वाराणसी से हटेंगी मीट-मछली की दुकानें! नगर निगम का बड़ा फैसला, शहर के बाहर बनेंगे नए मार्केट ...

वाराणसी: नगर निगम की साधारण सभा (सदन) की बैठक में शहर के विकास, स्वच्छता और राजस्व वृद्धि से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा हुई. सबसे अहम निर्णय शहर के भीतर संचालित मीट-मांस और मछली की दुकानों को चरणबद्ध तरीके से शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित करने का रहा.
मैदागिन स्थित टाउनहाल में महापौर अशोक कुमार तिवारी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि योजना के प्रथम चरण में रामनगर, सूजाबाद, गणेशपुर, अवलेशपुर और शिवपुर क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है. इन स्थानों पर व्यवस्थित मीट और मछली बाजार विकसित किए जाएंगे, जिससे शहर के भीतर स्वच्छता और यातायात व्यवस्था बेहतर हो सके.
बैठक के दौरान पार्षद गुलशन अली ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि करीब एक वर्ष पहले भी ऐसा प्रस्ताव आया था, लेकिन अब तक उसका क्रियान्वयन नहीं हो पाया. उन्होंने सावन के दौरान दुकानों के बंद होने से प्रभावित होने वाले व्यवसायियों की चिंता भी सदन के सामने रखी. इस पर नगर आयुक्त ने आश्वासन दिया कि जल्द ही स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू की जाएगी.
काशी इंटरप्रिटेशन सेंटर पर भी स्थिति स्पष्ट
भेलूपुर में प्रस्तावित काशी इंटरप्रिटेशन सेंटर और कम्युनिटी पार्क को लेकर भी सदन में चर्चा हुई. नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि जलकल परिसर के पुराने भवन को ध्वस्त नहीं किया जाएगा और न ही सेटलिंग टैंक या पेयजल आपूर्ति व्यवस्था से कोई छेड़छाड़ होगी. पार्क का विकास खाली पड़े सोलर पैनल क्षेत्र में किया जाएगा.
शिवपुर में बनेगी 500 दुकानों वाली फल मंडी
शहर के फल व्यवसायियों को व्यवस्थित स्थान उपलब्ध कराने के लिए शिवपुर में फुटकर फल मंडी विकसित करने का प्रस्ताव भी सामने आया. यहां लगभग 500 दुकानों की व्यवस्था किए जाने की योजना है.
निगम राजस्व बढ़ाने पर जोर
सदन में जलकल परिसर से निकाली गई करीब 40 हजार घन मीटर मिट्टी की नीलामी, मल्टीस्टोरी भवनों और फ्लैट्स को गृहकर के दायरे में लाने तथा विभिन्न संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन पर भी चर्चा हुई. महापौर ने अधिकारियों को राजस्व बढ़ाने के लिए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए.
तालाब, अवैध कब्जे और स्वच्छता बने प्रमुख मुद्दे
कई पार्षदों ने तालाबों पर अतिक्रमण, सरकारी जमीनों पर कब्जे, डोर-टू-डोर कूड़ा उठान व्यवस्था की खामियों, जल निकासी की समस्याओं और वार्डों में विकास कार्यों की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए. नगर आयुक्त ने अधिकांश मामलों में समयबद्ध कार्रवाई और रिपोर्ट उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया.
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पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग
पार्षदों ने विभागीय कार्यों की जानकारी क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को उपलब्ध कराने, वर्क ऑर्डर और लंबित फाइलों की सूची साझा करने तथा विकास कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने की मांग की. सदन में इस पर सहमति बनी कि कार्यों की निगरानी और सूचना प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा.
ई-रिक्शा से पहुंचे महापौर और नगर आयुक्त
बैठक का एक सकारात्मक पहलू यह भी रहा कि महापौर अशोक कुमार तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल समेत कई पार्षद ई-रिक्शा से टाउनहाल पहुंचे. नगर निगम द्वारा प्रत्येक शनिवार को मनाए जाने वाले “नो फ्यूल डे” के तहत यह पहल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाली रही.
सदन में पास हुए प्रमुख प्रस्ताव
- मीट-मांस और मछली की दुकानों को शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया.
- मुख्यमंत्री ग्रीन रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम के तहत परियोजनाओं के लिए धनराशि आवंटन.
- राष्ट्रीय राजमार्गों और सार्वजनिक स्थलों पर अवैध साइन बोर्ड एवं संकेतकों पर रोक.
- विद्युत उपकेंद्रों के लिए भूमि उपलब्ध कराने संबंधी प्रस्ताव.
- पार्षदों की शैक्षिक यात्रा और अन्य लंबित विकास प्रस्तावों को स्वीकृति.
- संत शिरोमणि नरहरि महाराज (सोनार) की प्रतिमा स्थापना मामले में न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन.
कुल मिलाकर, नगर निगम सदन की बैठक में शहर की स्वच्छता, सुव्यवस्थित व्यापार, राजस्व वृद्धि और विकास कार्यों में पारदर्शिता को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिनका असर आने वाले समय में काशी की शहरी व्यवस्था पर दिखाई दे सकता है.



