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केरल में लेफ्ट का किला ढहते ही बदली LDF की रणनीति, विपक्षी नेता पर मंथन शुरू

केरल में लेफ्ट का किला ढहते ही बदली LDF की रणनीति, विपक्षी नेता पर मंथन शुरू
May 06, 2026, 12:46 PM
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Posted By Preeti Kumari

LDF's strategy shifts as Left's fort collapses in Kerala, brainstorming begins on opposition leader


Kerala: केरल विधानसभा चुनाव के सामने आए नतीजों में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट को करारी हार मिली है. जिसके बाद से हर किसी का ध्यान इस बात पर टिका है कि, आखिरकार विधानसभा में विपक्ष का नेतृत्व कौन करेगा. जिसमें पिनराई विजयन का नाम सबसे आगे आ रहा है. जिस पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी यानि (मार्क्सवादी) (CPM) ने आंतरिक चर्चाएं भी करनी शुरू कर दी हैं. ऐसे में पार्टी के नेताओं को इस बात की भी चिंता सताने लगी है कि क्या पूर्व मुख्यमंत्री को विपक्ष की मौजूदगी को मज़बूत करने की भूमिका निभानी देनी चाहिए की नहीं. ऐसे में माना ये जा रहा है कि, पिनाराई विजयन को ही विपक्ष का नेता नियुक्त किया जा सकता है. क्योंकि वो काफी अनुभवी और वरिष्ठ विधायक हैं. ताकि उनका ये अनुभव विपक्ष को और भी मजबूती के साथ एक जुट बनाए रखने में बेहद मददगार साबित होगी. हालांकि, इस मामले में अभी तक कोई भी आधिकारिक फैसला घोषित नहीं किया गया है, और विजयन ने खुद भी इस मामले पर किसी तरह का बयान नहीं दिया है.


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विपक्षी नेता के लिए क्यों पिनाराई विजयन का नाम


CPM विपक्षी गठबंधन में सबसे बड़ी पार्टी है, इसलिए यह स्वाभाविक है कि विपक्ष का नेता इसी पार्टी से हो. विजयन चुने हुए विधायकों में सबसे वरिष्ठ नेता भी हैं, जिन्होंने हाल के चुनाव के दौरान सरकार और पार्टी का नेतृत्व किया था. पार्टी नेताओं ने सुझाव दिया है कि अगर विजयन चुने जाने के बावजूद पीछे हटते हैं, तो इससे राजनीतिक आलोचना हो सकती है, खासकर लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) को मिली करारी हार को देखते हुए.


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मुख्य विकल्प बने बालागोपाल


सूत्रों का मानना है कि, अगर किसी कारणों की वजह से पिनराई विजयन यह भूमिका नहीं निभाते हैं, तो के. एन. बालागोपाल को मुख्य विकल्प के रूप में देखा जा रहा है. ताकि विजयन के इस पद के लिए मना करने पर केंद्रीय समिति के सदस्य और नव-निर्वाचित विधायक, बालागोपाल को विपक्ष की ये कमान सौंपी जा सके. क्योंकि , बालागोपाल को पार्टी के भीतर एक मजबूत संगठनात्मक हस्ती माना जाता है. साजी चेरियन और पी. ए. मोहम्मद रियास जैसे अन्य वरिष्ठ नेता भी राज्य नेतृत्व का हिस्सा हैं, हालाँकि उन्हें फिलहाल इस पद के लिए मुख्य दावेदार के रूप में नहीं देखा जा रहा है.ऐसे में अगर विजयन कमान संभालते हैं, तो उप-नेता की भूमिका के लिए बालागोपाल पर विचार किया जा सकता है.


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जानकारी के मुताबिक, LDF अपने गठन के बाद से सबसे कमजोर स्थितियों में से एक का सामना कर रहा है, जिससे विधानसभा में मजबूत नेतृत्व पेश करने के लिए पार्टी पर दबाव बढ़ गया है. हार के बाद सोशल मीडिया पर विजयन और CPM के राज्य सचिव एम. वी. गोविंदन की आलोचना भी की जा रही है.पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि नेतृत्व की भूमिका को अस्वीकार करने से आलोचना और तेज हो सकती है, जबकि इसे स्वीकार करने से विपक्ष को एकजुट करने और राजनीतिक विश्वसनीयता बहाल करने में मदद मिल सकती है.


