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बनारस में पतंगबाजी; महापौर और नगर आयुक्त ने लड़ाए पेंच, आज होगा फाइनल मुकाबला

बनारस में पतंगबाजी; महापौर और नगर आयुक्त ने लड़ाए पेंच, आज होगा फाइनल मुकाबला
Jan 13, 2026, 07:05 AM
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Posted By Monisha Rai

वाराणसी : दशाश्वमेध घाट के सामने गंगा उस पार रेती पर सोमवार को दो दिवसीय पतंगबाजी प्रतियोगिता की शुरुआत हुई. इसका शुभारंभ मेयर अशोक कुमार तिवारी ने किया. इस दौरान मेयर और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने पतंग उड़ाई. उन्होंने खूब पेंच लड़ाए. इस दौरान युवाओं में काफी उत्साह देखने को मिला. पतंगबाजी के शुभारंभ के अवसर पर सभी युवाओं ने जमकर मस्ती की और खूब पतंजबाजी की. फाइनल मुकाबला आज खेला जाएगा.

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नगर निगम की ओर से गंगा पार आयोजित पतंग प्रतियोगिता में पतंगबाजी लोगों के सिर चढ़कर बोली .ये कटा, वो कटा, भक्काटा, हुर्रे की आवाजें दिनभर गूंजती रहीं. मानो वहां मौजूद लोगों का बचपन फिर से लौट आया हो. गंगा पार में पतंगबाजी की धूम रही। 16 टीमें आपस में पेच लड़ाते दिखीं. हर पतंग के कटने पर सिर्फ एक ही आवाज गूंजती-भक्काट.


ये टीमें पहुँची सेमीफाइनल में


बनारस काइट क्लब ,फायर काइट क्लब,एयर लाइन्स काइट क्लबऔर स्काई लाइन काइट क्लब सेमीफाइनल में पहुँची. मुकाबले में प्रथम विजेता टीम को 51 हजार रुपये, द्वितीय को 21 हजार रुपये और तृतीय को 11 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा.


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महापौर अशोक कुमार तिवारी ने कहा कि काशी में पतंगबाजी सदियों पुरानी परंपरा है. बीते दौर में मकर संक्रांति से एक माह पूर्व ही हर घर की छतों से 'भाक्काटे' की आवाजें सुनाई देने लगती थीं. आजकल के युवा सोशल मीडिया और रील बनाने में व्यस्त हैं. नतीजतन पारंपरिक खेलों का प्रभाव कम हो रहा है. महापौर ने घोषणा की है कि अगले साल से प्रतियोगिता को राष्ट्रीय स्वरूप दिया जाएगा. अगले साल से प्रस्तावित राष्ट्रीय स्तर के आयोजन में फाइनल विजेता को प्रथम पुरस्कार के रूप में 5 लाख रुपये, द्वितीय को 2.51 लाख रुपये और तृतीय को 1.51 लाख रुपये की धनराशि प्रदान की जाएगी.

