित रहे.

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीपप्रज्वलन एवं बृहस्पति पाण्डेय के वैदिक मंगलाचरण के साथ हुआ. इसके पश्चात् कला केन्द्र के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. अभिजित दीक्षित ने कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों का औपचारिक स्वागत किया.
इस अवसर पर मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि इस प्रकार के स्मृति-ग्रंथ केवल श्रद्धांजलि नहीं होते, अपितु वे ज्ञान के स्थायी स्रोत बन जाते हैं. प्रो० गिरि का जीवन दर्शन समाज में कला इतिहास के परस्पर समन्वय को जागृत करता है. उन्होंने इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, क्षेत्रीय केन्द्र वाराणसी द्वारा किये जा रहे इस प्रकार के अकादमिक प्रयासों की सराहना करते हुये कहा कि यह संस्थान भारतीय सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. कार्यक्रम के दौरान प्रो. कमल गिरि के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अपने विभिन्न विचार व्यक्त करते हुये उन्होंने उनके अध्यापन, शोध एवं मार्गदर्शन के क्षेत्र में किये गये कार्यों का स्मरण किया एवं उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की.

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. प्रघोत कुमार मुखोपाध्याय ने प्रो. कमल गिरि के शैक्षिक अवदान को स्मरण करते हुये कहा कि उन्होंने भारतीय कला इतिहास को एक नवीन दृष्टि प्रदान की. उनके कार्यों में परंपरा एवं आधुनिकता का संतुलित समन्वय देखने को मिलता है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिये प्रेरणास्रोत रहेगा. भारतीय कला इतिहास कांग्रेस के अध्यक्ष प्रो. मारुतिनंदन प्रसाद तिवारी ने ग्रन्थ की रूपरेखा एवं विषय-वस्तु को प्रकाशित करते हुये बताया कि इसमें भारतीय कला एवं संस्कृति के विविध आयामों पर देश-विदेश के विद्वानों के शोधपूर्ण लेख संकलित हैं. उन्होंने कहा कि प्रो. गिरि का कार्य भारतीय कला इतिहास के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है. यह ग्रन्थ प्रो० कमल गिरि के व्यापक शैक्षिक योगदान का सजीव प्रतिबिंब प्रस्तुत करता है.
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रो० चतुर्वेदी ने ग्रन्थ के अन्य सम्पादक इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविघालय से उपस्थित वरिष्ठ आचार्य प्रो. आलोक श्रोत्रिय तथा दृश्यकला संकाय, काशी हिन्दू विश्वविघालय के प्रो. शान्तिस्वरूप सिन्हा को सम्मानित करते हुये उन्हें ग्रन्थ भेंट किया. इस अवसर पर ग्रन्थ के काशी में स्थित लेखकों को भी ग्रन्थ की एक प्रति प्रदान की गयी. कार्यक्रम में प्रो० गिरि के अग्रज भ्राता ने कमला जी स्मृतियों को मञ्च साझा करते हुये जाग्रत किया तथा पारिवारिक सदस्य शरद गिरि ने भी अपनी विशेष सहभागिता को प्रस्तुत किया.

समारोह में उपस्थित शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भी इस आयोजन को अत्यंत प्रेरणादायक बताया. उनका मानना था कि इस प्रकार के आयोजन न केवल अकादमिक विमर्श को प्रोत्साहित करते हैं, अपितु सांस्कृतिक चेतना को भी सुदृढ़ करते हैं. कार्यक्रम का संचालन प्रो. शान्तिस्वरूप सिन्हा ने किया. कार्यक्रम के अंत में प्रो. आलोक श्रोत्रिय के धन्यवाद ज्ञापन के साथ समारोह का समापन हुआ.
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आयोजकों ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुये भविष्य में भी इस प्रकार के सार्थक आयोजनों को जारी रखने की प्रतिबद्धता को भी उद्घोषित किया. इस अवसर पर यह स्पष्ट रूप से अनुभव किया गया कि प्रो. कमल गिरि की स्मृति में प्रकाशित यह ग्रंथ भारतीय कला एवं संस्कृति के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण संदर्भ के रूप में स्थापित होगा तथा आने वाले समय में शोधार्थियों एवं विद्वानों के लिये मार्गदर्शक सिद्ध होगा.



