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जौहर विश्वविद्यालय के भवनों को गिराने के नोटिस का विरोध, एआईएमआईएम ने ज्ञापन सौंपकर की ये मांग

जौहर विश्वविद्यालय के भवनों को गिराने के नोटिस का विरोध, एआईएमआईएम ने ज्ञापन सौंपकर की ये मांग
Jul 18, 2026, 10:17 AM
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Posted By gagan arora

वाराणसी : ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के महानगर अध्यक्ष मुख्तार अहमद अंसारी के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने आज जिला मुख्यालय पहुंचकर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा. ज्ञापन में रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 48 भवनों को ध्वस्त किए जाने संबंधी रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) द्वारा जारी नोटिस को तत्काल वापस लेने की मांग की गई.


मुख्तार अहमद अंसारी ने कहा कि जौहर विश्वविद्यालय एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान है, जिसकी स्थापना सरकारी अनुदान और आम जनता के सहयोग से हुई है. उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय में सभी धर्मों, वर्गों और समुदायों के हजारों छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं तथा बड़ी संख्या में शिक्षक और कर्मचारी कार्यरत हैं. ऐसे में विश्वविद्यालय के भवनों को अवैध बताते हुए उन्हें गिराने की कार्रवाई शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगी.


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उन्होंने आरोप लगाया कि रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा 48 भवनों को अवैध बताकर जारी किया गया नोटिस विधिसम्मत नहीं है. उनका कहना था कि जिस समय विश्वविद्यालय की स्थापना और भवनों का निर्माण हुआ, उस समय संबंधित क्षेत्र विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में नहीं था. ऐसे में वर्षों बाद भवनों को अवैध बताकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता.


मुख्तार अहमद अंसारी ने कहा कि वर्ष 1973 में उत्तर प्रदेश में विकास प्राधिकरणों की स्थापना के बाद प्रदेश में अनेक विश्वविद्यालय, महाविद्यालय और शैक्षणिक संस्थान बने हैं. यदि भवन निर्माण के लिए नक्शा अथवा अन्य स्वीकृतियां आवश्यक थीं तो सरकार को प्रदेश के सभी शैक्षणिक संस्थानों के संबंध में समान नीति अपनानी चाहिए. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के निर्माण की भी निष्पक्ष समीक्षा की जानी चाहिए.


उन्होंने कहा कि यदि विश्वविद्यालय के किसी भवन के निर्माण में तकनीकी या प्रशासनिक स्तर पर कोई कमी है तो सरकार को उसे ध्वस्त करने के बजाय नियमानुसार समाधान निकालना चाहिए, क्योंकि यह शिक्षा का केंद्र है और यहां हजारों विद्यार्थियों का भविष्य जुड़ा हुआ है. उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि जौहर विश्वविद्यालय को संरक्षण प्रदान किया जाए तथा वहां बेहतर शैक्षणिक व्यवस्था के लिए आवश्यक सहयोग और अनुदान उपलब्ध कराया जाए.


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उन्होंने बताया कि आगे की रणनीति के संबंध में पूछे जाने पर मुख्तार अहमद अंसारी ने कहा कि एआईएमआईएम पूरे प्रदेश में लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से इस मुद्दे को उठाएगी. उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी तथा प्रदेश नेतृत्व के निर्देशन में उत्तर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर जनजागरण अभियान, ज्ञापन और शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे. यदि मांगों पर विचार नहीं किया गया तो संविधान और कानून द्वारा प्रदत्त लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा.

