बीएचयू को एनसीआइएसएम का नोटिस, डीएससीपी योजना पर उठाए सवाल...

वाराणसी : बीएचयू स्थित आईएमएस के आयुर्वेद संकाय में संचालित डीएसीपी (डिस्टिंग्विश्ड स्पेशलिटी क्लिनिकल प्रोफेसर) योजना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (एनसीआइएसएम) ने इस मामले में बीएचयू प्रशासन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और विश्वविद्यालय से जवाब तलब किया है.
आयोग का आरोप है कि डीएससीपी योजना को लागू करने में उसके निर्धारित नियमों और विनियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया. एनसीआइएसएम द्वारा 23 जून को जारी पत्र में कहा गया कि योजना के तहत नियुक्त किए गए चिकित्सकों और शिक्षकों को कई तरह के अनुचित लाभ दिए गए हैं. आयोग का मानना है कि योजना लागू करने से पहले आवश्यक प्रक्रियाओं और मानकों का पालन किया जाना चाहिए था.
नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि आयोग ने पहले भी 10 जून को बीएचयू को पत्र भेजकर डीएसीपी योजना से संबंधित विज्ञापन वापस लेने और योजना पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया था. हालांकि विश्वविद्यालय द्वारा योजना को जारी रखा गया, जिसके बाद आयोग ने इसे गंभीरता से लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है.
एनसीआइएसएम ने बीएचयू प्रशासन को निर्देश दिया है कि डीएसीपी योजना से जुड़े सभी दस्तावेज, विज्ञापन और नियुक्ति प्रक्रिया का पूरा विवरण आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जाए. आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि नियमों के विपरीत किसी प्रकार की नियुक्ति या पदोन्नति पाई जाती है तो संबंधित शिक्षक, शिक्षक कोड और संस्थान के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है.
ALSO READ : ग्रीन वाराणसी कॉन्क्लेव में विरासत को संजोने के साथ ही सतत भविष्य के निर्माण पर होगा मंथन...
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय संस्थानों में किसी भी नई योजना को लागू करने से पहले नियामक संस्थाओं के दिशा-निर्देशों और मानकों का पालन अनिवार्य है. मामले की सुनवाई के लिए बीएचयू के कुलपति अथवा कुलसचिव को 25 जून को आयोग के नई दिल्ली स्थित कार्यालय में आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने के लिए कहा गया है. इस नोटिस के बाद आयुर्वेद संकाय की डीएसीपी योजना को लेकर चर्चा तेज हो गई है और अब सभी की निगाहें विश्वविद्यालय के जवाब तथा आयोग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं.



