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इस पेंगुइन ने खीचा लोगों का ध्यान, वायरल हुई वीडियो

इस पेंगुइन ने खीचा लोगों का ध्यान, वायरल हुई वीडियो
Jan 27, 2026, 01:08 PM
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Posted By Preeti Kumari

अंटार्कटिका की अंतहीन बर्फ के बीच एक अकेला पेंगुइन, अपनी कॉलोनी को पीछे छोड़कर विशाल बर्फीले पहाड़ों की ओर बढ़ रहा है. इन दिनों इंटरनेट पर वायरल वीडियो सनसनी मचा रहा है. यह वायरल वीडियो रेजिस्टेंस और विद्रोह का एक अनूठा प्रतीक बन गया है. सोशल मीडिया पर लोग इसे रॉबर्ट फ्रॉस्ट की 'रोड नॉट टेकन' चुनने वाला बता रहे हैं, जिसके बाद हर कोई यही जानना चाहता है कि, अपनी कॉलोनी को छोड़कर आखिर वो पेंगुइन अकेला पहाड़ की तरफ क्यों जा रहा है? तो चलिए आज हम आपको इसके बारे में बताते हैं.


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आखिर क्या है 'निहिलिस्ट पेंगुइन' की असली कहानी?


सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो की सच्चाई यह है कि, जनवरी 2026 में वायरल हो रहा ये वीडियो यह हालिया का नहीं है. यह क्लिप 19 साल पुरानी एक डॉक्यूमेंट्री 'एनकाउंटर्स एट द एंड ऑफ द वर्ल्ड' (2007) से ली गई है, जिसे जर्मन फिल्म निर्माता वर्र्नर हर्जोग ने निर्देशित किया था, इस फिल्म में एक एडली पेंगुइन को अपनी कॉलोनी से दूर जाते दिखाया गया है.


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आमतौर पर पेंगुइन समुद्र की ओर जाते हैं, जहां उन्हें खाना और जीवन मिलता है, लेकिन यह पेंगुइन उनसे उलट दुर्गम पहाड़ियों की ओर जा पड़ा. हर्जोग ने इसे ‘डेथ मार्च’ यानी मौत की यात्रा कहा, क्योंकि उस दिशा में पेंगुइन का जीवित बचना नामुमकिन था.


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क्यों छोड़ दिया उसने सब कुछ


फिल्म में बताया जा रहा है कि, अगर उस पेंगुइन को पकड़कर वापस कॉलोनी में छोड़ भी दिया जाता, तब भी वह मुड़कर फिर से उसी ‘डेथ मार्च’ पर निकल पड़ता है. फिल्म निर्माता ने यह भी कन्फर्म किया था कि वह पेंगुइन उन पहाड़ों की ओर करीब 70 कि.मी. चला, लेकिन बाद में उसकी मृत्यु हो गई. अब हजारों लोग इस पेंगुइन का वीडियो और मीम शेयर कर रहे हैं. इनमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी शामिल हैं. उन्होंने पेंगुइन के साथ एक एआई जेनेरेटेड पोस्ट शेयर करके ग्रीन लैंड पर कब्जा करने की अपनी धमकी को बढ़ावा दिया है.


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इस वायरल वीडियों में डोनाल्ड ट्रंप को पेंगुइन को देख कई लोगों ने टॉक्सिक वर्क कल्चर को लेकर निशाना साधा हैं. कई लोगों ने इसे इनर पीस से जोड़कर देख रहे हैं कि यह पेंगुइन दुनिया के दिखावे को छोड़कर अकेले निकल पड़ा है, वह दुनिया की भीड़ में और दिखावा नहीं करना चाहता है.

बनारस की इन प्राचीन मंदिरों की बदलेगी सूरत, तैयार हुआ मास्टर प्लान
बनारस की इन प्राचीन मंदिरों की बदलेगी सूरत, तैयार हुआ मास्टर प्लान
These ancient temples of Banaras will be transformed, master plan readyवाराणसी: पूर्वांचल के गाजीपुर और वाराणसी के तीन प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिरों और खंडहर हो चुके स्थानों को संरक्षित किया जाएगा. इसके लिए पर्यटन और पुरातत्व विभाग ने एक जबरदस्त मास्टर प्लान तैयार किया है. जिस प्राचीन मंदिरों के लिए ये प्लान तैयार किया गया है उनमें अश्वारी शिव मंदिर, गोपाल लाल विला और पाली राधा कृष्ण मंदिर शामिल है, जिनके जर्जर और बेकार हुई संरचनाओं को दुबारा से मजबूत कर यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित किये जाने का फैसला लिया गया है.ऐतिहासिक मंदिरों की जल्द मरम्मत इस प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिरों की मरम्मत कराने में राजातालाब अश्वारी स्थित शिव मंदिर, अर्दली बाजार स्थित गोपाल लाल विला और गाजीपुर के पाली स्थित राधा कृष्ण मंदिर शामिल हैं, जर्जर हुए इन मंदिरों की दुबारा से खूबसूरती निखारी जाएगी, ताकि पर्यटन और श्रद्धालुओं के लायक बन सके. जो विकास के साथ-साथ रोजगार का भी जरिया बनेगा.बात करें अश्वारी स्थित शिव मंदिर की जो वाराणसी के राजातालाब क्षेत्र के अश्वारी स्थित शिव मंदिर का इतिहास पेशवाओं से जुड़ा है. इस मंदिर की बनावट, विशेषकर इसके शिखर और नक्काशीदार पत्थर, उन उत्तर भारतीय मंदिरों की याद दिलाते हैं, जिनका पुनर्निर्माण पेशवाओं ने 290 वर्ष पहले वाराणसी के धार्मिक पुनरुद्धार के समय कराया था. मंदिर के गर्भगृह और बाहरी दीवारों पर पेशवा कालीन निर्माण शैली स्पष्ट रूप से झलकती है, यह उस दौर की याद दिलाता है जब पेशवाओं ने काशी को सांस्कृतिक रूप से सुदृढ़ करने के लिए शहर के बाहरी इलाकों तक मंदिरों का जाल बिछाया था.गोपाल लाल विला अर्दली बाजार, एलटी कॉलेज परिसर में स्थित गोपाल लाल विला आज खंडहर में तब्दील हो चुका है, इस भवन के खंडहर लगभग 50 वर्गमीटर के क्षेत्रफल में स्थित हैं।इसके भीतर छोटे-छोटे कमरे बने हुए हैं. फिलहाल इस संपत्ति पर शिक्षा विभाग का मालिकाना हक है, यहां स्वामी विवेकानंद ने अपने अंतिम दिनों में लगभग सवा महीने तक प्रवास किया था. वर्ष 1902 में जब विवेकानंद बीमार हुए, तब उन्हें यहीं पर स्वास्थ्य लाभ मिला था.गाजीपुर का राधा कृष्ण मंदिर400 वर्ष पुराने मंदिर का निर्माण 56 खंभों के साथ किया गया है, पुरनिए बताते हैं कि मंदिर का निर्माण राजस्थानी शैली में हुआ है, मंदिर में राधा कृष्ण की अष्टधातु की मूर्ति मौजूद है, ब्रिटिश हुकूमत के दौरान ब्रिटानी बैंक में मंदिर के नाम से कुछ पैसा भी जमा था, जिसका आज भी कुछ ब्याज मिलता है. गाजीपुर का पंच मंदिर, वाराणसी में पंचकोशी यात्रा मार्ग पर शिव मंदिर एवं एलटी कॉलेज परिसर में स्थित गोपाललाल विला अपनी प्राचीन वास्तुकला और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध हैं, इसे इस आधार पर विकसित किया जा रहा है.Also Read: इन सरकारी अस्पतालों का हाल-बेहाल, मरीजों को नहीं मिल रही दवाइयां
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These government hospitals are in a bad state, patients are not getting medicines.Varanasi News: सरकारी अस्पताल अक्सर गरीबों का सहारा होता है, मगर जब यहां से भी इन्हें मायूसी मिलती है तो काफी सोचने वाली है. जी हां, एक ऐसा नजारा जो उत्तर-प्रदेश के वाराणसी जिले के सरकारी अस्पतालों में इलाज मुफ्त मिल तो रहा है, लेकिन मरीजों और उनके तीमारदारों को कॉटन बैंडेज, सर्जिकल ब्लेड और यहां तक कि टांका लगाने वाला धागा तक अस्पताल के बाहर स्थित निजी दुकानों से खरीदना पड़ रहा है. ये स्थिति ऐसे समय पर देखने को मिल रही है जब वाराणसी को बीएचयू समेत जिले के 17 अस्पतालों में सुविधाओं पर करोड़ों रुपये खर्च करने के लिए आए दिन 62.19 करोड़ के बजट में 5.56 करोड़ रुपये तक मरीजों के नाम पर खर्च नहीं कर पाता है. हालांकि, बीएचयू समेत कई अस्पतालों में यह समस्या आम है, फिर भी अपनी हरकतों से बाज ना आने वाला ये स्वास्थ्य विभाग पर्याप्त मरीजों को सुविधाएं उपलब्ध होने का झूठा दावा खुलेआम करता है. जो बड़े ही शर्म की बात है.अस्पताल के बजाय बाहर से खरीदनी पड़ रही दवाएं वहीं, कई गंभीर सर्जरी के मामलों में तो सर्जिकल किट और एनेस्थीसिया की दवाएं भी बाहर से मंगाना अब एक सामान्य प्रक्रिया बन गई है, बीएचयू, मंडलीय, जिला अस्पताल समेत कई सीएचसी-पीएचसी में यह स्थिति है, स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि मरीजों को सभी सुविधाएं अस्पताल में उपलब्ध कराई जा रही हैं. बावजूद इसके मरीजों को सुविधाओं के लिए निजी मेडिकल स्टोर पर पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं. जिला स्वास्थ्य समिति की फरवरी 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में अस्पतालों में सुविधाओं पर खर्च करने के लिए आए 62.19 करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया था, लेकिन प्रसव के दौरान बाहर से विक्रिल 2-0 (सीसीएन 2317), विक्रिल 1 नं. (2347), विक्रिल (2437), प्रोलीन 0 नं. के सूचर बाहर से ज्यादतर मंगाए जाते हैं.Also Read: प्रताड़ना से तंग आकर बुजुर्ग ने की आत्महत्या की कोशिश, मददगार बने समाजसेवी अमन कबीरबता दें, सलारपुर के रहने वाले गोपाल ने अपनी पत्नी को प्रसव के लिए बीएचयू एमसीएच विंग में भर्ती कराया था, चिकित्सकों ने ऑपरेशन से 30 मिनट पहले उन्हें सादे पर्चे पर कुछ सामान लिखकर लाने को कहा, तभी गोपाल ने तत्काल अस्पताल के बाहर स्थित मेडिकल स्टोर से 4870 रुपये का सामान खरीदा, इसमें दो ऑपरेशन में प्रयोग होने वाले टांके, तीन इंजेक्शन और एक कॉटन का बड़ा पैकेट शामिल था.सर्जिकल सामानों का नहीं कोई निश्चित दामबताया जा रहा है कि, सर्जिकल सामानों का कोई निश्चित दाम नहीं हाते है. कॉटन, बैंडेज एमआरपी के अलावा अलग-अलग दरों पर भी बाजार में बिकते हैं, जिसकी जितनी पहुंच, उसे उतना ही सस्ता सामान मिल रहा है. उदाहरण के लिए 200 ग्राम के कॉटन की एमआरपी 150 से 180 रुपये के बीच होती है, वहीं इसकी बिक्री 80-150 रुपये के बीच होती है. उसी प्रकार सर्जिकल ब्लेड अलग-अलग नंबर और साइज के अनुसार 10 से 35 रुपये में बिक रहे हैं. अस्पतालों में सभी दवाएं और जरूरी सामान उपलब्ध कराए गए हैं, बहुत कम मामलों में कुछ दवाएं ऐसी होती हैं, जिन्हें बाहर से लिखा जाता है. उन दवाओं को भी अस्पतालों में उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है.https://www.youtube.com/watch?v=cXbiN13VBxk
प्रताड़ना से तंग आकर बुजुर्ग ने की आत्महत्या की कोशिश, मददगार बने समाजसेवी अमन कबीर
प्रताड़ना से तंग आकर बुजुर्ग ने की आत्महत्या की कोशिश, मददगार बने समाजसेवी अमन कबीर
Tired of harassment, elderly man attempts suicide, social worker Aman Kabir helps himवाराणसी: एक मार्मिक घटना सामने आई है, जहां बिहार के रोहतास जिले का एक वृद्ध व्यक्ति प्रताड़ना से तंग आकर काशी पहुंच गया. बताया जा रहा है कि एक अकेला युवक उसे लगातार परेशान और प्रताड़ित करता था, जिससे वह मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुका था. लगातार हो रही इस प्रताड़ना से परेशान होकर वृद्ध ने अपना घर छोड़ दिया और काशी आ गया, यहां आकर भी वह गहरे तनाव में था और जिंदगी से निराश होकर आत्महत्या करने का मन बना चुका था.बुजुर्ग के सहारे बने ये समाजसेवी इसी दौरान समाजसेवी कार्यकर्ता अमन कबीर की नजर उस पर पड़ी, उन्होंने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए वृद्ध को रोका और उससे बातचीत कर उसकी स्थिति को समझा. अमन कबीर ने धैर्यपूर्वक उसे समझाया और उसका हौसला बढ़ाया, जिसके बाद वृद्ध ने आत्महत्या का इरादा छोड़ दिया. इसके बाद अमन कबीर उस वृद्ध को काशी कुष्ठ सेवा संघ के वृद्ध आश्रम लेकर गए, जहां फिलहाल वह रह रहा है.Also Read: विश्वनाथ मंदिर में मंगला आरती की शुरू नई व्यवस्था, 90 दिनों तक बाबा के नहीं होंगे दर्शनबुजुर्ग को मिला आश्रम का सहारा आश्रम में उसे रहने और खाने की सुविधा के साथ-साथ देखभाल भी मिल रही है, जिससे अब वह सुरक्षित माहौल में अपना जीवन बिता रहा है. यह घटना न सिर्फ मानवता की मिसाल है, बल्कि यह भी दिखाती है कि सही समय पर की गई मदद किसी की जिंदगी बचा सकती है, समाजसेवी अमन कबीर जैसे लोग आज के समय में उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण हैं, जो किसी न किसी कारण से जीवन से निराश हो जाते हैं.https://www.youtube.com/watch?v=cXbiN13VBxk