मरीजों के मसीहा पद्मश्री डाॅ. टीके लहरी 15 दिन से बिस्तर पर, बीएचयू को नहीं लगी भनक

वाराणसी : इस शहर के लिए डॉ. तपन कुमार लहरी (टीके लहरी) किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. सेवानिवृत के बाद भी बीएचयू स्थित सरसुंदर लाल अस्पताल में मरीजों की सेवा के लिए रोज दो किलोमीटर पैदल चलकर अस्पताल जाने वाले जाने माने कार्डियोथोरेसिक सर्जन पद्मश्री डॉ. टीके लहरी इन दिनों अस्वस्थ हैं. बीएचयू अस्पताल प्रशासन के लिए इससे बड़ी संवेदनहीनता और क्या होगी कि डॉ. लहरी 15 दिन से बिस्तर पर पड़े रहे और किसी को इसकी भनक नहीं लगी. मंगलवार को उनके एक करीबी अहमद अली ने जब इसकी जानकारी आईएमएस निदेशक को दी तो हड़कंप मच गया. आनन- फानन देर शाम एंबुलेंस के साथ मेडिकल टीम उनके नरिया स्थित डाक्टर्स कालोनी आवास पहुंची और सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के सीटीवीएस डिपार्टमेंट के आईसीयू में भर्ती कराया. फिलहाल उनकी हालत स्थिर बनी हुई है.

बीएचयू कैंपस के नरिया गेट के सामने डाक्टर्स इंक्लेव गेट पर घुसते ही उनका घर है. इसी कैंपस में आईएमएस बीएचूय के निदेशक प्रो. एसएन संखवार सहित वरिष्ठ चिकित्सकों का आवास है. इसके बाद भी 15 दिन से डॉक्टर लहरी के बिस्तर पर पड़े रहने और उनके स्वास्थ्य के बारे में किसी ने जानकारी नहीं ली. डॉक्टर लहरी को पांच दशक से जानने वाले नरिया निवासी अहमद अली का कहना है कि वो 15 दिन से बीमार होकर घर में पड़े रहे. तबीयत इतनी बिगड़ गई थी कि उनको नित्य क्रिया करने में भी समस्या हो रही थी. जब वो बाहर दिखाई नहीं दिए तो उनके घर गया. पता चला कि उनकी तबीयत ज्यादा खराब है.
अहमद अली ने बताया कि उनसे अस्पताल में भर्ती होने को कहा, लेकिन पहले तो वो नहीं माने. उनकी पीड़ा देखी नहीं गई. 27 जनवरी को ईएमएस निदेशक प्रो. एसएन संखवार से मिलने उनके कार्यालय गया और डॉक्टर लहरी के बीमार होने की जानकारी दी. डिप्टी एमएस को भी जानकारी दी. फिर क्या था डॉक्टर साहब के घर एंबुलेंस आई और भर्ती करवाया गया. अहमद अली ने बताया कि मरीजों के लिए पूरा जीवन समर्पित करने वाले डॉक्टर लहरी के साथ ऐसा होगा कि उनकी खोज खबर कोई नहीं लेगा, इससे बड़ी संवदेनहीनता और क्या हो सकती है.
अहमद अली की दुकान नरिया गेट के पास है. उनकी दुकान से ही डॉ. टीके लहरी को दूध और ब्रेड जाता रहा. डाक्टर के नहीं दिखाई पडने पर उनके बीमार होने की जानकारी हुई.
रिटायरमेंट के बाद 23 साल से हर दिन करते हैं ओपीडी
तीन जनवरी 1941 को कोलकाता में जन्मे डॉ. लहरी बीएचयू से 2003 में सेवानिवृत्त हुए. रिटायरमेंट के बाद भी वे लगातार घर से पैदल सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक की ओपीडी में आते हैं. सेवा काल के दौरान हजारों मरीजों के हृदय की सर्जरी कर चुके डॉ. लहरी की खासियत है कि वह सब कुछ भूल सकते हैं, लेकिन ओपीडी जाना नहीं भूलते हैं. एप्रन पहने डॉक्टर लहरी को नरिया गेट से एनसीसी बटालियन वाली लेन, त्रिवेणी गर्ल्स हॉस्टल, एलडी गेस्ट हाउस चौराहा, कुलपति आवास के सामने से एमएस जाते देखा जा सकता है. उनके एक हाथ में काला बैग, दूसरे हाथ में छाता जरूर रहता है. उनकी मरीजों की सेवा, समर्पण को देख 2006 में पद्मश्री से नवाजा गया. सचमुच 'धरती के भगवान' जैसे डॉ लहरी वह चिकित्सक हैं, जो वर्ष 1994 से ही अपनी पूरी तनख्वाह गरीबों को दान करते रहे हैं.
अस्पताल में भर्ती होने के बाद स्थिति
बीपी 175/107
एसपीओ 96 प्रतिशत
पल्स 92
आरबीएस 124
पीसीओ2 48.2
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क्या बोले आईएमएस बीएचयू के निदेशक
डॉक्टर लहरी के एक करीबी से उनके लंबे समय से बीमार होने की जानकारी मिली. तत्काल चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ की एक टीम एंबुलेंस के साथ भेजकर सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में भर्ती करवाया गया. डॉक्टरों की टीम उनकी सेहत पर नजर बनाए है. -प्रो.एसएन संखवार, निदेशक, आईएमएस बीएचयू



