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वाराणसी से हटेंगी मीट-मछली की दुकानें! नगर निगम का बड़ा फैसला, शहर के बाहर बनेंगे नए मार्केट ...

वाराणसी से हटेंगी मीट-मछली की दुकानें! नगर निगम का बड़ा फैसला, शहर के बाहर बनेंगे नए मार्केट ...
Jun 06, 2026, 03:51 PM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी: नगर निगम की साधारण सभा (सदन) की बैठक में शहर के विकास, स्वच्छता और राजस्व वृद्धि से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा हुई. सबसे अहम निर्णय शहर के भीतर संचालित मीट-मांस और मछली की दुकानों को चरणबद्ध तरीके से शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित करने का रहा.


मैदागिन स्थित टाउनहाल में महापौर अशोक कुमार तिवारी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि योजना के प्रथम चरण में रामनगर, सूजाबाद, गणेशपुर, अवलेशपुर और शिवपुर क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है. इन स्थानों पर व्यवस्थित मीट और मछली बाजार विकसित किए जाएंगे, जिससे शहर के भीतर स्वच्छता और यातायात व्यवस्था बेहतर हो सके.


बैठक के दौरान पार्षद गुलशन अली ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि करीब एक वर्ष पहले भी ऐसा प्रस्ताव आया था, लेकिन अब तक उसका क्रियान्वयन नहीं हो पाया. उन्होंने सावन के दौरान दुकानों के बंद होने से प्रभावित होने वाले व्यवसायियों की चिंता भी सदन के सामने रखी. इस पर नगर आयुक्त ने आश्वासन दिया कि जल्द ही स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू की जाएगी.


काशी इंटरप्रिटेशन सेंटर पर भी स्थिति स्पष्ट


भेलूपुर में प्रस्तावित काशी इंटरप्रिटेशन सेंटर और कम्युनिटी पार्क को लेकर भी सदन में चर्चा हुई. नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि जलकल परिसर के पुराने भवन को ध्वस्त नहीं किया जाएगा और न ही सेटलिंग टैंक या पेयजल आपूर्ति व्यवस्था से कोई छेड़छाड़ होगी. पार्क का विकास खाली पड़े सोलर पैनल क्षेत्र में किया जाएगा.


शिवपुर में बनेगी 500 दुकानों वाली फल मंडी


शहर के फल व्यवसायियों को व्यवस्थित स्थान उपलब्ध कराने के लिए शिवपुर में फुटकर फल मंडी विकसित करने का प्रस्ताव भी सामने आया. यहां लगभग 500 दुकानों की व्यवस्था किए जाने की योजना है.


निगम राजस्व बढ़ाने पर जोर


सदन में जलकल परिसर से निकाली गई करीब 40 हजार घन मीटर मिट्टी की नीलामी, मल्टीस्टोरी भवनों और फ्लैट्स को गृहकर के दायरे में लाने तथा विभिन्न संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन पर भी चर्चा हुई. महापौर ने अधिकारियों को राजस्व बढ़ाने के लिए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए.


तालाब, अवैध कब्जे और स्वच्छता बने प्रमुख मुद्दे


कई पार्षदों ने तालाबों पर अतिक्रमण, सरकारी जमीनों पर कब्जे, डोर-टू-डोर कूड़ा उठान व्यवस्था की खामियों, जल निकासी की समस्याओं और वार्डों में विकास कार्यों की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए. नगर आयुक्त ने अधिकांश मामलों में समयबद्ध कार्रवाई और रिपोर्ट उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया.


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पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग


पार्षदों ने विभागीय कार्यों की जानकारी क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को उपलब्ध कराने, वर्क ऑर्डर और लंबित फाइलों की सूची साझा करने तथा विकास कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने की मांग की. सदन में इस पर सहमति बनी कि कार्यों की निगरानी और सूचना प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा.


ई-रिक्शा से पहुंचे महापौर और नगर आयुक्त


बैठक का एक सकारात्मक पहलू यह भी रहा कि महापौर अशोक कुमार तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल समेत कई पार्षद ई-रिक्शा से टाउनहाल पहुंचे. नगर निगम द्वारा प्रत्येक शनिवार को मनाए जाने वाले “नो फ्यूल डे” के तहत यह पहल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाली रही.


