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मदरसे ही नहीं सीएम के गोरखनाथ मठ की भी हो जांच - अजय राय

मदरसे ही नहीं सीएम के गोरखनाथ मठ की भी हो जांच - अजय राय
Feb 04, 2026, 09:10 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी : कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने मुख्यमंत्री योगी पर गंभीर आरोप लगाया है. उन्‍होंने मंगलवार को मीडिया से बताचीत में कहा है कि गोरखनाथ मठ में आ रहे चढ़ावे की जांच की जानी चाहिए. योगी जब से मुख्यमंत्री बने हैं, तब से लेकर अब तक और जब वे मुख्यमंत्री नहीं थे, तब भी मठ में कितनी राशि चढ़ाई गई, इसकी जांच कराई जाए. अजय राय ने आरोप लगाया कि योगी के मठ में अब पैसे के चढ़ावे के बजाय सोने का चढ़ावा लिया जा रहा है.


AJAY RAI


अजय राय अपने कैंप कार्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि उत्तर प्रदेश में योगी ने मदरसे की फंडिंग की जांच करने का आदेश दिया है. ऐसे में गोरखनाथ मंदिर में आ रहे चढ़ावे की भी जांच होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के सामने नतमस्तक हो चुके हैं और पूरा देश परेशान है. पीएम मोदी अमेरिका के समक्ष समर्पण कर चुके हैं और चुनाव आयोग भाजपा के एजेंट के तौर पर काम कर रहा है.


काशी में आठ फरवरी को संविधान संवाद सम्‍मेलन


अजय राय ने यह भी कहा कि जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद में देश की सुरक्षा की बात उठाने की कोशिश की, तो उन्हें बोलने नहीं दिया गया, जो कि संविधान का हनन है. इसी संदर्भ में कांग्रेस पार्टी संविधान संवाद सम्मेलन का आयोजन कर रही है. इस क्रम में 8 फरवरी को शास्त्री घाट पर एक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रदेश के पांच सांसद और काशी की जनता भाग लेंगी. इस कार्यक्रम के माध्यम से हम संविधान, धर्म, जाति और भाषा के नाम पर हो रहे खिलवाड़ को उजागर करेंगे.


योगी सरकार की नीतियाें से जनता परेशान


अजय राय ने कहा कि योगी आदित्यनाथ को अपनी सरकार के कार्यों का जवाब देना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि गोरखनाथ मठ में चढ़ावे की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है. राय ने यह भी कहा कि जब तक इस मामले की जांच नहीं होती, तब तक लोगों का विश्वास मठ पर बना रहना मुश्किल है.


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कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि योगी सरकार की नीतियों के कारण आम जनता परेशान है. सरकार को जनता की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए और उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए. अजय राय ने योगी आदित्यनाथ की सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए गोरखनाथ मठ में चढ़ावे की जांच की मांग की है. उनका कहना है कि यह जांच न केवल मठ की पारदर्शिता के लिए आवश्यक है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगी कि जनता का विश्वास बना रहे.

