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महाशिवरात्रि - मथुरा से आई बाबा विश्‍वनाथ के लिए शगुन समाग्री, सीईओ ने किया स्‍वागत

महाशिवरात्रि - मथुरा से आई बाबा विश्‍वनाथ के लिए शगुन समाग्री, सीईओ ने किया स्‍वागत
Feb 09, 2026, 07:41 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी : श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में महाशिवरात्रि की तैयारी जोरशोर से चल रही है. इसी क्रम में सोमवार को मथुरा स्थित कृष्‍ण जन्‍मभूमि से भेजी गई शगुन सामग्री का आगमन हुआ. मथुरा से बाबा के लिए श्रृंगार सामग्री के साथ-साथ पूजन और प्रसाद की काफी मात्रा में सामग्री भेजी गई थी, जिसका स्वागत मुख्य कार्यपालक ने किया. महाशिवरात्रि के अवसर पर विभिन्न धार्मिक स्थलों से बाबा के लिए श्रृंगार और भोग प्रसाद की सामग्री भेजी जा रही है.

हाल ही में वैष्णो देवी धाम से भी बाबा के लिए सामग्री पहुंची थी. रविवार को मथुरा से विधि-विधान पूर्वक पूजन और श्रृंगार सामग्री पारंपरिक तरीके से मथुरा से काशी के ल‍िए रवाना की गई. यह सामग्री सोमवार की सुबह बाबा दरबार में पहुंची, जिसे मंदिर प्रशासन ने स्वीकार किया. इस भेंट को महाशिवरात्रि के आयोजन में बाबा और गौरा को अर्पित किया जाएगा.


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विशेष प्रसाद और भोग की व्यवस्था


मंदिर प्रशासन ने इस अवसर पर कहा कि यह सामग्री भक्तों की श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है. मथुरा से भेजी गई सामग्री में विशेष रूप से फूल, फल, मिठाइयाँ और अन्य पूजन सामग्री शामिल है. यह सामग्री न केवल बाबा के श्रृंगार के लिए उपयोग की जाएगी, बल्कि भक्तों के लिए प्रसाद के रूप में भी वितरित की जाएगी.

मंदिर प्रशासन ने बताया कि इस बार महाशिवरात्रि के अवसर पर विशेष तैयारियाँ की गई हैं. भक्तों की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है. इसके अलावा, भक्तों के लिए विशेष प्रसाद और भोग की व्यवस्था भी की गई है.


बाबा विश्‍वनाथ धारण करेंगे असमिया वैभव


महादेव की नगरी काशी में महाशिवरात्रि पर शिव–गौरा पहली बार असमिया वैभव में दिखेंगे. बाबा विश्वनाथ धारण करेंगे ‘चेलेंग–गसोमा’, तो माता गौरा रेशमी मेखेला साड़ी और जूनबीरी आभूषणों से अलंकृत होंगी. भक्त बराती बनकर उत्सव का हिस्सा बनेंगे. महाशिवरात्रि में छह दिन बचे हैं. शिव-विवाह की सदियों पुरानी परंपराओं को लेकर तैयारियां चरम पर हैं. टेढ़ीनीम स्थित विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत आवास पर बाबा विश्वनाथ की हल्दी, शिव-विवाह, शिव बारात और गौना की रस्मों को लेकर माहौल भक्तिमय हो उठा है. महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ और माता गौरा का शृंगार आकर्षण का केंद्र होगा.


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आध्‍यात्मिक परंपराओं को दिखेगा संगम


पहली बार शिव–गौरा की चल प्रतिमा असमिया पारंपरिक परिधान और आभूषणों में सजेगी. पूर्व महंत के पुत्र वाचस्पति तिवारी ने बताया कि महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ और माता गौरा के परिधान असम के शिवसागर से मंगाए गए हैं. यह शृंगार न केवल परिधान की दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक संदेश के रूप में भी महत्वपूर्ण है. इससे काशी और असम की प्राचीन आध्यात्मिक परंपराओं का सुंदर संगम देखने को मिलेगा.