सदन में पास हुए प्रमुख प्रस्ताव


  1. मीट-मांस और मछली की दुकानों को शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया.
  2. मुख्यमंत्री ग्रीन रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम के तहत परियोजनाओं के लिए धनराशि आवंटन.
  3. राष्ट्रीय राजमार्गों और सार्वजनिक स्थलों पर अवैध साइन बोर्ड एवं संकेतकों पर रोक.
  4. विद्युत उपकेंद्रों के लिए भूमि उपलब्ध कराने संबंधी प्रस्ताव.
  5. पार्षदों की शैक्षिक यात्रा और अन्य लंबित विकास प्रस्तावों को स्वीकृति.
  6. संत शिरोमणि नरहरि महाराज (सोनार) की प्रतिमा स्थापना मामले में न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन.


कुल मिलाकर, नगर निगम सदन की बैठक में शहर की स्वच्छता, सुव्यवस्थित व्यापार, राजस्व वृद्धि और विकास कार्यों में पारदर्शिता को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिनका असर आने वाले समय में काशी की शहरी व्यवस्था पर दिखाई दे सकता है.

आईआईटी बीएचयू के प्रो. श्याम कमल बने पोलिश विज्ञान अकादमी के सदस्य...
आईआईटी बीएचयू के प्रो. श्याम कमल बने पोलिश विज्ञान अकादमी के सदस्य...
वाराणसी: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी-बीएचयू), के विद्युत अभियांत्रिकी विभाग के प्रोफेसर श्याम कमल को पोलिश विज्ञान अकादमी (Polska Akademia Nauk – PAN) का सदस्य (Foreign Member) चुना गया है. पोलिश विज्ञान अकादमी, पोलैंड की राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी है और यह देश के सर्वोच्च वैज्ञानिक सम्मानों में से एक मानी जाती है.प्रो. श्याम कमल का चयन अकादमी की महासभा द्वारा विज्ञान के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट अनुसंधान, उल्लेखनीय वैज्ञानिक उपलब्धियों तथा अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग को सुदृढ़ बनाने में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए किया गया है.पोलिश विज्ञान अकादमी के अध्यक्ष प्रो. मारेक कोनार्जेव्स्की ने आधिकारिक पत्र के माध्यम से प्रो. श्याम कमल को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए उन्हें इस वर्ष के अंत में पोलैंड की राजधानी वारसॉ स्थित अकादमी मुख्यालय में आयोजित समारोह में विदेशी सदस्यता का प्रमाण-पत्र ग्रहण करने के लिए आमंत्रित किया है. अकादमी ने यह भी विश्वास व्यक्त किया है कि उनकी सदस्यता भारत और पोलैंड के बीच वैज्ञानिक सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करेगी.ALSO READ :जिंदगी की जद्दोजहद में चंद रुपयों के लिए हर रोज जान जोखिम जोखिम में डाल रहे डिलिवरी बॉय...इस प्रतिष्ठित उपलब्धि पर आईआईटी (बीएचयू) के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने प्रो. श्याम कमल को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान संस्थान के लिए अत्यंत गौरव का विषय है. उन्होंने कहा कि प्रो. श्याम कमल की उत्कृष्ट शोध उपलब्धियां न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिभा का प्रमाण हैं, बल्कि आईआईटी (बीएचयू) की वैश्विक शैक्षणिक प्रतिष्ठा, अनुसंधान उत्कृष्टता तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी सशक्त बनाती हैं.प्रो. श्याम कमल का पोलिश विज्ञान अकादमी का विदेशी सदस्य चुना जाना आईआईटी (बीएचयू) के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. यह सम्मान संस्थान की अनुसंधान, नवाचार और वैश्विक शैक्षणिक सहभागिता के क्षेत्र में निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन का परिचायक है.
जिंदगी की जद्दोजहद में चंद रुपयों के लिए हर रोज जान जोखिम में डाल रहे डिलिवरी बॉय...
जिंदगी की जद्दोजहद में चंद रुपयों के लिए हर रोज जान जोखिम में डाल रहे डिलिवरी बॉय...
वाराणसीःडिलिवरी बॉय अब हर घर का हिस्सा बन चुके हैं. लगभग हर कोई अपनी बड़ी से लेकर छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी आनलाइन खरीदारी करने लगे हैं जिन्हें घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी डिलिवरी बॉय की होती है. एक डिलिवरी के बदले इन्हें 10 से 60 रुपये मिलते हैं. इन रुपयों के लिए वह दिन रात मेहनत करते हैं. आधी रात हो या भोर, गर्मी का दिन हो या मूसलधार बरसात ये डिलिवरी बॉयआर्डर को जल्द से जल्द पहुंचाने की कोशिश करते हैं. इसी कोशिश में उनके साथ हादसे भी होते हैं. ऐसे ही एक डिलिवरी पहुंचाने जा रहे साहिल की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई. देर रात उसका परिवार उसके लौटने का इंतजार कर रहा था. वह तो नहीं आया उसके मौत की खबर उसके घर तक पहुंची. इस खबर से पूरा परिवार सदमे में आ गया. साहिल ही तो था जो डिलिवरी बॉय का काम करते हुए कुछ रुपये जुटता था और घर की जरूरत को पूरा करता था. परिवार के सामने अब एक सवाल है साहिल तो नहीं रहा अब उन्हें कौन संभालेगा.साहिल के बड़े पिता अब्दुल मतीन बताते हैं कि परिवार में वह इकलौता कमाने वाला था. तीन साल पहले उसके पिता की मौत हो गई थी. परिवार में मां, तीन बहने और एक छोटा भाई है. सभी की जरूरतों को पूरा करने के लिए साहिल दिन रात मेहनत करता था. पड़ोसी रियाजुद्दीन बताते हैं कि जिदंगी की जरूरतों को पूरा करने के लिए रुपयों का इतंजाम करने के लिए साहिल ने घर पर रोजमर्रा की जरूरतों के सामानों की दुकान खोली थी. लेकिन दुकान नहीं चलने पर वह उसने डिलिवरी बॉय का काम करने की सोचा. इसके लिए छह महीना पहले कुछ लोगों से रुपये उधार लेकर एक बाइक फाइनेंस कराया था. इसके बाद ब्लिंकिट से जुड़ गया था और सामानों की डिलेवरी करके कुछ रुपये कमाता था. डिलेवरी पर कुछ अधिक रुपये मिल सकें इसलिए साहिल दिन के साथ रात में भी काम करता था. रात में जानकारी मिली की साहिल की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई. नगर निगम के वाहन ने उसे कुचल दिया.डिलिवरी बॉय को पता नहीं होता घर लौटेंगे भी या नहीं डिलिवरी बॉय का करने वाले शहाबुद्दीन का कहना है कि वह चंद रुपयों के लिए हर दिन अपनी जान जोखिम में डालते हैं. इस महंगाई में रोज के खर्च के मुताबिक रुपये मिल सकें इसलिए ज्यादा से ज्यादा डिलिवरी करने की कोशिश करते हैं. रात में रोड खाली होने से वक्त और बाइक के इंधन का खर्च कम लगता है और डिलिवरी पर अधिक कमीशन पर मिलता है इसलिए ज्यादातर रात को काम करते हैं. कई बार उनके साथ हादसे भी होते हैं. रविवार की रात वह डिलिवरी करने गए थे लेकिन एक युवती ने उन पर छेड़खानी का आरोप लगा दिया. इसकी वजह से परेशानी झेलनी पड़ी और डिलेवरी के रुपये भी नहीं मिले. डिलेवरी ब्वाय वसीम अंसारी बताते हैं कि हर डिलिवरी पर 12-15 रुपये मिलते हैं. रात में काम करना चाहते हैं लेकिन कई हादसे होते हैं. आए दिन तरह-तरह की समस्या को झेलना पड़ता है. डिलिवरी बॉय रसीद अहमद अंसारी पहले बुनकर थे. उन्हें काम मिलना कम हुआ तो डिलिवरी बॉय बन गए. बताते हैं कि अधिक रुपये के लालच में रातभर जगकर डिलिवरी करते हैं लेकिन डर भी लगता है. रात में कई बार छिनैती की घटना होती है. दुघर्टना भी डर अक्सर बना रहता है.बड़ी संख्या में युवक बन रहे डिलेवरी ब्वायALSO READ : 44वें दीक्षांत समारोह की तैयारियों का कुलपति ने लिया जायजा, 29 जुलाई को होगा भव्य आयोजन...