नागपंचमी पर श्रद्धालुओं को नहीं होगी परेशानी, नगर आयुक्त ने परखी तैयारियां
नागपंचमी पर श्रद्धालुओं को नहीं होगी परेशानी, नगर आयुक्त ने परखी तैयारियां
वाराणसी : नागपंचमी पर्व को लेकर नगर निगम ने तैयारियां तेज कर दी हैं। रविवार को नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने जैतपुरा स्थित ऐतिहासिक नागकुआं क्षेत्र का औचक निरीक्षण कर मेला क्षेत्र में सफाई, प्रकाश, जल निकासी और पेयजल व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए नागरिक सुविधाओं में किसी भी तरह की कमी न रहे।नगर आयुक्त ने पूरे मेला क्षेत्र में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ ही श्रद्धालुओं के लिए निर्बाध स्वच्छ पेयजल आपूर्ति के निर्देश दिए। उन्होंने जलकल और सिविल विभाग के जेई को व्यवस्थाओं को समय से दुरुस्त करने को कहा।ALSO READ: कुत्ता काटने से घायल मासूम से चार दिन बाद मिलने पहुंची प्रो. श्रद्धा, परिजनों के सामने जोड़ा हाथनागकुआं के निरीक्षण के बाद नगर आयुक्त ने औसानगंज वार्ड का भी जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में सफाई समेत अन्य नागरिक सुविधाओं की स्थिति देखी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि नागपंचमी के मेला क्षेत्र और आसपास के वार्डों में सफाई व्यवस्था को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।निरीक्षण के दौरान क्षेत्रीय पार्षद, जलकल विभाग के जेई, सिविल विभाग के जेई, सफाई निरीक्षक अवनीश दुबे समेत नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे.
कुत्ता काटने से घायल मासूम से चार दिन बाद मिलने पहुंची प्रो. श्रद्धा, परिजनों के सामने जोड़ा हाथ
कुत्ता काटने से घायल मासूम से चार दिन बाद मिलने पहुंची प्रो. श्रद्धा, परिजनों के सामने जोड़ा हाथ
वाराणसीः बीएचयू में पालतू कुत्ते के हमले में गंभीर रूप से घायल 11 साल के अभिनव से चार दिन बाद रविवार को मिलने प्रो. श्रद्धा सिंह अपने पति के साथ ट्रामा सेंटर पहुंचीं. उन्होंने बच्चे के माता-पिता से हाथ जोड़कर माफी मांगी और भविष्य में कुत्ता नहीं रखने की बात कही. हालांकि बच्चे के माता-पिता ने उनसे नाराजगी जताई. मां ने तो सीधे सवाल कर दिया कि अब क्यों आईं हैं. पिता ने शिकायत किया कि बच्चा अब भी बोल नहीं पा रहा है.ALSO READ: BHU-ट्रामा सेंटर के केयर टेकर ने प्रभारी पर लगाया आऱोप, गलत रिपोर्ट लिखने से मना करने पर काम से निकालाप्रोफेसर और उनके पति ने कुत्ते के टीकाकरण का कार्ड दिखाया. साथ ही कहा कि भविष्य में कुत्ता घर में नहीं रखने की बात भी कही। बता दें कि बीते 13 अगस्त की सुबह बीएचयू ट्रामा सेंटर में सीनियर नर्सिंग आफिसर प्रेमाराम दोनों बेटों 11 वर्षीय अभिनव और 13 वर्षीय हर्ष के साथ बीएचयू परिसर में मार्निंग वाक पर निकले थे. वापस लौटने के दौरान कुछ दूर निकल चुके बड़े बेटे को लेने के लिए आगे बढ़ गए. वहीं छोटा बेटा परिसर की ही जोधपुर कालोनी स्थित घर की ओर अकेला जाने लगा. इसी दौरान हिंदी विभाग की प्रो. श्रद्धा सिंह के पालतू कुत्ते ने अभिनव पर हमला कर दिया. वहां मौजूद लोगों ने किसी तरह से बच्चे को कुत्ते से बचाया. गंभीर हालत में उसे ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया. बच्चे को कुत्ते ने इतनी बुरी तरह से काटा था कि उसके सिर व चेहरे पर 50 टांके लगाने पड़े. वहीं आरोप है कि प्रो. श्रद्धा सिंह बच्चे की मदद करने की बजाय वहां से चली गईं. उन्होंने बच्चे पर कुत्ते द्वारा हमले से भी इनकार किया था. वहीं बीएचयू प्रशासन ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया था.
