नाग पंचमी: सांपों की जिदंगी से खिलवाड़ और सपेरों की रोजी-रोटी

वाराणसी: हिंदू धर्म में नाग पंचमी का त्योहार बेहद पवित्र माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन नाग देव की पूजा करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है. सनातन परंपरा में प्रकृति और जीवों के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए नागपंचमी को सांपों को दूध, फूल और धान का लावा अर्पित कर उनकी रक्षा का संकल्प लिया जाता है.
सपेरों की एक दिन की कमाई
नाग पंचमी का दिन सपेरों के लिए कमाई का साल का सबसे बड़ा अवसर होता है. वे जंगलों और झाड़ियों से कोबरा, गेहूंअन जैसे जहरीले सांपों को पकड़कर लाते हैं और उनके साथ शहरों और गांवों में घूमते हैं. श्रद्धालुओं धार्मिक आस्था के कारण नाग देव के दर्शन कर सपेरों को पैसे, अनाज और कपड़े दान करते हैं. इसके सपेरों को एक ही दिन में अच्छी-खासी आय हो जाती है.
ALSO READ : डेटिंग एप से दोस्ती पड़ी महंगी, अपहरण कर पीटने और 20 हजार लूटने का आरोप
सांपों की जिंदगी के साथ खिलवाड़
प्राकृतिक आवास में रहने वाला सांप मांसाहारी होता है. वह चूहे, मेंढ़क आदि खाता है लेकिन सपेरे उसे लालच में पकड़कर लाते हैं. श्रद्धालुओं से रुपये, अनाज लेने के चक्कर में सांप को दूध पिला देते हैं. यह सांप को नुकसान पहुंचाता है और कई सांप मर भी जाते हैं. हालांकि सपेरें को दावा है कि वह एक दिन के लिए ही सांप को ले आते हैं और नाग पंचमी के बाद सांपों को फिर वापस जंगल में छोड़ देते हैं. सांपों के बचाने के लिए कई एनजीओ भी सक्रिय रहते हैं.



