वाराणसी में डीआईजी कार्यालय की सरकारी जमीन हड़पने की साजिश, छह लोगों के खिलाफ केस...

वाराणसी : कैंट थानांतर्गत मकबूल आलम रोड स्थित पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) कार्यालय और सरकारी आवास से संबंधित उत्तर प्रदेश राज्य संपत्ति की भूमि को कथित रूप से फर्जी और कूटरचित दस्तावेज के आधार पर निजी नाम पर दर्ज कराने की सजिश करने का मामला सामने आया है. क्षेत्रीय लेखपाल ऋृषि दुबे की तहरीर पर कैंट थाने में छह नामजद समेत अन्य अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. पुलिस ने जांच शुरू कर दी है.
सरकारी अभिलेखों और नगर निगम के असेसमेंट रजिस्टर के अनुसार, संबंधित भूखंड पुलिस उपमहानिरीक्षक कार्यालय एवं सरकारी आवास के रूप में दर्ज है. आरोप है कि पूर्व में चौक के राजा दरवाजा निवासी आनंद अग्रवाल नामक व्यक्ति ने नगर निगम के अधिकारियों को गुमराह कर इस राज्य संपत्ति का नामांतरण (म्युटेशन) अपने नाम करवा लिया था.
9 अक्टूबर 2019 को आनंद अग्रवाल के निधन के बाद इस खेल का दूसरा अध्याय शुरू हुआ. उनके पुत्र गुंजन अग्रवाल ने एक कथित 'अपंजीकृत वसीयत' को आधार बनाकर खुद को इस संपत्ति का वारिस बताया और न्यायालय में प्रतिस्थापन प्रार्थना पत्र दाखिल कर दिया. इस पर राज्य सरकार की ओर से कड़ी आपत्ति दर्ज कराई गई. मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने 18 नवंबर 2022 को अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि इस अपंजीकृत वसीयत का कोई वैध साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिसके बाद गुंजन अग्रवाल का प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया गया था.
लेखपाल द्वारा दी गई तहरीर के अनुसार, कोर्ट से प्रार्थना पत्र निरस्त होने के बावजूद आरोपियों ने हार नहीं मानी. गुंजन अग्रवाल और उसके सहयोगियों ने उसी कथित फर्जी वसीयत और हेरफेर किए गए दस्तावेजों के सहारे दोबारा सरकारी संपत्ति पर अपना अधिकार स्थापित करने और नामांतरण कराने का सुनियोजित प्रयास किया. सरकारी अभिलेखों में हेराफेरी कर राज्य की करोड़ों की संपत्ति को हड़पने की यह एक बड़ी साजिश थी.
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इन आरोपियों पर दर्ज हुआ केस
लेखपाल की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कैंट पुलिस ने मुख्य आरोपी गुंजन अग्रवाल के साथ-साथ इस साजिश में उसका साथ देने वाले सहयोगियों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया है. नामजद आरोपियों में गुंजन अग्रवाल निवासी राजा दरवाजा, स्मृता गोयल निवासी मवैया, सारनाथ, इला अग्रवाल निवासी मवैया सारनाथ, बृजेश अग्रवाल निवासी मवैया सारनाथ, शरद अग्रवाल निवासी मवैया सारनाथ और मयंक अग्रवाल शामिल हैं. पुलिस प्रशासन का कहना है कि सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जा या हेरफेर करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया जाएगा और इस मामले के दोषियों को जल्द सलाखों के पीछे भेजा जाएगा.



