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केपी ओली को पुलिस ने किया गिरफ्तार, Gen Z हिंसा का दिखा असर

केपी ओली को पुलिस ने किया गिरफ्तार, Gen Z हिंसा का दिखा असर
Mar 28, 2026, 06:51 AM
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Posted By Preeti Kumari

नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस द्वारा की गई ये कार्रवाई दोनों शीर्ष नेताओं को पिछले साल हुए GEN-Z प्रोटेस्ट यानि (जेन जी) आंदोलन के दौरान लापरवाही बरतने के आरोप में की गई है. जिसमें इन दोनों ही नेताओं को कई धाराओं में दोषी करार दिया गया है. हालांकि, इसे केपी ओली साजिश और बदले की कार्रवाई बताकर कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कह रहे हैं. बता दें, ये गिरफ्तारी तब हुई जब नेपाल में नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री बालेन शाह ने पीएम पद की शपथ ली थी, शपथ लेते उन्हें 24 घंटे बीते नहीं की उनके एक एक्शन ने हर किसी को हैरान कर दिया है.


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जांच के आधार पर गिरफ्तारी


बताया जा रहा है कि, ये गिरफ्तारी गृह मंत्रालय की शिकायत के चलते जांच के आधार पर की गई है. दरअसल, बालेन शाह को जेन जी का बेहद खास नेता माना जाता है. नेपाल में हुए जिस आंदोलन की लापरवाही का आरोप केपी ओली झेल रहे हैं, उसी मामले में उन्हें 15 साल की सजा भी हो सकती है. इस आंदोलन की जांच-पड़ताल के लिए एक इनक्वायरी कमीशन बनाई गई थी.


ये वहीं आंदोलन है जिसने केपी ओली को इस्तीफा तक देने को मजबूर कर दिया था, जिसके चलते ओली ने बीते 9 सितंबर को नेपाल के प्रधानमंत्री पद से हमेशा-हमेशा के लिए अपना इस्तीफा दे दिया. इतना ही नहीं, पिछले साल हुए जेन जी प्रदर्शनों में 77 लोगों की मौत हो गई थी और अरबों की संपत्ति का नुकसान भी हुआ था.


जाने पूरा मामला


जानकारी के मुताबिक, नेपाल में जेन जी आंदोलन की आंच सही मायने में आज भी बुझी नहीं हैं. नतीजा केपी ओली की गिरफ्तारी है. पिछले साल जेन जी आंदोलन से भड़की हिंसा के बाद गौरीबहादुर कार्की की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन हुआ, जिसने बताया कि 8 सितंबर को प्रदर्शनकारियों की मौत के मामले में ओली और लेखक की लापरवाही और गैर-जिम्मेदारान रवैया देखा गया था. दोनों के खिलाफ मुलुकी आपराधिक संहिता अधिनियम, 2074 (2017) के तहत कार्रवाई की सिफारिश की गई थी. आयोग ने इसके अलावा पूर्व पुलिस प्रमुख को भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग का आदेश देने के लिए जिम्मेदार ठहराया था.


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ओली को हो सकती 15 साल की जेल


नेपाल में भड़की हिंसा मामले में हुई 77 लोगों की मौत को लेकर आयोग के सामने अपने बयान में केपी ओली ने ये कहा था कि, सुरक्षा एजेंसियों को जान-माल के नुकसान को कम करने और प्रदर्शन में अवांछित तत्वों की घुसपैठ रोकने के निर्देश दिए गए थे. एक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, ओली सरकार को गिराने वाले जेनजी आंदोलन के दौरान 85 अरब नेपाली रुपये से अधिक की संपत्ति नष्ट हुई थी.


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घटनाओं की जांच के लिए गठित की गई एक उच्च-स्तरीय जांच आयोग ने केपी शर्मा ओली, पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक और तत्कालीन पुलिस प्रमुख चंद्र कुबेर खापुंग के खिलाफ आपराधिक जांच और मुकदमा चलाने की सिफारिश की थी. अब इसी कमीशन पर पीएम बालेन शाह ने ऐक्शन लिया है, जिसके बाद से ओली और लेखक के खिलाफ पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई की है, ऐसे में ये माना जा रहा है कि इन दोनों नेताओं को 15 साल की जेल की सजा भी हो सकती है.

काशी विश्‍वनाथ मंदिर में एप आधारित नई व्‍यवस्‍था, श्रद्धालुओं को होगा बेहतर अनुभव
काशी विश्‍वनाथ मंदिर में एप आधारित नई व्‍यवस्‍था, श्रद्धालुओं को होगा बेहतर अनुभव
वाराणसी: काशी विश्वनाथ मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अब दर्शन व्यवस्था और अधिक सुव्यवस्थित और आधुनिक बनाया जा रहा है. मंदिर न्यास ने श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और बेहतर अनुभव देने के उद्देश्य से एप-आधारित नई व्‍यवस्‍था लागू करने का निर्णय लिया है. श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास एक मई से ऐप आधारित व्यवस्था शुरू करने जा रहा है. इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. काशी विश्वनाथ न्यास परिषद के सीईओ डॉ. विश्वभूषण ने बताया कि इसमें श्रद्धालुओं के मूल विवरण अनिवार्य रूप से प्राप्त किए जाएंगे. कई भाषाओं में प्रशिक्षित कर्मचारियों की नियुक्ति इस आधार पर उनका सामान्य, क्षेत्रीय और भाषाई वर्गीकरण किया जाएगा. इससे कई भाषाओं में प्रशिक्षित कर्मचारियों की नियुक्ति कर बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा. सुरक्षा की दृष्टि से नई व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी. आगंतुकों की मूल पहचान संबंधी जानकारी सीमित अवधि तक सुरक्षित रखी जाएगी. काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अनुसार, धाम में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को भाषा और क्षेत्रीय भिन्नताओं के कारण कई बार असुविधा का सामना करना पड़ता है. इसी समस्या को दूर करने के लिए यह नई व्यवस्था शुरू की जा रही है.ई प्रणाली के तहत सुगम दर्शन, अभिषेक और अन्य विशेष सेवाओं के लिए आने वाले श्रद्धालुओं का पंजीकरण एप के माध्यम से किया जाएगा. इसमें आधार संख्या सहित कुछ जरूरी विवरण दर्ज करना अनिवार्य होगा. इस डेटा के आधार पर श्रद्धालुओं का भाषाई और क्षेत्रीय वर्गीकरण किया जाएगा, जिससे संबंधित भाषाओं में प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती की जा सकेगी. इससे श्रद्धालुओं को अधिक सहज और संतोषजनक अनुभव मिलेगा.Also Read: बुद्ध पूर्णिमा: सारनाथ बौद्ध अनुयायियों से गुलजार, भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष के किए दर्शननई व्यवस्था आगामी दिनों में शुरू की जाएगी यह नई व्यवस्था आगामी दिनों में शुरू की जाएगी और 1 मई 2026 के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. न्यास ने स्पष्ट किया है कि सामान्य श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क दर्शन व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है. काशीवासियों के लिए भी विशेष द्वार से सुबह और शाम के समय मुफ्त दर्शन की सुविधा पहले की तरह जारी रहेगी. मंदिर न्यास ने श्रद्धालुओं से इस नई व्यवस्था के सफल संचालन के लिए सहयोग की अपील की है. साथ ही, सुझाव देने के लिए आधिकारिक वेबसाइट और ईमेल के माध्यम से अपनी राय साझा करने का आग्रह किया गया है.https://www.youtube.com/watch?v=OxmuubD2ofQ
बुद्ध पूर्णिमा: सारनाथ बौद्ध अनुयायियों से गुलजार, भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष के किए दर्शन
बुद्ध पूर्णिमा: सारनाथ बौद्ध अनुयायियों से गुलजार, भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष के किए दर्शन
