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थाने के बाहर फर्जी रिहाई का रील बनाना दो युवकों को पड़ा महंगा, पुलिस ने भेजा जेल

थाने के  बाहर फर्जी रिहाई का रील बनाना दो युवकों को पड़ा महंगा, पुलिस ने भेजा जेल
Sep 08, 2025, 09:06 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसीः स्थानीय चौबेपुर थाना परिसर से शान से बाहर आते हुए रील बनवाना एक युवक और उसके दोस्त को काफी मंहगा पड़ गया. रील के वायरल होते ही थाने की पुलिस हरकत में आई और दोनों युवकों को धर दबोचा. पहले तो उनकी करनी के लिए उनसे थाने में उठक बैठक करवाई गई फिर जेल भेज दिया गया. इस रील के साथ दोनों युवकों की गिरफ्तारी क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है.


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यह है पूरा मामला


दरअसल रविवार को चौबेपुर इलाके में एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ. रील में एक युवक बड़ी शान से थाने के अंदर से चहलकदमी कर बाहर निकलते दिख रहा है. थाने के बाहर आते ही उसका दोस्त उस युवक का गर्मजोशी से स्वागत करता है और सड़क के दूसरी ओर आकर अपने दोस्तों से मिलता है. हालांकि इस रील में सब कुछ सामान्य था लेकिन इस रील को भोजपुरी गाने पर एडिट किया गया था. इस वीडियो में एक गाना बज रहा है जिसके बोल है "जान हो जेल से रिहा हो गईली...". इस गाने का अर्थ यह निकाला गया कि युवक को पहले किसी मामले में गिरफ्तार किया गया था जो रिहा होने के बाद थाना परिसर में से शान से बाहर निकल रहा है और उसके दोस्त उसका इंतजार कर रहे हैं. जो वीडियो वायरल हुआ था उसके शीर्षक में "अतुल सोनकर 77" और "सूरज राय 9883", लिखा था. वैसे रील को इन दोनों युवकों के कुछ दोस्तों ने बनाया, जो थाने के बाहर एक चाय-पान की दुकान पर खड़े थे.


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थाना का घटा रूआब, पकड़े गए रीलबाज


दूसरी ओर जब यह वायरल हुआ तो थाना का घटता रूआब देख अधिकारी बिफरे पड़े. उनके निर्देश पर चौबेपुर पुलिस दोनों रीलबाजों के पीछे पड़ गई. वायरल रील पर लिखे आईडी से पुलिस दोनों युवकों तक कुछ ही देर में पहुंच गई. रीलबाज युवकों को थाने लाकर डंड-बैठक कराने के बाद कानूनी कार्रवाई कर जेल भेज दिया गया.


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करेंगे प्रयास न तो भविष्य में इस तरह की घटनाः चौबेपुर थानाध्यक्ष


इस संबंध में चौबेपुर थानाध्यक्ष राजेन्द्र यादव ने बताया कि वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रौना कलां निवासी अतुल सोनकर तथा उसके दोस्त मुनारी निवासी राहुल राजभर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है. पुलिस इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी ताकि थाने की छवि किसी भी कारण धूमिल न हो. इसके अलावा वह यह भी सुनिश्चित करेंगे कि समाज में कानून व्यवस्था बनी रहे और इस प्रकार की घटना भविष्य में न हो.

