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वाराणसी में एक लाइसेंस पर एक नाव, जारी होंगे नंबर प्‍लेट, आरटीओ तैयार कर रहा एसओपी...

वाराणसी में एक लाइसेंस पर एक नाव, जारी होंगे नंबर प्‍लेट, आरटीओ तैयार कर रहा एसओपी...
Jun 19, 2026, 12:03 PM
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Posted By Shivangi Ojha

वाराणसी : गंगा में चलने वाली अवेध नावों पर शिकंजा कसने की तैयारी है. अब एक लाइसेंस पर सिर्फ एक ही नाव चलेगी. अन्य नाव के लिए दूसरा जिस्‍ट्रेशन कराना होगा. सभी नावों पर आरटीओ की ओर से जारी नंबर प्लेट होगा जिस पर उस नाव की पूरी जानकारी होगी. नावों और बजड़ों के संचालन को व्यवस्थित करने के लिए आरटीओ की ओर से स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार किया जा रहा है. इस एसओपी में नावों और बजड़ों के पंजीकरण, शुल्क निर्धारण, संचालन, रूट सहित अन्य बिंदुओं की विस्तृत जानकारी होगी.


गंगा में करीब 4000 नावें चल रही हैं. अधिकतम मोटर बोट से चलती हैं जिस कारण गंगा में प्रदूषण के साथ ही ट्रैफिक भी है. अब तक नावों और बजड़ों का पंजीकरण नगर निगम में होता रहा है. नगर निगम के अनुसार, 1217 छोटी-बड़ी नावें पंजीकृत हैं. दो साल से नगर निगम में नावों का पंजीकरण और नवीनीकरण बंद है. भीड़ को कम करने, यात्रियों को सुरक्षित सफर मुहैया कराने के साथ ही नाविकों की जवाबदेही तय करने को लेकर आरटीओ सख्ती करेगा. आरटीओ की ओर से वाहनों की तरह ही नावों पर नंबर प्लेट लगवाई जाएगी. आरटीओ की ओर से नामित इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (आईआरएस) की ओर से सर्वेक्षण किया जा रहा है.


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तीन वर्गों में बांटकर किया जा रहा सर्वे


आरटीओ के अधिकरियों ने बताया कि नावों को तीन वर्गों में बांटकर सर्वे किया जा रहा है. इसमें 24 मीटर से अधिक लंबाई वाली नावों को ए श्रेणी, 10 से 24 मीटर की नावों को बी श्रेणी और 10 मीटर से कम लंबाई वाली नावों को सी श्रेणी में रखा गया है. यात्री क्षमता व अन्य मानकों को आधार बनाया जाएगा. आरटीओ राघवेंद्र सिंह ने बताया कि नावों के पंजीकरण के लिए एसओपी तैयार की जा रही है. इसे शासन में भेज कर मंजूरी ली जाएगी. शासन से ही नावों को लेकर जो मानक तय किए जाएंगे, उन्हीं के आधार पंजीकरण और लाइसेंस की प्रक्रिया निर्धारित होगी.