Buddha Purnima: Sarnath buzzes with Buddhist followers, offering prayers to the relics of Lord Buddhaवाराणसी: वैशाख बुद्ध पूर्णिमा के मौके पर शुक्रवार को सारनाथ गुलजार है. इस अवसर पर सुबह मूलगंध कुटी बौद्ध मंदिर में हजारों बौद्ध अनुयायी भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष का दर्शन पूजन कर निहाल हुए. दिन भर बौद्ध भिक्षुओं की चहल पहल बनी रही. मंदिर और मठों में विशेष सजावट की गई. बौद्ध मंदिर के विहाराधिपति भिक्षु आर सुमित्ता नन्द थेरो के नेतृत्व में हीरा मोती से जड़ित फ्लास्क में रखा बुद्ध अस्थि अवशेष मन्दिर के हाल में दर्शन को रखा गया.जापानी बौद्ध मंदिर में किए दर्शन पूजन थाईलैंड, वियतनाम, श्रीलंका के साथ महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, बिहार के बोध गया, के अलावा यूपी के श्रावस्ती, कुशीनगर, गाजीपुर, जौनपुर, चंदौली,अन्य जिलों से बौद्ध अनुयायी एंव स्थानीय बौद्ध मठ के बौद्ध भिक्षुओं ने बुद्ध अस्थि अवशेष के दर्शन किये. इस दौरान भिक्षु चंदिमा, भिक्षु शीलवश, भिक्षु धम्म रत्न, भिक्षु रत्नाकर, सहित थाई, तिब्बती,जापानी, वियतनाम, कम्बोडिया बौद्ध मंदिर के बौद्ध भिक्षु शामिल रहे. इसके पूर्व मन्दिर में सुबह 6 बजे विश्व शांति के लिए बौद्ध भिक्षुओं ने पूजा की. इसके साथ यहां आए बौद्ध अनुयायियों ने सारनाथ के कम्बोडिया, थाईलैंड, वियतनाम, तिब्बती, जापानी बौद्ध मंदिर में दर्शन पूजन किए.Also Read: कमर्शियल LPG सिलेंडर के संग महंगा हुआ 5 किलो वाला 'छोटू', जानें दामों में कितनी बढ़ोतरीबुद्ध पूर्णिमा पर सारनाथ आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भोजन दान किया गया. इसके पहले पहला भोजन भिक्षु चण्डपदुम लेकर भगवान बुद्ध के चढ़ाया गया. धम्म शिक्षण केंद्र के प्रभारी भिक्षु चंदिमा ने बताया कि मूलगंध कुटी बौद्ध मंदिर परिसर में सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक भोजन की व्यवस्था की गई. इस दौरान सारनाथ में दुकानों पर भी भीड देखी गई. अवकाश होने और मौसम के तकाजे के कारण आम लोग भी बडी संख्‍या में लोगा पहुंचे.https://www.youtube.com/watch?v=OxmuubD2ofQ
मजदूर दिवस पर बड़ा सवाल—क्या सिर्फ भाषणों तक सीमित हैं अधिकार...
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वाराणसी: आज पूरे देश में अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवसयानी मजदूर दिवस उत्साह और सम्मान के साथ मनाया जा रहा है. यह दिन श्रमिकों के संघर्ष, उनके अधिकारों और समाज के निर्माण में उनके अहम योगदान को याद करने के लिए समर्पित है.मजदूर दिवस की शुरुआत 19वीं सदी में श्रमिकों के काम के घंटे तय करने की मांग को लेकर हुए आंदोलनों से जुड़ी है.भारत में पहली बार 1 मई 1923 को चेन्नई में इस दिवस को मनाया गया था, जिसकी पहल हिंदुस्तान लेबर किसान पार्टी ने की थी.आज के दिन विभिन्न श्रमिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं द्वारा रैलियां, संगोष्ठियां और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं.वाराणसी सहित प्रदेश के कई जिलों में मजदूरों को उनके अधिकारों, न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षित कार्यस्थल को लेकर जागरूक किया जा रहा है.विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते समय के साथ मजदूरों की भूमिका और चुनौतियां भी बदल रही हैं.खासकर असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों को आज भी रोजगार की अस्थिरता, कम वेतन और सामाजिक सुरक्षा की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.also read:कमर्शियल LPG सिलेंडर के संग महंगा हुआ 5 किलो वाला 'छोटू', जानें दामों में कितनी बढ़ोतरीसरकार द्वारा श्रमिकों के हित में कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन उनके प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता जमीनी स्तर पर अब भी महसूस की जा रही है.मजदूर दिवस के अवसर पर लोगों ने श्रमिकों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उनके बेहतर भविष्य और अधिकारों की सुरक्षा का संकल्प लिया.