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मरीजों के मसीहा पद्मश्री डाॅ. टीके लहरी 15 दिन से बिस्‍तर पर, बीएचयू को नहीं लगी भनक

मरीजों के मसीहा पद्मश्री डाॅ. टीके लहरी 15 दिन से बिस्‍तर पर, बीएचयू को नहीं लगी भनक
Jan 28, 2026, 08:44 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी : इस शहर के लिए डॉ. तपन कुमार लहरी (टीके लहरी) किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. सेवानिवृत के बाद भी बीएचयू स्थित सरसुंदर लाल अस्पताल में मरीजों की सेवा के लिए रोज दो किलोमीटर पैदल चलकर अस्पताल जाने वाले जाने माने कार्डियोथोरेसिक सर्जन पद्मश्री डॉ. टीके लहरी इन दिनों अस्‍वस्‍थ हैं. बीएचयू अस्पताल प्रशासन के लिए इससे बड़ी संवेदनहीनता और क्या होगी कि डॉ. लहरी 15 दिन से बिस्तर पर पड़े रहे और किसी को इसकी भनक नहीं लगी. मंगलवार को उनके एक करीबी अहमद अली ने जब इसकी जानकारी आईएमएस निदेशक को दी तो हड़कंप मच गया. आनन- फानन देर शाम एंबुलेंस के साथ मेडिकल टीम उनके नरिया स्थित डाक्‍टर्स कालोनी आवास पहुंची और सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के सीटीवीएस डिपार्टमेंट के आईसीयू में भर्ती कराया. फिलहाल उनकी हालत स्थिर बनी हुई है.

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बीएचयू कैंपस के नरिया गेट के सामने डाक्‍टर्स इंक्‍लेव गेट पर घुसते ही उनका घर है. इसी कैंपस में आईएमएस बीएचूय के निदेशक प्रो. एसएन संखवार सहित वरिष्ठ चिकित्सकों का आवास है. इसके बाद भी 15 दिन से डॉक्टर लहरी के बिस्‍तर पर पड़े रहने और उनके स्वास्थ्य के बारे में किसी ने जानकारी नहीं ली. डॉक्टर लहरी को पांच दशक से जानने वाले नरिया निवासी अहमद अली का कहना है कि वो 15 दिन से बीमार होकर घर में पड़े रहे. तबीयत इतनी बिगड़ गई थी कि उनको नित्य क्रिया करने में भी समस्या हो रही थी. जब वो बाहर दिखाई नहीं दिए तो उनके घर गया. पता चला कि उनकी तबीयत ज्यादा खराब है.


अहमद अली ने बताया कि उनसे अस्पताल में भर्ती होने को कहा, लेकिन पहले तो वो नहीं माने. उनकी पीड़ा देखी नहीं गई. 27 जनवरी को ईएमएस निदेशक प्रो. एसएन संखवार से मिलने उनके कार्यालय गया और डॉक्टर लहरी के बीमार होने की जानकारी दी. डिप्टी एमएस को भी जानकारी दी. फिर क्या था डॉक्टर साहब के घर एंबुलेंस आई और भर्ती करवाया गया. अहमद अली ने बताया कि मरीजों के लिए पूरा जीवन समर्पित करने वाले डॉक्टर लहरी के साथ ऐसा होगा कि उनकी खोज खबर कोई नहीं लेगा, इससे बड़ी संवदेनहीनता और क्या हो सकती है.

अहमद अली की दुकान नरिया गेट के पास है. उनकी दुकान से ही डॉ. टीके लहरी को दूध और ब्रेड जाता रहा. डाक्‍टर के नहीं दिखाई पडने पर उनके बीमार होने की जानकारी हुई.


रिटायरमेंट के बाद 23 साल से हर दिन करते हैं ओपीडी


तीन जनवरी 1941 को कोलकाता में जन्मे डॉ. लहरी बीएचयू से 2003 में सेवानिवृत्त हुए. रिटायरमेंट के बाद भी वे लगातार घर से पैदल सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक की ओपीडी में आते हैं. सेवा काल के दौरान हजारों मरीजों के हृदय की सर्जरी कर चुके डॉ. लहरी की खासियत है कि वह सब कुछ भूल सकते हैं, लेकिन ओपीडी जाना नहीं भूलते हैं. एप्रन पहने डॉक्टर लहरी को नरिया गेट से एनसीसी बटालियन वाली लेन, त्रिवेणी गर्ल्स हॉस्टल, एलडी गेस्ट हाउस चौराहा, कुलपति आवास के सामने से एमएस जाते देखा जा सकता है. उनके एक हाथ में काला बैग, दूसरे हाथ में छाता जरूर रहता है. उनकी मरीजों की सेवा, समर्पण को देख 2006 में पद्मश्री से नवाजा गया. सचमुच 'धरती के भगवान' जैसे डॉ लहरी वह चिकित्सक हैं, जो वर्ष 1994 से ही अपनी पूरी तनख्वाह गरीबों को दान करते रहे हैं.


