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पंडितपुर बना डेंगू मुक्त मॉडल गांव, ‘साथ लड़ेंगे डेंगू से’ अभियान ने बदली तस्वीर...

पंडितपुर बना डेंगू मुक्त मॉडल गांव, ‘साथ लड़ेंगे डेंगू से’ अभियान ने बदली तस्वीर...
Jun 15, 2026, 01:28 PM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी: रोहनिया क्षेत्र के पंडितपुर गांव ने डेंगू और मलेरिया के खिलाफ सामुदायिक जागरूकता का एक सफल उदाहरण पेश करते हुए खुद को एक मॉडल गांव के रूप में स्थापित किया है. मच्छर भगाने वाले प्रमुख ब्रांड ‘ऑल आउट’ की सामुदायिक पहल ‘साथ लड़ेंगे डेंगू से’ अभियान ने सोमवार को अपने सफल संचालन का एक वर्ष पूरा कर लिया. इस अवसर पर अभियान संचालित करने वाली ब्रिलॉन कंज्यूमर प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने अपनी पहली इम्पैक्ट रिपोर्ट जारी की, जिसमें पंडितपुर गांव में हुए सकारात्मक बदलावों को साझा किया गया.


विश्व डेंगू दिवस 2025 के अवसर पर शुरू किए गए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में डेंगू और मलेरिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, मच्छरों के पनपने वाले स्थलों को खत्म करना तथा सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करना था. एक वर्ष के दौरान अभियान ने गांव के लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.


अभियान की सबसे खास पहल रही ‘दबंग डेंगू जासूस’, जिसमें गांव के बच्चों को जागरूकता दूत बनाया गया. इन बच्चों ने घर-घर जाकर लोगों को डेंगू के लक्षण, बचाव के उपाय और स्वच्छता के महत्व के बारे में जानकारी दी. बच्चों की सक्रिय भागीदारी ने पूरे गांव में जागरूकता फैलाने में अहम योगदान दिया.


जारी इम्पैक्ट रिपोर्ट के अनुसार, पंडितपुर गांव में डेंगू और मलेरिया के प्रति जागरूकता का स्तर बढ़कर 97 प्रतिशत तक पहुंच गया है. इसके अलावा 90 प्रतिशत से अधिक परिवार अब नियमित रूप से घरों और आसपास जमा पानी को बदलने या हटाने लगे हैं, जिससे मच्छरों के प्रजनन स्थलों में कमी आई है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि लोगों में डेंगू के शुरुआती लक्षणों की पहचान करने और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की प्रवृत्ति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है.


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ब्रिलॉन कंज्यूमर प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी रतनजीत दास ने कहा कि डेंगू जैसी बीमारियों से लड़ाई केवल दवाओं या उपचार से नहीं, बल्कि जागरूकता और सामूहिक प्रयासों से जीती जा सकती है. उन्होंने कहा कि पंडितपुर में मिले परिणाम इस बात का प्रमाण हैं कि जब पूरा समुदाय एकजुट होकर स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए काम करता है तो बड़े बदलाव संभव होते हैं.


वहीं, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार जे. नायक ने इस पहल को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को सामुदायिक कार्रवाई में बदलने का उत्कृष्ट उदाहरण बताया. उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अभियान न केवल बीमारियों की रोकथाम में मदद करते हैं बल्कि लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करते हैं.


कार्यक्रम में उपस्थित जिला मलेरिया अधिकारी एस.सी. पांडेय ने भी अभियान की सराहना करते हुए कहा कि जनभागीदारी के माध्यम से सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में सकारात्मक और स्थायी बदलाव लाए जा सकते हैं. उन्होंने कहा कि पंडितपुर की सफलता अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणादायक मॉडल साबित हो सकती है.


