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कैलाश मानसरोवर की मुक्ति से तिब्बत की मुक्ति का होगा मार्ग प्रशस्त

कैलाश मानसरोवर की मुक्ति से तिब्बत की मुक्ति का होगा मार्ग प्रशस्त
Dec 17, 2025, 07:37 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी - कैलाश मानसरोवर और तिब्बत की मुक्ति के उद्देश्य को लेकर देश में कई सम्मेलन के बाद आज काशी में अंतरराष्ट्रीय मंथन हुआ. शिवधाम कैलाश मानसरोवर तिब्बत फ्रीडम एसोसिएशन के राष्ट्रीय अधिवेशन में कैलाश मानसरोवर के लिए एक राय की गयी. इसमें मुख्य अतिथि तिब्बत की निर्वासित सरकार (Central Tibetan Administration – CTA) की रक्षा मंत्री डोल्मा गायरी रहीं. जिसमें उन्होंने मानसरोवर यात्रा और मुक्ति की इस मुहीम को सराहा. उन्होंने कहा हम भी चाहते हैं की कैलाश मानसरोवर को जल्द से जल्द मुक्त किया जाए ताकि हम भी वहां दर्शन करने जा सकें.


ऐसे होगा तिब्बत की मुक्ति का मार्ग प्रशस्त


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दलाई लामा जी 1959 में भारत आये तो तिब्बत की जनसंख्या 60 लाख थी. उसमें से एक लाख भी उनके साथ नहीं आये थे. वो सिर्फ 60 से 80 हजार लोग निर्वासित होकर भारत पहुंचे. ज्यादातर लोग अभी भी चीन के कब्जे में तिब्बत में हैं. अभी भी तिब्बत में लोग हैं. हम 2009 से नॉन वॉयलेंस प्रोटेस्ट कर रहे हैं. बाहर आंदोलन चल रहा है. आज नया चैप्टर लेकर मानवेन्द्र लेकर आये हैं मानसरोवर मुक्ति का, इससे तिब्बत की मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होगा.


यूपी समेत विभिन्न प्रदेशों से डेलीगेट्स जुटे


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राष्ट्रीय अधिवेशन में यूपी समेत विभिन्न प्रदेशों से डेलीगेट्स इस अधिवेशन में पहुंचे थे., जो इस आंदोलन के लिए अपनी टीम बनाएंगे. SDTFA के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष मानवेन्द्र सिंह मानव ने बताया कि कैलाश मान सरोवर की यात्रा और सहजता के लिए देश में कई मंथन शिविर हो चुके हैं. काशी में तिब्बत की रक्षा मंत्री का भारत में SDTFA के मंच पर आना केवल एक उपस्थिति नहीं, बल्कि यह सांस्कृतिक-आध्यात्मिक एकता और तिब्बत की स्वतंत्रता के संकल्प को मजबूत करने का प्रतीक है. इस बार हमने अधिवेशन के लिए काशी को चुना है. सांस्कृतिक विरासत के जरिए इसमें अभियान को नई ऊर्जा मिलेगी.

इसके अलावा विशिष्ट अतिथियों में तिब्बत शिक्षा संस्थान के प्रोफेसर जम्पा समतेन, महात्मागांधी विवि के प्रोफेसर विजय कौल, भारतीय कुश्ती संघ के चेयरमैन संजय सिंह बबलू, माध्यमिक शिक्षक संघ की प्रदेश उपाध्यक्ष रितिका दुबे शामिल हुईं. इस अधिवेशन में वीडीए मेंबर अम्बरीश सिंह भोला, बीएचयू के शिक्षक डा. धीरेंद्र राय, शिक्षाविद पूजा दीक्षित, सुमित सिंह, काशी विद्यापीठ के प्रोफेसर ओमप्रकाश सिंह, कबीर पाकट्य स्थली के महंत गोविंद दास ने भी अपना पक्ष रखा और मानसरोवर मुक्ति की बात कही.


