गोलीकांड से लिया सबक, वाराणसी एयरपोर्ट पर अब अलग केबिन में होगी शस्त्र जांच

वाराणसी: लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के हाई सिक्योरिटी जोन में लाइसेंसी पिस्टल से अचानक गोली चलने की घटना के बाद एयरपोर्ट प्रशासन ने सुरक्षा जांच को और सख्त करने का फैसला लिया है. हादसे में दो एयरपोर्ट कर्मचारियों के घायल होने के बाद सोमवार को ग्राउंड हैंडलिंग एजेंसी एएआइ कार्गो लाजिस्टिक्स एंड एलाइड सर्विसेज कंपनी लिमिटेड (एएआइसीएलएएस) के अधिकारियों ने एयरपोर्ट निदेशक पुनीत गुप्ता के साथ बैठक की. इसमें एयरपोर्ट की सुरक्षा को लेकर विस्तार से चर्चा हुई और निर्णय लिया गया. बैठक में तय किया गया कि एयरपोर्ट पर शस्त्रों की जांच के लिए अलग आइसोलेशन रूम बनाया जाएगा. साथ ही नागरिक विमानन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) की सुरक्षा गाइडलाइंस का सख्ती से पालन कराने पर जोर दिया गया.
दरअसल, रविवार सुबह आजमगढ़ निवासी शिवसेना नेता और मुंबई के पूर्व नगर सेवक कमलेश राय की लाइसेंसी पिस्टल की जांच के दौरान अचानक गोली चल गई थी. गोली लगने से दो कर्मचारियों के घायल हो गए थे. घटना के बाद पुलिस ने कमलेश राय से करीब चार घंटे तक पूछताछ की. हादसे ने सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर कड़ियां सामने ला दी हैं. कमलेश राय लोडेड पिस्टल और 22 कारतूस लेकर टर्मिनल भवन तक पहुँच गए. उस समय करीब 300 लोग वहां मौजूद थे.
पुलिस के मुताबिक, हथियार जमा करने से पहले गोली न होने की पुष्टि करने के लिए ट्रिगर दबाया गया था, जिसके बाद फायर हो गया. मामले में लापरवाही का मुकदमा दर्ज किया गया और पूछताछ के बाद उन्हें जमानत पर छोड़ दिया गया. सबसे बड़ा सवाल बाहरी प्रवेश गेट से टर्मिनल तक निगरानी व्यवस्था को लेकर उठ रहा है. मौजूदा व्यवस्था में टर्मिनल के मुख्य प्रवेश द्वार पर सुरक्षा जांच मुख्यतः टिकट और पहचान पत्र के सत्यापन तक सीमित है. बाहरी प्रवेश गेट पर सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं है. वाहन भी बिना प्रभावी जांच टर्मिनल भवन के गेट तक पहुंच जाते हैं.
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पार्किंग चेकपोस्ट पर ठेकेदार के कर्मचारी वाहन रोककर पर्चा देते हैं, इसके बाद जांच नहीं होती. पार्किंग से यात्री टिकट और आइडी दिखाकर टर्मिनल भवन में प्रवेश' करते हैं. इस मार्ग पर मेटल डिटेक्टर अथवा यात्रियों और सामान की जांच की व्यवस्था नहीं है. शस्त्र की जांच के लिए निर्धारित सुरक्षित स्थान और सैंडबैग जैसे इंतजाम भी जरूरी हैं, जो वाराणसी एयरपोर्ट पर नहीं है. घटना ने कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर भी सवाल खड़े किए हैं. सैंडबैग जैसी सुरक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों को हथियारों की पहचान एवं आकस्मिक फायरिंग से निपटने का व्यावहारिक प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया जा रहा है.



