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इन शर्तों पर मिली अनुमति, स्‍वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद की लखनऊ में होगी सभा

इन शर्तों पर मिली अनुमति, स्‍वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद की लखनऊ में होगी सभा
Mar 10, 2026, 08:10 AM
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Posted By Preeti Kumari

वाराणसी: गौ माता को राज्‍यमाता का दर्जा दिलाने का संकल्‍प लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का बड़ा बयान सामने आया है. देश मे बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और बढ़ते अपराधों को लेकर शंकराचार्य ने शासन-प्रशासन और सरकार पर निशाना साधा है. उधर लखनऊ की सभा के लिए शंकराचार्य को 26 शर्तों के साथ अनुमति मिली है. अविमुक्‍तेश्‍वरानंद इस समय धर्मयुद्ध शंखनाद यात्रा पर निकले हैं. 11 मार्च को उनकी सभा लखनऊ में है.


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"गो रक्षा से ही विश्व रक्षा"


स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहाकि गो रक्षा से ही विश्व रक्षा होगी. जब जब गाय खतरे में है, तब तब देश पर संकट मंडराएगा. वहीं लखनऊ में होने वाली सभा को लेकर प्रशासन के अपडेट को लेकर स्वामी ने तंज कसा है. शंकराचार्य बोले- यहां नेटवर्क कमजोर है, जब निकलेंगे तब पता चलेगा. उन्होंने कहा, जो भी सरकारें हैं, वो हमारी हैं. जनता भी चाहती है कि गो माता का संकल्प पूरा हो, इसलिए गाय को राज्‍यमाता की पदवी मिलनी चाहिए.


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अविमुक्तेश्वरानंद ने लखनऊ के लिए किया प्रस्थान


बता दें कि बीते 7 मार्च को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने वाराणसी से लखनऊ के लिए प्रस्थान किया था. वह अपने गो रक्षा अभियान के लिए जनसमर्थन जुटा रहे हैं. 11 मार्च को लखनऊ में वह इस अभियान को लेकर बड़ा बिगुल फूंकेंगे. शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का आज शाम लखनऊ में आगमन होगा. शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के गोरक्षा के कार्यक्रम को लंबी चौड़ी शर्तों के साथ अनुमति मिली है. वे अपनी पदयात्रा के दौरान यहां गो माता प्रतिष्ठा संकल्प महासभा' में हिस्सा लेंगे.


शंकराचार्य करेंगे गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध' का शंखनाद


यह महासभा 11 मार्च को कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल पर आयोजित होगी, जहां शंकराचार्य गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध' का शंखनाद करेंगे. शंकराचार्य ने इस यात्रा को धर्मयुद्ध का नाम दिया है. यात्रा का मुख्य मकसद गो माता को 'राष्ट्रमाता' या 'राज्यमाता' का दर्जा दिलाना, गो हत्या पर पूरी तरह रोक लगाना और गो संरक्षण को मजबूत करना है. यह पदयात्रा 7 मार्च को वाराणसी (काशी) से शुरू हुई थी.


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शंकराचार्य ने पहले उत्तर प्रदेश सरकार को 40 दिनों का अल्टीमेटम दिया था, जब मांगें पूरी नहीं हुईं, तो उन्होंने यह अभियान शुरू किया. अब प्रशासन ने महासभा को अनुमति दे दी है, लेकिन 26 सख्त शर्तों के साथ. इन शर्तों का उद्देश्य शांति, यातायात और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है.


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इन शर्तों पर मिली अनुमति


किसी भी धर्म, जाति, संप्रदाय या भाषा के खिलाफ भड़काऊ भाषण बिल्कुल नहीं होगा. राजनीतिक या धार्मिक व्यक्तियों के खिलाफ विवाद फैलाने वाली बातें नहीं की जाएंगी. नाबालिग बच्चों से कोई विवादित नारे नहीं लगवाए जाएंगे. वाहनों की संख्या सीमित रहेगी, पार्किंग से यातायात बाधित नहीं होगा. केवल पारंपरिक ध्वज-दंड की इजाजत, कोई हथियार या घातक वस्तु नहीं. ज्ञापन केवल अधिकृत अधिकारी को दिया जाएगा. कोई समस्या होने पर आयोजकों की पूरी जिम्मेदारी होगी और कानूनी कार्रवाई होगी.


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पुलिस बल का खर्च आयोजकों को देना होगा. शांत क्षेत्र में लाउडस्पीकर, ढोल-नगाड़े या संगीत पर रोक. ध्वनि प्रदूषण नियमों का सख्त पालन होगा, उल्लंघन पर पर्यावरण कानून के तहत सजा. किसी भी शर्त के टूटने पर अनुमति अपने आप खत्म हो जाएगी. प्रशासन ने साफ कहा है कि शर्तों का पालन न होने पर कार्यक्रम रद्द हो सकता है.

सावन में खिल उठी फूल मंडी, फूलों के कारोबार से जुड़े 500 किसान परिवार की बढ़ी आय...
सावन में खिल उठी फूल मंडी, फूलों के कारोबार से जुड़े 500 किसान परिवार की बढ़ी आय...
वाराणसी:सावन की शुरुआत के साथ ही बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी पूरी तरह शिवमय हो गई है। काशी विश्वनाथ मंदिर समेत शहर के छोटे-बड़े सभी शिवालयों में फूलों और विशेष मालाओं से भव्य श्रृंगार किया जा रहा है। बाबा भोलेनाथ को प्रिय बेलपत्र, धतूरा, मदार और नीलकंठ की मालाओं की मांग बढ़ने से बनारस की सबसे पुरानी बांसफाटक फूल मंडी में कारोबार दोगुना हो गया है।सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में श्रद्धालु घरों और मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए सुगंधित फूल, मालाएं और पूजन सामग्री की जमकर खरीदारी कर रहे हैं। इसका सीधा असर फूल कारोबार पर देखने को मिल रहा है। बांसफाटक स्थित फूल मंडी सुबह से देर रात तक ग्राहकों से गुलजार है।फूल मंडी के संचालक एकांश अग्रवाल ने बताया कि सावन शुरू होने से पहले ही मंदिरों के श्रृंगार की एडवांस बुकिंग शुरू हो जाती है। केवल वाराणसी ही नहीं, बल्कि पूर्वांचल के कई जिलों से भी विशेषकर सावन के सोमवार के लिए मालाओं और फूलों के ऑर्डर आते हैं।उन्होंने बताया कि कछवा, सारनाथ, चिरईगांव, संदहा, जालूपुरा और भगवानपुर समेत आसपास के गांवों से किसान अपने खेतों और बगीचों के फूल लेकर मंडी पहुंचते हैं। पूरा परिवार मिलकर मालाएं तैयार करता है और उन्हें बेचकर आजीविका चलाता है। इस मंडी से करीब 200 से 300 परिवार जुड़े हुए हैं। सावन में प्रतिदिन चार से पांच क्विंटल बेलपत्र की बिक्री हो जाती है।इस बार लगातार गर्मी और बारिश के कारण फूलों का उत्पादन प्रभावित हुआ है। जो फूल तैयार हो रहे हैं, वे भी जल्दी खराब हो रहे हैं। उत्पादन कम और मांग अधिक होने से फूलों और विशेष मालाओं के दामों में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई है।आम दिनों में 50 से 60 रुपये में बिकने वाली मदार की माला सावन में 100 से 120 रुपये प्रति पीस बिक रही है। धतूरा 500 से 600 रुपये, बेलपत्र 250 से 300 रुपये प्रति किलो, जबकि सामान्य दिनों में 20 रुपये की नीलकंठ माला अब 50 से 80 रुपये प्रति पीस तक पहुंच गई है। छोटी फूल मालाएं भी 30 से 50 रुपये प्रति पीस बिक रही हैं। व्यापारियों का कहना है कि यदि मौसम की स्थिति ऐसी ही रही तो आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ सकती हैं।फूल व्यापारी सुनील गुप्ता ने बताया कि बांसफाटक मंडी काशी की सबसे पुरानी फूल मंडी है। यहां बनने वाली पारंपरिक मालाएं अन्य कहीं आसानी से नहीं मिलतीं। वाराणसी के प्रमुख मंदिरों—काशी विश्वनाथ, संकट मोचन, दुर्गाकुंड, महामृत्युंजय समेत कई प्रमुख शिवालयों में इसी मंडी से फूल और मालाएं भेजी जाती हैं। यहां सभी धर्मों के लोग अपनी-अपनी आस्था के अनुसार फूल और मालाएं खरीदने आते हैं। उन्होंने कहा कि इस मंडी से कई परिवार तीन पीढ़ियों से जुड़े हैं और सावन का महीना उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण सीजन होता है।किसान जितेंद्र कुमार मौर्य ने बताया कि मंडी से जुड़े लगभग 20 प्रतिशत किसान पंचकोशी क्षेत्र से आते हैं और कई परिवार पिछले 70 वर्षों से इस कारोबार से जुड़े हुए हैं। एक गजरा या विशेष माला तैयार करने में तीन से चार घंटे का समय लगता है। परिवार के सभी सदस्य मिलकर भगवान के लिए मालाएं तैयार करते हैं और फिर उन्हें बेचने के लिए मंडी लेकर आते हैं।सावन की शुरुआत के साथ काशी की फूल मंडी एक बार फिर आस्था और आजीविका का बड़ा केंद्र बन गई है। एक ओर जहां शिवभक्त बाबा के श्रृंगार के लिए विशेष फूल और मालाएं खरीद रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सैकड़ों किसान और फूल कारोबारियों के परिवारों की रोजी-रोटी भी इसी कारोबार पर निर्भर है। मौसम की मार से उत्पादन भले प्रभावित हुआ हो, लेकिन श्रद्धालुओं की अटूट आस्था के चलते फूलों की मांग लगातार बनी हुई है। व्यापारियों का मानना है कि सावन के आगामी सोमवारों में मांग और बढ़ेगी, जिससे फूलों का कारोबार भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा।
वाराणसी मंडल के 11 रेलकर्मी 'एक्सीलेंस अवार्ड' से सम्मानित, डीआरएम ने सराहा उत्कृष्ट कार्य...
वाराणसी मंडल के 11 रेलकर्मी 'एक्सीलेंस अवार्ड' से सम्मानित, डीआरएम ने सराहा उत्कृष्ट कार्य...
वाराणसी. पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल में संरक्षा एवं सुरक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 11 रेलकर्मियों को 'एक्सीलेंस अवार्ड' से सम्मानित किया गया। मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) आशीष जैन ने भारतेन्दु सभागार में आयोजित समारोह में चयनित रेलकर्मियों को पुरस्कार प्रदान कर उनके योगदान की सराहना की।डीआरएम आशीष जैन ने कहा कि भारतीय रेल की सर्वोच्च प्राथमिकता यात्रियों की संरक्षा एवं सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि वाराणसी मंडल के विभिन्न विभागों ने बेहतर समन्वय, टीम भावना और कर्तव्यनिष्ठा के साथ कार्य करते हुए संरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने संभावित दुर्घटनाओं को टालने और रेल संपत्ति व यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले कर्मचारियों की सतर्कता, त्वरित निर्णय क्षमता और दायित्वबोध की प्रशंसा करते हुए इसे अन्य कर्मचारियों के लिए प्रेरणादायी बताया।ALSO READप्लास्टिक मुक्त काशी के लिए नगर निगम का अभियान तेज, 372 दुकानों पर लगाए जागरूकता स्टीकर...उन्होंने सभी रेलकर्मियों से हर परिस्थिति में सजगता, अनुशासन और उत्तरदायित्व के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया।समारोह में अपर मंडल रेल प्रबंधक (परिचालन) अशोक कुमार वर्मा, अपर मंडल रेल प्रबंधक (इन्फ्रा) अजय सिंह, वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी आशुतोष शुक्ला सहित मंडल के विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।सम्मानित रेलकर्मी:रवि रंजन पटेल, प्रवीण कुमार राय, रास बिहारी पाण्डेय, संदीप कुमार, राजेश कुमार, उदय कुमार, उमेश कुमार दास, शम्भू शरण कुमार, मनोज कुमार (कांटावाल), शशांक शर्मा तथा मनोज कुमार (कांस्टेबल) को जून-2026 माह के लिए 'एक्सीलेंस अवार्ड' प्रदान किया गया।
प्लास्टिक मुक्त काशी के लिए नगर निगम का अभियान तेज, 372 दुकानों पर लगाए जागरूकता स्टीकर...
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वाराणसी. सावन माह और कांवड़ यात्रा के दौरान काशी को स्वच्छ एवं सिंगल यूज़ प्लास्टिक मुक्त बनाने के उद्देश्य से नगर निगम ने गुरुवार को विशेष जनजागरूकता अभियान चलाया। अभियान के तहत मैदागिन से गोदौलिया तक 372 दुकानों पर जागरूकता स्टीकर लगाए गए और लोगों से प्रतिबंधित प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने की अपील की गई।नगर निगम की आईईसी टीम ने मैदागिन से गोदौलिया तक जागरूकता रैली निकालकर दुकानदारों, स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं को प्लास्टिक मुक्त काशी का संदेश दिया। दुकानों पर लगाए गए स्टीकरों के माध्यम से स्वच्छता और सिंगल यूज़ प्लास्टिक के बहिष्कार का आह्वान किया गया।ALSO READ : कांवड़ मार्ग पर खुली मीट दुकानों पर नगर निगम की कार्रवाई, 24,500 रुपये जुर्माना वसूला...अभियान के तहत दशाश्वमेध घाट पर हस्ताक्षर अभियान आयोजित किया गया, जिसमें स्थानीय लोगों और पर्यटकों ने प्लास्टिक मुक्त काशी का संकल्प लिया। युवाओं और श्रद्धालुओं को अभियान से जोड़ने के लिए घाट पर विशेष सेल्फी प्वाइंट भी बनाया गया, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा।महापौर अशोक कुमार तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने नागरिकों, व्यापारियों, कांवड़ यात्रियों और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं से अपील की कि वे बाबा विश्वनाथ की नगरी को स्वच्छ और प्लास्टिक मुक्त बनाए रखने में सहयोग करें तथा प्रतिबंधित पॉलीथिन और सिंगल यूज़ प्लास्टिक का उपयोग न करें। नगर निगम ने स्पष्ट किया कि सावन माह के दौरान यह जागरूकता अभियान लगातार जारी रहेगा।