कंपनियां करती हैं चंद मिनटों में डिलिवरी का दावाकई 'क्विक-कामर्स' और इंस्टेंट डिलीवरी प्लेटफार्म हैं जिनके माध्यम से फल, सब्जियां, किराना (ग्रासरी), स्नैक्स और रोजमर्रा के अन्य उत्पाद लोग अपने घर पर कुछ ही मिनटों में मंगवा सकते हैं. डिलिवरी बॉय के तौर पर इनसे बड़ी संख्या में युवक जुड़ रहे हैं. यह प्लेटफार्म आर्डर को औसतन 10 से 20 मिनट के भीतर डिलीवर करने का दावा करते हैं. इसके लिए हर 2-3 किलोमीटर के दायरे में अपने छोटे वेयरहाउस (गोदाम) चलाती है, जिन्हें डार्क स्टोर कहते हैं. यहां से डिलीवरी पार्टनर सीधे आर्डर देने वाले के घर पर सामान पहुंचाते हैं. सामान पहुंचाने वाले डिलिवरी बॉय को एक आर्डर पहुंचाने पर 10 से 60 रुपये तक मिलते हैं. यह राशि फिक्स नहीं होती है, बल्कि दूरी, वजन और समय के हिसाब से बदलती रहती है. एक किलोमीटर के दायरे वाले आर्डर के लिए न्यूनतम लगभग 15 रुपये मिलते हैं. एक किलोमीटर से ज्यादा दूरी होने पर प्रति किलोमीटर के हिसाब से दस से 14 रुपये अतिरिक्त मिलते हैं. बारिश, कड़ाके की ठंड या रात के समय मांग ज्यादा होने पर प्रति आर्डर 15 से 30 रुपये तक अतिरिक्त (सर्ज़ बोनस) मिलता है. दिन भर में तय किए गए कुल आर्डर या घंटे पूरे करने पर कंपनी अलग से बोनस या इंसेंटिव भी देती है.
44वें दीक्षांत समारोह की तैयारियों का कुलपति ने लिया जायजा, 29 जुलाई को होगा भव्य आयोजन...
44वें दीक्षांत समारोह की तैयारियों का कुलपति ने लिया जायजा, 29 जुलाई को होगा भव्य आयोजन...
वाराणसी. सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में 29 जुलाई को आयोजित होने वाले 44वें दीक्षांत समारोह की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। समारोह को भव्य और गरिमामय बनाने के उद्देश्य से सोमवार को कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक मुख्य भवन का व्यापक निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने पंडाल, मंच, बैठक व्यवस्था, विद्युत, ध्वनि प्रणाली, सुरक्षा, स्वच्छता, पेयजल, पार्किंग, मीडिया और अतिथि सत्कार सहित सभी व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए.कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन समारोह की प्रत्येक तैयारी पर लगातार नजर रखे हुए है और सभी कार्य तय समय-सीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के सहयोग से यह दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय के इतिहास में एक नई उपलब्धि के रूप में दर्ज होगा।उन्होंने बताया कि 29 जुलाई को सुबह 9 बजे आयोजित होने वाले दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल करेंगी। मुख्य अतिथि के रूप में आईआईटी कानपुर के प्रख्यात वैज्ञानिक प्रो. आशुतोष शर्मा उपस्थित रहेंगे। वहीं, उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय तथा उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगी।ALSO READ: वीडीए और आईआईटी बीएचयू ने मिलाए हाथ, 115 कॉलेजों में पढ़ाएंगे शहरी नियोजन का पाठ...समारोह में स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की जाएंगी, जबकि विभिन्न संकायों के मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक एवं अन्य सम्मान प्रदान किए जाएंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि दीक्षांत समारोह को भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत की समृद्ध विरासत और उच्च शिक्षा की उत्कृष्ट परंपराओं के अनुरूप ऐतिहासिक एवं यादगार बनाया जाएगा।गौरतलब है कि दीक्षांत समारोह से पूर्व 'दीक्षोत्सव' के तहत विश्वविद्यालय में शैक्षणिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं रचनात्मक कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया जा चुका है। निरीक्षण के दौरान कुलानुशासक प्रो. जितेन्द्र कुमार, प्रो. विधु द्विवेदी, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, प्रो. विद्या कुमारी चंद्रा, अभियंता रामविजय सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।