महाशिवरात्रि - मथुरा से आई बाबा विश्वनाथ के लिए शगुन समाग्री, सीईओ ने किया स्वागत

वाराणसी : श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में महाशिवरात्रि की तैयारी जोरशोर से चल रही है. इसी क्रम में सोमवार को मथुरा स्थित कृष्ण जन्मभूमि से भेजी गई शगुन सामग्री का आगमन हुआ. मथुरा से बाबा के लिए श्रृंगार सामग्री के साथ-साथ पूजन और प्रसाद की काफी मात्रा में सामग्री भेजी गई थी, जिसका स्वागत मुख्य कार्यपालक ने किया. महाशिवरात्रि के अवसर पर विभिन्न धार्मिक स्थलों से बाबा के लिए श्रृंगार और भोग प्रसाद की सामग्री भेजी जा रही है.
हाल ही में वैष्णो देवी धाम से भी बाबा के लिए सामग्री पहुंची थी. रविवार को मथुरा से विधि-विधान पूर्वक पूजन और श्रृंगार सामग्री पारंपरिक तरीके से मथुरा से काशी के लिए रवाना की गई. यह सामग्री सोमवार की सुबह बाबा दरबार में पहुंची, जिसे मंदिर प्रशासन ने स्वीकार किया. इस भेंट को महाशिवरात्रि के आयोजन में बाबा और गौरा को अर्पित किया जाएगा.

विशेष प्रसाद और भोग की व्यवस्था
मंदिर प्रशासन ने इस अवसर पर कहा कि यह सामग्री भक्तों की श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है. मथुरा से भेजी गई सामग्री में विशेष रूप से फूल, फल, मिठाइयाँ और अन्य पूजन सामग्री शामिल है. यह सामग्री न केवल बाबा के श्रृंगार के लिए उपयोग की जाएगी, बल्कि भक्तों के लिए प्रसाद के रूप में भी वितरित की जाएगी.
मंदिर प्रशासन ने बताया कि इस बार महाशिवरात्रि के अवसर पर विशेष तैयारियाँ की गई हैं. भक्तों की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है. इसके अलावा, भक्तों के लिए विशेष प्रसाद और भोग की व्यवस्था भी की गई है.
बाबा विश्वनाथ धारण करेंगे असमिया वैभव
महादेव की नगरी काशी में महाशिवरात्रि पर शिव–गौरा पहली बार असमिया वैभव में दिखेंगे. बाबा विश्वनाथ धारण करेंगे ‘चेलेंग–गसोमा’, तो माता गौरा रेशमी मेखेला साड़ी और जूनबीरी आभूषणों से अलंकृत होंगी. भक्त बराती बनकर उत्सव का हिस्सा बनेंगे. महाशिवरात्रि में छह दिन बचे हैं. शिव-विवाह की सदियों पुरानी परंपराओं को लेकर तैयारियां चरम पर हैं. टेढ़ीनीम स्थित विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत आवास पर बाबा विश्वनाथ की हल्दी, शिव-विवाह, शिव बारात और गौना की रस्मों को लेकर माहौल भक्तिमय हो उठा है. महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ और माता गौरा का शृंगार आकर्षण का केंद्र होगा.
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आध्यात्मिक परंपराओं को दिखेगा संगम
पहली बार शिव–गौरा की चल प्रतिमा असमिया पारंपरिक परिधान और आभूषणों में सजेगी. पूर्व महंत के पुत्र वाचस्पति तिवारी ने बताया कि महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ और माता गौरा के परिधान असम के शिवसागर से मंगाए गए हैं. यह शृंगार न केवल परिधान की दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक संदेश के रूप में भी महत्वपूर्ण है. इससे काशी और असम की प्राचीन आध्यात्मिक परंपराओं का सुंदर संगम देखने को मिलेगा.