आईआईटी बीएचयू में परिचय कार्यक्रम, 7 दिनों तक छात्रों की हर समस्या का विशेषज्ञ करेंगे हल...
आईआईटी बीएचयू में परिचय कार्यक्रम, 7 दिनों तक छात्रों की हर समस्या का विशेषज्ञ करेंगे हल...
वाराणसी : आईआईटी बीएचयू में नव प्रवेशी स्‍नातक छात्रों के लिए परिचय कार्यक्रम - 2026 की शुरूआत बुधवार को स्वतंत्रता भवन में की गई. कार्यक्रम के पहले दिन संस्थान के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने नए विद्यार्थियों के अभिभावकों से संवाद करते हुए उनका संस्थान परिवार में स्वागत किया, उनकी जिज्ञासाओं और शंकाओं का विस्तारपूर्वक समाधान किया. अपने संबोधन में प्रो. अमित पात्रा ने कहा कि आईआईटी (बीएचयू) केवल उत्कृष्ट तकनीकी शिक्षा प्रदान करने वाला संस्थान ही नहीं, बल्कि नवाचार, अनुसंधान, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं मानवीय मूल्यों के विकास के लिए भी प्रतिबद्ध है.उन्होंने कहा कि संस्थान छात्रों को विश्वस्तरीय शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है. उन्होंने अभिभावकों को आश्वस्त किया कि छात्रों की शैक्षणिक प्रगति, सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तिगत विकास के लिए संस्थान में सुदृढ़ एवं संवेदनशील व्यवस्था उपलब्ध है. संवाद सत्र के दौरान अभिभावकों ने शैक्षणिक व्यवस्था, छात्रावास, सुरक्षा, मेंटरशिप, अनुसंधान, प्लेसमेंट, छात्र कल्याण तथा परिसर जीवन से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे. निदेशक ने सभी प्रश्नों का विस्तार से उत्तर देते हुए अभिभावकों को आश्वस्त किया कि संस्थान प्रत्येक विद्यार्थी को सुरक्षित, सकारात्मक एवं प्रेरणादायी वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है.ओरिएंटेशन एवं इंडक्शन प्रोग्राम के अंतर्गत आगामी दिनों में विद्यार्थियों को संस्थान की शैक्षणिक प्रणाली, अनुसंधान संस्कृति, छात्र सहायता सेवाओं, खेल, संस्कृति, नवाचार तथा सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों से परिचित कराया जाएगा. 30 जुलाई को नवप्रवेशी छात्रों का पंजीकरण होगा. इसके बाद स्वतंत्रता भवन में चेयरमैन-जेईई, डीन (अकादमिक अफेयर्स), प्रोफेसर इंचार्ज (ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट) तथा डीन (रिसोर्स एंड एलुमनाई) विद्यार्थियों को संबोधित करेंगे. इस दौरान उन्हें संस्थान की शैक्षणिक व्यवस्था, प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट की संभावनाओं तथा पूर्व छात्रों के नेटवर्क से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की जाएंगी.31 जुलाई को विभिन्न विभागों एवं स्कूलों में विभागीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जहां विभागाध्यक्ष एवं संकाय सदस्य विद्यार्थियों और अभिभावकों को संबंधित विषयों की शैक्षणिक एवं अनुसंधान गतिविधियों से अवगत कराएंगे. इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों को डीन (स्टूडेंट्स अफेयर्स), चेयरमैन-सीओडब्ल्यू, डीन (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) तथा मुख्य प्रॉक्टर द्वारा संस्थान की विभिन्न व्यवस्थाओं एवं छात्र जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी जाएगी. कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों का डायग्नोस्टिक टेस्ट भी आयोजित होगा.1 अगस्त को विद्यार्थियों के लिए प्रातःकालीन कैंपस वॉक आयोजित होगी. इसके बाद वे अपने-अपने विभागों में अनुसंधान प्रयोगशालाओं एवं अन्य सुविधाओं का भ्रमण करेंगे. शाम को स्वतंत्रता भवन में कमांडर वीरेंद्र कुमार जेटली का प्रेरक व्याख्यान आयोजित किया जाएगा, जो विद्यार्थियों को जीवन, अनुशासन और नेतृत्व से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश देंगे.2 अगस्त को विद्यार्थियों के लिए शारीरिक एवं टीम-बिल्डिंग गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा. इसके पश्चात काउंसलिंग प्रोफेशनल्स (CP), पीयर मेंटर्स के साथ संवाद सत्र आयोजित होंगे, जिनका उद्देश्य विद्यार्थियों को नए शैक्षणिक एवं सामाजिक वातावरण में सहजता से स्वयं को स्थापित करने में सहायता प्रदान करना है.3 अगस्त को विद्यार्थियों का परिचय संस्थान की विभिन्न छात्र परिषदों एवं गतिविधियों से कराया जाएगा। इस दौरान स्टूडेंट काउंसलिंग सर्विसेज (SAKHA), स्टूडेंट्स पार्लियामेंट, फिल्म एवं मीडिया काउंसिल, सांस्कृतिक परिषद तथा सोशल सर्विस काउंसिल अपनी गतिविधियों से विद्यार्थियों को अवगत कराएंगी. कार्यक्रम के अंत में विभिन्न छात्र संगठनों एवं क्लबों की प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी.4 अगस्त को साइंस एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल, गेम्स एंड स्पोर्ट्स काउंसिल, ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल, स्टूडेंट एलुमनाई इंटरैक्शन सेल (SAIC), पीआर सेल, ई-सेल, रिसर्च सेल तथा संस्थान के काउंसलर्स विद्यार्थियों को उपलब्ध अवसरों, सुविधाओं एवं छात्र सहायता तंत्र की जानकारी