संभल बीमा फ्राड का वाराणसी कनेक्शन, आरोपी की संपत्ति कुर्क करने की तैयारी

वाराणसी : संभल बीमा फ्राड का मामला वाराणसी से भी जुड़ रहा है. फर्जी बीमा पॉलिसियों के जरिए बीमा कंपनियों से करोड़ों रुपये का क्लेम हड़पने वाले अंतरराज्यीय संगठित गिरोह के खिलाफ चल रही कार्रवाई के तहत सोमवार को संभल जिले की पुलिस की अगुवाई में वाराणसी पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम कैंट थाना क्षेत्र के फुलवरिया पहुंची. टीम ने गिरोह के मुख्य सरगना ओंकारेश्वर मिश्रा उर्फ करन की संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू की, हालांकि मौके पर केवल नोटिस तामील कराते हुए टीम वापस लौट गई. प्रशासन ने स्पष्ट किया कि मंगलवार को कुर्की की कार्रवाई की जाएगी.
संयुक्त टीम कैंट थाना क्षेत्र अंतर्गत फुलवरिया स्थित सरैया और डिफेंस कॉलोनी पहुंची. यहां ओंकारेश्वर मिश्रा करन के बताए जा रहे मकान को कुर्क करने की तैयारी की गई. कार्रवाई के दौरान मकान में मौजूद महिलाओं ने इसे ओंकारेश्वर मिश्रा की संपत्ति मानने से इनकार किया और कुर्की से संबंधित नोटिस दिखाने की मांग की. घर के भीतर सुषमा मिश्रा नामक महिला और लगभग 15–16 वर्ष की किशोरी मौजूद थीं, जिन्होंने दूसरे तल के बरामदे से प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत की.
नायब तहसीलदार शैलेश सिंह ने बताया कि यह कार्रवाई संभल जिलाधिकारी के आदेश पर की जा रही है. महिलाओं द्वारा दरवाजा न खोले जाने और मानवीय पहलुओं को देखते हुए प्रशासन ने एक दिन का समय दिया, ताकि परिवार आवश्यक घरेलू सामान और कपड़े समेट सके. इसके बाद टीम ने साफ किया कि मंगलवार को मकान की कुर्की की जाएगी. मौके पर चौकी इंचार्ज फुलवरिया दीक्षा पांडे, राजस्व निरीक्षक सहित कैंट थाने की पुलिस टीम मौजूद रही.
इस अंतरराज्यीय गिरोह के खिलाफ अप्रैल से जून 2025 के बीच संभल जनपद के थाना रजपुरा और थाना गुन्नौर में तीन मुकदमे दर्ज किए गए थे. जांच के बाद कुल 68 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें से 25 के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट लगाए जाने की जिलाधिकारी संभल से स्वीकृति मिल चुकी है. प्रकरणों में बीएनएस की गंभीर धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल कर दिए गए हैं और मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं.
ALSO READ : कफ सिरप तस्करी में शुभम जायसवाल का मौसेरा भाई गिरफ्तार, बैंक स्लिप से खुला राज
जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह गरीब और अशिक्षित परिवारों के आधार और पैन कार्ड का दुरुपयोग कर मरणासन्न या मृत व्यक्तियों के नाम पर बीमा पॉलिसियां कराता था. बाद में फर्जी नामिनी बनाकर बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से क्लेम की रकम निकाली जाती थी, जिसे गिरोह के सदस्यों में आपस में बांट लिया जाता था.