अस्पताल में भर्ती होने के बाद स्थिति


बीपी 175/107

एसपीओ 96 प्रतिशत

पल्स 92

आरबीएस 124

पीसीओ2 48.2


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क्या बोले आईएमएस बीएचयू के निदेशक


डॉक्टर लहरी के एक करीबी से उनके लंबे समय से बीमार होने की जानकारी मिली. तत्काल चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ की एक टीम एंबुलेंस के साथ भेजकर सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में भर्ती करवाया गया. डॉक्टरों की टीम उनकी सेहत पर नजर बनाए है. -प्रो.एसएन संखवार, निदेशक, आईएमएस बीएचयू

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वाराणसी : रोहनिया के व्‍यवसायी जितेंद्र पटेल की गोली मारकर हुई हत्‍या को लेकर विधायक सुनील पटेल के नेतृत्‍व में एक प्रतिनधिमंडल ने शनिवार को पुलिस आयुक्‍त मोहित अग्रवाल से मुलाकात की. इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य अवलेशपुर में हुई हालिया घटना पर चर्चा करना था. प्रतिनिधिमंडल में वाराणसी के पूर्व महापौर, ब्लॉक प्रमुख, पार्षद सहित कई अन्य लोग भी शामिल थे.मुलाकात के मुख्य बिंदु पुलिस प्रशासन का आश्वासन: बैठक के दौरान पुलिस आयुक्त ने सभी को आश्वस्त किया कि पुलिस इस मामले पर पूरी गंभीरता और तत्परता से काम कर रही है. उन्होंने कहा कि जल्द ही दोषियों को पकड़ लिया जाएगा और उन्हें कड़ी सजा मिलेगी.दोषियों पर सख्त कार्रवाई: प्रतिनिधियों ने इस बात पर जोर दिया कि घटना में शामिल दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वे कहीं के भी हों. मामले की तह तक जाकर दोषियों को सजा दिलाने का आश्वासन दिया गया है.जांच का दायरा: मामले की जांच को लेकर यह जानकारी दी गई है कि इस घटना के लिए दो टीमें गठित की गई हैं, जो लखनऊ तक जांच करेंगी. इसके अलावा, चंदौली, बिहार और गुजरात के लिए भी टीमें लगाई गई हैं ताकि दोषियों को जल्द पकड़ा जा सके.ALSO READ : वाराणसी का स्‍वाद म‍िलेगा स्विगी के साथ, नगर निगम ने की साझेदारी...जनता से सहयोग की अपील: प्रतिनिधिमंडल ने जनता और सभी संबंधित लोगों से धैर्य बनाए रखने की अपील की है. उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग अपना काम पूरी मजबूती से कर रहा है और अपराधियों को किसी भी हाल में भागने नहीं दिया जाएगा. प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में मामले का पूरा खुलासा हो जाएगा और पीड़ित पक्ष को न्याय मिलेगा. बता दें कि पिछले दिनों दुकान बंद कर घर लौट रहे व्‍यवसायी की गोली मारकर हत्‍या कर दी गई थी.
वाराणसी का स्‍वाद म‍िलेगा स्विगी के साथ, नगर निगम ने की साझेदारी...
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वाराणसी : खानपान की विरासत को लेकर नगर निगम ने भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय और स्विगी के साथ मिलकर "वाराणसी का स्वाद, स्विगी के साथ" नामक एक नई पहल की शुरुआत की है. इस पहल का उद्देश्य वाराणसी की समृद्ध खाद्य विरासत का जश्न मनाना और शहर के लाखों पर्यटकों तथा निवासियों को यहां के प्रसिद्ध स्थानीय व्यंजनों तक सुविधाजनक पहुंच प्रदान करना है. इस पहल का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया है.इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे उत्तर प्रदेश के स्टाम्प, न्यायालय शुल्क और पंजीकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं विधायक (वाराणसी उत्तर) रवींद्र जायसवाल ने 12 प्रतिष्ठित स्थानीय खाद्य आउटलेट्स के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया, जिनमें काशी चाट भंडार, चाची की प्रसिद्ध कचौरी, लक्ष्मी चाय, पहलवान लस्सी, गामा पान भंडार, नीलू कचौरी, टेस्ट किंग, पाठक जी ठंडाई वाला, नेताजी पान भंडार, गौरी शंकर कचौरी वाला और बनारसी पान मंदिर (लक्सा) शामिल हैं. इन सभी आउटलेट्स को एक औपचारिक प्रमाणन प्रदान किया गया, जो उनकी विरासत, गौरव और गुणवत्ता का प्रतीक है.जानकारी के अनुसार इस पहल के अंतर्गत वाराणसी के कुछ प्रमुख घाटों, जैसे नमो घाट, अस्सी घाट और दशाश्वमेध घाट पर पारंपरिक ठेले स्थापित किए जाएंगे. इन ठेलों पर आने वाले आगंतुक इन प्रसिद्ध स्थानीय भोजनालयों के लोकप्रिय व्यंजनों का आनंद ले सकेंगे. भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के सचिव भुवनेश कुमार ने इस पहल पर टिप्पणी करते हुए कहा, "वाराणसी की खाद्य परंपराएं इसके इतिहास, संस्कृति और यहां के लोगों की रचनात्मकता का प्रतिबिंब हैं.