काशी विश्वनाथ धाम ने जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल को भेजे उपहार, मजबूत हुई काशी-मथुरा की आध्यात्मिक परंपरा

वाराणसी : श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर काशी और मथुरा के बीच आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक रिश्ते को और मजबूत करने की पहल की गई. श्री काशी विश्वनाथ धाम की ओर से भगवान श्री लड्डू गोपाल के लिए विशेष उपहार सामग्री तैयार कर बुधवार, 2 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्मस्थान, मथुरा के लिए रवाना की गई. जन्माष्टमी से पहले श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में भगवान श्री विश्वेश्वर महादेव के समक्ष उपहार सामग्री का विधि-विधान से पूजन किया गया. वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के बाद सामग्री बाबा विश्वनाथ को समर्पित कर उनका आशीर्वाद लिया गया. इसके बाद श्रद्धा के साथ इसे मथुरा के लिए भेजा गया.

यह परंपरा वर्ष 2024 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर शुरू हुई थी. इसके तहत काशी विश्वनाथ धाम की ओर से मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर विराजमान लड्डू गोपाल के लिए उपहार भेजा जाता है. रंगभरी एकादशी के अवसर पर भी काशी और मथुरा के बीच भेंट और शुभकामना संदेशों का आदान-प्रदान किया गया था. इस वर्ष इस पहल को और व्यापक रूप दिया गया है. श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की ओर से संस्थागत नॉलेज पार्टनर टेम्पल कनेक्ट के सहयोग से देश-विदेश के मंदिरों से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के लिए शुभकामना संदेश जुटाए जा रहे हैं.
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अब तक करीब 15 देशों के 100 से अधिक मंदिरों से शुभकामना संदेश प्राप्त होने की जानकारी दी गई है. इन संदेशों को भी भेंट सामग्री के साथ श्रीकृष्ण जन्मस्थान, मथुरा भेजा गया है. आयोजकों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य सनातन धर्म के प्रमुख तीर्थों और मंदिरों के बीच आध्यात्मिक संवाद, सांस्कृतिक समन्वय और आपसी श्रद्धा को मजबूत करना है. काशी और मथुरा के बीच यह परंपरा भगवान शिव और श्रीकृष्ण की भक्ति के माध्यम से सनातन एकता और सांस्कृतिक जुड़ाव का संदेश दे रही है.
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी मथुरा में आयोजित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव में स्वयं शामिल होंगे. इस दौरान काशी विश्वनाथ धाम और श्रीकृष्ण जन्मस्थान के बीच स्थापित इस आध्यात्मिक परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा. 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मथुरा में होने वाले उत्सव से पहले काशी से भेजी गई यह भेंट दोनों तीर्थस्थलों के बीच आस्था, भक्ति और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की अनूठी मिसाल बन रही है.