Teddy Day 2026: टेडी डे को ऐसे करें सेलिब्रेट, जाने इसके पीछे की छिपी कहानी
Teddy Day 2026: टेडी डे को ऐसे करें सेलिब्रेट, जाने इसके पीछे की छिपी कहानी
Teddy Day 2026: वैलेंटाइन वीक आते ही माहौल में अपने-आप एक अलग ही मिठास घुल जाती है. चारों तरफ प्यार, अपनापन और रिश्तों की गर्माहट महसूस होने लगती है. यह हफ्ता सिर्फ रोमांटिक रिश्तों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उन भावनाओं को भी जगह देता है, जिन्हें हम रोजमर्रा की जिंदगी में शब्दों में बयां नहीं कर पाते. छोटे-छोटे इशारों, तोहफों और एहसासों के जरिए प्यार जताने का यह सिलसिला 7 फरवरी को रोज डे से शुरू होकर 14 फरवरी के प्यार के इजहार होने तक चलता है.इसी वैलेंटाइन वीक का एक बेहद खास और सबसे क्यूट दिन होता है टेडी डे. यह दिन सिर्फ एक सॉफ्ट टॉय गिफ्ट करने का नहीं, बल्कि उस सुकून, सुरक्षा और भावनात्मक सहारे का प्रतीक है, जो हम अपने किसी खास इंसान को देना चाहते हैं. टेडी डे हमें याद दिलाता है कि प्यार हमेशा बड़े शब्दों या महंगे तोहफों का मोहताज नहीं, कभी-कभी एक मुलायम सा टेडी भी अपने प्यार के दिल की बात कह जाता है.जाने टेडी डेहर साल टेडी डे 10 फरवरी को मनाया जाता है. 2026 का टेडी डे आज मंगलवार को हर प्रेमी जोड़ा सेलिब्रेट कर रहा है. यह वैलेंटाइन वीक का चौथा दिन होता है, जो चॉकलेट डे के बाद और प्रॉमिस डे से ठीक पहले आता है. यही वजह है कि इसे भावनात्मक नजदीकियों को जताने का सबसे सही मौका माना जाता है.टेडी डे का इतिहासटेडी डे की जड़ें असल में टेडी बियर के इतिहास से जुड़ी होती हैं. टेडी बियर का नाम अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट से जुड़ा है, जिन्हें प्यार से टेडी कहा जाता था. साल 1902 में राष्ट्रपति रूजवेल्ट एक शिकार यात्रा पर गए थे. इस दौरान एक घायल भालू को पकड़कर उनके सामने लाया गया, लेकिन उन्होंने उसे मारने से इनकार कर दिया और कहा कि यह खेल भावना के खिलाफ है. उनकी इस करुणा भरी घटना को एक राजनीतिक कार्टूनिस्ट क्लिफोर्ड बेरीमैन ने चित्र के रूप में दिखाया, जो काफी लोकप्रिय हुआ. इस कार्टून से प्रेरित होकर खिलौना निर्माता मॉरिस मिचटॉम ने एक मुलायम भालू का खिलौना बनाया और उसे टेडी बियर नाम दिया. धीरे-धीरे यह टेडी बियर प्यार, सुरक्षा और भावनात्मक सुकून का प्रतीक बन गया. बाद में जब वैलेंटाइन वीक की परंपरा शुरू हुई, तो टेडी बियर को समर्पित एक खास दिन टेडी डे भी इसमें शामिल हो गया.टेडी डे एक एहसासटेडी डे सिर्फ सॉफ्ट टॉय गिफ्ट करने का दिन नहीं होता है. टेडी बियर उन भावनाओं का प्रतीक है, जो रिश्तों की नींव मजबूत करती हैं, जैसे अपनापन, भरोसा, मासूमियत और बिना शर्त साथ. जब कोई अपने पार्टनर को टेडी गिफ्ट करता है, तो वह यह जताता है कि मैं तुम्हारे साथ हूं, तुम सुरक्षित हो, तुम्हें अकेला महसूस नहीं होने दूंगा. टेडी बियर ठीक वैसे ही सुकून देता है, जैसे किसी मुश्किल वक्त में किसी अपने का साथ होना महसूस कराता है. टेडी डे हमें यह याद दिलाता है कि प्यार हमेशा दिखावे का नहीं होता. कभी-कभी सबसे गहरा एहसास सबसे नरम और शांत इशारों में छुपा होता है. एक टेडी बियर की तरह जो बिना कुछ कहे भी बहुत कुछ कर जाता है.ऐसे बनाए टेडी डे को खासटेडी के साथ एक हाथ से लिखा नोट जोड़ें.घर पर कोज़ी डिनर डेट प्लान करें.टेडी थीम पर छोटा-सा सरप्राइज़ दें.लॉन्ग-डिस्टेंस रिलेशनशिप में वीडियो कॉल पर टेडी भेजें.छोटी-छोटी चीजें इस दिन को यादगार बना देती हैं.
जनगणना–2027 के ल‍िए दो चरणों में बनी रूपरेखा, मंडलीय समीक्षा बैठक में दी जानकारी
जनगणना–2027 के ल‍िए दो चरणों में बनी रूपरेखा, मंडलीय समीक्षा बैठक में दी जानकारी
वाराणसी : देश की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना–2027 की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं. कमिश्नरी सभागार में वाराणसी मंडल की जनगणना–2027 तैयारियों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई. बैठक की अध्यक्षता मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी एवं निदेशक, जनगणना कार्य निदेशालय उत्तर प्रदेश, शीतल वर्मा (आईएएस) ने की.बैठक में मंडलायुक्त वाराणसी तथा मंडल के चारों जनपदों के जिलाधिकारी उपस्थित रहे.शीतल वर्मा ने बताया कि जनगणना–2027 देश की 16वीं जनगणना और स्वतंत्रता के बाद की आठवीं जनगणना होगी, जो गांव, शहर एवं वार्ड स्तर पर प्राथमिक आंकड़ों का सबसे बड़ा और विश्वसनीय स्रोत मानी जाती है. उन्होंने कहा कि जनगणना से प्राप्त आंकड़े भविष्य की विकास योजनाओं और नीति निर्माण का मजबूत आधार बनेंगे.दो चरणों में होगी जनगणनाजनगणना–2027 का आयोजन दो चरणों में किया जाएगा.प्रथम चरण: मकान सूचीकरण एवं मकान गणना का कार्य पूरे उत्तर प्रदेश में एक साथ 22 मई से 20 जून 2026 तक कराया जाएगा.द्वितीय चरण: जनसंख्या गणना का कार्य पूरे देश में फरवरी 2027 में संपन्न होगा.डिजिटल माध्यम से होगी पूरी प्रक्रियाइस बार जनगणना का संचालन पूरी तरह डिजिटल माध्यम से किया जाएगा.पहली बार नागरिकों को स्व-गणना (Self Enumeration) का विकल्प दिया गया है. इसके अंतर्गत 7 मई से 21 मई 2026 तक नागरिक सेल्फ एन्युमरेशन पोर्टल और मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन प्रश्नावली भरकर स्वयं अपनी जनगणना कर सकेंगे.संपूर्ण कवरेज सुनिश्चित करने के लिए जीआईएस आधारित मानचित्रों और डिजिटल ऐप्स के माध्यम से सभी नगर निकायों एवं ग्रामों के गणना ब्लॉक तैयार किए जाएंगे.33 प्रकार की जानकारियों का होगा संग्रहमकान सूचीकरण के दौरान प्रगणक द्वारा भवन के उपयोग, निर्माण में प्रयुक्त सामग्री, कमरों की संख्या, स्वामित्व की स्थिति, शौचालय की उपलब्धता, प्रकाश का मुख्य स्रोत, खाना पकाने में प्रयुक्त ईंधन, एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन, परिवार द्वारा उपभोग किए जाने वाले मुख्य अनाज, फोन, वाहन, टेलीविजन एवं इंटरनेट सुविधा सहित कुल 33 प्रकार की सूचनाओं का संग्रह किया जाएगा.अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जनगणना के दौरान दी गई सभी जानकारियाँ पूर्णतः गोपनीय रहेंगी.हजारों कार्मिकों की लगेगी ड्यूटीजनगणना–2027 के सफल संचालन के लिए बड़ी संख्या में कार्मिकों की ड्यूटी लगाई जाएगी। अनुमान के अनुसार—वाराणसी: लगभग 10 हजारजौनपुर: 11 हजारगाजीपुर: लगभग 9 हजारचंदौली: लगभग 5 हजार कार्मिकों को 15 फरवरी से चरणबद्ध प्रशिक्षण दिया जाएगा.ALSO READ : वाराणसी में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने वरुणा नदी में की सफाईमंडलायुक्त ने दिए निर्देशमंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने प्रशिक्षण की महत्ता को रेखांकित करते हुए सभी जिलाधिकारियों को प्रभावी प्रशिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करने और उपयुक्त प्रशिक्षकों के चयन के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि जनगणना कार्य को समयबद्ध, पारदर्शी और त्रुटिरहित ढंग से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक तैयारियाँ समय रहते पूरी कर ली जाएँ.बैठक का समन्वय डॉ. एस.एस. शर्मा, संयुक्त निदेशक (जनगणना), भारत सरकार द्वारा किया गया.बैठक में चारों जिलों के जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, नगर आयुक्त वाराणसी, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), जिला सूचना विज्ञान अधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे.
एपस्टीन का दिखा असर, नामचीन अधिकारियों ने दिया इस्तीफा
एपस्टीन का दिखा असर, नामचीन अधिकारियों ने दिया इस्तीफा
अमेरिका के यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन का मुद्दा इन दिनों चर्चाओं का विषय बन बैठा है. एपस्टीन फाइलों से जुड़े दस्तावेज लगातार राजनेताओं से लेकर दिग्गज लोगों की करतूतों की पोल खोलने में लगी हुई है. इस पोल का असर इस हद तक हुआ कि बड़े पदों पर बैठे तमाम लोग जांच के घेरे में आ गए हैं, जिसके चलते इस्तीफों की लाइन लग गई हैं. इसकी वजह इन दस्तावेजों में ईमेल, सोशल संपर्क, पैसों के लेन-देन और लड़कियों से निजी मुलाकातों से जुड़ी जानकारियां शामिल है. बता दें, हाल ही में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के चहेते चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी को इस्तीफा देना पड़ा. उन पर आरोप है कि, उन्होंने पीटर मैंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत बनाने की सलाह दी थी. इन्हीं आरोपों को स्वीकार करते हुए मॉर्गन मैकस्वीनी ने चीफ स्टाफ का अपना पद छोड़ना ही बेहतर समझा. ये किस्सा यहीं खत्म नहीं हुआ, बल्कि इसका असर नॉर्वे में भी देखने को मिला.एपस्टीन ने छिना इतनों का पद यहां के विदेश मंत्रालय का कहना है कि, वरिष्ठ राजनयिक मोना जूल एपस्टीन से जुड़े मामले में "फैसले में गंभीर गलती" होने की वजह से अपना पद छोड़ने को तैयार है. हालांकि, 66 वर्षीय जूल पहले मंत्री रह चुकी हैं इजरायल, ब्रिटेन और संयुक्त राष्ट्र में नॉर्वे की राजदूत भी रह चुकी हैं. लेकिन एपस्टीन फाइल की इन करतूतों से यूरोप में बढ़ते विवाद का हिस्सा माना जा रहा है. बात करें अमेरिका की तो फरवरी 2026 में ब्रैड कार्प ने एक बड़ी लॉ फर्म के चेयरमैन पद छोड़ने का फैसला लेते हुए इस्तीफा दे दिया है, क्योंकि उनके एपस्टीन से जुड़े ईमेल संपर्क सामने आए थे. इससे पहले नवंबर 2025 में लैरी समर्स ने भी एपस्टीन मामले से जुड़े होने का नतीजा भोगा था, जिसके चलते उन्होंने ने भी अपना एक अहम बोर्ड पद छोड़ा. दिसंबर 2025 में एफबीआई के डिप्टी डायरेक्टर डैन बोंजिनो ने भी इसी विवाद के बीच पद छोड़ दिया.एपस्टीन फाइल्स ने ऐसे-ऐसे राज खोले की बड़े पदों पर बैठे अधिकारियों की कुर्सी हिलने लगी, यूरोप के अन्य देशों में भी एपस्टीन फाइल्स ने अपना खेल दिखाया, फ्रांस में पूर्व मंत्री जैक लैंग ने एक सांस्कृतिक संस्थान के प्रमुख पद से इस्तीफा दिया. स्वीडन के साथ-साथ कई अधिकारियों को अपने पद से हाथ धोना पड़ा. ध्यान देने वाली बात यह है कि हर इस्तीफा अपराध साबित होने के कारण नहीं हुआ. कई मामलों में सिर्फ संपर्क सामने आने से ही विवाद खड़ा हुआ और सार्वजनिक दबाव बढ़ा. संस्थाओं की साख और अपना रूतवा कायम रखने के लिए कई लोगों ने पद छोड़ने में ही अपनी समझदारी समझी.इन इस्तीफों को देखते हुए ये कहना जरा भी गलत नहीं होगा कि, इस एपस्टीन फाइल्स ने जैसे ही कई बड़े नेताओं की पोल क्या खोली उन्हें कुछ पल के लिए ये लगा कि हमारे द्वारा किये गए करतूतों पर कैसे भी करके पर्दा पड़ ही जाएगा. पर शायद वो ये भूल गए कि किसी भी हाल में उन्हें उन कारनामों का हिसाब चुकाना ही पड़ेगा, जो बंद दरवाजे के भीतर किया गया था.....क्योंकि कहा जाता है जैसी करनी वैसी भरनी.. जिसका नतीजा ये इस्तीफा है, जिसकी झड़ी आपको देखने को मिल रही है. जिसने पल भर में उनकी वर्षों की मेहनत पर पानी फेर दिया और उनसे उनकी इज्जत और नौकरी ले डूबी.जानिए क्या है पूरा मामला दरअसल, एपस्टीन 'फ़ाइल्स' के एक ईमेल मैसेज में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई बड़े-बड़े अधिकारियों का नाम सामने आया है. जहां पीएम मोदी का जेफ़री एपस्टीन की मुलाक़ात का दावा भी किया गया, जिसे भारतीय विदेश मंत्रालय ने ख़ारिज कर दिया है. वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने भी खुद पर लगे आरोपों पर चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि, उनका जेफ़री एपस्टीन से 'कोई लेना-देना नहीं' था. यहां तक कि अमेरिकी जांच से साज़िश सामने आती है. इसका मक़सद उन्हें 'राजनीतिक रूप से नुक़सान पहुंचाना और चुनाव हरवाना था. बता दें, यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन प्रभावशाली लोगों के लिए लड़कियां सप्लाई करता था? यह सवाल लंबे समय से उठ रहा है. लेकिन FBI यानि (फेडरल ब्यूरों इन्वेस्टिगेशन) जो संयुक्त राज्य अमेरिकी एजेंसी है इसी अमेरिकी न्याय विभाग के दस्तावेजों की समीक्षा के बाद अब सामने आई जानकारी ने एक नई बहस छेड़ दी है.सेक्स नेटवर्किंग का खिलाड़ी निकला एपस्टीनजांच एजेंसियों ने एपस्टीन से जुड़े सभी रिकॉर्ड खंगाले, जिसके बाद भी उन्हें ऐसा ठोस सबूत नहीं मिला जो ये साबित कर सके कि, वह शक्तिशाली लोगों के लिए कोई संगठित सेक्स ट्रैफिकिंग नेटवर्क चला रहा था, लेकिन जांच में यह जरूर सामने आया कि एपस्टीन सेक्स नेटवर्किंग चला रहा था, जिसके जरिए नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण करता था. यह जांच 2005 में हुई थी, जब 2008 में 14 साल की एक लड़की के परिवार ने फ्लोरिडा में शिकायत दर्ज कराई थी.इस जांच-पड़ताल में पुलिस ने कम से कम 35 लड़कियों की पहचान की, जिन्होंने अपनी आप बीती बताते हुए कहा कि जेफरी एपस्टीन उन्हें यौन प्रकृति की मालिश के लिए एक बड़ी रकम देता था, इस शिकायत के बाद एपस्टीन का काला चिट्ठा खुलते ही 2019 में उसकी गिरफ्तारी हुई, लेकिन इस मामले से छुटकारा पाने के लिए उसने जेल में ही आत्महत्या कर ली. हैरानी इस बात की है कि, एपस्टीन की मौत के बाद भी एपस्टीन की फ़ाइलें विश्व की कई सरकारों, नेताओं, बिज़नेसमैन और नामचीन हस्तियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं. अब देखने वाली बात यह है कि, एपस्टीन का ये मुद्दा नामचीन अधिकारियों को किस हद तक का सफर तय कराता हैं.