महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ, भारतीय ज्ञान परंपरा पर मंथन

वाराणसी: महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में भारतीय ज्ञान परंपरा के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक आयामों पर केंद्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का मंगलवार को शुभारंभ हुआ. संगोष्ठी का आयोजन प्रो. वासुदेव सिंह स्मृति न्यास, वाराणसी के तत्वावधान में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग तथा महामना मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान के सहयोग से किया गया.

डॉ. भगवान दास केंद्रीय पुस्तकालय के समिति कक्ष में आयोजित संगोष्ठी के मुख्य अतिथि पद्म भूषण प्रो. देवी प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा हमें यह बोध कराती है कि जीवन में किस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए. हमारी परंपरा सत्य, नैतिकता और सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित है. उन्होंने कहा कि लीला और प्रतीकों के माध्यम से हमारी संस्कृति गहरे संदेश देती है, जिसे समझना आवश्यक है. संप्रेषण की प्रभावी पद्धतियाँ भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित हैं, किंतु वर्तमान समय में पुस्तक संस्कृति के स्थान पर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का प्रभाव बढ़ गया है। ऐसे में पुस्तकों को अपनी परंपरा से जोड़कर रखना अत्यंत आवश्यक है.
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जय प्रकाश नारायण विश्वविद्यालय, छपरा (बिहार) के पूर्व कुलपति प्रो. हरिकेश सिंह ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल आधार समग्रता है। मां सरस्वती की प्रतिमा में वाणी, वीणा और तप का समन्वय इसी समग्र दृष्टिकोण का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास की उत्पत्ति और विकास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यहीं से भारतीय दर्शन की यात्रा प्रारंभ होती है.साथ ही, प्रो. भगवानदास के साहित्यिक योगदान को भी उन्होंने महत्वपूर्ण बताया.

विशिष्ट अतिथि प्रो. जंग बहादुर पांडेय ने अर्जुन के उपदेशों का उल्लेख करते हुए तत्परता, इंद्रिय-संयम और मन पर नियंत्रण को जीवन के लिए आवश्यक बताया. काशी विद्यापीठ के डॉ. अमरीश राय ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा एक सतत और सनातन प्रवाह है, जो कभी खंडित नहीं हुई.इसमें विश्व की समस्त समस्याओं के समाधान निहित हैं, क्योंकि हमारे ऋषि-मुनियों ने प्रत्येक विषय पर गहन चिंतन किया है.
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रो. प्रभाकर सिंह ने सामाजिक और साहित्यिक चेतना को समझने की आवश्यकता पर बल दिया.कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे यू.पी. कॉलेज के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. राम सुधार सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता काल में पराड़कर जी द्वारा लिखे गए लेख आज भी समाज को झकझोरने की क्षमता रखते हैं और भारतीय ज्ञान परंपरा के सामाजिक-सांस्कृतिक पक्ष को सशक्त रूप से प्रस्तुत करते हैं.
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इस अवसर पर यू.जी.सी. केयर लिस्टेड शोध पत्रिका ‘नमन’ का लोकार्पण भी किया गया। कार्यक्रम में प्रो. श्रद्धा सिंह, प्रो. जंग बहादुर पाण्डेय, डॉ. जयदेव सिंह, डॉ. बृजेंद्र पांडेय सहित अनेक शिक्षकों ने अपने विचार व्यक्त किए.
स्वागत भाषण महामना मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान के निदेशक डॉ. नागेन्द्र कुमार सिंह ने दिया, बीज वक्तव्य डॉ. हिमांशु शेखर सिंह ने प्रस्तुत किया। संचालन डॉ. राहुल अवस्थी एवं डॉ. चन्द्रशील पाण्डेय ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन सुधांशु शेखर सिंह व डॉ. मनोहर लाल ने किया.
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे.