CPM राज्य सचिवालय की महत्वपूर्ण बैठक


CPM राज्य सचिवालय की एक महत्वपूर्ण बैठक निर्धारित है, जिसमें पार्टी चुनाव परिणामों की समीक्षा करेगी और भविष्य की रणनीति पर भी चर्चा करेगी. हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि, इस बैठक में विपक्ष के नेता के पद पर अंतिम फैसला हो पाएगा या नहीं, लेकिन उम्मीद है कि विजयन इसमें शामिल होंगे. वरिष्ठ नेता सी. एन. मोहनन ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि विजयन को यह भूमिका निभानी चाहिए; उनका तर्क है कि सरकार और चुनावी अभियान का चेहरा होने के नाते, विपक्ष का नेतृत्व करना भी उनके लिए स्वाभाविक है. इस अंतिम फैसले से यह तय होने की उम्मीद है कि भविष्य में विधानसभा में CPM और LDF किस तरह काम करेंगे, खासकर ऐसे समय में, जब विपक्ष अपनी खोई हुई राजनीतिक ज़मीन वापस पाने की कोशिश कर रहा है.


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बीएचयू को मिला पर्यावरणीय सिमुलेशन उपकरण का भारतीय पेटेंट...
बीएचयू को मिला पर्यावरणीय सिमुलेशन उपकरण का भारतीय पेटेंट...
वाराणसी: 25 जून 2026 काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) को एक अभिनव और कम लागत वाले पर्यावरणीय सिमुलेशन उपकरण के लिए भारतीय पेटेंट प्राप्त हुआ है. यह उपकरण छोटे प्रयोगात्मक पशुओं पर विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों के प्रभाव का अध्ययन करने में सक्षम है. इस आविष्कार का शीर्षक "A Low-Cost and Portable, Small Animals' Device for Simulation of Differing Environmental Conditions" है.यह उपकरण बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के शरीर क्रिया विज्ञान विभाग में डॉ. अनिल कुमार यादव द्वारा, डॉ. कुमार सर्वोत्तम के मार्गदर्शन में उनके पीएचडी शोध कार्य के दौरान विकसित किया गया है.यह स्वदेशी उपकरण छोटे प्रयोगात्मक पशुओं के लिए कृत्रिम रूप से विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियां तैयार कर सकता है. इसके माध्यम से ऑक्सीजन की मात्रा, वायुदाब, तापमान, आर्द्रता, वायु गुणवत्ता और प्रकाश जैसी परिस्थितियों को नियंत्रित किया जा सकता है. इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों का जीवों के शरीर और व्यवहार पर क्या प्रभाव पड़ता है.विशेषज्ञों के अनुसार, अब तक उपलब्ध अधिकांश उपकरण अत्यधिक महंगे थे और एक समय में केवल एक या दो पर्यावरणीय कारकों का ही अध्ययन कर सकते थे.जबकि बीएचयू द्वारा विकसित यह उपकरण कम लागत में एक साथ कई पर्यावरणीय परिस्थितियों का अध्ययन करने की सुविधा प्रदान करता है.ALSO READ:क्यूआर कोड व्यवस्था पुनः लागू करने की मांग, पुलिस आयुक्त को सौंपा ज्ञापन...इस तकनीक से सीमित संसाधनों वाले शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों को भी आधुनिक शोध सुविधाएं सुलभ हो सकेंगी. इसका उपयोग उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में कम ऑक्सीजन की स्थिति, वायु प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, श्वसन संबंधी रोगों, अंतरिक्ष एवं विमानन चिकित्सा तथा अन्य जैव-चिकित्सकीय अनुसंधानों में किया जा सकेगा.वैज्ञानिकों का मानना है कि यह उपकरण भविष्य में नई दवाओं के परीक्षण और मानव स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न शोध कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.इस आविष्कार के लिए बीएचयू को भारतीय पेटेंट प्रदान किया गया है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे स्वदेशी अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक उत्कृष्टता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है. यह सफलता न केवल बीएचयू बल्कि देश के वैज्ञानिक समुदाय के लिए भी गौरव का विषय मानी जा रही है.
क्यूआर कोड व्यवस्था पुनः लागू करने की मांग, पुलिस आयुक्त को सौंपा ज्ञापन...
क्यूआर कोड व्यवस्था पुनः लागू करने की मांग, पुलिस आयुक्त को सौंपा ज्ञापन...
