केरल में लेफ्ट का किला ढहते ही बदली LDF की रणनीति, विपक्षी नेता पर मंथन शुरू

LDF's strategy shifts as Left's fort collapses in Kerala, brainstorming begins on opposition leader
Kerala: केरल विधानसभा चुनाव के सामने आए नतीजों में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट को करारी हार मिली है. जिसके बाद से हर किसी का ध्यान इस बात पर टिका है कि, आखिरकार विधानसभा में विपक्ष का नेतृत्व कौन करेगा. जिसमें पिनराई विजयन का नाम सबसे आगे आ रहा है. जिस पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी यानि (मार्क्सवादी) (CPM) ने आंतरिक चर्चाएं भी करनी शुरू कर दी हैं. ऐसे में पार्टी के नेताओं को इस बात की भी चिंता सताने लगी है कि क्या पूर्व मुख्यमंत्री को विपक्ष की मौजूदगी को मज़बूत करने की भूमिका निभानी देनी चाहिए की नहीं. ऐसे में माना ये जा रहा है कि, पिनाराई विजयन को ही विपक्ष का नेता नियुक्त किया जा सकता है. क्योंकि वो काफी अनुभवी और वरिष्ठ विधायक हैं. ताकि उनका ये अनुभव विपक्ष को और भी मजबूती के साथ एक जुट बनाए रखने में बेहद मददगार साबित होगी. हालांकि, इस मामले में अभी तक कोई भी आधिकारिक फैसला घोषित नहीं किया गया है, और विजयन ने खुद भी इस मामले पर किसी तरह का बयान नहीं दिया है.

विपक्षी नेता के लिए क्यों पिनाराई विजयन का नाम
CPM विपक्षी गठबंधन में सबसे बड़ी पार्टी है, इसलिए यह स्वाभाविक है कि विपक्ष का नेता इसी पार्टी से हो. विजयन चुने हुए विधायकों में सबसे वरिष्ठ नेता भी हैं, जिन्होंने हाल के चुनाव के दौरान सरकार और पार्टी का नेतृत्व किया था. पार्टी नेताओं ने सुझाव दिया है कि अगर विजयन चुने जाने के बावजूद पीछे हटते हैं, तो इससे राजनीतिक आलोचना हो सकती है, खासकर लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) को मिली करारी हार को देखते हुए.

मुख्य विकल्प बने बालागोपाल
सूत्रों का मानना है कि, अगर किसी कारणों की वजह से पिनराई विजयन यह भूमिका नहीं निभाते हैं, तो के. एन. बालागोपाल को मुख्य विकल्प के रूप में देखा जा रहा है. ताकि विजयन के इस पद के लिए मना करने पर केंद्रीय समिति के सदस्य और नव-निर्वाचित विधायक, बालागोपाल को विपक्ष की ये कमान सौंपी जा सके. क्योंकि , बालागोपाल को पार्टी के भीतर एक मजबूत संगठनात्मक हस्ती माना जाता है. साजी चेरियन और पी. ए. मोहम्मद रियास जैसे अन्य वरिष्ठ नेता भी राज्य नेतृत्व का हिस्सा हैं, हालाँकि उन्हें फिलहाल इस पद के लिए मुख्य दावेदार के रूप में नहीं देखा जा रहा है.ऐसे में अगर विजयन कमान संभालते हैं, तो उप-नेता की भूमिका के लिए बालागोपाल पर विचार किया जा सकता है.

जानकारी के मुताबिक, LDF अपने गठन के बाद से सबसे कमजोर स्थितियों में से एक का सामना कर रहा है, जिससे विधानसभा में मजबूत नेतृत्व पेश करने के लिए पार्टी पर दबाव बढ़ गया है. हार के बाद सोशल मीडिया पर विजयन और CPM के राज्य सचिव एम. वी. गोविंदन की आलोचना भी की जा रही है.पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि नेतृत्व की भूमिका को अस्वीकार करने से आलोचना और तेज हो सकती है, जबकि इसे स्वीकार करने से विपक्ष को एकजुट करने और राजनीतिक विश्वसनीयता बहाल करने में मदद मिल सकती है.
CPM राज्य सचिवालय की महत्वपूर्ण बैठक
CPM राज्य सचिवालय की एक महत्वपूर्ण बैठक निर्धारित है, जिसमें पार्टी चुनाव परिणामों की समीक्षा करेगी और भविष्य की रणनीति पर भी चर्चा करेगी. हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि, इस बैठक में विपक्ष के नेता के पद पर अंतिम फैसला हो पाएगा या नहीं, लेकिन उम्मीद है कि विजयन इसमें शामिल होंगे. वरिष्ठ नेता सी. एन. मोहनन ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि विजयन को यह भूमिका निभानी चाहिए; उनका तर्क है कि सरकार और चुनावी अभियान का चेहरा होने के नाते, विपक्ष का नेतृत्व करना भी उनके लिए स्वाभाविक है. इस अंतिम फैसले से यह तय होने की उम्मीद है कि भविष्य में विधानसभा में CPM और LDF किस तरह काम करेंगे, खासकर ऐसे समय में, जब विपक्ष अपनी खोई हुई राजनीतिक ज़मीन वापस पाने की कोशिश कर रहा है.

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