होली में विश्वनाथ बाबा को अर्पित होगा मुथरा का गुलाल, श्रीकृष्ण जन्मभूमि से गुलाल यात्रा रवाना

वाराणसी - रंगभरी एकादशी के अवसर पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि एवं काशी विश्वनाथ धाम में होली का मुख्य आयोजन किया जाता है. इस संबंध में जानकारी देते हुए श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि पिछले वर्ष से एक परंपरा की शुरुआत हुई है, जिसमें काशी विश्वनाथ धाम और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के बीच होली के अवसर पर फाग भेजने की परंपरा स्थापित की गई है.

इस वर्ष काशी विश्वनाथ धाम से श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए रंगारंग लठामार होली कार्यक्रम के लिए सुगंधित द्रव्य, गुलाल, वस्त्र, प्रसाद आदि सामग्री भेजी गई है, जिसे रंगभरी एकादशी महोत्सव में विशेष रूप से अर्पित किया जाएगा. गुरुवार को फाल्गुन शुक्ल दशमी के दिन, श्रीकृष्ण जन्मभूमि से नील-गुलाल, प्रसाद, फल एवं मेवा आदि सामग्री के साथ भव्य गुलाल-यात्रा का आयोजन किया गया. इस यात्रा में उद्दाम नृत्य एवं संकीर्तन के बीच श्रद्धालु श्रीकृष्ण जन्मभूमि से काशी विश्वनाथ धाम, वाराणसी के लिए रवाना हुए. इस दिव्य गुलाल-यात्रा में ग्वाल-गोपी होली के रसिया पर नृत्य करते हुए श्रद्धालु शामिल हुए.

संतजन भी ढोल, मृदंग, झांझ, मजीरे की मंगल ध्वनि पर संकीर्तन एवं नृत्य कर रहे थे. हजारों श्रद्धालु एवं ब्रजवासी इस यात्रा में शामिल होकर अभिभूत थे। भगवान श्रीकृष्ण और राधाजी की प्रिय होली लीला में भगवान शिव का विशेष स्थान है. भगवान शिव ने भी होली खेलने के लिए ब्रज में पधारने का निर्णय लिया. गोपियों ने भगवान शिव के विचित्र रूप को देखकर आश्चर्य व्यक्त किया और कहा, "मैं कैसे होरी खेलूं या बावरिया के संग." भगवान कृष्ण के संकेत पर भगवान शिव ने गोपी रूप धारण किया और इस प्रिय लीला में सम्मिलित हुए. आज भी रंगेश्वर महादेव के रूप में रंगीली गली में विराजमान हैं.
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इस वर्ष काशी विश्वनाथ धाम एवं श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर होली का मुख्य आयोजन रंगभरी एकादशी के दिन होगा. इस अवसर पर दोनों स्थानों के बीच दिव्य प्रसाद का आदान-प्रदान किया जाएगा, जिसका लाभ भक्तजन ले सकेंगे. श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा एवं प्रबंध समिति के सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने गुलाल-यात्रा को पुष्प वर्षा एवं नमन कर रवाना किया. यह शुक्रवार को वाराणसी पहुंचेगी तो मंदिर प्रशासन की ओर से इसे स्वीकार किया जाएगा.



