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पुलिस के निर्माण कार्य रोकने पर अधिवक्‍ताओं का हंगामा, पुलिस चौकी का घेराव

पुलिस के निर्माण कार्य रोकने पर अधिवक्‍ताओं का हंगामा,  पुलिस चौकी का घेराव
Apr 16, 2026, 07:41 AM
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Posted By Preeti Kumari

Lawyers create ruckus after police stop construction work, surround police station


वाराणसी: पुलिस द्वारा निर्माण कार्य रोकने पर शिवपुर की गिलट बाजार चौकी का देर रात उस अधिवक्‍ताओं ने घेराव किया. इस विरोध प्रदर्शन के दौरान मौके पर हंगामे की स्थिति उत्पन्न हो गई. इसके चलते तरना से गिलट बाजार जाने वाला मार्ग करीब आधा घंटा तक बाधित रहा, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ. जानकारी के अनुसार, चौकी इंचार्ज प्रभाकर सिंह गश्त पर थे. इसी दौरान उन्होंने पत्रकारपुरम कालोनी के पास एक खाली प्लॉट में चल रही खोदाई पर आपत्ति जताई. चौकी इंचार्ज ने मौके पर मौजूद लोगों से निर्माण कार्य के लिए अनुमति पत्र (परमिशन) मांगा और चेतावनी दी कि यदि खोदाई के कारण आसपास के मकानों को नुकसान हुआ तो इसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी.


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बताया जाता है कि इसके बाद संबंधित लोगों को चौकी पर बुला लिया गया और मौके पर मौजूद जेसीबी मशीन को भी रुकवा दिया गया. इसी बीच जानकारी हुई कि जिस प्लॉट पर कार्य चल रहा था, वह एक अधिवक्ता का है. इसके बाद संबंधित अधिवक्ता ने अपने अन्य साथियों को मौके पर बुला लिया.

कुछ ही देर में बड़ी संख्या में अधिवक्ता चौकी पर पहुंच गए और उन्होंने विरोध स्वरूप सड़क पर चक्का जाम कर दिया. अधिवक्ताओं ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की और चौकी इंचार्ज के व्यवहार पर आपत्ति जताई. इस दौरान सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा.


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स्थिति की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी अजीत कुमार वर्मा और एसीपी कैंट अपूर्व पांडेय मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने अधिवक्ताओं से बातचीत कर उन्हें शांत कराया और विवाद को सुलझाने का प्रयास किया. काफी समझाने-बुझाने के बाद अधिवक्ताओं ने जाम समाप्त किया, जिससे यातायात फिर से सुचारू हो सका. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और दोनों पक्षों से बातचीत कर समाधान निकाला जाएगा. घटना के बाद क्षेत्र में कुछ देर के लिए तनाव का माहौल बना रहा, लेकिन स्थिति अब पूरी तरह सामान्य है.