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ, भारतीय ज्ञान परंपरा पर मंथन
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ, भारतीय ज्ञान परंपरा पर मंथन
वाराणसी: महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में भारतीय ज्ञान परंपरा के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक आयामों पर केंद्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का मंगलवार को शुभारंभ हुआ. संगोष्ठी का आयोजन प्रो. वासुदेव सिंह स्मृति न्यास, वाराणसी के तत्वावधान में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग तथा महामना मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान के सहयोग से किया गया.डॉ. भगवान दास केंद्रीय पुस्तकालय के समिति कक्ष में आयोजित संगोष्ठी के मुख्य अतिथि पद्म भूषण प्रो. देवी प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा हमें यह बोध कराती है कि जीवन में किस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए. हमारी परंपरा सत्य, नैतिकता और सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित है. उन्होंने कहा कि लीला और प्रतीकों के माध्यम से हमारी संस्कृति गहरे संदेश देती है, जिसे समझना आवश्यक है. संप्रेषण की प्रभावी पद्धतियाँ भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित हैं, किंतु वर्तमान समय में पुस्तक संस्कृति के स्थान पर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का प्रभाव बढ़ गया है। ऐसे में पुस्तकों को अपनी परंपरा से जोड़कर रखना अत्यंत आवश्यक है.कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जय प्रकाश नारायण विश्वविद्यालय, छपरा (बिहार) के पूर्व कुलपति प्रो. हरिकेश सिंह ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल आधार समग्रता है। मां सरस्वती की प्रतिमा में वाणी, वीणा और तप का समन्वय इसी समग्र दृष्टिकोण का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास की उत्पत्ति और विकास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यहीं से भारतीय दर्शन की यात्रा प्रारंभ होती है.साथ ही, प्रो. भगवानदास के साहित्यिक योगदान को भी उन्होंने महत्वपूर्ण बताया.विशिष्ट अतिथि प्रो. जंग बहादुर पांडेय ने अर्जुन के उपदेशों का उल्लेख करते हुए तत्परता, इंद्रिय-संयम और मन पर नियंत्रण को जीवन के लिए आवश्यक बताया. काशी विद्यापीठ के डॉ. अमरीश राय ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा एक सतत और सनातन प्रवाह है, जो कभी खंडित नहीं हुई.इसमें विश्व की समस्त समस्याओं के समाधान निहित हैं, क्योंकि हमारे ऋषि-मुनियों ने प्रत्येक विषय पर गहन चिंतन किया है.काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रो. प्रभाकर सिंह ने सामाजिक और साहित्यिक चेतना को समझने की आवश्यकता पर बल दिया.कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे यू.पी. कॉलेज के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. राम सुधार सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता काल में पराड़कर जी द्वारा लिखे गए लेख आज भी समाज को झकझोरने की क्षमता रखते हैं और भारतीय ज्ञान परंपरा के सामाजिक-सांस्कृतिक पक्ष को सशक्त रूप से प्रस्तुत करते हैं.ALSO READ : उमा भारती बोलीं, शंकराचार्य होने का सबूत मांगना मर्यादा का उल्लंघनइस अवसर पर यू.जी.सी. केयर लिस्टेड शोध पत्रिका ‘नमन’ का लोकार्पण भी किया गया। कार्यक्रम में प्रो. श्रद्धा सिंह, प्रो. जंग बहादुर पाण्डेय, डॉ. जयदेव सिंह, डॉ. बृजेंद्र पांडेय सहित अनेक शिक्षकों ने अपने विचार व्यक्त किए.स्वागत भाषण महामना मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान के निदेशक डॉ. नागेन्द्र कुमार सिंह ने दिया, बीज वक्तव्य डॉ. हिमांशु शेखर सिंह ने प्रस्तुत किया। संचालन डॉ. राहुल अवस्थी एवं डॉ. चन्द्रशील पाण्डेय ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन सुधांशु शेखर सिंह व डॉ. मनोहर लाल ने किया.कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे.
इस पेंगुइन ने खीचा लोगों का ध्यान, वायरल हुई वीडियो
इस पेंगुइन ने खीचा लोगों का ध्यान, वायरल हुई वीडियो
अंटार्कटिका की अंतहीन बर्फ के बीच एक अकेला पेंगुइन, अपनी कॉलोनी को पीछे छोड़कर विशाल बर्फीले पहाड़ों की ओर बढ़ रहा है. इन दिनों इंटरनेट पर वायरल वीडियो सनसनी मचा रहा है. यह वायरल वीडियो रेजिस्टेंस और विद्रोह का एक अनूठा प्रतीक बन गया है. सोशल मीडिया पर लोग इसे रॉबर्ट फ्रॉस्ट की 'रोड नॉट टेकन' चुनने वाला बता रहे हैं, जिसके बाद हर कोई यही जानना चाहता है कि, अपनी कॉलोनी को छोड़कर आखिर वो पेंगुइन अकेला पहाड़ की तरफ क्यों जा रहा है? तो चलिए आज हम आपको इसके बारे में बताते हैं.आखिर क्या है 'निहिलिस्ट पेंगुइन' की असली कहानी?सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो की सच्चाई यह है कि, जनवरी 2026 में वायरल हो रहा ये वीडियो यह हालिया का नहीं है. यह क्लिप 19 साल पुरानी एक डॉक्यूमेंट्री 'एनकाउंटर्स एट द एंड ऑफ द वर्ल्ड' (2007) से ली गई है, जिसे जर्मन फिल्म निर्माता वर्र्नर हर्जोग ने निर्देशित किया था, इस फिल्म में एक एडली पेंगुइन को अपनी कॉलोनी से दूर जाते दिखाया गया है.आमतौर पर पेंगुइन समुद्र की ओर जाते हैं, जहां उन्हें खाना और जीवन मिलता है, लेकिन यह पेंगुइन उनसे उलट दुर्गम पहाड़ियों की ओर जा पड़ा. हर्जोग ने इसे ‘डेथ मार्च’ यानी मौत की यात्रा कहा, क्योंकि उस दिशा में पेंगुइन का जीवित बचना नामुमकिन था.क्यों छोड़ दिया उसने सब कुछफिल्म में बताया जा रहा है कि, अगर उस पेंगुइन को पकड़कर वापस कॉलोनी में छोड़ भी दिया जाता, तब भी वह मुड़कर फिर से उसी ‘डेथ मार्च’ पर निकल पड़ता है. फिल्म निर्माता ने यह भी कन्फर्म किया था कि वह पेंगुइन उन पहाड़ों की ओर करीब 70 कि.मी. चला, लेकिन बाद में उसकी मृत्यु हो गई. अब हजारों लोग इस पेंगुइन का वीडियो और मीम शेयर कर रहे हैं. इनमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी शामिल हैं. उन्होंने पेंगुइन के साथ एक एआई जेनेरेटेड पोस्ट शेयर करके ग्रीन लैंड पर कब्जा करने की अपनी धमकी को बढ़ावा दिया है.इस वायरल वीडियों में डोनाल्ड ट्रंप को पेंगुइन को देख कई लोगों ने टॉक्सिक वर्क कल्चर को लेकर निशाना साधा हैं. कई लोगों ने इसे इनर पीस से जोड़कर देख रहे हैं कि यह पेंगुइन दुनिया के दिखावे को छोड़कर अकेले निकल पड़ा है, वह दुनिया की भीड़ में और दिखावा नहीं करना चाहता है.
उमा भारती बोलीं, शंकराचार्य होने का सबूत मांगना मर्यादा का उल्लंघन
उमा भारती बोलीं, शंकराचार्य होने का सबूत मांगना मर्यादा का उल्लंघन
यूपी के प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है. दोनों पक्ष अपनी-अपनी बातों पर अडिग है. इस बीच एमपी की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती का बयान भी सामने आया है, जिसमें उन्होंने प्रशासन द्वारा शंकराचार्य होने के सबूत मांगने को पूरी तरह अनुचित करार दिया है. हालांकि, उन्होंने इसके साथ यह भी कहा है कि योगी विरोधी खुशफहमी न पालें. मेरा कथन सीएम योगी के खिलाफ नहीं हैं.मर्यादाओं का उल्लंघन कियाप्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के विवाद पर पूर्व सीएम उमा भारती ने बयान दिया और प्रशासन द्वारा शंकराचार्य होने का सबूत मांगने को अनुचित बताया, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि, उनका कथन सीएम योगी के खिलाफ नहीं है, यह अधिकार सिर्फ शंकराचार्यों या विद्वत परिषद का है.इस मामले में कई अधिकारियों ने अपना इस्तीफा भी दिया है. जहां उमा भारती ने अपने एक ट्वीट में लिखा था, मुझे विश्वास है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच कोई सकारात्मक समाधान निकल आएगा. लेकिन, प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा शंकराचार्य होने का सबूत मांगना, यह प्रशासन ने अपनी मर्यादाओं और अधिकारों का उल्लंघन किया है.यूपी में इस्तीफे का दौर जारी वहीं दूसरी तरफ यूपी में जारी अफसरों द्वारा दिया जा रहे इस्तीफे पर उमा भारती ने चिंता जताई और कहा कि, लागू हुआ नया नियम यूजीसी और शंकराचार्य के शिष्यों के साथ हुए अत्याचार को देख बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपना इस्तीफा तक दे दिया. यूपी में यह कोई पहला इस्तीफा नहीं, बल्कि अयोध्या में GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. जिसे लेकर यूपी की राजनीति गरमाई हुई है.