LG वीके सक्सेना को मिली बड़ी राहत, मानहानि केस में कोर्ट ने किया बरी

राजधानी दिल्ली की साकेत कोर्ट ने सोशल एक्टिविस्ट मेधा पाटकर के मानहानि केस को लेकर सुनवाई की. जहां कोर्ट का कहना है कि आरोप बिना किसी शक के साबित नहीं हुए हैं, इसलिए दिल्ली के एलजी वीके सक्सेना को बरी कर दिया गया है. एलजी सक्सेना को उस मामले में बरी किया गया है जिसमें मेधा पाटकर ने करीब 20 साल पहले उनके खिलाफ केस किया था. इसी के साथ ही कोर्ट ने वीके सक्सेना द्वारा दायर किये गये मानहानि केस में मेधा पाटकर को भी बरी कर दिया गया था.

मेधा पाटकर भी हुए थे बरी
दिल्ली साकेत कोर्ट ने दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना की तरफ से दायर किए गए दो दशक पुराने आपराधिक मानहानि मामले में नर्मदा बचाओ, इस आंदोलन की कार्यकर्ता मेधा पाटकर को बरी कर दिया था. साकेत कोर्ट के फर्स्ट क्लास ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट राघव शर्मा ने सुनाए गए फैसले में कहा था कि, शिकायतकर्ता आरोपी के खिलाफ अपने मामले को उचित संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह से फेल रहे. ऐसे में आरोपी मेधा पाटकर को आईपीसी की धारा-500 के तहत दंडनीय अपराध से बरी किया जाता है.

वर्षों पुराना है मानहानि केस
दरअसल, मानहानि केस का यह मामला 2006 का है. वीके सक्सेना उस समय नेशनल काउंसिल आफ सिविल लिबर्टीज (एनसीसीएल) के अध्यक्ष थे, उन्होंने 20 अप्रैल, 2006 को निजी टीवी चैनल के कार्यक्रम के दौरान मानहानि का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी. जिसमें उन्होंने दावा किया था कि, मेधा पाटकर ने आन एयर उन पर सरदार सरोवर निगम से सिविल कान्ट्रैक्ट लेने का आरोप लगाया, जिसका असर उनकी प्रतिष्ठा पर जा पड़ा और हद से ज्यादा उन्हें नुकसान पहुंचा.

