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डाक्‍टरों की लापरवाही- BHU ट्रामा सेंटर में ट्यूमर पीड़ित मरीज की जांघ का कर दिया ऑपरेशन, मौत

डाक्‍टरों की लापरवाही- BHU ट्रामा सेंटर में ट्यूमर पीड़ित मरीज की जांघ का कर दिया ऑपरेशन, मौत
Apr 15, 2026, 07:57 AM
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Posted By Preeti Kumari

Negligence by doctors: A patient suffering from a tumor in the thigh was operated upon at the BHU Trauma Centre, resulting in his death.


वाराणसी: आईएमएस बीएचयू के ट्रामा सेंटर में उस समय हद दर्जे की लापरवाही सामने आई जब ट्यूमर पीड़ित एक महिला की जान चली गई. डॉक्टरों ने ट्रॉमा सेंटर में स्पाइनल कॉर्ड ट्यूमर पीड़ित महिला राधिका देवी (71) की जांघ का ऑपरेशन कर दिया. हुआ यूं कि राधिका नाम की दो मरीज ट्रॉमा सेंटर में भर्ती हुई थीं. एक स्पाइनल कॉर्ड में ट्यूमर से पीड़ित थी. दूसरे के पैर में फ्रैक्चर था. सात मार्च को फ्रैक्चर का ऑपरेशन करने ट्यूमर के मरीज को ओटी में ले गए. जब पैर की सर्जरी के दौरान फ्रैक्चर नहीं मिला तो ओटी में डॉक्टरों को शक हुआ कि गलत मरीज का ऑपरेशन कर रहे हैं. हड़बड़ी में उसके पैर को सिलकर बाहर भेज दिया. बाद में 18 मार्च को उसकी न्यूरो सर्जरी भी की. 27 मार्च को महिला की अस्पताल में मौत हो गई.


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लापरवाही दर लापरवाही


हद तो तब हो गई जब लपरवाही की जांच बैठाने में भी लापरवाही बरती गई. महिला के पोते मृत्युंजय पाल ने मामले की शिकायत बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी और आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन संखवार से की. कुलपति ने रिपोर्ट तलब की तो लापरवाही सामने आ गई. यही नहीं निदेशक की तरफ से मामले की जांच में भी लापरवाही बरती गई. जिस डॉक्टर अमित रस्तोगी की टीम की लापरवाही से महिला की मौत हुई थी उसी डॉ. अमित रस्तोगी को जांच कमेटी का अध्यक्ष बना दिया गया. हालांकि मामला सामने आया तो जांच अधिकारी को बदल दिया.


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ये है पूरा मामला


बलिया निवासी राधिका देवी (71) को स्पाइलन काॅर्ड ट्यूमर की समस्या थी. राधिका के पोते मृत्युंजय पाल उन्हें 25 फरवरी को ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचे थे. उन्होंने न्यूरो सर्जरी में डॉ. अनुराग साहू को दिखाया, तो उन्होंने भर्ती कर लिया. जांच के बाद 7 मार्च को सर्जरी की तारीख तय की गई. मृत्युंजय पाल ने एक अप्रैल 2026 को आईएमएस के निदेशक से जो शिकायत दर्ज कराई है उसके मुताबिक दादी को स्पाइनल ट्यूमर की समस्या थी. न्यूरो सर्जरी की टीम को ऑपरेशन करना था लेकिन आर्थो के डॉक्टरों की टीम दादी को ऑपरेशन थियेटर में लेकर गई.


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ऑपरेशन से पहले कागजात पर हस्ताक्षर के साथ ही नियमानुसार परिजनों को जानकारी भी देनी चाहिए लेकिन किसी उन्हें कोई जानकारी नहीं दी. चिट्ठी में लिखा है कि जब ऑपरेशन के बारे में पूछा गया तो वहां मौजूद स्टाफ ने दुर्व्यवहार भी किया. गलत ऑपरेशन की वजह से संबंधित मरीज को अल्सर, मेमोरी लॉस, जबड़े में कंपन, मुंह में दर्द, सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या होने लगी. इसके बाद 18 मार्च को 2026 को न्यूरो सर्जरी की टीम ने दोबारा ऑपरेशन किया. वह 7 दिन तक अस्पताल में रहीं. मृत्युंजय ने बताया कि 27 मार्च की सुबह सांस लेने में तकलीफ हुई और कार्डियोपल्मनरी अरेस्ट की वजह से दादी की मौत हो गई.


