विनय पत्रिका रचना स्थल पर गूंजे भक्ति के सुर

वाराणसी : चौखंभा स्थित षष्ठपीठ गोपाल मंदिर में शुक्रवार को भक्ति और संगीत के सुरों से सराबोर नजर आया। मंदिर परिसर में अष्टछाप कवि नंददास एवं गोस्वामी तुलसीदास जयंती के अवसर पर आयोजित समारोह में वैष्णवजनों की संगीतमय प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को परमानंद की अनुभूति कराई।
मुकुंद गोपाल सेवा संस्थान एवं भारत भारती परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता षष्ठपीठाधीश्वर गोस्वामी श्याम मनोहर महाराज ने की। मुख्य अतिथि प्रो. शैलेश कुमार तिवारी और विशिष्ट अतिथि प्रो. विद्योत्तमा मिश्रा ने नंददास एवं तुलसीदास की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

गोपाल मंदिर की ऐतिहासिकता इस आयोजन को और खास बनाती है। मान्यता है कि इसी मंदिर में गोस्वामी तुलसीदास ने ‘विनय पत्रिका’ और अष्टछाप कवि नंददास ने ‘भ्रमरगीत’ की रचना की थी। यही वजह रही कि जयंती समारोह के दौरान श्रद्धालुओं के बीच इन दोनों संत-कवियों की साहित्यिक और आध्यात्मिक विरासत की चर्चा होती रही।
महाराज श्री ने कहा कि नंददास के सत्संग का तुलसीदास के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा और भक्ति के अनन्य भाव से ही प्रभु को प्रसन्न किया जा सकता है। प्रो. शैलेश तिवारी ने विनय पत्रिका रचना स्थल पर पहुंचने को अपना सौभाग्य बताया। वहीं प्रो. विद्योत्तमा मिश्रा ने नंददास को वैष्णव परंपरा का महत्वपूर्ण संत बताते हुए उनके काशी प्रवास और आध्यात्मिक योगदान को रेखांकित किया।
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कार्यक्रम में अरुण पारिख, राजेश अग्रवाल, प्रदीप अग्रवाल, अतुल शाह, राममोहन दास गुप्ता समेत अन्य लोगों का सहयोग रहा। संचालन बृजकिशोर वाला ने किया।



