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नारी शक्ति वंदन अधिनियम: नीति-निर्धारण में महिलाओं की हिस्सेदारी, BHU में परिचर्चा

नारी शक्ति वंदन अधिनियम: नीति-निर्धारण में महिलाओं की हिस्सेदारी, BHU में परिचर्चा
Apr 12, 2026, 01:15 PM
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Posted By Preeti Kumari

वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित महिला महाविद्यालय के सावित्री बाई फुले सभागार में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023' विषय पर एक विस्तृत परिचर्चा एवं विचार-विमर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शीर्ष अधिकारियों, शिक्षाविदों और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और राष्ट्र निर्माण एवं नीति-निर्धारण में महिलाओं की भागीदारी पर गहन मंथन किया, कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने की. अपने इस संबोधन में प्रो. चतुर्वेदी ने निर्णय प्रक्रियाओं में महिलाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता को रेखांकित या उन्होंने इस बात पर बल दिया कि लैंगिक समानता के लक्ष्य को लेकर समाज में व्यापक सहमति है, किंतु वास्तविक चुनौती इसे प्राप्त करने के लिए संरचित और व्यावहारिक मार्गों की पहचान करने में निहित है.


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इसी के आगे उन्होंने कहा कि प्रगति को सुनियोजित और क्रमिक ढंग से आगे बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि उपलब्धियां स्थायी हों, नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि यद्यपि यह कानून 2023 में पारित हो गया था, किंतु इसके क्रियान्वयन को 2029 तक निर्धारित किया गया है, क्योंकि इसके लिए जनगणना और निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन जैसी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं, उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत जैसे विशाल देश में ये प्रक्रियाएं जटिल तो होती ही हैं, काफी समय भी लेती हैं, क्योंकि ये संसदीय और विधायी निर्वाचन क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व और संतुलन को निर्धारित करती हैं.


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शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका की चर्चा करते हुए कुलपति जी ने कहा कि सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले विचारों की उत्पत्ति अकसर विश्वविद्यालयों में होती है, जो समाज को प्रगति की राह पर ले जाते हैं, उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे व्यक्तियों के बजाय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करें, क्योंकि सार्थक और समाधान उन्मुख चर्चा ही प्रगति का आधार बनती है. उन्होंने संतुलित और विवेकपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने पर भी जोर दिया और कहा कि लक्ष्य भले ही स्पष्ट हो, लेकिन उसे प्राप्त करने का मार्ग सावधानीपूर्वक निर्धारित किया जाना चाहिए. कुलपति जी ने विश्वास जताया कि इस परिचर्चा से जो भी बेहतर और सार्थक सुझाव निकलकर आएंगे, उसके माध्यम से काशी हिंदू विश्वविद्यालय पूरे देश को रास्ता दिखाने का कार्य करेगा.


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कुलसचिव प्रो. अरुण कुमार सिंह ने इस अधिनियम के दूरगामी परिणामों पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि जिस प्रकार वर्ष 2005 में लागू हुआ 'सूचना का अधिकार अधिनियम' (RTI) सुशासन का प्रवेश द्वार साबित हुआ, ठीक उसी प्रकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक कानून मात्र नहीं है, बल्कि यह एक समावेशी समाज और वास्तविक सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बनेगा, यह देश के निर्णय निर्माण में महिलाओं की भागीदारी को पुख्ता करेगा. केंद्रीय तिब्बती उच्च अध्ययन संस्थान, सारनाथ की कुलसचिव डॉ. सुनीता चंद्रा ने अपने संबोधन में कहा कि महिला महाविद्यालय के प्रांगण में आना उन्हें हमेशा एक नई ऊर्जा देता है, उन्होंने स्पष्ट किया कि "आज हम केवल सशक्तिकरण की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि नीति-निर्धारण में महिलाओं की सीधी हिस्सेदारी की बात कर रहे हैं।" उन्होंने सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर बल दिया और पंचायत स्तर पर महिलाओं के उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की.


