हिंदू नववर्ष पर बटुकों ने किया सूर्य नमस्कार, भगवान भास्कर को दिया अर्घ्य

वाराणसी: नव संवत्सर (हिंदू नववर्ष) के अवसर पर गंगा किनारे केदार घाट पर सूर्य नमस्कार करते हुए बटुकों ने भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित किया. इस विशेष अवसर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सनातनी पंचांग का लोकार्पण किया. साथ ही चतुरंगिणी सेना का गठन भी किया. वहीं सूर्य की पहली किरन को अर्घ्य देकर नव संवत्सर का स्वागत किया गया.

बटुकों ने की सूर्य देवता की आराधना
नव संवत्सर का यह पर्व भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है. इस दिन लोग अपने-अपने घरों में नए साल की शुरुआत करते हैं और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं. वाराणसी के केदार घाट पर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया. बटुकों ने सूर्य नमस्कार के माध्यम से सूर्य देवता की आराधना की और उनके प्रति आभार व्यक्त किया.
भक्ति और श्रद्धा का माहौल
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस अवसर पर कहा कि नव संवत्सर का पर्व हमें नई ऊर्जा और सकारात्मकता के साथ जीवन की शुरुआत करने का अवसर प्रदान करता है. उन्होंने कहा कि यह समय है जब हम अपने जीवन में सुधार लाने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने का प्रयास करें. इस दौरान वातावरण में भक्ति और श्रद्धा का माहौल था. बटुकों ने एक साथ मिलकर सूर्य नमस्कार किया, जो एकता और सामूहिकता का प्रतीक था. कहा कि भारतीय संस्कृति में सूर्य को जीवन का स्रोत माना गया है. सूर्य की किरणें न केवल हमारे शरीर को ऊर्जा देती हैं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक विकास में भी सहायक होती हैं. उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे इस पर्व को अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर मानें.

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नव संवत्सर के इस आयोजन में विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए. श्रद्धालुओं ने भक्ति गीत गाए और एक-दूसरे को नव वर्ष की शुभकामनाएं दीं. इस प्रकार, केदार घाट पर आयोजित यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक था, बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे का भी संदेश देता है. इस अवसर पर स्थानीय प्रशासन ने भी कार्यक्रम की व्यवस्था में सहयोग किया. उन्होंने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा का ध्यान रखा. वहीं मंदिरों में धर्म ध्वज लगाया गया. घरों में कलश स्थापना के साथ देवी की आराधना शुरू हो गई.


