फुटपाथ का किराया, सड़क पर कारोबार,आखिर जिम्मेदार कौन...

वाराणसी : शहर के प्रमुख बाजारों और व्यस्त इलाकों में फुटपाथों पर बढ़ते अतिक्रमण और अवैध वसूली का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है. फुटपाथ, जो पैदल चलने वालों के लिए बनाए गए हैं, अब जगह-जगह ठेलों और अस्थायी दुकानों से घिरे नजर आते हैं. इससे राहगीरों को मजबूरन सड़क पर चलना पड़ता है, जिससे दुर्घटना का खतरा भी बढ़ रहा है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि फुटपाथ पर दुकान लगाने के नाम पर प्रतिदिन रुपये वसूले जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं.

भोजूबीर से चांदमारी मार्ग तक कई स्थानों पर फुटपाथों पर फल, सब्जी, चाट, फुल्की और अन्य सामान के ठेले लगे देखने को मिल जाएंगे. दुकानों और ठेलों के कारण पैदल चलने वालों के लिए पर्याप्त जगह नहीं बचती. कई फेरी और ठेला संचालकों का दावा है कि उन्हें रोजाना 20 रुपये तक देने पड़ते हैं। वहीं, कुछ स्थानों पर ठेला लगाने के लिए 200 से 500 रुपये तक वसूले जाने की भी बात सामने आई है. हालांकि, इस वसूली की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
नगर निगम अधिनियम, सड़क सुरक्षा मानकों और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार फुटपाथों का प्राथमिक अधिकार पैदल यात्रियों का है. नियमों के तहत ठेला-फेरी व्यवसाय केवल निर्धारित वेंडिंग जोन में ही संचालित किया जाना चाहिए. इसके बावजूद शहर के कई इलाकों में नियमों की अनदेखी होती दिखाई दे रही है.
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि समय-समय पर अतिक्रमण हटाने के अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद फिर से फुटपाथों पर कब्जा हो जाता है. इससे अभियान की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठ रहे हैं. लोगों का कहना है कि यदि अवैध वसूली के आरोप सही हैं, तो इसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.
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शहरवासियों का मानना है कि फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त रखने, वेंडिंग जोन की व्यवस्था को प्रभावी बनाने और नियमों का सख्ती से पालन कराने से ही पैदल यात्रियों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सकेगी. साथ ही, अवैध वसूली के आरोपों की पारदर्शी जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी जरूरी है.



