काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के पुनर्गठन की तैयारी तेज...

वाराणसी: श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के पुनर्गठन को लेकर प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. मंडलायुक्त की ओर से शासन को पत्र भेजकर नई न्यास परिषद के गठन और अध्यक्ष पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया जल्द शुरू करने का अनुरोध किया गया है. वर्तमान परिषद के अध्यक्ष का कार्यकाल वर्ष 2024 में समाप्त हो चुका है, जिसके बाद से नए गठन का इंतजार किया जा रहा है.
काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद मंदिर प्रशासन की सबसे महत्वपूर्ण इकाई मानी जाती है. मंदिर के संचालन, वित्तीय प्रबंधन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, धार्मिक आयोजनों और विकास योजनाओं से जुड़े बड़े निर्णय इसी परिषद के माध्यम से लिए जाते हैं. ऐसे में कार्यकाल समाप्त होने के बाद नई परिषद के गठन की मांग लंबे समय से उठ रही थी.
सूत्रों के अनुसार मंडलायुक्त द्वारा शासन को भेजे गए पत्र में पुनर्गठन की प्रक्रिया में तेजी लाने की बात कही गई है, ताकि मंदिर से जुड़े प्रशासनिक और विकास कार्यों को नई दिशा मिल सके. हाल के वर्षों में काशी विश्वनाथ धाम परियोजना के विस्तार और मंदिर परिसर में बढ़ती व्यवस्थाओं के चलते न्यास परिषद की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है.
पूर्व में न्यास परिषद के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी प्रो. नागेंद्र पांडेय संभाल चुके हैं, जबकि मंदिर प्रशासन में मुख्य कार्यपालक अधिकारी की भूमिका भी अहम मानी जाती है. वर्तमान में मंदिर प्रशासन और विकास कार्यों की निगरानी मंडलायुक्त स्तर से की जा रही है.
हाल ही में मंडलायुक्त एस. राजलिंगम की अध्यक्षता में मंदिर प्रशासन से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए थे, जिनमें पुजारियों और व्यवस्थाओं से संबंधित प्रस्ताव भी शामिल रहे.
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अब धार्मिक और सामाजिक हलकों की नजर शासन के अगले कदम पर टिकी है. माना जा रहा है कि शासन स्तर पर सहमति बनने के बाद नई न्यास परिषद, उसके अध्यक्ष और सदस्यों के नामों पर जल्द अंतिम फैसला लिया जा सकता है. इससे लंबे समय से लंबित परिषद गठन की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद बढ़ गई है.