BHU-ट्रामा सेंटर के केयर टेकर ने प्रभारी पर लगाया आऱोप, गलत रिपोर्ट लिखने से मना करने पर काम से निकाला
BHU-ट्रामा सेंटर के केयर टेकर ने प्रभारी पर लगाया आऱोप, गलत रिपोर्ट लिखने से मना करने पर काम से निकाला
वाराणसी : बीएचयू ट्रॉमा सेंटर के नवनियुक्त प्रभारी पर 11 साल से तैनात केयरटेकर ने गंभीर आरोप लगाए हैं। केयर टेकर का आरोप है कि मुझ पर कुछ कर्मचारियों के खिलाफ गलत रिपोर्ट लिखने का दबाव बनाया गया।केयर टेकर ने दावा किया कि दबाव में काम करने से इनकार कर दिया। इसके बाद 28 जुलाई को कुलपति से शिकायत की। इसके अगले ही दिन मुझे ट्रॉमा सेंटर आने से रोक दिया गया। उनका कहना है कि उन्हें बिना किसी शोकॉज नोटिस के काम से हटा दिया गया।मामले में केयर टेकर ने कुलपति को ई-मेल के जरिए शिकायत करने के साथ सीएम पोर्टल और श्रम विभाग में भी शिकायत की है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रॉमा सेंटर प्रभारी बदलाव के लिए आए थे, लेकिन उनके खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई की जा रही है।ट्रामा सेंटर प्रभारी पर कर्मचारी ने लगाए आरोप।ट्रामा सेंटर प्रभारी पर कर्मचारी ने लगाए आरोप।गलत रिपोर्ट लिखने का दबाव बनाने का आरोपBHU ट्रॉमा सेंटर में 2014 से केयरटेकर के पद पर तैनात सुनील यादव ने वीडियो जारी कर आरोप लगाया है। कहा- 20 जुलाई को नए प्रोफेसर इंचार्ज डॉ. अजीत कुमार के आने के बाद से मुझे परेशान किया जा रहा था।सुनील ने कहा- कुछ कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट लिखने के लिए मुझ पर दबाव बनाया जा रहा था। लिखना था कि वे समय पर ड्यूटी नहीं आते और काम नहीं करते, जबकि कर्मचारी नियमित रूप से काम कर रहे थे।ALSO READ: बीएचयू शिक्षा संकाय का 109वां स्थापना दिवस समारोहपूर्वक मनाया गयासुनील यादव BHU ट्रामा सेंटर में साल 2014 से तैनात हैं।सुनील यादव BHU ट्रामा सेंटर में साल 2014 से तैनात हैं।मना किया तो ट्रामा में प्रवेश पर रोक लगा दीसुनील ने बताया कि उन्होंने ऐसा लिखने से इनकार किया तो उन पर दबाव बनाया गया और कहा गया कि वह सौरभ सिंह के आदमी हैं। इसके बाद उन्होंने 28 जुलाई को पत्र के माध्यम से कुलपति से शिकायत की। उनका आरोप है कि 29 जुलाई को जब वह ट्रॉमा सेंटर पहुंचे तो गार्ड ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया और बताया कि उनके प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।सुनील का कहना है कि उन्हें काम से हटाने से पहले कोई शो-कॉज नोटिस नहीं दिया गया। उन्हें सीधे कहा गया कि वह अगले दिन से काम पर न आएं। उन्होंने इस कार्रवाई को नियमों के खिलाफ बताते हुए मामले में शिकायत की है।सीएम पोर्टल और श्रम विभाग में शिकायतसुनील यादव ने बताया कि उन्होंने मामले को लेकर ई-मेल के जरिए कुलपति से शिकायत की। इसके बाद जनसुनवाई, सीएम पोर्टल और श्रम विभाग में भी शिकायत दर्ज कराई है।उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रॉमा सेंटर में वर्चस्व की लड़ाई के चलते उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। सुनील के मुताबिक, वह 11 साल से काम कर रहे हैं और उन्हें बदले की भावना से हटाया गया है, जिससे उन पर मानसिक दबाव बना हुआ है।सुनील ने दावा किया कि जब उन्होंने कार्रवाई का कारण पूछा तो उन्हें बताया गया कि वीसी ने निर्देश दिया है कि जो भी गलत दिखाई दे, उसे हटा दिया जाए।