UGC के चक्कर में PCS अफसर ने दिया इस्तीफा, किया धरना प्रदर्शन

यूजीसी के नए नियम को लेकर देशभर में विवाद छिड़ गया है. जहां सार्वजनिक रूप से इस्तीफा देने वाले पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री की परेशानियां बढ़ गई हैं. जी हां, वो बरेली डीएम ऑफिस के बाहर धरना प्रदर्शन पर बैठ गये. इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि, उन्हें डीएम अविनाश सिंह द्वारा बंधक बनाया गया और उन्हें सुनियोजित साजिशन के तहत सस्पेंड कर दिया गया है.

इन्हीं आरोपों का खंडन करते हुए एडीएम न्यायिक देश दीपक सिंह ने बताया कि, वहां बंधक बनाने जैसी कोई बात नहीं थी. वहीं अग्निहोत्री ने यह मांग की है कि, डीएम स्वंय आकर उन्हें ये बताने की कोशिश करें कि कल शाम किसका फोन आया था और पंडितों के लिए अपशब्द जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी कर रहा था. अगर बरेली डीएम आने में असमर्थ हो तो पीएम या गृहमंत्री ही आने का कष्ट करें.

UGC के विरोध में सवर्ण वर्ग
दरअसल, UGC की नई गाइडलाइन को लेकर सवर्णों ने विरोध शुरू कर दिया है. इन बढ़ते विवादों के बीच बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा देना चर्चाओं का विषय बन बैठा है. यूपी पीसीएस 2019 बैच के अधिकारी और बरेली के पीसीएस अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दिया और कहा, उनका इस्तीफ़ा पद और प्रतिष्ठा से ऊपर स्वधर्म और स्वाभिमान से कम नहीं है. यूजीसी की नई गाइडलाइन का विरोध करते हुए अग्निहोत्री ने कहा कि, ये नया नियम सभी वर्ग के छात्रों का शोषण करने वाला है. जो सभी जातियों के बच्चों के प्रति विषमताओं और षड्यंत्र करने का मौक़ा मिलेगा.

मेरा इस्तीफा देने का निर्णय व्यक्तिगत लाभ या हानि नहीं, बल्कि समाज के प्रति उनकी जवाबदेही और अंतरात्मा की आवाज है. उन्होंने कहा कि इस इस्तीफे वजह UGC के साथ-साथ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की चोटी पकड़कर पिटाई ब्राह्मणों का अपमान है. क्योंकि प्रयागराज माघ मेले में जिन पूजनीय संतों का अपमान और ब्राह्मणों का उत्पीड़न किया गया. हैरानी की बात यह है कि अविमुक्तेश्वरानंद महाराज के बटुक शिष्यों की पिटाई प्रशासन द्वारा की गई. जिस समाज में संतों की शिखा को छुआ तक नहीं जाता, वहां उन्हें घसीट कर मारा जा रहा है. जब सुरक्षा करने वाला प्रशासन ही मर्यादाओं का उल्लंघन करने लगे तो आम जनता की बात ही निराली है. ऐसे दुर्वव्यवहार ने मानवता को शर्मसार करने में जरा भी कसर नहीं छोड़ी है.

अग्निहोत्री के इस्तीफे ने मचाया बवाल
वहीं गौर करने वाली बात यह है कि मजिस्ट्रेट अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे में लिखा है कि, अब समय आ गया है कि ब्राह्मण और अन्य सवर्ण वर्ग का प्रतिनिधित्व करने के लिए वैकल्पिक राजनीतिक व्यवस्था का निर्माण करने का. इससे ये आशंका जताई जा रही है कि, इस्तीफे के बहाने वो राजनीति में एंट्री मारने के मूड में हैं.

जाने क्या है UGC नियम
बात करें यूजीसी यानि यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) ने एक नया नियम बनाया हैं जिसका नाम है Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026. ये नियम यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए हैं. इस नियम के मुताबिक हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज में एक इक्विटी कमेटी बनानी होगी. इस कमेटी में शामिल एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों की शिकायतें सुनेगी और तय समय में उनका निपटारा करेगी.

कमेटी में एससी-एसटी, ओबीसी, दिव्यांग और महिलाओं का होना बेहद जरूरी है. कमेटी का काम कैंपस में बराबरी का माहौल बनाने के साथ ही पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए योजनाएं लागू करना होगा. सुप्रीम कोर्ट द्वारा लाए गए यूजीसी नियमों पर सुनवाई कर कोर्ट ने कहा कि, 2012 के पुराने नियमों को अपडेट करें और भेदभाव रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाएं.