देंगे, दिन का समापन छात्र गतिविधियों से संबंधित स्टॉल प्रदर्शनी के साथ होगा.5 अगस्त को विद्यार्थियों के लिए संस्थान का व्यापक कैंपस विजिट आयोजित किया जाएगा. इस दौरान उन्हें आईआईटी (बीएचयू) के प्रमुख शैक्षणिक विभागों, केंद्रीय अनुसंधान सुविधाओं, पुस्तकालय, छात्र गतिविधि केंद्र, नवाचार एवं उद्यमिता केंद्र सहित संस्थान के विभिन्न महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा। इसके पश्चात विभागों में फैकल्टी मेंटर्स द्वारा फीडबैक सत्र आयोजित किए जाएंगे, ताकि विद्यार्थी अपने अनुभव साझा कर सकें.8 अगस्त को ओरिएंटेशन एवं इंडक्शन प्रोग्राम का समापन "डिनर विद फ्रेशर्स" के साथ होगा, जिसमें संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी एवं नवप्रवेशित विद्यार्थी एक साथ सहभागिता करेंगे.ALSO READ:पुलिस का बड़ा एक्शन अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़ 5 आरोपी गिरफ्तार...यह आयोजन विद्यार्थियों और संस्थान प्रशासन के बीच आत्मीय संवाद स्थापित करने तथा संस्थान परिवार के साथ उनके जुड़ाव को और मजबूत बनाने का अवसर प्रदान करेगा. सप्ताहभर चलने वाला यह ओरिएंटेशन एवं इंडक्शन प्रोग्राम नवप्रवेशित विद्यार्थियों को आईआईटी (बीएचयू) की शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान परंपरा, नवाचार संस्कृति, छात्र सहायता प्रणाली, खेल, सांस्कृतिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों तथा जीवंत परिसर जीवन से परिचित कराएगा. कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में आत्मविश्वास का संचार करते हुए उन्हें एक सफल, संतुलित एवं प्रेरणादायी शैक्षणिक यात्रा के लिए तैयार करना है.
पुलिस का बड़ा एक्शन अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़ 5 आरोपी गिरफ्तार...
पुलिस का बड़ा एक्शन अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़ 5 आरोपी गिरफ्तार...
वाराणसी : पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल के निर्देशन में वाराणसी साइबर क्राइम थाना पुलिस ने एक अंतरराज्यीय साइबर का भंडाफोड़ करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है. यह गिरोह देशभर के साइबर अपराधियों को म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराकर साइबर ठगी में मदद करता था. यानी खाता गरीबों का और ठगी के पैसे का खेल चल रहा था. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 15 एंड्रॉयड मोबाइल, 3 आईफोन, 43 एटीएम कार्ड, 10 पासबुक, 8 चेकबुक, 11 क्यूआर कोड, 12 सिम कार्ड, एक लैपटॉप, एक डायरी और महिंद्रा थार व हुंडई आई-20 कार बरामद की है.डीसीपी नीतू कादयान ने बताया कि गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाता था. इसके बाद एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक, सिम कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग की पूरी जानकारी अपने कब्जे में लेकर खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए करता था. विदेशी साइबर अपराधियों से प्राप्त ट्रांजेक्शन एपीके फाइल के जरिए खातों पर रिमोट एक्सेस देकर ठगी की रकम का लेनदेन कराया जाता था. पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्हें साइबर ठगी से मिलने वाली रकम पर 8 से 15 प्रतिशत तक कमीशन मिलता था. इसी अवैध कमाई से महिंद्रा थार और हुंडई आई-20 कार खरीदी गई थी और उनकी ईएमआई भी चुकाई जा रही थी.ALSO READ:संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के 44वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने भारतीय ज्ञान प्रणाली, पांडुलिपि संरक्षण और आधुनिक शिक्षा पर रखा जोर.यह गिरोह म्यूल बैंक खातों और ट्रांजेक्शन एपीके फाइल का उपयोग कर देशभर में साइबर ठगी करता था. पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों से बैंक खातों, संदिग्ध चैट, टेलीग्राम कम्युनिकेशन और साइबर लेनदेन से जुड़े अहम डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं. सभी डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है. मामले में आगे की जांच जारी है. गिरफ्तार आरोपियों में आदर्श चौबे निवासी रामगढ़, थाना चुनार, जनपद मिर्जापुर (हाल पता- वरुणा इन्क्लेव थाना कैंट, वाराणसी), आशीष यादव निवासी तोफापुर बिन्दवल, थाना बिलरियागंज, जनपद आजमगढ़ (हाल पता- वरुणा इन्क्लेव, थाना कैंट, वाराणसी), सुजल सिंह निवासी कवाल, थाना जनसठ, जनपद मुजफ्फरनगर (हाल पता- गणपति इन्क्लेव सुंदरपुर, वाराणसी), पियूष सिंह निवासी भीखमपुर, थाना घोसी, जनपद मऊ (हाल पता- कबीर नगर, भेलूपुर वाराणसी) और युवराज वर्मा निवासी गांधी नगर, नरिया, थाना लंका शामिल हैं.
संपूर्णानंद  संस्कृत विश्वविद्यालय के 44वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने भारतीय ज्ञान प्रणाली, पांडुलिपि संरक्षण और आधुनिक शिक्षा पर रखा जोर.
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के 44वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने भारतीय ज्ञान प्रणाली, पांडुलिपि संरक्षण और आधुनिक शिक्षा पर रखा जोर.
वाराणसी: सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के 44वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने भारतीय ज्ञान परंपरा को वैज्ञानिक शोध और प्रमाणों के साथ वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि योग, आयुर्वेद और ध्यान जैसी भारत की प्राचीन ज्ञान परंपराएं आज पूरी दुनिया में स्वीकार की जा रही हैं और यूनेस्को भी योग सहित कई भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को वैश्विक विरासत का दर्जा दे चुका है.उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल आधार वैज्ञानिक सोच और नए विचारों का स्वागत है. "आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः" का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत सदैव ज्ञान और नवाचार का समर्थक रहा है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत भारतीय ज्ञान प्रणाली को शिक्षा से जोड़ा जा रहा है, जबकि 'ज्ञान भारत मिशन' के माध्यम से प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण, डिजिटलीकरण और शोध कार्यों को बढ़ावा दिया जा रहा है.कुलाधिपति ने कहा कि "मेरा गांव मेरी धरोहर" और राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण जैसी योजनाओं के जरिए देश के गांवों की लोक संस्कृति और परंपराओं का दस्तावेजीकरण किया जा रहा है. उन्होंने युवाओं से भारतीय भाषाओं, योग, आयुर्वेद, लोक कलाओं और इतिहास को अपनाकर डिजिटल माध्यमों से दुनिया तक पहुंचाने का आह्वान किया.उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति का प्रचार केवल गौरवगान तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे वैज्ञानिक शोध और प्रमाणों के आधार पर विश्व समुदाय के सामने प्रस्तुत किया जाना चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि वर्षों तक प्राचीन पांडुलिपियों की उपेक्षा होती रही, लेकिन प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप के बाद उनके संरक्षण और डिजिटलीकरण के कार्यों में तेजी आई है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में संरक्षित पांडुलिपियों के बेहतर संरक्षण और उपयोग की आवश्यकता भी बताई.अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए राज्यपाल ने कहा कि विकास कार्यों में ग्रांट की कमी नहीं है, बल्कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की कमी है. उन्होंने कुलपति प्रो. बिहारीलाल शर्मा की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने विभिन्न स्रोतों से संसाधन जुटाकर विश्वविद्यालय में कई महत्वपूर्ण कार्य पूरे कराए हैं. साथ ही अधूरे विकास कार्यों, विशेषकर बाउंड्री वॉल के निर्माण में हो रही देरी पर भी नाराजगी व्यक्त की.दीक्षांत समारोह में उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्रों के आधुनिकीकरण पर भी जोर दिया. उन्होंने बताया कि अब तक 17 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों को बेहतर सुविधाओं से जोड़ा जा चुका है, जहां बच्चों के लिए बेहतर वातावरण, टेबल-कुर्सी और सम्मानजनक भोजन व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है. इस कार्य में जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी के सहयोग की उन्होंने सराहना की.एचपीवी (HPV) वैक्सीन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि जनसहयोग से पिछले तीन वर्षों में तीन लाख से अधिक बेटियों का टीकाकरण कराया गया है. उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा 14 वर्ष की बेटियों के लिए एचपीवी वैक्सीन मुफ्त किए जाने का स्वागत करते हुए सभी अभिभावकों, स्कूलों, कॉलेजों और आंगनवाड़ी केंद्रों से प्रत्येक पात्र बेटी का टीकाकरण सुनिश्चित कराने की अपील की। उन्होंने सीरम इंस्टीट्यूट, पुणे के साथ हुए एमओयू का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके माध्यम से लाखों वैक्सीन उपलब्ध कराई गई हैं। सोनभद्र में 40 हजार एचपीवी वैक्सीन उपलब्ध कराने तथा अन्य आदिवासी बहुल जिलों में भी अभियान चलाने की जानकारी दी.ALSO READ:काशी में मुस्लिम शिष्यों ने उतारी अपने गुरु की आरती, पातालपुरी मठ के पीठाधीश्वर ने सभी को दिया आशीर्वादउन्होंने बेटियों के प्रति भेदभाव समाप्त करने, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के बच्चों को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने, सामाजिक समरसता बढ़ाने तथा सफाई कर्मियों सहित सभी वर्गों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने का संदेश दिया. साथ ही विश्वविद्यालय परिसर में स्वच्छता, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने तथा संस्थान की विरासत को सुरक्षित रखते हुए उसके समग्र विकास के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की कार्यशैली और मानसिकता में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए आत्ममंथन समय की मांग है.