वाराणसी : उत्तर प्रदेश ऑटो रिक्शा/थ्री व्हीलर चालक यूनियन, वाराणसी के जिला अध्यक्ष ईश्वर सिंह ने पुलिस आयुक्त वाराणसी को ज्ञापन देकर शहर में पूर्व में लागू क्यूआर कोड व्यवस्था को पुनः प्रभावी ढंग से लागू करने तथा कथित अवैध वसूली की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है.ज्ञापन में कहा गया है कि कमिश्नरेट वाराणसी द्वारा पूर्व में लागू की गई क्यूआर कोड व्यवस्था के कारण शहर की यातायात व्यवस्था काफी हद तक व्यवस्थित हो गई थी तथा जाम की समस्या में भी उल्लेखनीय कमी आई थी. इससे आम नागरिकों, वाहन चालकों तथा देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को भी राहत मिली थी.यूनियन का आरोप है कि वर्तमान समय में क्यूआर कोड व्यवस्था पूरी तरह प्रभावहीन हो चुकी है और विभिन्न क्षेत्रों में बिना परमिट एवं नियम विरुद्ध वाहन खुलेआम संचालित हो रहे हैं. साथ ही कुछ एजेंटों द्वारा ऐसे वाहनों से प्रति वाहन लगभग दो हजार रुपये प्रतिमाह की कथित अवैध वसूली किए जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं.ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि जब भी किसी क्षेत्र में जांच अथवा चेकिंग अभियान चलाया जाता है, उसकी सूचना पहले ही कुछ लोगों तक पहुंच जाती है.इसके लिए कथित रूप से व्हाट्सएप ग्रुप संचालित किए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से बिना परमिट अथवा नियम विरुद्ध संचालित वाहनों को पहले ही सतर्क कर दिया जाता है.इससे कार्रवाई का उद्देश्य प्रभावित होता है और वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ पाती.ईश्वर सिंह ने कहा कि यह अत्यंत गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच कराए जाने पर अवैध वसूली तथा नियम विरुद्ध वाहन संचालन से जुड़े पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है.ALSO READ : वाराणसी में ऑनलाइन बेटिंग और जुआ कारोबार के दो आरोपी गिरफ्तार...ज्ञापन में पुलिस आयुक्त से मांग की गई है कि क्यूआर कोड व्यवस्था को पुनः लागू किया जाए, बिना परमिट संचालित वाहनों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाया जाए, कथित अवैध वसूली करने वालों एवं उनके संरक्षकों की जांच कर कार्रवाई की जाए, सूचना लीक करने वाले व्हाट्सएप ग्रुपों की जांच कराई जाए तथा बिना पूर्व सूचना के औचक निरीक्षण एवं चेकिंग अभियान चलाकर वास्तविक स्थिति का सत्यापन कराया जाए.
वाराणसी में ऑनलाइन बेटिंग और जुआ कारोबार के दो आरोपी गिरफ्तार...
वाराणसी में ऑनलाइन बेटिंग और जुआ कारोबार के दो आरोपी गिरफ्तार...
वाराणसी : साइबर क्राइम थाना पुलिस ने ऑनलाइन माध्यम से जुआ और सट्टे का कारोबार संचालित करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. कार्रवाई के दौरान पुलिस ने करीब पांच लाख रुपये की धनराशि दो बैंक खातों में सीज कराई है. सहायक पुलिस आयुक्त (अपराध) विदुष सक्सेना ने बताया कि साइबर क्राइम थाना की टीम को ऑनलाइन बेटिंग और जुआ संचालन की सूचना मिली थी. जांच के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया.गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान दीपक सिंह, निवासी थाना गोविंद नगर, कानपुर तथा नवनीत सिंह, निवासी कानपुर के रूप में हुई है. तलाशी के दौरान उनके कब्जे से नौ मोबाइल फोन और 12 सिम कार्ड बरामद किए गए हैं, जिनका उपयोग कथित रूप से ऑनलाइन सट्टा और जुआ संचालन में किया जा रहा था. पुलिस के अनुसार, आरोपियों के बैंक खातों में मौजूद करीब पांच लाख रुपये की संदिग्ध धनराशि को सीज कराया गया है. बरामद मोबाइल फोन और सिम कार्डों की जांच कर ऑनलाइन नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है.ALSO READ : बीएचयू अस्पताल और ट्रामा सेंटर में अब मिलेगी मुफ्त वाई-फाई सेवा, जान लें तरीका...गिरफ्तारी करने वाली टीम में निरीक्षक विजय नारायण मिश्र, निरीक्षक उदयवीर सिंह, उपनिरीक्षक विवेक सिंह, उपनिरीक्षक आलोक कुमार यादव, कांस्टेबल चंद्रशेखर यादव, कांस्टेबल देवेंद्र यादव, अवनीश सिंह तथा कांस्टेबल अनिल मौर्य शामिल रहे. पुलिस का कहना है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए के अवैध कारोबार में संलिप्त अन्य व्यक्तियों की पहचान कर उनके विरुद्ध भी आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी. पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वे विभिन्न बेटिंग वेबसाइटों के लिए ग्राहकों को आइडी उपलब्ध कराते थे तथा जमा-निकासी (पे-इन और पे-आउट) की प्रक्रिया संचालित करते थे. इसके लिए फर्जी सिम कार्ड और बैंक खातों का उपयोग किया जाता था. पुलिस ने दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. गिरोह से जुड़े अन्य लोगों, बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की जांच जारी है.