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नगर निगम की बड़ी ध्वस्तीकरण कार्रवाई: जर्जर मकानों पर चला बुलडोज़र
नगर निगम की बड़ी ध्वस्तीकरण कार्रवाई: जर्जर मकानों पर चला बुलडोज़र
वाराणसी : दालमंडी में नगर निगम द्वारा जर्जर और असुरक्षित मकानों के खिलाफ चलाए जा रहे ध्वस्तीकरण अभियान के तहत आज एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की गई। नगर निगम की ध्वस्तीकरण टीम ने तय सूची के अनुसार कुल 20 मकानों पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की, जबकि एक मकान पर नोटिस तामील न हो पाने के कारण कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी।कार्रवाई के दौरान जिन मकानों की स्थिति अत्यधिक जर्जर पाई गई, उनमें से कुछ को जेसीबी मशीन की मदद से तोड़ा गया, जबकि शेष मकानों को श्रमिकों द्वारा ध्वस्त किया गया। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई जनहित और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए की जा रही है, ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना से बचा जा सके।नगर निगम की सूची में कुल 21 मकान चिह्नित थे, लेकिन एक मकान पर विधिक प्रक्रिया पूरी न होने के कारण आज की कार्रवाई से उसे अलग रखा गया। अधिकारियों ने बताया कि जिन 20 मकानों पर आज ध्वस्तीकरण किया गया है, उन्हीं मकानों पर कल भी कार्रवाई जारी रहेगी।अधिकारियों के मुताबिक अब तक कुल 50 मकानों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा चुकी है। इसके साथ ही पुनर्विकास और मुआवज़े से जुड़ी प्रक्रिया भी समानांतर रूप से आगे बढ़ रही है। आज तक करीब 29 मकानों की रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है, जबकि लगभग 15 मकानों की रजिस्ट्री की प्रक्रिया प्रगति पर है।आज की कार्रवाई के दौरान विरोध अपेक्षाकृत कम देखने को मिला। हालांकि, एक घटना में एक व्यक्ति ने अपने ही घर पर ज्वलनशील पदार्थ फैलाकर अराजकता फैलाने की कोशिश की, लेकिन मौके पर मौजूद प्रशासन और पुलिस बल ने समय रहते स्थिति पर नियंत्रण पा लिया और संबंधित व्यक्ति को हिरासत में ले लिया गया।ALSO READ:Teddy Day 2026: टेडी डे को ऐसे करें सेलिब्रेट, जाने इसके पीछे की छिपी कहानीकार्रवाई के दौरान कुछ महिलाओं ने ध्वस्तीकरण का विरोध भी किया, लेकिन प्रशासन की समझाइश और सुरक्षा व्यवस्था के चलते स्थिति शांतिपूर्ण बनी रही। नगर निगम अधिकारियों ने साफ किया कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और सभी जर्जर मकानों पर नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।नगर निगम का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि शहरवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। जर्जर मकान किसी भी समय हादसे का कारण बन सकते हैं, ऐसे में समय रहते कार्रवाई आवश्यक है।
Teddy Day 2026: टेडी डे को ऐसे करें सेलिब्रेट, जाने इसके पीछे की छिपी कहानी
Teddy Day 2026: टेडी डे को ऐसे करें सेलिब्रेट, जाने इसके पीछे की छिपी कहानी
Teddy Day 2026: वैलेंटाइन वीक आते ही माहौल में अपने-आप एक अलग ही मिठास घुल जाती है. चारों तरफ प्यार, अपनापन और रिश्तों की गर्माहट महसूस होने लगती है. यह हफ्ता सिर्फ रोमांटिक रिश्तों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उन भावनाओं को भी जगह देता है, जिन्हें हम रोजमर्रा की जिंदगी में शब्दों में बयां नहीं कर पाते. छोटे-छोटे इशारों, तोहफों और एहसासों के जरिए प्यार जताने का यह सिलसिला 7 फरवरी को रोज डे से शुरू होकर 14 फरवरी के प्यार के इजहार होने तक चलता है.इसी वैलेंटाइन वीक का एक बेहद खास और सबसे क्यूट दिन होता है टेडी डे. यह दिन सिर्फ एक सॉफ्ट टॉय गिफ्ट करने का नहीं, बल्कि उस सुकून, सुरक्षा और भावनात्मक सहारे का प्रतीक है, जो हम अपने किसी खास इंसान को देना चाहते हैं. टेडी डे हमें याद दिलाता है कि प्यार हमेशा बड़े शब्दों या महंगे तोहफों का मोहताज नहीं, कभी-कभी एक मुलायम सा टेडी भी अपने प्यार के दिल की बात कह जाता है.जाने टेडी डेहर साल टेडी डे 10 फरवरी को मनाया जाता है. 2026 का टेडी डे आज मंगलवार को हर प्रेमी जोड़ा सेलिब्रेट कर रहा है. यह वैलेंटाइन वीक का चौथा दिन होता है, जो चॉकलेट डे के बाद और प्रॉमिस डे से ठीक पहले आता है. यही वजह है कि इसे भावनात्मक नजदीकियों को जताने का सबसे सही मौका माना जाता है.टेडी डे का इतिहासटेडी डे की जड़ें असल में टेडी बियर के इतिहास से जुड़ी होती हैं. टेडी बियर का नाम अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट से जुड़ा है, जिन्हें प्यार से टेडी कहा जाता था. साल 1902 में राष्ट्रपति रूजवेल्ट एक शिकार यात्रा पर गए थे. इस दौरान एक घायल भालू को पकड़कर उनके सामने लाया गया, लेकिन उन्होंने उसे मारने से इनकार कर दिया और कहा कि यह खेल भावना के खिलाफ है. उनकी इस करुणा भरी घटना को एक राजनीतिक कार्टूनिस्ट क्लिफोर्ड बेरीमैन ने चित्र के रूप में दिखाया, जो काफी लोकप्रिय हुआ. इस कार्टून से प्रेरित होकर खिलौना निर्माता मॉरिस मिचटॉम ने एक मुलायम भालू का खिलौना बनाया और उसे टेडी बियर नाम दिया. धीरे-धीरे यह टेडी बियर प्यार, सुरक्षा और भावनात्मक सुकून का प्रतीक बन गया. बाद में जब वैलेंटाइन वीक की परंपरा शुरू हुई, तो टेडी बियर को समर्पित एक खास दिन टेडी डे भी इसमें शामिल हो गया.टेडी डे एक एहसासटेडी डे सिर्फ सॉफ्ट टॉय गिफ्ट करने का दिन नहीं होता है. टेडी बियर उन भावनाओं का प्रतीक है, जो रिश्तों की नींव मजबूत करती हैं, जैसे अपनापन, भरोसा, मासूमियत और बिना शर्त साथ. जब कोई अपने पार्टनर को टेडी गिफ्ट करता है, तो वह यह जताता है कि मैं तुम्हारे साथ हूं, तुम सुरक्षित हो, तुम्हें अकेला महसूस नहीं होने दूंगा. टेडी बियर ठीक वैसे ही सुकून देता है, जैसे किसी मुश्किल वक्त में किसी अपने का साथ होना महसूस कराता है. टेडी डे हमें यह याद दिलाता है कि प्यार हमेशा दिखावे का नहीं होता. कभी-कभी सबसे गहरा एहसास सबसे नरम और शांत इशारों में छुपा होता है. एक टेडी बियर की तरह जो बिना कुछ कहे भी बहुत कुछ कर जाता है.ऐसे बनाए टेडी डे को खासटेडी के साथ एक हाथ से लिखा नोट जोड़ें.घर पर कोज़ी डिनर डेट प्लान करें.टेडी थीम पर छोटा-सा सरप्राइज़ दें.लॉन्ग-डिस्टेंस रिलेशनशिप में वीडियो कॉल पर टेडी भेजें.छोटी-छोटी चीजें इस दिन को यादगार बना देती हैं.
जनगणना–2027 के ल‍िए दो चरणों में बनी रूपरेखा, मंडलीय समीक्षा बैठक में दी जानकारी
जनगणना–2027 के ल‍िए दो चरणों में बनी रूपरेखा, मंडलीय समीक्षा बैठक में दी जानकारी