ट्रॉमा सेंटर प्रभारी ने वीसी को भेजी रिपोर्ट, बताई हकीकत


आर्थोपेडिक्स विभाग की टीम के गलत सर्जरी करने की शिकायत का संज्ञान लेते हुए बीएचयू के कुलपति प्रो. चतुर्वेदी ने ट्रॉमा सेंटर प्रभारी प्रो.सौरभ सिंह से रिपोर्ट मांगी थी. प्रो.सौरभ ने कुलपति को भेजी रिपोर्ट में गलत सर्जरी का जिक्र किया है. बताया है कि न्यूरो सर्जरी विभाग में भर्ती राधिका देवी की उम्र 71 साल जबकि आर्थोपेडिक्स विभाग में भर्ती राधिका देवी की उम्र 82 थी. रिपोर्ट में आर्थोपेडिक्स विभाग की बी टीम के 7 मार्च को दोपहर 12.45 बजे सर्जरी का जिक्र किया गया है. यह भी बताया कि स्पाइनल ट्यूमर से ग्रसित राधिका देवी की गलत सर्जरी करने की जानकारी तब मिली जब जांघ के पास चीरा लगाया गया और यहां की हड्डी सही दिखी. आनन-फानन में सर्जरी को रोककर तुरंत महिला को ऑपरेशन थियेटर से बाहर किया गया.


निदेशक ने 4 सदस्यीय कमेटी बनाई फिर अध्यक्ष को हटाया


ट्रॉमा सेंटर में महिला की गलत सर्जरी के मामले में पोते मृत्युंजय पाल ने जो शिकायत की थी, उस पर आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन संखवार ने दो अप्रैल को चार सदस्यीय फैक्ट फाइडिंग कमेटी बनाई. इसमें आर्थोपेडिक्स विभाग के प्रो. अमित रस्तोगी को अध्यक्ष, न्यूरोसर्जरी के प्रो. कुलवंत सिंह, डेंटल फैकल्टी के प्रो. अजीत विक्रम परिहार को सदस्य और ट्रॉमा सेंटर के सहायक कुलसचिव को सचिव बनाया. कमेटी को 10 दिन के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया. आईएमएस बीएचयू के निदेशक ने इस बारे में पूछे जाने पर बताया कि कमेटी गठन के बाद खुद प्रो. अमित रस्तोगी ने यह जानकारी दी कि जिस महिला की गलत सर्जरी की शिकायत की गई है वह सर्जरी उन्हीं की टीम के डॉक्टरों ने की थी. प्रो. रस्तोगी ने जांच कमेटी के अध्यक्ष पद से हटाने को कहा था. निदेशक ने बताया कि कमेटी का चेयरमैन अब प्रो. अजीत को बनाया गया है. अब रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.


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ट्रॉमा सेंटर में आर्थोपेडिक्स, न्यूरोसर्जरी सहित जो भी सर्जरी के केस हो रहे हैं, उसमें डब्ल्यूएचओ सर्जिकल सेफ्टी चेक लिस्ट का पालन सुनिश्चित करने को सभी जिममेदार लोगों को कहा गया है. सर्जरी से पहले संबंधित मरीज के बारे में पूरी जानकारी करने को भी कहा गया है. इसमें किसी तरह की लापरवाही पर नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जाएगी. -प्रो.सौरभ सिंह, प्रभारी ट्रॉमा सेंटर