बताया क‍ि स्थानीय विक्रेताओं द्वारा पीढ़ियों से तैयार किए जा रहे ये व्यंजन शहर के पर्यटन आकर्षण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. स्विगी की इस पहल के माध्यम से स्थानीय विक्रेताओं को एक ऐसा मंच मिलेगा, जिससे वे शहर का दौरा करने वाले पर्यटकों सहित एक बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंच सकेंगे. इस तरह के सहयोग से हमारे खाद्य उद्यमियों के लिए स्थायी अवसर पैदा होंगे और स्थानीय खाद्य विरासत को संरक्षित करने में मदद मिलेगी."जिलाधिकारी सत्येन्द्र कुमार ने कहा, "काशी को एक विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल में बदलना हमारे प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण है. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में घोषित 'एक जिला, एक व्यंजन' (ओडीओसी) पहल का उद्देश्य वाराणसी की पाक विरासत को भारत और वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देना है. स्विगी की इस पहल से शहर की पारंपरिक खाद्य संस्कृति को पर्यटकों और स्थानीय लोगों के बीच और अधिक दृश्यता मिलेगी, जिससे उनकी पहचान मजबूत होगी."ALSO READ : दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना को झटका, अगली सुनवाई तक लगी रोक...स्विगी फूड मार्केटप्लेस के सीईओ रोहित कपूर ने कहा, "भोजन किसी भी शहर की सांस्कृतिक विरासत का एक अभिन्न अंग होता है. हमें विश्वास है कि यह पहल पवित्र शहर का दौरा करने वाले लाखों पर्यटकों के बीच यहां के स्थानीय और प्रतिष्ठित व्यंजनों को बढ़ावा देने में मदद करेगी. स्विगी सुविधाजनक पहुंच के लिए जानी जाती है और इस साझेदारी के साथ, हम इस खूबसूरत शहर की पाक विरासत को तलाशने के लिए और अधिक ग्राहकों को जोड़ने के लिए उत्साहित हैं. मैं भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय और वाराणसी नगर निगम का इस विज़न को धरातल पर उतारने में उनके सहयोग के लिए आभार जताता हूं."
दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना को झटका, अगली सुनवाई तक लगी रोक...
दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना को झटका, अगली सुनवाई तक लगी रोक...
वाराणसी : दालमंडी मार्ग चौड़ीकरण योजना के तहत प्रस्तावित भवन ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है.अदालत ने अगली सुनवाई तक संबंधित संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है, जिससे प्रभावित पक्ष को बड़ी राहत मिली है.जानकारी के अनुसार, इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी ने अलिमुन्निशा द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया. याचिका में नगर निगम वाराणसी के जोनल अधिकारी एवं सहायक नगर आयुक्त द्वारा 26 मई 2026 को उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959 की धारा 331 के तहत जारी नोटिस को चुनौती दी गई थी.याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि नोटिस जारी करने और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया में प्रक्रियागत अनियमितताएं बरती गई हैं तथा बिना पर्याप्त सुनवाई का अवसर दिए कार्रवाई शुरू कर दी गई.पक्षकार ने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध बताया.मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने फिलहाल विवादित संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है.अदालत ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई तक किसी भी प्रकार की ध्वस्तीकरण कार्रवाई नहीं की जाएगी.ALSO READ : बीएचयू के शिक्षा संकाय में संशोधित सिलेबस को मिली मंजूरी, बैठक में हुआ अनुमोदन...गौरतलब है कि दालमंडी मार्ग चौड़ीकरण परियोजना को लेकर पिछले कुछ समय से क्षेत्र में विवाद बना हुआ है.ऐसे में हाईकोर्ट का यह आदेश परियोजना से प्रभावित लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.अब सभी की निगाहें मामले की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां पक्षकार अपनी विस्तृत दलीलें अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेंगे.