मदर्स डे पर बेटी ने निभाया बेटे का फर्ज, मां को दिया कंधा और मुखाग्नि

On Mother's Day, a daughter fulfilled her son's duty, carrying her mother on her shoulders and performing the last rites.
वाराणसी: एक ओर जहां मदर्स डे पर लोग सोशल मीडिया पर अपनी मां के साथ तस्वीरें साझा कर जश्न मना रहे थे, वहीं वाराणसी से एक ऐसी मार्मिक तस्वीर सामने आई जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं. सुजाबाद क्षेत्र की रहने वाली गीता ने अपनी मां को अंतिम विदाई देते हुए बेटे का फर्ज निभाया है. गीता ने न केवल अपनी मां की अर्थी को कंधा दिया, बल्कि मणिकर्णिका घाट पर अपने हाथों से मुखाग्नि उन्हें अंतिम विदाई भी दी है.

बताया जा रहा है कि गीता पिछले दो दिनों से अपनी मां की तबीयत और फिर निधन के बाद बेहद परेशान थी, घर की आर्थिक और पारिवारिक परिस्थितियां भी उसके सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़ी थीं, मां के शव के पास बैठी गीता लगातार रो रही थी, इसी दौरान समाजसेवी अमन कबीर को इसकी जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने आगे बढ़कर अंतिम संस्कार में सहयोग किया. समाजसेवी अमन कबीर ने बताया कि जब वह मौके पर पहुंचे तो गीता अपनी मां के शव के पास बेसहारा बैठी थी, गीता का पति पहले ही उसका साथ छोड़ चुका है और वह अपनी मां के साथ अकेले रहती थी, ऐसे कठिन समय में भी उसने हिम्मत नहीं हारी, गीता ने खुद अपनी मां की अंतिम यात्रा में नंगे पांव हिस्सा लिया और पूरे साहस के साथ मां को अंतिम विदाई दी.

मदर्स डे के दिन सामने आई यह तस्वीर समाज के लिए एक बड़ा संदेश भी छोड़ गई, जहां अक्सर बेटों को ही अंतिम संस्कार का अधिकार और जिम्मेदारी माना जाता है, वहीं गीता ने यह साबित कर दिया कि बेटियां भी हर परिस्थिति में अपने परिवार का सहारा बन सकती हैं. शव यात्रा के दौरान मौजूद लोगों की आंखें उस समय नम हो गईं जब गीता ने कांपते हाथों से अपनी मां को मुखाग्नि दी, घाट पर मौजूद लोगों ने बेटी के साहस और मां के प्रति उसके समर्पण को सलाम किया, यह घटना मदर्स डे पर रिश्तों की सच्ची संवेदना और एक बेटी के अटूट प्रेम की मिसाल बन गई.
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