आईआईटी बीएचयू के प्रो. श्याम कमल बने पोलिश विज्ञान अकादमी के सदस्य...
आईआईटी बीएचयू के प्रो. श्याम कमल बने पोलिश विज्ञान अकादमी के सदस्य...
वाराणसी: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी-बीएचयू), के विद्युत अभियांत्रिकी विभाग के प्रोफेसर श्याम कमल को पोलिश विज्ञान अकादमी (Polska Akademia Nauk – PAN) का सदस्य (Foreign Member) चुना गया है. पोलिश विज्ञान अकादमी, पोलैंड की राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी है और यह देश के सर्वोच्च वैज्ञानिक सम्मानों में से एक मानी जाती है.प्रो. श्याम कमल का चयन अकादमी की महासभा द्वारा विज्ञान के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट अनुसंधान, उल्लेखनीय वैज्ञानिक उपलब्धियों तथा अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग को सुदृढ़ बनाने में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए किया गया है.पोलिश विज्ञान अकादमी के अध्यक्ष प्रो. मारेक कोनार्जेव्स्की ने आधिकारिक पत्र के माध्यम से प्रो. श्याम कमल को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए उन्हें इस वर्ष के अंत में पोलैंड की राजधानी वारसॉ स्थित अकादमी मुख्यालय में आयोजित समारोह में विदेशी सदस्यता का प्रमाण-पत्र ग्रहण करने के लिए आमंत्रित किया है. अकादमी ने यह भी विश्वास व्यक्त किया है कि उनकी सदस्यता भारत और पोलैंड के बीच वैज्ञानिक सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करेगी.ALSO READ :जिंदगी की जद्दोजहद में चंद रुपयों के लिए हर रोज जान जोखिम जोखिम में डाल रहे डिलिवरी बॉय...इस प्रतिष्ठित उपलब्धि पर आईआईटी (बीएचयू) के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने प्रो. श्याम कमल को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान संस्थान के लिए अत्यंत गौरव का विषय है. उन्होंने कहा कि प्रो. श्याम कमल की उत्कृष्ट शोध उपलब्धियां न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिभा का प्रमाण हैं, बल्कि आईआईटी (बीएचयू) की वैश्विक शैक्षणिक प्रतिष्ठा, अनुसंधान उत्कृष्टता तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी सशक्त बनाती हैं.प्रो. श्याम कमल का पोलिश विज्ञान अकादमी का विदेशी सदस्य चुना जाना आईआईटी (बीएचयू) के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. यह सम्मान संस्थान की अनुसंधान, नवाचार और वैश्विक शैक्षणिक सहभागिता के क्षेत्र में निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन का परिचायक है.
जिंदगी की जद्दोजहद में चंद रुपयों के लिए हर रोज जान जोखिम में डाल रहे डिलिवरी बॉय...
जिंदगी की जद्दोजहद में चंद रुपयों के लिए हर रोज जान जोखिम में डाल रहे डिलिवरी बॉय...
वाराणसीःडिलिवरी बॉय अब हर घर का हिस्सा बन चुके हैं. लगभग हर कोई अपनी बड़ी से लेकर छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी आनलाइन खरीदारी करने लगे हैं जिन्हें घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी डिलिवरी बॉय की होती है. एक डिलिवरी के बदले इन्हें 10 से 60 रुपये मिलते हैं. इन रुपयों के लिए वह दिन रात मेहनत करते हैं. आधी रात हो या भोर, गर्मी का दिन हो या मूसलधार बरसात ये डिलिवरी बॉयआर्डर को जल्द से जल्द पहुंचाने की कोशिश करते हैं. इसी कोशिश में उनके साथ हादसे भी होते हैं. ऐसे ही एक डिलिवरी पहुंचाने जा रहे साहिल की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई. देर रात उसका परिवार उसके लौटने का इंतजार कर रहा था. वह तो नहीं आया उसके मौत की खबर उसके घर तक पहुंची. इस खबर से पूरा परिवार सदमे में आ गया. साहिल ही तो था जो डिलिवरी बॉय का काम करते हुए कुछ रुपये जुटता था और घर की जरूरत को पूरा करता था. परिवार के सामने अब एक सवाल है साहिल तो नहीं रहा अब उन्हें कौन संभालेगा.साहिल के बड़े पिता अब्दुल मतीन बताते हैं कि परिवार में वह इकलौता कमाने वाला था. तीन साल पहले उसके पिता की मौत हो गई थी. परिवार में मां, तीन बहने और एक छोटा भाई है. सभी की जरूरतों को पूरा करने के लिए साहिल दिन रात मेहनत करता था. पड़ोसी रियाजुद्दीन बताते हैं कि जिदंगी की जरूरतों को पूरा करने के लिए रुपयों का इतंजाम करने के लिए साहिल ने घर पर रोजमर्रा की जरूरतों के सामानों की दुकान खोली थी. लेकिन दुकान नहीं चलने पर वह उसने डिलिवरी बॉय का काम करने की सोचा. इसके लिए छह महीना पहले कुछ लोगों से रुपये उधार लेकर एक बाइक फाइनेंस कराया था. इसके बाद ब्लिंकिट से जुड़ गया था और सामानों की डिलेवरी करके कुछ रुपये कमाता था. डिलेवरी पर कुछ अधिक रुपये मिल सकें इसलिए साहिल दिन के साथ रात में भी काम करता था. रात में जानकारी मिली की साहिल की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई. नगर निगम के वाहन ने उसे कुचल दिया.