वाराणसी : देश की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना–2027 की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं. कमिश्नरी सभागार में वाराणसी मंडल की जनगणना–2027 तैयारियों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई. बैठक की अध्यक्षता मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी एवं निदेशक, जनगणना कार्य निदेशालय उत्तर प्रदेश, शीतल वर्मा (आईएएस) ने की.बैठक में मंडलायुक्त वाराणसी तथा मंडल के चारों जनपदों के जिलाधिकारी उपस्थित रहे.शीतल वर्मा ने बताया कि जनगणना–2027 देश की 16वीं जनगणना और स्वतंत्रता के बाद की आठवीं जनगणना होगी, जो गांव, शहर एवं वार्ड स्तर पर प्राथमिक आंकड़ों का सबसे बड़ा और विश्वसनीय स्रोत मानी जाती है. उन्होंने कहा कि जनगणना से प्राप्त आंकड़े भविष्य की विकास योजनाओं और नीति निर्माण का मजबूत आधार बनेंगे.दो चरणों में होगी जनगणनाजनगणना–2027 का आयोजन दो चरणों में किया जाएगा.प्रथम चरण: मकान सूचीकरण एवं मकान गणना का कार्य पूरे उत्तर प्रदेश में एक साथ 22 मई से 20 जून 2026 तक कराया जाएगा.द्वितीय चरण: जनसंख्या गणना का कार्य पूरे देश में फरवरी 2027 में संपन्न होगा.डिजिटल माध्यम से होगी पूरी प्रक्रियाइस बार जनगणना का संचालन पूरी तरह डिजिटल माध्यम से किया जाएगा.पहली बार नागरिकों को स्व-गणना (Self Enumeration) का विकल्प दिया गया है. इसके अंतर्गत 7 मई से 21 मई 2026 तक नागरिक सेल्फ एन्युमरेशन पोर्टल और मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन प्रश्नावली भरकर स्वयं अपनी जनगणना कर सकेंगे.संपूर्ण कवरेज सुनिश्चित करने के लिए जीआईएस आधारित मानचित्रों और डिजिटल ऐप्स के माध्यम से सभी नगर निकायों एवं ग्रामों के गणना ब्लॉक तैयार किए जाएंगे.33 प्रकार की जानकारियों का होगा संग्रहमकान सूचीकरण के दौरान प्रगणक द्वारा भवन के उपयोग, निर्माण में प्रयुक्त सामग्री, कमरों की संख्या, स्वामित्व की स्थिति, शौचालय की उपलब्धता, प्रकाश का मुख्य स्रोत, खाना पकाने में प्रयुक्त ईंधन, एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन, परिवार द्वारा उपभोग किए जाने वाले मुख्य अनाज, फोन, वाहन, टेलीविजन एवं इंटरनेट सुविधा सहित कुल 33 प्रकार की सूचनाओं का संग्रह किया जाएगा.अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जनगणना के दौरान दी गई सभी जानकारियाँ पूर्णतः गोपनीय रहेंगी.हजारों कार्मिकों की लगेगी ड्यूटीजनगणना–2027 के सफल संचालन के लिए बड़ी संख्या में कार्मिकों की ड्यूटी लगाई जाएगी। अनुमान के अनुसार—वाराणसी: लगभग 10 हजारजौनपुर: 11 हजारगाजीपुर: लगभग 9 हजारचंदौली: लगभग 5 हजार कार्मिकों को 15 फरवरी से चरणबद्ध प्रशिक्षण दिया जाएगा.ALSO READ : वाराणसी में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने वरुणा नदी में की सफाईमंडलायुक्त ने दिए निर्देशमंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने प्रशिक्षण की महत्ता को रेखांकित करते हुए सभी जिलाधिकारियों को प्रभावी प्रशिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करने और उपयुक्त प्रशिक्षकों के चयन के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि जनगणना कार्य को समयबद्ध, पारदर्शी और त्रुटिरहित ढंग से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक तैयारियाँ समय रहते पूरी कर ली जाएँ.बैठक का समन्वय डॉ. एस.एस. शर्मा, संयुक्त निदेशक (जनगणना), भारत सरकार द्वारा किया गया.बैठक में चारों जिलों के जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, नगर आयुक्त वाराणसी, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), जिला सूचना विज्ञान अधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे.