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काशी की ऐतिहासिक जगन्नाथ रथयात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में, सजकर तैयार हुई भगवान जगन्नाथ की पालकी...

काशी की ऐतिहासिक जगन्नाथ रथयात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में, सजकर तैयार हुई भगवान जगन्नाथ की पालकी...
Jul 12, 2026, 01:26 PM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी : काशी के प्रसिद्ध लक्खा मेलों में शामिल ऐतिहासिक जगन्नाथ रथयात्रा मेले की तैयारियां तेज हो गई हैं। अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक पालकी को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कारीगर पालकी की साफ-सफाई, रंग-रोगन और सजावट में जुटे हैं। इसी पालकी में विराजमान होकर भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा मंदिर से निकलकर रथयात्रा स्थल तक पहुंचेंगे, जहां से ऐतिहासिक रथयात्रा का शुभारंभ होगा।


मंदिर के मुख्य पुजारी ने बताया कि भगवान की यह पालकी सेखुआ (साखू) की मजबूत लकड़ी से बनाई जाती है। इसकी विशेषता इसकी मजबूती और लंबी आयु है। वर्तमान में उपयोग की जा रही पालकी लगभग 15 से 20 वर्ष पुरानी है, जिसे पुरानी पालकी के जर्जर होने के बाद तैयार कराया गया था। हर वर्ष रथयात्रा से पहले इसकी विशेष मरम्मत और सजावट की जाती है, ताकि भगवान की यात्रा पूरी गरिमा और भव्यता के साथ संपन्न हो सके।


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उन्होंने बताया कि 15 जुलाई को पालकी को फूल-मालाओं, रंग-बिरंगी झालरों और पारंपरिक सजावट से अलंकृत किया जाएगा। धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा पहले पालकी में विराजमान होकर मंदिर से निकलते हैं। काशी की संकरी गलियों में विशाल रथ का प्रवेश संभव नहीं होने के कारण श्रद्धालु भगवान की पालकी को अपने कंधों पर उठाकर रथयात्रा स्थल तक ले जाते हैं। इस दौरान पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है और जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठता है।


रथयात्रा स्थल पर भगवान का रात्रि विश्राम होता है। अगले दिन प्रातःकाल भगवान भव्य रथ पर आरूढ़ होकर भक्तों को दर्शन देते हैं। तीन दिनों तक चलने वाले इस ऐतिहासिक मेले में दूर-दराज़ से लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। मेले की समाप्ति के बाद भगवान पुनः इसी पालकी के माध्यम से अपने मंदिर वापस लौटते हैं।


मंदिर प्रशासन के अनुसार रथयात्रा के समापन के बाद पालकी को मंदिर परिसर में सुरक्षित रखा जाता है और उसकी नियमित देखभाल की जाती है। मंदिर के निर्माण एवं विस्तार कार्य पूर्ण होने के बाद पालकी और उससे जुड़े अन्य धार्मिक उपकरणों के संरक्षण की और बेहतर व्यवस्था की जाएगी।


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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वर्ष 1790 में मंदिर की स्थापना के साथ ही काशी की ऐतिहासिक जगन्नाथ रथयात्रा की परंपरा प्रारंभ हुई थी। तब से लेकर आज तक यह परंपरा निरंतर चली आ रही है और भगवान जगन्नाथ की यह पालकी श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण प्रतीक बनी हुई है। हर वर्ष रथयात्रा से पहले पालकी की सजावट और उसकी तैयारियां इस ऐतिहासिक आयोजन के शुभारंभ का प्रमुख आकर्षण होती हैं।

शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोपी गिरफ्तार, वाराणसी छोड़ने की फिराक में था.
शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोपी गिरफ्तार, वाराणसी छोड़ने की फिराक में था.
वाराणसी: मंडुआडीह थाना पुलिस ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म, मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को शनिवार तड़के बरेका (बीएलडब्ल्यू) आवासीय परिसर से गिरफ्तार किया गया।पुलिस के अनुसार, लहरतारा निवासी एक महिला की तहरीर पर 24 जुलाई को आरोपी किशन कुमार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 69, 115(2), 352 और 351(3) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और विरोध करने पर मारपीट, गाली-गलौज के साथ जान से मारने की धमकी दी।मामले की विवेचना उपनिरीक्षक प्रवीण सचान कर रहे हैं। पुलिस टीम ने 25 जुलाई की रात करीब 12:25 बजे आरोपी किशन कुमार (30), निवासी लहरतारा, को बीएलडब्ल्यू आवासीय परिसर से गिरफ्तार कर लिया।ALSO READ : गुरु पूर्णिमा पर नहीं लगेगा जाम पड़ाव आश्रम में ट्रैफिक और पार्किंग व्यवस्था का एडीसीपी ने लिया जायजापूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि युवती से उसकी मित्रता थी और दोनों के बीच आपसी सहमति से संबंध बने थे। उसने यह भी स्वीकार किया कि मुकदमा दर्ज होने की जानकारी मिलने के बाद वह वाराणसी छोड़कर जाने की तैयारी में था, लेकिन उससे पहले ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।गिरफ्तारी करने वाली टीम में उपनिरीक्षक प्रवीण सचान, उपनिरीक्षक विवेक यादव, फैंटम-48 के कांस्टेबल अमित कुमार तिवारी तथा कांस्टेबल संदीप शाह शामिल रहे। पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
गुरु पूर्णिमा पर नहीं लगेगा जाम  पड़ाव आश्रम में ट्रैफिक और पार्किंग व्यवस्था का एडीसीपी ने लिया जायजा
गुरु पूर्णिमा पर नहीं लगेगा जाम पड़ाव आश्रम में ट्रैफिक और पार्किंग व्यवस्था का एडीसीपी ने लिया जायजा
वाराणसी: गुरु पूर्णिमा पर्व पर पड़ाव स्थित श्री सर्वेश्वरी समूह के अवधूत भगवान राम आश्रम में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। 28 और 29 जुलाई को होने वाले आयोजन के दौरान यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए एडीसीपी ट्रैफिक अंशुमान मिश्र ने शनिवार को आश्रम परिसर और आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान एडीसीपी ने यातायात प्रबंधन, पार्किंग व्यवस्था, बैरिकेडिंग, श्रद्धालुओं के प्रवेश एवं निकास मार्ग सहित अन्य व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सभी व्यवस्थाएं समय से पूरी कर ली जाएं, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या जाम की स्थिति उत्पन्न न हो।ALSO READ : काशी विद्यापीठ में 'दहेज मुक्त भारत' विषयक भाषण प्रतियोगिता, विद्यार्थियों ने लिया दहेज न लेने-देने का संकल्प.पुलिस प्रशासन ने गुरु पूर्णिमा पर लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना को देखते हुए विशेष ट्रैफिक एवं पार्किंग प्लान तैयार किया है। इसके तहत प्रमुख मार्गों पर यातायात का सुचारु संचालन, पार्किंग स्थलों का निर्धारण तथा आवश्यक स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी।प्रशासन का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित यातायात व्यवस्था उपलब्ध कराना है, जिससे गुरु पूर्णिमा का आयोजन शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।
काशी विद्यापीठ में 'दहेज मुक्त भारत' विषयक भाषण प्रतियोगिता, विद्यार्थियों ने लिया दहेज न लेने-देने का संकल्प.
काशी विद्यापीठ में 'दहेज मुक्त भारत' विषयक भाषण प्रतियोगिता, विद्यार्थियों ने लिया दहेज न लेने-देने का संकल्प.
वाराणसी: महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के मनोविज्ञान विभाग में शनिवार को 48वें दीक्षांत समारोह के उपलक्ष्य में 'दहेज मुक्त भारत' विषय पर भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई। कार्यक्रम में शिक्षकों ने दहेज प्रथा को सामाजिक बुराई बताते हुए युवाओं से इसके खिलाफ जनजागरण का आह्वान किया।मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रो. शैफाली वर्मा ठकराल ने कहा कि दहेज प्रथा केवल सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान, समानता और मानवीय गरिमा के विरुद्ध अपराध है। उन्होंने विद्यार्थियों से दहेज न लेने और न देने का संकल्प लेकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की अपील की।प्रो. रश्मि सिंह ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करना भी है। उन्होंने युवाओं से दहेज जैसी कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।डॉ. मुकेश कुमार पंथ ने कहा कि शिक्षित समाज ही दहेज प्रथा जैसी कुप्रथा को समाप्त करने में प्रभावी भूमिका निभा सकता है। वहीं डॉ. कंचन शुक्ला ने समाज में समानता, महिला सम्मान और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने पर बल दिया।ALSO READ : दालमंडी ध्वस्तीकरण के दौरान सरकारी कर्मचारियों से मारपीट का आरोप, चौक थाने में प्राथमिक दर्जभाषण प्रतियोगिता में जाह्नवी गुप्ता, विकास कुमार, विकास यादव, दीपाली यादव और मोहम्मद आरिफ सहित अन्य विद्यार्थियों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के अंत में सभी विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने 'दहेज मुक्त भारत' का सामूहिक संकल्प लिया।कार्यक्रम का स्वागत डॉ. प्रतिभा सिंह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. पूर्णिमा श्रीवास्तव ने किया