डिलिवरी बॉय को पता नहीं होता घर लौटेंगे भी या नहीं डिलिवरी बॉय का करने वाले शहाबुद्दीन का कहना है कि वह चंद रुपयों के लिए हर दिन अपनी जान जोखिम में डालते हैं. इस महंगाई में रोज के खर्च के मुताबिक रुपये मिल सकें इसलिए ज्यादा से ज्यादा डिलिवरी करने की कोशिश करते हैं. रात में रोड खाली होने से वक्त और बाइक के इंधन का खर्च कम लगता है और डिलिवरी पर अधिक कमीशन पर मिलता है इसलिए ज्यादातर रात को काम करते हैं. कई बार उनके साथ हादसे भी होते हैं. रविवार की रात वह डिलिवरी करने गए थे लेकिन एक युवती ने उन पर छेड़खानी का आरोप लगा दिया. इसकी वजह से परेशानी झेलनी पड़ी और डिलेवरी के रुपये भी नहीं मिले. डिलेवरी ब्वाय वसीम अंसारी बताते हैं कि हर डिलिवरी पर 12-15 रुपये मिलते हैं. रात में काम करना चाहते हैं लेकिन कई हादसे होते हैं. आए दिन तरह-तरह की समस्या को झेलना पड़ता है. डिलिवरी बॉय रसीद अहमद अंसारी पहले बुनकर थे. उन्हें काम मिलना कम हुआ तो डिलिवरी बॉय बन गए. बताते हैं कि अधिक रुपये के लालच में रातभर जगकर डिलिवरी करते हैं लेकिन डर भी लगता है. रात में कई बार छिनैती की घटना होती है. दुघर्टना भी डर अक्सर बना रहता है.बड़ी संख्या में युवक बन रहे डिलेवरी ब्वायALSO READ : 44वें दीक्षांत समारोह की तैयारियों का कुलपति ने लिया जायजा, 29 जुलाई को होगा भव्य आयोजन...कंपनियां करती हैं चंद मिनटों में डिलिवरी का दावाकई 'क्विक-कामर्स' और इंस्टेंट डिलीवरी प्लेटफार्म हैं जिनके माध्यम से फल, सब्जियां, किराना (ग्रासरी), स्नैक्स और रोजमर्रा के अन्य उत्पाद लोग अपने घर पर कुछ ही मिनटों में मंगवा सकते हैं. डिलिवरी बॉय के तौर पर इनसे बड़ी संख्या में युवक जुड़ रहे हैं. यह प्लेटफार्म आर्डर को औसतन 10 से 20 मिनट के भीतर डिलीवर करने का दावा करते हैं. इसके लिए हर 2-3 किलोमीटर के दायरे में अपने छोटे वेयरहाउस (गोदाम) चलाती है, जिन्हें डार्क स्टोर कहते हैं. यहां से डिलीवरी पार्टनर सीधे आर्डर देने वाले के घर पर सामान पहुंचाते हैं. सामान पहुंचाने वाले डिलिवरी बॉय को एक आर्डर पहुंचाने पर 10 से 60 रुपये तक मिलते हैं. यह राशि फिक्स नहीं होती है, बल्कि दूरी, वजन और समय के हिसाब से बदलती रहती है. एक किलोमीटर के दायरे वाले आर्डर के लिए न्यूनतम लगभग 15 रुपये मिलते हैं. एक किलोमीटर से ज्यादा दूरी होने पर प्रति किलोमीटर के हिसाब से दस से 14 रुपये अतिरिक्त मिलते हैं. बारिश, कड़ाके की ठंड या रात के समय मांग ज्यादा होने पर प्रति आर्डर 15 से 30 रुपये तक अतिरिक्त (सर्ज़ बोनस) मिलता है. दिन भर में तय किए गए कुल आर्डर या घंटे पूरे करने पर कंपनी अलग से बोनस या इंसेंटिव भी देती है.
44वें दीक्षांत समारोह की तैयारियों का कुलपति ने लिया जायजा, 29 जुलाई को होगा भव्य आयोजन...
44वें दीक्षांत समारोह की तैयारियों का कुलपति ने लिया जायजा, 29 जुलाई को होगा भव्य आयोजन...
वाराणसी. सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में 29 जुलाई को आयोजित होने वाले 44वें दीक्षांत समारोह की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। समारोह को भव्य और गरिमामय बनाने के उद्देश्य से सोमवार को कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक मुख्य भवन का व्यापक निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने पंडाल, मंच, बैठक व्यवस्था, विद्युत, ध्वनि प्रणाली, सुरक्षा, स्वच्छता, पेयजल, पार्किंग, मीडिया और अतिथि सत्कार सहित सभी व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए.कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन समारोह की प्रत्येक तैयारी पर लगातार नजर रखे हुए है और सभी कार्य तय समय-सीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के सहयोग से यह दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय के इतिहास में एक नई उपलब्धि के रूप में दर्ज होगा।उन्होंने बताया कि 29 जुलाई को सुबह 9 बजे आयोजित होने वाले दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल करेंगी। मुख्य अतिथि के रूप में आईआईटी कानपुर के प्रख्यात वैज्ञानिक प्रो. आशुतोष शर्मा उपस्थित रहेंगे। वहीं, उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय तथा उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगी।ALSO READ: वीडीए और आईआईटी बीएचयू ने मिलाए हाथ, 115 कॉलेजों में पढ़ाएंगे शहरी नियोजन का पाठ...समारोह में स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की जाएंगी, जबकि विभिन्न संकायों के मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक एवं अन्य सम्मान प्रदान किए जाएंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि दीक्षांत समारोह को भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत की समृद्ध विरासत और उच्च शिक्षा की उत्कृष्ट परंपराओं के अनुरूप ऐतिहासिक एवं यादगार बनाया जाएगा।गौरतलब है कि दीक्षांत समारोह से पूर्व 'दीक्षोत्सव' के तहत विश्वविद्यालय में शैक्षणिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं रचनात्मक कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया जा चुका है। निरीक्षण के दौरान कुलानुशासक प्रो. जितेन्द्र कुमार, प्रो. विधु द्विवेदी, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, प्रो. विद्या कुमारी चंद्रा, अभियंता रामविजय सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।