दालमंडी में विकास प्राधिकरण की बड़ी कार्रवाई, 5 अवैध मकानों पर चला बुलडोजर...

वाराणसी : दालमंडी सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत सोमवार को तड़के एक बार फिर ध्वस्तीकरण अभियान चलाया गया. सुबह करीब सात बजे से पोकलैंड मशीन और बुलडोजर की मदद से पांच भवनों को ध्वस्त किया गया. इन भवनों को वाराणसी विकास प्राधिकरण द्वारा पूर्व में अवैध घोषित किया गया था. ध्वस्तीकरण के दौरान पूरे दालमंडी क्षेत्र में सन्नाटा पसरा रहा. सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए दशाश्वमेध थाना प्रभारी अतुल अंजान त्रिपाठी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद रहे.
प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार का विरोध देखने को नहीं मिला और पोकलैंड मशीनों की सहायता से चिन्हित भवनों को जमींदोज कर दिया गया. एसीपी दशाश्वमेध अतुल अंजान त्रिपाठी के अनुसार, जिन भवनों पर कार्रवाई की गई थी, उन्हें पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके थे. साथ ही मुनादी कराकर भवन स्वामियों को मकान खाली करने का निर्देश दिया गया था. निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद सोमवार को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई.
सोमवार को जिन भवनों पर कार्रवाई हुई उनमें मकान संख्या सीके 42/94-95, सीके 43/145, सीके 43/175-बी, सीके 50/204 और सीके 43/123 शामिल हैं. दालमंडी सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने कुल 181 भवनों और दुकानों को चिन्हित किया था. सोमवार की कार्रवाई के बाद अब तक लगभग 150 भवनों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा चुकी है, जबकि इनमें से करीब 70 भवन पूरी तरह जमींदोज किए जा चुके हैं. परियोजना से प्रभावित लोगों को अब तक 65 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा वितरित किया जा चुका है. अधिकारियों के अनुसार शेष भवनों पर भी तेजी से कार्रवाई जारी है.
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जून के अंत तक भूमि खाली कराने का लक्ष्य
पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि जून के अंतिम सप्ताह तक सभी चिन्हित भवनों पर कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी. इसके बाद भूमि को पूरी तरह खाली कराने और सड़क निर्माण की अगली प्रक्रिया शुरू की जाएगी. बता दें कि दालमंडी की संकरी और ऐतिहासिक गलियों को मॉडल सड़क के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है. इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने काशी दौरे के दौरान रखी थी. परियोजना के लिए राज्य सरकार द्वारा लगभग 215.88 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं. वहीं, 181 भवन एवं दुकान स्वामियों को करीब 191 करोड़ रुपये मुआवजे के रूप में दिए जाने का प्रावधान किया गया है.