बीएचयू के विधि संकाय की आचार्य प्रो. विभा त्रिपाठी ने अधिनियम के कानूनी पहलुओं पर विस्तार से बात की। उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि 30 वर्ष पहले जब यह बिल प्रस्तावित हुआ था, तब वह इसके विरोध में थीं, लेकिन आज वह इसका पुरजोर समर्थन करती हैं। प्रो. त्रिपाठी ने 'सेपरेट बट इक्वल' (Separate but Equal), यथार्थवाद, 'डुअल कांस्टीट्यूएंसी' (Dual Constituency) और 'कैपिंग' जैसी प्रक्रियाओं को अपनाने के पक्ष में अपने मजबूत तर्क रखे. स्वाति सिंह निदेशक, मुहिम संस्था ने महिलाओं के संदर्भ में 'लेड बाय वूमेन' की मानसिकता से बाहर निकलकर 'लीड बाय वूमेन' यानी महिलाओं के वास्तविक नेतृत्व पर जोर दिया, प्रो. भास्कर भट्टाचार्य, अध्यक्ष, IQAC बीएचयू ने कहा कि जब तक समाज की मानसिकता नहीं बदलेगी और महिलाओं को वास्तविक प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा, तब तक विकास अधूरा है. डॉ. अफजल हुसैन, उर्दू विभाग, महिला महाविद्यालय ने समग्र महिला विकास की दिशा में विशेष रूप से मुस्लिम महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की ओर श्रोताओं का ध्यान आकृष्ट कराया.


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बता दें, ग्रीष्मा टोप्पो, महिला महाविद्यालय ने कहा कि यह अधिनियम महिला अधिकारों, भागीदारी और सामाजिक संतुलन स्थापित करने में एक निर्णायक कदम होगा. इससे समाज में जो नया विश्वास पैदा होगा, वह भारत गणराज्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा.

परिचर्चा के अंतिम चरण में महिला महाविद्यालय की प्रो. पद्मिनी रवीन्द्रनाथ ने सभी विद्वान वक्ताओं के वक्तव्यों का उत्कृष्ट सार प्रस्तुत किया, इसके पश्चात, उन्होंने सभागार में उपस्थित प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं को शांत करने के लिए एक व्यवस्थित प्रश्नोत्तर सत्र का संचालन किया, जिसमें छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. महाविद्यालय की छात्रा ध्रुवी एवं अनुष्का ने सत्र संयोजन किया तथा डॉ. रुक्मणि जायसवाल, महिला महाविद्यालय की छात्रा सलाहकार ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों, वक्ताओं, शिक्षकों और छात्राओं के प्रति औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन किया. कार्यक्रम में महिला महाविद्यालय की छात्राओं, शोधार्थियों और संकाय सदस्यों की भारी उपस्थिति रही.