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अभियान के अगले चरण में भी ‘ऑल आउट’ और ब्रिलॉन कंज्यूमर प्रोडक्ट्स द्वारा जागरूकता कार्यक्रम, सामुदायिक गतिविधियां और स्वच्छता संबंधी पहल जारी रखी जाएंगी, ताकि डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के खिलाफ लोगों को लगातार जागरूक किया जा सके और स्वस्थ समाज के निर्माण में योगदान दिया जा सके.

जमीन और मकान के नाम पर पुलिसकर्मियों से लाखों की धोखाधड़ी, मां और बेटों पर केस दर्ज
जमीन और मकान के नाम पर पुलिसकर्मियों से लाखों की धोखाधड़ी, मां और बेटों पर केस दर्ज
वाराणसी : जमीन और मकान दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी करने के मामले में मां और बेटों ने पुलिसकर्मियों को भी नहीं छोड़ा. पीडित पुलिसकर्मियों ने लालपुर-पांडेयपुर थाने में 20.50 लाख रुपये की धोखाधड़ी के दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज कराए हैं. पुलिस की शुरुआती जांच में जो खुलासा हुआ है वह बेहद हेरान करने वाला है. आरोपी जमीन कारोबारियों ने पिछले 24 महीनों के भीतर 10 से ज्यादा पुलिसवालों से करीब एक करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की है. पुलिस सूत्रों का मानना है कि यदि पूरी कड़ियां जोड़ी जाएं, तो यह महाघोटाला 5 से 10 करोड़ रुपये के बीच पहुंच सकता है.लालपुर-पांडेयपुर पुलिस ने पीड़ितों की तहरीर पर मुख्य आरोपी और जमीन कारोबारी गौरव गुप्ता, उसके सगे भाई दीपक गुप्ता, मां कस्तूरी देवी (निवासी: अशोक विहार कॉलोनी) सहित अन्य सहयोगियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है. इस गिरोह के चंगुल में सिर्फ पुलिसवाले ही नहीं, बल्कि कचहरी के पेशकार और मुंशी भी फंस चुके हैं.ALSO READ: जीएसटी की डिप्‍टी कमिश्‍नर 50 हजार रश्वित लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, महिला दरोगा से उलझी...पर्यटक थाने में तैनात सिपाही विशाल कुमार ने आरोप लगाया कि साल 2024 में आरोपियों ने उन्हें एक मकान दिलाने के नाम पर 13 लाख रुपये हड़प लिए. लंबे समय बाद भी जब रजिस्ट्री नहीं हुई और विशाल ने अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी. पीड़ित की शिकायत पर मंगलवार को पुलिस ने मामला दर्ज किया. कैंट थाने में तैनात और मूल रूप से गोंडा के रहने वाले आरक्षी भवन कुमार ने भी साल 2024 में जमीन खरीदने के लिए गौरव गुप्ता से संपर्क किया था. आरोपियों ने झांसे में लेकर उनसे 7.50 लाख रुपये की धोखाधड़ी कर ली. यह पहली बार नहीं है जब इस जालसाज परिवार पर केस दर्ज हुआ है. इससे पहले भी इनके खिलाफ शहर के अन्य थानों में मामले दर्ज हैं. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है और जल्द ही इन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाएगा.
जीएसटी की डिप्‍टी कमिश्‍नर 50 हजार रश्वित लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, महिला दरोगा से उलझी...
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वाराणसी : फाइल निस्‍तारण के लिए 50 हजार रुपये रिश्‍वत लेते विजिलेंस टीम ने जीएसटी की डिप्टी कमिश्नर (उपायुक्त) अंबिका सिंह को बुधवार शाम चेतगंज स्थित एक रेस्टोरेंट के पास रंगेहाथ गिरफ्तार किया. इस मामले में केस दर्ज कर लिया गया है. आरोप है कि उन्होंने एक उद्यमी की जीएसटी संबंधी फाइल पास करने के एवज में रिश्वत मांगी थी. गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस ने अंबिका सिंह से कोतवाली स्थित महिला थाने में पूछताछ की. इस दौरान चेतगंज में गिरफ्तारी के समय वह विजिलेंस की महिला दरोगा से उलझने के साथ राहगीरों से बचाने की गुहार लगाती रहीं लेकिन पुलिसकर्मियों की सख्ती के बाद शांत हो गईं. अंबिका सिंह फतेहपुर जिले के धाता थाना क्षेत्र की निवासी हैं.उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान, वाराणसी सेक्टर के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि भेलूपुर थाना क्षेत्र के बजरडीहा लखरांव निवासी तथा ब्लैक स्मिथ इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अजय कुमार मौर्य ने शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत के अनुसार, उनकी कंपनी के फरवरी 2023 के रिटर्न और राज्य जीएसटी के आकलन से संबंधित फाइल के निस्तारण के लिए सेक्टर-6 की डिप्टी कमिश्नर अंबिका सिंह 50 हजार रुपये की रिश्वत मांग रही थीं. शिकायतकर्ता का आरोप था कि फाइल सही होने के बावजूद उसमें अनावश्यक खामियां निकाली जा रही थीं.ALSO READ:जनजातीय शिक्षा को नई दिशा, जनजातीय कार्य मंत्रालय और सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के बीच एमओयू...शिकायत मिलने के बाद सतर्कता अधिष्ठान ने गोपनीय जांच कराई. जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर विजिलेंस टीम ने जाल बिछाया. बुधवार शाम चेतगंज स्थित दादा रेस्टोरेंट के पास जैसे ही अंबिका सिंह ने शिकायतकर्ता से 50 हजार रुपये वाला लिफाफा लिया, पहले से मौजूद महिला पुलिसकर्मियों और विजिलेंस टीम ने उन्हें पकड़ लिया.गिरफ्तारी के दौरान उन्होंने शोर मचाया और महिला पुलिसकर्मियों से उलझने का भी प्रयास किया. उनके खिलाफ विजिलेंस थाना, वाराणसी सेक्टर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है.
जनजातीय शिक्षा को नई दिशा, जनजातीय कार्य मंत्रालय और सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के बीच एमओयू...
जनजातीय शिक्षा को नई दिशा, जनजातीय कार्य मंत्रालय और सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के बीच एमओयू...
वाराणसी : जनजातीय समाज की शिक्षा, संस्कृति और कौशल विकास को बढ़ावा देने की दिशा में जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार और सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के बीच बुधवार को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए. नई दिल्ली स्थित जनजातीय कार्य मंत्रालय में आयोजित कार्यक्रम में यह समझौता मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा की उपस्थिति में संपन्न हुआ.इस एमओयू के तहत विश्वविद्यालय, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मानकों के अनुरूप जनजातीय क्षेत्रों के लिए विशेष सर्टिफिकेट और डिप्लोमा पाठ्यक्रम तैयार करेगा. इन पाठ्यक्रमों में जनजातीय संस्कृति, मातृभाषा, पारंपरिक ज्ञान, कौशल विकास और रोजगारोन्मुख शिक्षा का समावेश किया जाएगा, ताकि जनजातीय युवाओं को आधुनिक शिक्षा के साथ उनकी सांस्कृतिक पहचान भी मजबूत हो सके.कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि यह समझौता जनजातीय समाज के उज्ज्वल भविष्य और विकसित भारत के निर्माण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप यह पहल स्थानीय संस्कृति, भारतीय ज्ञान परंपरा और कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देगी.उन्होंने विश्वास जताया कि इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से जनजातीय युवाओं में नेतृत्व क्षमता, आत्मनिर्भरता, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रबोध की भावना विकसित होगी तथा वे देश के विकास में प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे.ALSO READ:रेलवे कर्मचारी ने रची लूट की फर्जी कहानी, कर्ज से बचने के लिए किया था षड्यंत्र...इस अवसर पर मंत्रालय के संयुक्त सचिव अनंत प्रकाश पांडेय, निदेशक दीपाली मसीर्कर सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे. यह पहल जनजातीय समुदायों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, समान अवसर और सांस्कृतिक सम्मान प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.