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दशाश्वमेध घाट पर फ्री वाई-फाई, लेकिन बिना प्रचार के सुविधा बेअसर
दशाश्वमेध घाट पर फ्री वाई-फाई, लेकिन बिना प्रचार के सुविधा बेअसर
वाराणसी: दशाश्वमेध घाट पर नगर निगम द्वारा शुरू की गई फ्री वाई-फाई सेवा फिलहाल अधूरी तैयारियों के कारण अपनी उपयोगिता साबित नहीं कर पा रही है. डिजिटल इंडिया और स्मार्ट सिटी के तहत दी जा रही इस सुविधा का उद्देश्य जहां पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आधुनिक कनेक्टिविटी देना है, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है.घाट पर कहीं भी स्पष्ट सूचना बोर्ड, साइनेज या प्रचार-प्रसार की व्यवस्था नहीं की गई है, जिसके चलते बड़ी संख्या में आने वाले पर्यटक इस सुविधा से अनजान बने हुए हैं.रोजाना हजारों की संख्या में श्रद्धालु और सैलानी यहां पहुंचते हैं, लेकिन उनमें से बहुत कम लोग ही फ्री वाई-फाई का उपयोग कर पा रहे हैं.घाट पर पहुंचे पर्यटक विपीन मित्तल ने बताया कि उनके मोबाइल में वाई-फाई नेटवर्क दिखाई दिया और कनेक्शन भी आसानी से स्थापित हो गया, लेकिन आसपास कहीं भी ऐसा कोई बोर्ड या संकेत नहीं मिला, जिससे यह जानकारी मिल सके कि यहां मुफ्त वाई-फाई उपलब्ध है. उन्होंने कहा कि यदि सही तरीके से सूचना दी जाए, तो सुविधा बेहद उपयोगी साबित हो सकती है.अन्य पर्यटकों ने भी इसी तरह की प्रतिक्रिया दी. उनका कहना है कि इंटरनेट सेवा की गुणवत्ता अच्छी है और कनेक्टिविटी में कोई बड़ी समस्या नहीं है, लेकिन जानकारी के अभाव में लोग इसका लाभ नहीं उठा पा रहे हैं.वाराणसी में MSME की ‘गुड़िया एवं खिलौना’ कार्यशाला, 200 से अधिक लाभार्थियों को मिला पैकेजिंग प्रशिक्षणकई लोगों ने सुझाव दिया कि घाट पर प्रमुख स्थानों पर सूचना बोर्ड, QR कोड निर्देशात्मक पोस्टर लगाए जाने चाहिए, जिससे अधिक से अधिक लोग इस सुविधा से जुड़ सकें.स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम की पहल सराहनीय है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में कमी साफ दिखाई दे रही है. यदि उचित प्रचार-प्रसार और व्यवस्था की जाती, तो यह सुविधा हजारों लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकती थी.गौरतलब है कि इससे पहले भी वाराणसी के घाटों पर वाई-फाई सेवा शुरू की गई थी, जो कुछ समय बाद बंद हो गई थी. ऐसे में एक बार फिर शुरू हुई यहसुविधाभीव्यवस्थागत खामियों के चलते सवालों के घेरे में आ गई है.विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल सुविधाओं की सफलता केवल उनकी शुरुआत से नहीं, बल्किउनके प्रभावी संचालन और जनजागरूकता से तय होती है. यदि समय रहते आवश्यक सुधार नहीं किए गए, तो यह पहल भी सीमित उपयोग तक सिमटकर रह सकतीहै और अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर पाएगी.
वाराणसी में MSME की ‘गुड़िया एवं खिलौना’ कार्यशाला, 200 से अधिक लाभार्थियों को मिला पैकेजिंग प्रशिक्षण
वाराणसी में MSME की ‘गुड़िया एवं खिलौना’ कार्यशाला, 200 से अधिक लाभार्थियों को मिला पैकेजिंग प्रशिक्षण
वाराणसी : सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के अंतर्गत एमएसएमई विकास कार्यालय, वाराणसी द्वारा भारतीय पैकेजिंग संस्थान के सहयोग से ‘गुड़िया एवं खिलौना’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला एवं पैकेजिंग वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया.कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को आधुनिक पैकेजिंग तकनीकों से अवगत कराना और उनके उत्पादों की गुणवत्ता एवं बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ाना रहा.कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को बताया गया कि आकर्षक और गुणवत्तापूर्ण पैकेजिंग किसी भी उत्पाद की बिक्री बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. बेहतर पैकेजिंग से उत्पाद की प्रस्तुति मजबूत होती है और उपभोक्ताओं के बीच उसकी स्वीकार्यता भी बढ़ती है. इस अवसर पर सरकार द्वारा खिलौना उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी गई. विशेषज्ञों ने बताया कि प्रशिक्षण और तकनीकी ज्ञान के माध्यम से कारीगर अपने उत्पादों को बेहतर बना सकते हैं और बाजार में अपनी पहचानमजबूत कर सकते हैं.बीएचयू में प्राचीन भारतीय मुद्राओं पर कार्यशाला आरंभ, छात्र टकसाल तकनीक से होंगे रूबरूकार्यक्रम में सहायक निदेशक राजेश कुमार चौधरी एवं निदेशक, एमएसएमई विकास कार्यालय, प्रयागराज एल.बी.एस. यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही. तकनीकी सत्र के दौरान भारतीय पैकेजिंग संस्थान के विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को आधुनिक पैकेजिंग तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया.इस कार्यशाला में 200 से अधिक प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के लाभार्थियों ने भाग लिया. प्रतिभागियों ने सरकार की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से उन्हें नई तकनीकों की जानकारी मिलती है, जिससे वे अपने उत्पादों की गुणवत्ता और विपणन क्षमता में सुधार कर पा रहे हैं.विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से स्थानीय हस्तशिल्प और खिलौना उद्योग को नई दिशा मिलेगी और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
बीएचयू में प्राचीन भारतीय मुद्राओं पर  कार्यशाला आरंभ, छात्र टकसाल तकनीक से होंगे रूबरू
बीएचयू में प्राचीन भारतीय मुद्राओं पर कार्यशाला आरंभ, छात्र टकसाल तकनीक से होंगे रूबरू
वाराणसी : बीएचयू के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग में गुरुवार को "भारतीय ज्ञान परम्परा (IKS) के परिप्रेक्ष्य में प्राचीन भारतीय मुद्राएँः स्रोत, लिपि एवं टकसाल तकनीक" विषय पर आयोजित सात दिवसीय राष्ट्रीय हैंड्स-ऑन कार्यशाला का शुभारंभ किया गया. कला संकाय के प्रेमचंद सभागार में यह कार्यशाला महान इतिहासकार एवं मुद्राविद् स्वर्गीय. ए. के. नारायण की जन्मशती के उपलक्ष्य में आयोजित की जा रही है.कार्यक्रम का शुभारंभ परंपरागत दीप प्रज्वलन एवं महामना पं. मदन मोहन मालवीय तथा प्रो. ए. के. नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ. प्रदर्शन कला संकाय के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत कुलगीत ने कार्यक्रम को गरिमामय वातावरण प्रदान किया.इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो. एम. पी. अहीरवार ने स्वागत भाषण देते हुए भारतीय इतिहास के आर्थिक एवं सांस्कृतिक पुनर्निर्माण में मुद्राशास्त्र के महत्व को रेखांकित किया. उन्होंने बताया कि यह कार्यशाला जन्मशती वर्ष के अंतर्गत आयोजित होने वाला सातवाँ शैक्षणिक आयोजन है. तत्पश्चात मंचासीन अतिथियों का विभागीय शिक्षकों द्वारा सम्मान किया गया. कार्यशाला की संयोजिका प्रो. मीनाक्षी सिंह ने कार्यशाला के उद्देश्यों एवं रूपरेखा पर प्रकाश डाला. अमितेश्वर झा, पूर्व निदेशक, आईआईआरएनएस, नासिक ने भारत में मुद्राशास्त्र के विकास एवं प्रगति पर प्रकाश डालते हुए वैज्ञानिक तकनीकों एवं अंतःविषयक दृष्टिकोण के बढ़ते उपयोग को रेखांकित किया.मनीष वर्मा, क्यूरेटर, हिंदुजा फाउंडेशन ने हिंदुजा फाउंडेशन द्वारा 34,000 से अधिक सिक्कों के संग्रह के संरक्षण एवं संकलन कार्य की जानकारी दी. भारतीय मुद्रा परिषद् के अध्यक्ष प्रो. पी. एन. सिंह ने विशिष्ट अतिथि के रूप में अपने संबोधन में विभाग सहित विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों को समाज द्वारा प्रदान किए जा रहे सहयोग, शोध गतिविधियों एवं शैक्षिक कार्यक्रमों की चर्चा की. मुख्य अतिथि प्रो. कमल शील, पूर्व रेक्टरकाशी हिन्दू विश्वविद्यालयने अपने उद्बोधन में अपने पिता के एक मुद्राविद् के रूप में विद्वतापूर्ण जीवन-यात्रा का उल्लेख करते हुए उनके योगदान को स्मरण किया तथा ऐसे आयोजनों की शैक्षणिक महत्ता पर बल दिया.कार्यक्रम की अध्यक्षता कला संकाय की अधिष्ठाता प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने की. अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने वर्तमान समय में निम्न मूल्यवर्ग की मुद्रा के अवमूल्यन की समस्या पर विचार व्यक्त करते हुए छात्रों को मुद्रा इतिहास के प्रति गंभीर अध्ययन हेतु प्रेरित किया. कार्यक्रम का समापन डॉ. प्रियंका सिंह द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ. तत्पश्चात उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग के सहयोग से आयोजित प्रदर्शनी का उ‌द्घाटन किया गया, जिसमें पुरातात्विक एवं मुद्राशास्त्रीय धरोहर से संबंधित चित्रात्मक पैनलों का प्रदर्शन किया गया.also read:वाराणसी में अंतरराष्‍ट्रीय स्‍टेडियम के लिए चौड़ी होंगी सडकें, भूमि अधिग्रहण शुरूइस अवसर पर विभाग के शिक्षकगण- प्रो. पी. के. श्रीवास्तव, प्रो. अर्चना शर्मा, प्रो. सुजाता गौतम, प्रो. अर्पिता चटर्जी, डॉ. विकास कुमार सिंह, डॉ. अमित उपाध्याय, डॉ. उमेश कुमार सिंह, डॉ. सुजीत कुमार सिंह, डॉ. सर्वेश कुमार, डॉ. उपेंद्र कुमार एवं डॉ. विराग गोपाल सोंटक्के सहित अन्य उपस्थित रहे.दोपहर पश्चात कार्यशाला का द्वितीय सत्र आरंभ हुआ, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठतम मुद्राविद् प्रो. ओ. एन. सिंह ने की. इस सत्र में श्री अमितेश्वर झा ने व्याख्यान प्रस्तुत कर प्रतिभागियों को मुद्राशास्त्र के विविध आयामों से अवगत कराया. यह कार्यशाला देश के विभिन्न भागों से आए प्रतिभागियों की सहभागिता के साथ 22 अप्रैल 2026 तक आयोजित की जाएगी, जिसमें व्याख्यान, व्यावहारिक सत्र एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्मिलित हैं.