खामेनेई की मौत पर वाराणसी में घरों पर लगे काले झंडे, मजलिसों में दिखा गुस्सा

वाराणसी: अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीटर अयातुल्लाह अली खामेनेई के मारे जाने पर वाराणसी के हज शिया समुदाय में गुस्सा है. उन्होंने सोमवार को भी गहरा दुख का इजहार किया. शिया मस्जिदों और इमामबाड़ों में मजलिसें हुईं, जिसमें आक्रोश जताया गया. कहा कि इस जुल्म की दुनिया निंदा कर रही है. एक दिन जुल्म करने वाले मुल्क भी मिट जाएंगे. शिया जमात के इमाम-ए-जुमा मौलाना जफरुल हुसैनी के सात दिन शोक के एलान के बाद शिया घरों और मस्जिदों पर काले झंडे लगाए गए.

रजमान के 12वीं तारीख पर रोजेदारों ने अजान के बाद रोजा खोला. शिया रोजेदारों ने रोजा खोलने के बाद मस्जिदों और इमामबाड़ों में मजलिसें हुईं. उन्होंने खामेनेई की मौत पर दुख जताते हुए इसके खिलाफ आवाज बुलंद की.

उलेमाओं ने कहा कि हक और इंसाफ के लिए हर किसी को आगे आना चाहिए. दारानगर, मुकिमगंज, सरैया इमामबाड़ा, दरगाहे फातमान, काली महाल आदि इलाकों में मजलिसें हुईं. लोग काला लिबास पहनकर एहतेजाज किया.

उधर, अर्दली बाजार में आयोजित शोक सभा में महानगर कांग्रेस कमेटी के महासचिव हसन मेहंदी कब्बन ने शोक जताते हुए कहा कि कर्बला की सरजमीं पर दुनिया को उन्होंने यह सिखाया की हालात चाहे जैसे भी हो सच का साथ न छोड़ें. कर्बला का पैगाम कोई कहानी नहीं है, बल्कि हर दौर के लिए ज़िंदा सबक है. जब भी दुनिया में जुल्म बढ़ेगा. हुसैनी किरदार की जरूरत महसूस होगी.



