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पत्‍नी ने बेटी संग ट्रेन से कटकर दी जान, घटना को देख सदमें में पति

पत्‍नी ने बेटी संग ट्रेन से कटकर दी जान, घटना को देख सदमें में पति
Mar 10, 2026, 07:37 AM
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Posted By Preeti Kumari

वाराणसी: जंसा पंचकोसी मार्ग पर स्थित चौखंडी रेलवे क्रॉसिंग के पास एक महिला अपनी मासूम बेटी के साथ अपने पति के सामने ही सारनाथ एक्सप्रेस के सामने छलांग लगाकर जान दे दी. सोमवार की शाम यह आत्मघाती कदम उसने क्यों उठाया मामला संदिग्ध बना हुआ है. वहीं अपनी ही आंखों के सामने पलक झपकते घटना होता देख पति बेहोश होकर गिर पड़ा.


गहबू


पत्नी ने पति को इस बात का दिया झांसा


बताते चलें कि जंसा थाना क्षेत्र के लक्ष्छीपुर रामेश्वर गांव निवासी अजीत कुमार अपनी पत्नी मृतका अनीता देवी (22 वर्ष) तथा पुत्री दर्शना (तीन वर्ष) के साथ बाइक से भाऊपुर बाजार बेटी को दवा दिलाने आया था. दवा लेने के बाद चौखंडी रेलवे क्रॉसिंग के पास संचालित एक मिष्ठान की दुकान पर आकर तीनों एक साथ नाश्ता किये. दुकान पर ही पत्नी ने पति को झांसा देते हुए कहा कि चौखंडी रेलवे स्टेशन के पास मेरी एक सहेली रहती है, मैं उससे मिलना चाहती हूं.


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परिजनों में मचा कोहराम


यह कहकर वह बेटी को लेकर दुकान से बाहर निकली संयोग से उसी समय वाराणसी से भदोही की तरफ सारनाथ एक्सप्रेस जा रही थी और वह उसके सामने छलांग लगा दी. घटना की सूचना मिलते ही भारी संख्या में उसके परिजन भी मौके पर पहुंच गए और वहां कोहराम मच गया. पति कहीं बाहर रहकर कार्य करता है. इधर, दो माह से गांव आया हुआ है. मृतका का मायका जंसा थाना क्षेत्र के सत्तनपुर गांव में बताया जाता है. फिलहाल राजकीय रेलवे पुलिस भदोही दोनों शवो को पोस्टमार्टम के लिए भेजते हुए मामले की जांच में जुटी है.

भारतीय भाषाएं बनेंगी वैश्विक ज्ञान-शक्ति, काशी से आधुनिक विज्ञान से जोड़ने का संदेश
भारतीय भाषाएं बनेंगी वैश्विक ज्ञान-शक्ति, काशी से आधुनिक विज्ञान से जोड़ने का संदेश
वाराणसी। हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के गांधी अध्ययन पीठ सभागार में हिन्दुस्थान समाचार की ओर से ‘भारतीय ज्ञान परंपरा, क्षेत्रीय भाषाएं और समृद्ध भारत’ विषय पर भारतीय भाषा समागम-2026 का आयोजन हुआ। समागम में भारतीय भाषाओं और ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान, शिक्षा, तकनीक व शोध से जोड़ने पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय भाषाएं केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि देश की समृद्ध ज्ञान और सांस्कृतिक परंपरा की वाहक हैं।मुख्य अतिथि केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के पूर्व कुलपति डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने कहा कि भारत के पुरातन ज्ञान और आधुनिक ज्ञान के बीच बनी दीवार को तोड़कर दोनों के बीच संवाद का पुल तैयार करना होगा। प्राचीन ज्ञान को जस का तस दोहराने के बजाय उसे वर्तमान विज्ञान और शिक्षा से जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि काशी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। भौतिक विकास के लिए जिस तरह काशी में कॉरिडोर बने हैं, उसी तरह ज्ञान के क्षेत्र में भी कॉरिडोर तैयार करने की आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को केवल दर्शन और अध्यात्म तक सीमित करना सही नहीं है। गणित, रसायन विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, चिकित्सा और खगोल विज्ञान समेत कई क्षेत्रों में भारत की महत्वपूर्ण उपलब्धियां रही हैं। संस्कृत की पांडुलिपियों और आधुनिक विषयों के विशेषज्ञों के बीच संवाद बढ़ना चाहिए। अपनी भाषा में बोलने वाले व्यक्ति को कमतर आंकने की मानसिकता भी बदलनी होगी।मुख्य वक्ता आरएसएस की अखिल भारतीय प्रचार टोली के सदस्य मुकुल कानिटकर ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा किसी नई चीज के निर्माण से अधिक शाश्वत सत्य के साक्षात्कार की परंपरा है। उन्होंने कहा कि भारत की सभी भाषाएं अखिल भारतीय हैं। भाषा बदल सकती है, लेकिन भाव नहीं बदलता। भाषा व्यक्ति को ‘मैं’ से ‘हम’ की यात्रा कराती है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा को तकनीक से जोड़ने और काशी को इस ज्ञानधारा का प्रमुख केंद्र बनाने की जरूरत बताई।हिन्दुस्थान समाचार समूह के अध्यक्ष अरविंद भालचंद्र मार्डीकर ने कहा कि हिन्दुस्थान समाचार 15 भाषाओं में समाचार उपलब्ध कराने वाली बहुभाषी समाचार एजेंसी है। करीब आठ दशक की यात्रा में संस्था ने भारतीय भाषाओं में विश्वसनीय सूचना पहुंचाने को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं में देश की ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक अनुभव सुरक्षित हैं। संस्था अब वैश्विक स्तर पर भी अपनी उपस्थिति मजबूत कर रही है। रूसी समाचार एजेंसी के साथ काम शुरू हो चुका है, जबकि जापानी एजेंसी से बातचीत चल रही है।ALSO READ:पहली बार काशी पहुंचे भाजयुमो अध्यक्ष हेमांग जोशी, बाबा विश्वनाथ के दरबार में लगाई हाजिरीसमागम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच मां भारती के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। इस दौरान डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री, मुकुल कानिटकर, केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थान सारनाथ के कुलपति भिक्षु प्रो. (डा.) वंगछुग दोर्जे नेगी, राज्य सूचना आयुक्त पदुमनारायण (पीएन) द्विवेदी और पूर्व पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री डा. नीलकंठ तिवारी मौजूद रहे। अध्यक्षता अरविंद भालचंद्र मार्डीकर ने की। स्वागत मुख्य समन्वयक एवं क्षेत्रीय संपादक डा. राजेश तिवारी ने किया। महामना पं. मदनमोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान के निदेशक डा. नागेंद्र कुमार सिंह की विशेष उपस्थिति रही। संचालन हिन्दुस्थान समाचार के संपादक जितेंद्र तिवारी ने किया।
पहली बार काशी पहुंचे भाजयुमो अध्यक्ष हेमांग जोशी, बाबा विश्वनाथ के दरबार में लगाई हाजिरी
पहली बार काशी पहुंचे भाजयुमो अध्यक्ष हेमांग जोशी, बाबा विश्वनाथ के दरबार में लगाई हाजिरी
वाराणसी : भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और वडोदरा के सांसद डॉ. हेमांग जोशी रविवार को पहली बार काशी पहुंचे। उनके आगमन को लेकर भाजपा और भाजयुमो कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह रहा। वाराणसी एयरपोर्ट पर पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने पुष्पगुच्छ और माला पहनाकर उनका स्वागत किया।एयरपोर्ट पर उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रविंद्र जायसवाल के पुत्र आयुष जायसवाल ने डॉ. हेमांग जोशी का अभिनंदन किया। इस दौरान भाजयुमो के महानगर और जिला पदाधिकारी, प्रदेश व क्षेत्रीय पदाधिकारी समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।स्वागत के बाद डॉ. जोशी श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे और बाबा विश्वनाथ का दर्शन-पूजन किया। इसके बाद उन्होंने बाबा कालभैरव के दरबार में भी मत्था टेका। मंदिर दर्शन के बाद उन्होंने काशी की गलियों में भ्रमण किया और यहां की धार्मिक परंपराओं, संस्कृति और जीवनशैली को करीब से देखा।ALSO READ: 118वां गणेशोत्सव, सात दिनों तक होंगे विविध कार्यक्रमउनके स्वागत में वाराणसी उत्तरी विधानसभा क्षेत्र के तरना वार्ड में रोड शो आयोजित किया गया। रास्ते में स्थानीय लोगों और युवा कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह स्वागत किया। इस दौरान क्रेन की मदद से विशाल पुष्पमाला पहनाकर डॉ. जोशी का अभिनंदन किया गया। रोड शो के दौरान कार्यकर्ताओं में खासा जोश नजर आया।भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में डॉ. हेमांग जोशी का यह पहला काशी दौरा संगठन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके आगमन से स्थानीय युवा कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम में प्रदेश, क्षेत्र, जिला और महानगर स्तर के पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में भाजयुमो कार्यकर्ता शामिल रहे।
118वां गणेशोत्सव, सात दिनों तक होंगे विविध कार्यक्रम
118वां गणेशोत्सव, सात दिनों तक होंगे विविध कार्यक्रम
वाराणसी : नूतन बालक गणेशोत्सव समाज सेवा मंडल की ओर से स्थानीय गणेश भवन, गणेश दीक्षित लेन में 118वें सप्तदिवसीय गणेशोत्सव का आयोजन किया जाएगा। सात दिवसीय महोत्सव में गणेश पूजन, सहस्रनामार्चन, भजन-कीर्तन, प्रतियोगिताएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम, विद्वत सत्कार और संगीत सम्मेलन समेत कई आयोजन होंगे।महोत्सव की शुरुआत 14 सितंबर को गणेशोत्सव के उद्घाटन समारोह से होगी। इस अवसर पर महापौर अशोक तिवारी मुख्य अतिथि होंगे। वेदमूर्ति वीरेश्वर नारायण दातार और पंडित हेमंत जोशी के आचार्यत्व में उत्सव मंत्री अनिरुद्ध कृष्ण घाणेकर गणेश प्रतिमा की स्थापना करेंगे। इसके बाद दूर्वा से सहस्रनामार्चन किया जाएगा। शाम को वैदिक ब्राह्मणों द्वारा वसंत पूजा और नारदीय हरिकीर्तन का आयोजन होगा।15 सितंबर को गणेश पूजन के साथ लावा से सहस्रनामार्चन किया जाएगा। शाम को विद्वत सत्कार कार्यक्रम में वेदमूर्ति गोविन्द गंगाधर शिधोरे, पंडित कोमल शर्मा और प्रोफेसर प्रदीप नारायण डोंगरे का सम्मान किया जाएगा।16 सितंबर को किशमिश से सहस्रनामार्चन के बाद 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए नृत्य प्रतियोगिता आयोजित होगी। 17 सितंबर को बादाम से सहस्रनामार्चन, महिलाओं के भजन एवं हल्दी-रोली कार्यक्रम के साथ कनिष्ठ पद्यगान और स्व. सौ. मनोरमा बाई पुराणिक स्मृति वरिष्ठ पद्यगान प्रतियोगिता होगी।18 सितंबर को काजू से सहस्रनामार्चन के बाद सौरभ प्रभाकर शुक्ल, अहमदाबाद द्वारा ‘ओह माय फ्रॉड’ स्टोरी टेलिंग शो प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद स्व. सुबोध पालन्दे की स्मृति में एलसीडी प्रोजेक्टर के माध्यम से प्रश्न मंच का आयोजन होगा।19 सितंबर को मखाना से सहस्रनामार्चन के बाद पुरस्कार वितरण समारोह होगा। इसके बाद संगीत सम्मेलन में प्राप्ति पुराणिक शास्त्रीय गायन प्रस्तुत करेंगी। उनके साथ तबले पर डॉ. संदीप केवले और हारमोनियम पर प्रवीण सिंह संगत करेंगे। इसके बाद सिद्धि कस्तुरे द्वारा कथक नृत्य की प्रस्तुति दी जाएगी।ALSO READ: यूपी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, काशी विश्वनाथ मंदिर के CEO विश्वभूषण मिश्रा का तबादलामहोत्सव के अंतिम दिन 20 सितंबर को मोदकों से सहस्रनामार्चन और गणेश अथर्वशीर्ष सहस्त्रावर्तन का आयोजन होगा। इसके बाद महानैवेद्य अर्पित किया जाएगा। दोपहर में भव्य शोभायात्रा के साथ सात दिवसीय गणेशोत्सव का समापन होगा।