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बीएचयू की डॉ. नेहा पाण्डेय ने मद्रास विश्वविद्यालय में एआई आधारित संचार पर दिया विशेष व्याख्यान.
बीएचयू की डॉ. नेहा पाण्डेय ने मद्रास विश्वविद्यालय में एआई आधारित संचार पर दिया विशेष व्याख्यान.
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के पत्रकारिता एवं जनसम्प्रेषण विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नेहा पाण्डेय ने मद्रास विश्वविद्यालय, चेन्नई में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित संचार तकनीकों पर विशेष व्याख्यान दिया। 23 अक्टूबर को आयोजित इस व्याख्यान का विषय ‘ट्रांसफॉर्मिंग कम्युनिकेशन थ्रू एआई: चैटबॉट्स, ऑटोमेशन एंड इमर्जिंग ऑपर्च्युनिटीज’ रहा। इसमें आधुनिक संचार व्यवस्था में एआई चैटबॉट्स की बढ़ती भूमिका, उनके उपयोग और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। डॉ. नेहा पाण्डेय ने बताया कि एआई आधारित चैटबॉट्स पत्रकारिता, व्यावसायिक संचार, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने चैटबॉट्स के विभिन्न प्रकार, उनके काम करने के तरीके और संचार प्रक्रियाओं को अधिक सरल एवं प्रभावी बनाने में उनकी उपयोगिता को समझाया। साथ ही, एआई तकनीक के विस्तार से पैदा हो रहे नए अवसरों और संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।पत्रकारिता में बदल रही है एआई की भूमिकाव्याख्यान के दौरान डॉ. पाण्डेय ने पत्रकारिता के क्षेत्र में एआई आधारित टूल्स के बढ़ते इस्तेमाल का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इनकी मदद से ब्रेकिंग न्यूज उपलब्ध कराने, पाठकों के सवालों का जवाब देने, समाचार लेखों का सारांश तैयार करने, फैक्ट-चेकिंग में सहायता करने और पत्रकारों को शोध एवं डेटा विश्लेषण में सहयोग देने जैसे कार्य किए जा सकते हैं। उन्होंने ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ के एआई टूल ‘हेलियोग्राफ’ और ‘रॉयटर्स’ के ‘न्यूज ट्रेसर’ का उदाहरण देते हुए बताया कि तकनीक किस तरह समाचारों के संकलन, विश्लेषण और प्रस्तुतीकरण की प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि एआई का उपयोग पत्रकारिता में सहायक हो सकता है, लेकिन सूचनाओं की सत्यता की जांच और जिम्मेदार पत्रकारिता का महत्व बना रहता है।स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा में भी उपयोगी एआई चैटबॉट्सडॉ. नेहा पाण्डेय ने स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एआई चैटबॉट्स की उपयोगिता पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि इनकी मदद से स्वास्थ्य संबंधी सामान्य जानकारी देने, बीमारियों के लक्षणों के बारे में मार्गदर्शन करने, वर्चुअल परामर्श में सहायता और मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित शुरुआती सहयोग उपलब्ध कराने जैसे कार्य किए जा सकते हैं।इसके अलावा मरीजों का डेटा एकत्र करने, अस्पताल में अपॉइंटमेंट निर्धारित करने और रिमाइंडर भेजने जैसी नियमित प्रक्रियाओं को स्वचालित बनाने में भी इनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। इससे स्वास्थ्यकर्मियों के कामकाज को व्यवस्थित करने और कार्यभार कम करने में सहायता मिल सकती है। शिक्षा के क्षेत्र में भी एआई आधारित उपकरणों के माध्यम से जानकारी उपलब्ध कराने और सीखने की प्रक्रिया को सहयोग देने की संभावनाओं पर चर्चा की गई।ALSO READ : बरेका में स्पेशल कैंपेन 6.0 के तहत चला स्वच्छता अभियान, पुराने रिकॉर्ड और अनुपयोगी सामान हटाए गएएआई के इस्तेमाल में नैतिकता और सत्यता जरूरीव्याख्यान में एआई से जुड़ी चुनौतियों और नैतिक सवालों को भी प्रमुखता से उठाया गया। डॉ. पाण्डेय ने गलत या भ्रामक जानकारी, एआई द्वारा मनगढ़ंत तथ्य प्रस्तुत करने, तकनीकी पूर्वाग्रह, भेदभाव और डेटा की गोपनीयता जैसे मुद्दों पर चर्चा की। इसके साथ ही शैक्षणिक ईमानदारी, तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता, डिजिटल विभाजन, सहमति, कॉपीराइट और जवाबदेही से जुड़ी चुनौतियों को भी रेखांकित किया। उन्होंने एआई से तैयार सामग्री के सत्यापन की आवश्यकता पर जोर देते हुए बताया कि तकनीक का उपयोग करते समय तथ्यों की जांच, गोपनीयता की सुरक्षा और नैतिक मानकों का पालन आवश्यक है। व्याख्यान के बाद आयोजित प्रश्न-उत्तर सत्र में डॉ. नेहा पाण्डेय ने प्रतिभागियों के सवालों के जवाब दिए। इस दौरान चैटबॉट्स के नैतिक उपयोग और एआई से तैयार सामग्री की सत्यता जांचने से जुड़े प्रश्नों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में मद्रास विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं संचार विभाग की प्रमुख डॉ. बेउलाह राहेल ने डॉ. नेहा पाण्डेय का स्वागत किया, जबकि विभाग की पूर्व अध्यक्ष डॉ. टी. आर. गोपालकृष्णन ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विभाग के संकाय सदस्यों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।
बरेका में स्पेशल कैंपेन 6.0 के तहत चला स्वच्छता अभियान, पुराने रिकॉर्ड और अनुपयोगी सामान हटाए गए
बरेका में स्पेशल कैंपेन 6.0 के तहत चला स्वच्छता अभियान, पुराने रिकॉर्ड और अनुपयोगी सामान हटाए गए
वाराणसी। बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में स्पेशल कैंपेन 6.0 के तहत शुक्रवार को विभिन्न कार्यालयों और परिसरों में विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया। रेल मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में महाप्रबंधक आशुतोष पंत के मार्गदर्शन में आयोजित इस अभियान का उद्देश्य कार्यालयों को स्वच्छ, सुव्यवस्थित और अनावश्यक सामग्री से मुक्त बनाना है। अभियान के तहत बरेका के जनसंपर्क कार्यालय और स्टोर में साफ-सफाई की गई। इस दौरान पुराने अभिलेखों और अनुपयोगी सामान को हटाकर कार्यालय परिसर को व्यवस्थित बनाया गया। साथ ही कर्मचारियों को कार्यस्थल पर नियमित साफ-सफाई बनाए रखने और स्वच्छता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित किया गया। इसी क्रम में लेखा विभाग के जनरल फाइनेंस, डब्ल्यूएमएस अनुभाग, स्टोर फाइनेंस और स्थापना अनुभाग में भी विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया। यहां कार्यालयों की सफाई के साथ पुराने रिकॉर्ड और बेकार सामान को हटाया गया। अभियान के माध्यम से कर्मचारियों को स्वच्छ एवं बेहतर कार्य वातावरण बनाए रखने के प्रति जागरूक किया गया।ALSO READ : काशी विश्वनाथ मंदिर के पास महिलाओं पर अश्लील टिप्पणी, शाहजहांपुर का युवक गिरफ्तारवहीं, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के आईपीएफ चैंबर, पोस्ट क्षेत्र के आसपास, बैरक संख्या एक और तीन के सामने तथा फायर टेंडर रूम में भी साफ-सफाई कराई गई। इन स्थानों पर जमा अनावश्यक सामग्री को हटाकर परिसर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने की पहल की गई। बरेका प्रशासन के अनुसार, स्पेशल कैंपेन 6.0 के अंतर्गत स्वच्छता के साथ कार्यालयों के बेहतर रखरखाव और कार्यस्थलों को व्यवस्थित बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य कर्मचारियों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना और कार्यालयों में स्वच्छ, स्वस्थ एवं सकारात्मक वातावरण सुनिश्चित करना है। बरेका प्रशासन ने स्वच्छता और सुव्यवस्थित कार्यस्थल को प्राथमिकता देते हुए इस तरह के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया। अभियान की जानकारी जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार ने दी।
काशी विश्वनाथ मंदिर के पास महिलाओं पर अश्लील टिप्पणी, शाहजहांपुर का युवक गिरफ्तार
काशी विश्वनाथ मंदिर के पास महिलाओं पर अश्लील टिप्पणी, शाहजहांपुर का युवक गिरफ्तार
वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर तीन के पास महिलाओं और लड़कियों पर अश्लील टिप्पणी करने और अशोभनीय इशारे करने के आरोप में चौक पुलिस ने शाहजहांपुर निवासी अमन गुप्ता (22) को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने 22 अक्टूबर को मिशन शक्ति अभियान के तहत कार्रवाई की। पुलिस के मुताबिक, मंदिर के गेट नंबर तीन के पास गश्त के दौरान महिलाओं और लड़कियों ने एक युवक की हरकतों की शिकायत की थी। उन्होंने बताया कि युवक गली से गुजरने वाली महिलाओं को देखकर अश्लील शब्दों का इस्तेमाल कर रहा था और अशोभनीय इशारे कर रहा था। इससे महिलाओं को असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा था।ALSO READ : वाराणसी में बालिकाओं ने निकाली रैली, भ्रूण हत्या बाल विवाह के खिलाफ बुलंद की आवाजशिकायत मिलने पर महिला उपनिरीक्षक मानसी वर्मा पुलिसकर्मियों संजू देवी और खुशबू के साथ मौके पर पहुंचीं। टीम ने गली में निगरानी शुरू की। कुछ देर बाद शिकायत में बताए गए हुलिए का युवक वहां दिखाई दिया। पुलिस के अनुसार, महिलाओं को देखकर अश्लील हरकत करने पर टीम ने उसे पकड़ लिया। गिरफ्तार आरोपी अमन गुप्ता शाहजहांपुर जिले के कोतवाली क्षेत्र स्थित चौकसी मुन्नूगंज फाटक, राजन कुआं का निवासी है। पुलिस ने उसके खिलाफ चौक थाने में मुकदमा दर्ज किया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। कार्रवाई करने वाली टीम में चौक थाना प्रभारी विजय कुमार शुक्ला, महिला उपनिरीक्षक मानसी वर्मा, उपनिरीक्षक सुमित, आरक्षी संजू देवी, खुशबू और आरक्षी अजीत कुमार यादव शामिल रहे।