काशी रेलवे स्टेशन अब होने जा रहा स्मार्ट, एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं होगी मौजूद...
काशी रेलवे स्टेशन अब होने जा रहा स्मार्ट, एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं होगी मौजूद...
वाराणसी : काशी स्टेशन की होगा कायाकल्प एयरपोर्ट की तरह अपडेट होगा. रेल प्रशासन ने इसके लिये काशी स्टेशन पर 100दिनों का मेगा ब्लाक ( 6 जून से 13 सितंबर तक ) लिया है इस फ़ैसले के बाद सिर्फ दो प्लेटफॉर्म से ही ट्रेन का आवा गवन चालू है प्लेटफॉर्म एक और दो गुजारी जाने लगी हैं, जबकि तीन और चार की रेल लाइनों तोड़ी जा रही हैं. वहीं कई ट्रेनो को रद्द कर दिया गया है और कई रेल को पंडित दीनदयाल जंक्शन से किया जा रहा है.काशी रेलवे स्टेशन बनेगा कैंट का सैटेलाइट स्टेशनकाशी जहां विश्व में अपनी एक पहचान बना रहा है. वहीं काशी स्टेशन विदेश की तरह बनाने की योजना 2023 में तैयार की गई थी. इसे एयर पोर्ट की तरह विकसित किया जाएगा और सार्वजानिक भवन बनाया जाना है. इसका पहला और दूसरा एंड्री गेट को भवन के छतों को एक दूसरे से जोड़ा जाएगा.इसके साथ ट्रेनों का इंतजार यात्री प्रथम तल पर करेंगे. जहां सारी सुविधा मौजूद होगी. इस समय दोनों प्रवेश द्वारों पर तीन मंजिल का भवन तैयार है जिसके लिए मेगा ब्लाक लिया गया है.भविष्य को देखते हुए बन रहा है स्टेशन 2050 के दृष्टिगत और भविष्य को देखते हुए काशी रेलवे स्टेशन को बनाया जा रहा है.यात्री की पहुंच बढ़ाने के लिये राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ा जाएगा. आगे जा के यह कैंट रेलवे स्टेशन का सैटलाइट स्टेशन होगा. यहां ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी तो लोग यही से ट्रेन पकड़ेंगे .ALSO READ : मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की परखी हकीकत, सीएचसी में गर्भवतियों से सीएमओ हुए रूबरू...स्टेशन के पास ही नामो घाट मौजूद है जिसे पर्यटक के दृष्टि से बनाया गया है इसके लिए काशी स्टेशन टूरिस्ट व टूरिज्म के बहुत महत्वपूर्ण होगा यह कि स्टेशन शहर के बाहरी राजमार्ग से जुड़ा हुआ है.स्टेशन को मालवीय पुल से आपस में जोड़ा जाएगाकाशी रेलवे स्टेशन के पुन निर्माण के बाद कुल 10 ट्रैक होगे.सभी रेल ट्रैक राजघाट पुल से जुड़े होगे. 1200 करोड़ रूपये की लागत से बन रहे राजघाट का निर्माण 2029 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है वहीं वर्ष 2027 में स्टेशन का कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की परखी हकीकत, सीएचसी में गर्भवतियों से सीएमओ हुए रूबरू...
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वाराणसी: प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) दिवस के अवसर पर मंगलवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार ने शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) शिवपुर का निरीक्षण कर गर्भवती महिलाओं को उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की. इस दौरान उन्होंने गर्भवतियों से सीधे संवाद कर स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल जाना तथा उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों की विशेष निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.निरीक्षण के दौरान सीएमओ ने प्रसव पूर्व जांच, प्रयोगशाला सेवाओं, दवा वितरण व्यवस्था और अन्य चिकित्सा सुविधाओं का जायजा लिया. उन्होंने स्वास्थ्य केंद्र पर मौजूद लाभार्थियों से बातचीत कर उपचार, जांच और परामर्श संबंधी व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की. साथ ही चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक गर्भवती महिला को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं.ALSO READ:वाराणसी में पेंटिंग ठेकेदार ने खुद को गोली मारकर दी जान, जांच में जुटी पुलिस...डॉ. मुकेश कुमार ने कहा कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों की समय पर पहचान और नियमित फॉलोअप बेहद आवश्यक है. उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों को ऐसे मामलों की लगातार निगरानी रखने तथा जरूरत पड़ने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए. अभियान के तहत बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच की गई. उन्हें संतुलित आहार, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, संस्थागत प्रसव और टीकाकरण के प्रति जागरूक भी किया गया.स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सुरक्षित मातृत्व से जुड़ी विभिन्न जानकारियां साझा कर महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की सलाह दी. इस अवसर पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज दुबे, स्टाफ नर्स, एएनएम तथा आशा कार्यकर्ता मौजूद रहीं. सीएमओ ने अभियान के सफल संचालन में स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका की सराहना करते हुए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया.
वाराणसी में पेंटिंग ठेकेदार ने खुद को गोली मारकर दी जान, जांच में जुटी पुलिस...
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वाराणसी : शहर के लंका थानांतर्गत नगवा क्षेत्र में एक खौफनाक घटना सामने आई, जिसमें पेंटिंग के ठेकेदार सोनू यादव ने खुद को गोली मारकर अपनी जान दे दी. घटना उस जगह हुई जहां पेंटिंग का काम चल रहा था. युवक का शव उसके हाथ में पिस्‍तौल के साथ पाया गया. गोली चलने की आवाज सुनकर लोगों का ध्यान इस ओर गया, जिसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी.घटना की जानकारी मिलते ही एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार सहित अन्य पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे. पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह आत्महत्या का मामला प्रतीत हो रहा है, लेकिन पुलिस आत्महत्या के कारणों की गुत्थी को सुलझाने में जुटी है.स्थानीय लोगों के अनुसार, डाफी क्षेत्र निवासी सोनू यादव एक सामान्य युवक था और उसके व्यवहार में कोई असामान्य परिवर्तन नहीं देखा गया था. उसकी आत्महत्या ने सभी को चौंका दिया है. पुलिस ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और मामले की विस्तृत जांच की जा रही है.ALSO READ:मनीष सिंह हत्‍याकांड के चार आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज, वकीलों ने की मुफ्त पैरवी...पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आत्महत्या के पीछे के कारणों का पता लगाने के लिए सभी संभावित पहलुओं पर जांच की जा रही है. उसके पास असलहा कहां से आया इसकी भी जांच की जा रही है. घटना की सूचना सोनू के परिजनों को दी गई. परिजनों ने बताया है कि सोनू ने यह कदम क्यों उठाया इस बात की उन्हें जानकारी नहीं है. पुलिस ने असलहे को कब्‍जे में ले लिया है.