होर्मुज बना 'Strait Of Trump'! अमेरिका की इस हरकत से छिड़ा विवाद
होर्मुज बना 'Strait Of Trump'! अमेरिका की इस हरकत से छिड़ा विवाद
मध्य पूर्व में चल रहे ईरान और अमेरिका के तनाव के बीच कुछ ऐसा कर दिया गया है, जिसे देख हर कोई हैरान है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने आज गुरुवार को अपने सोशल मीडिया ट्रूथ पर एक पोस्ट शेयर की है जो स्टेट ऑफ होर्मुज की है. जिसमें ये साफ देखा जा सकता है कि, इस तस्वीर में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नाम बदलकर स्ट्रेट ऑफ ट्रंप कर दिया गया है. जी हां, अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य का नया नामकरण करते हुए इसे ट्रंप जलडमरूमध्य बताया है. ट्रंप ने एक पोस्ट को री-पोस्ट करते हुए ये बड़ा दावा किया है्. उनके इस पोस्ट से ऐसा माना जा रहा है कि, ट्रंप एक नया विवाद छेड़ने के मूड में नजर आ रहे हैं.जानिए क्या है मामला दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य का नाम बदलकर ट्रंप जलडमरूमध्य कर दिया है. ऐसे में हैरानी इस बात की है कि, ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर साझा एक पोस्ट को री-पोस्ट किया, जिसमें होर्मुज की तस्वीर को ट्रंप जलडमरूमध्य दिखाया तो है, मगर जिस यूजर की पोस्ट को ट्रंप ने री-पोस्ट किया है, वह पोस्ट ही वहां से गायब है. ये काफी आश्चर्य की बात है. पश्चिम एशिया संकट के चलते पहले से ही चर्चाओं में छाया होर्मुज जलडमरूमध्य अब एक बड़ा विवाद का मुद्दा बनता नजर आ रहा है. वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने बीते बुधवार को ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को शानदार रणनीति बताते हुए कहा कि, तेहरान को हार माननी ही पड़ेगी. जब तक कि वह अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को नहीं छोड़ देता, तब तक कोई समझौता नहीं हो सकता है. मालूम हो कि, अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर नाकाबंदी कर इस समुद्री रास्ते को और भी खतरनाक बना दिया है.ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का जाने क्या है मामला जानकारी के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान की खाड़ी के बीच में स्थित दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन समुद्री मार्गों में से एक है, जिसके चलते इसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवन रेखा माना जाता है. दुनिया का करीब 20-30 प्रतिशत कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है, मगर ईरान ने अमेरिका और इस्राइल युद्ध के चलते ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हुई और दुनिया भर में तेल की कीमतों में उछाल आया है.Also Read: विवाद के चक्कर में युवक ने खुद को मारी गोली, तीन दिन बाद पुलिस को मिली सूचनाअब अमेरिका ने भी होर्मुज की नाकाबंदी कर दी है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है. इन सभी के पीछे का सबसे बड़ा राज यह है कि, अप्रैल 2026 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज में नौसैनिक नाकाबंदी कर ईरान पर अधिकतम दबाव बनाने के लिए यह कदम उठाया है, इसका उद्देश्य परमाणु मुद्दों पर बातचीत के लिए ईरान को मजबूर करना, तेल निर्यात रोकना और क्षेत्रीय सुरक्षा पर अमेरिकी प्रभुत्व बनाए रखना है, क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण वैश्विक ऊर्जा मार्ग है.https://www.youtube.com/watch?v=dDM6bqR657U
पत्‍नी से विवाद के बाद युवक ने खुद को मारी गोली, तीन दिन बाद पुलिस को मिली सूचना
पत्‍नी से विवाद के बाद युवक ने खुद को मारी गोली, तीन दिन बाद पुलिस को मिली सूचना
A young man shot himself in a dispute, police received information three days later.वाराणसी: रोहनिया थाना क्षेत्र के अखरी स्थित उपासना नगर कॉलोनी में अंशुल यादव (30 वर्ष) ने पत्नी पूनम से विवाद के बाद अवैध असलहे से खुद को सिर में गोली मार ली.द लहूलुहान युवक को गंभीर हालत में परिवार के लोगों ने बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया, जहां उसकी हालत नाजूक बनी हुई है. तीन दिन बाद अंशुल के भाई हिमांशु यादव ने रोहनिया थाने में घटना के बाबत सूचना दी है. अंशुल यादव पहले आरटीओ का वाहन चलाता था. अखरी के उपासना नगर निवासी हिमांशु यादव ने पुलिस को बताया कि उसका भाई अंशुल यादव रविवार की रात 10 बजे अपने कमरे में पहुंचा. पत्नी पूनम से किसी बात को लेकर उसकी कहासुनी हुई और गुस्से में आकर अंशुल ने रिवाल्वर से खुद को सिर में गोली मार ली.फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल का किया निरीक्षण रोहनिया इंस्पेक्टर राजू सिंह ने बताया कि अखरी चौकी इंचार्ज धर्मेंद्र राजपूत और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया. पत्नी समेत अन्य परिजनों के बयान दर्ज किए. अंशुल यादव के पास से बरामद अवैध रिवाल्वर को कब्जे में लिया गया है. यह पता लगाया जा रहा है कि अवैध असलहा अंशुल के पास कैसे पहुंचा. परिजनों के बयान के आधार पर यह मालूम चला कि पति और पत्नी के बीच आए दिन विवाद होता था. रात में बाहर से पार्टी करके अंशुल घर पहुंचा तो पत्नी ने आपत्ति जताई. इसी बात को लेकर दोनों में विवाद बढ़ गया.ज्योतिषी ने फांसी लगाकर दी जान भेलूपुर थाना क्षेत्र के भदैनी में रहने वाले रविराज उपाध्याय (48 वर्ष) ने कमरे में फंदे से लटककर जान दे दी. गुरुवार की सुबह पत्नी रिंकी की नींद खुली तो घटना की जानकारी हुई. रिंकी ने तत्काल अपने देवर शशिराज को सूचना दी. इसके बाद परिजन फंदे से उतारकर उसे अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृतक घोषित कर दिया. मृतक की दो बेटियां आठ साल और छह साल की हैं. रविराज उपाध्याय ज्योतिषी और पंचांग का काम करते थे. उनका परिवार से जमीन संबंधित विवाद चल रहा था, जिसको लेकर दो साल से रविराज मानसिक रूप से परेशान थे.Also Read: वाराणसी में दर्दनाक हादसा, बाइकों की जबरदस्‍त टक्‍कर में दो युवकों की मौतघटना के बाद पत्नी बच्चों का रो- रोकर बुरा हाल हो गया है. मृतक दो भाइयों में बड़े थे. मूल रूप से घोरावल सोनभद्र का रहने वाले थे. काफी समय से उसका परिवार भदैनी में रहता है. घोरावल में खेती करवाने के लिए रविराज समय- समय पर जाते थे. रविराज ने सुसाइड करने से पहले अपने सभी परिचितों को मंगलवार और बुधवार को फोन करके कुशल पूछा था.https://www.youtube.com/watch?v=dDM6bqR657U
सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में बुद्ध जयंती पर संगोष्ठी, गौतम बुद्ध के विचारों की प्रासंगिकता पर चर्चा…
सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में बुद्ध जयंती पर संगोष्ठी, गौतम बुद्ध के विचारों की प्रासंगिकता पर चर्चा…
वाराणसी: संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में आज बुद्ध जयंती के अवसर पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया. इस संगोष्ठी का उद्देश्य गौतम बुद्ध के विचारों और उपदेशों को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में समझना तथा विद्यार्थियों और समाज तक उनकी उपयोगिता को पहुँचाना था.कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने की, जबकि मुख्य अतिथि प्रो. वांगचुक दोरजे नेगी रह. अपने संबोधन में प्रो. नेगी ने बौद्ध धर्म और हिन्दू धर्म के आपसी संबंधों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि दोनों ही धर्म एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बौद्ध धर्म को हिन्दू धर्म से अलग नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह उसी की एक महत्वपूर्ण धारा है. उन्होंने दोनों परंपराओं के समन्वित विकास की आवश्यकता पर जोर दिया.संगोष्ठी के मुख्य वक्ता डॉ. के. सिरी सुमेध महाथेरो ने भगवान बुद्ध के उपदेशों को आज के तनावपूर्ण और जटिल जीवन में अत्यंत प्रासंगिक बताया. उन्होंने कहा कि बुद्ध के विचार—जैसे मध्यम मार्ग, करुणा और अहिंसा—आज के समाज की कई समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करते हैं.Also Read : मनीष हत्‍याकांड के इनामी आरोपी हुए अंडरग्राउंड, विधायकों ने दी 10 लाख की आर्थिक सहायताविशिष्ट अतिथि प्रो. अरुण कुमार यादव तथा सरस्वत अतिथि श्री दीनदयाल पांडेय ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को बुद्ध के आदर्शों से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है. कार्यक्रम के संयोजक प्रो. रमेश प्रसाद ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और संगोष्ठी के उद्देश्य पर प्रकाश डाला.संगोष्ठी में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि यदि बुद्ध के सिद्धांतों को जीवन में अपनाया जाए, तो समाज में शांति, सहिष्णुता और नैतिकता को बढ़ावा मिल सकता है।