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अन्विति में ‘रंगों की उड़ान’ ने भरी कल्पनाओं में उड़ान, हिंदी दिवस कार्यक्रम के अतिथि होंगे संजय मिश्रा...

अन्विति में ‘रंगों की उड़ान’ ने भरी कल्पनाओं में उड़ान, हिंदी दिवस कार्यक्रम के अतिथि होंगे संजय मिश्रा...
Sep 13, 2026, 07:14 AM
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Posted By gagan arora

वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय में आयोजित ‘अन्विति हिंदी सप्ताह’ के पांचवें दिन शनिवार को ‘रंगों की उड़ान’ चित्रकला प्रतियोगिता के साथ कार्यक्रमों की श्रृंखला आगे बढ़ी. जंतु विज्ञान विभाग के एसपीआरसी हाल में आयोजित प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने शब्दों के बजाय रंगों और रेखाओं के माध्यम से विज्ञान, तकनीक, पर्यावरण और भविष्य की अपनी कल्पनाओं को कैनवास पर उकेरा.


हिंदी प्रकाशन समिति की ओर से आयोजित ‘अन्विति’ के तहत यह पांचवां और अंतिम कार्यक्रम रहा. प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों की कलाकृतियों में वर्ष 2200 का मंगल, ऑक्सीजन सिलेंडरों वाले शहर, हरित गुंबदनुमा आवास, भारतीय ध्वज फहराते अंतरिक्ष यात्री, रोबोट, उड़न तश्तरी, डीएनए की सर्पिल संरचना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और पौधों से भरे बल्ब जैसे विषय देखने को मिले.


विद्यार्थियों ने वैज्ञानिक अवधारणाओं को कला के माध्यम से सहज और रचनात्मक रूप में प्रस्तुत किया. स्वीकृति कुमारी, श्रुति पाठक, अंकिता बिंद, प्राची तिवारी, सत्य राव और वैष्णवी बजाज सहित अनेक विद्यार्थियों की कृतियों में विज्ञान और कल्पना का अनूठा मेल दिखाई दिया.


कुछ चित्रों में मंगल ग्रह पर कृषि और मानव बस्तियों की कल्पना की गई तो कुछ में पृथ्वी से दूर भविष्य की काल्पनिक नगरी दिखाई दी. कई चित्रों में तकनीक और प्रकृति के बीच संतुलन का संदेश दिया गया, जबकि कुछ विद्यार्थियों ने भविष्य की प्रयोगशालाओं और अंतरिक्ष अभियानों को अपनी कला का विषय बनाया.


प्रतियोगिता में एक ओर धुएं से घिरे शहर और ऑक्सीजन सिलेंडर नजर आए तो दूसरी ओर हरित आवास और अंतरिक्ष में तैरते यान दिखाई दिए. प्रदूषण और पर्यावरण संकट के बीच हरित भविष्य की कल्पना का यह विरोधाभास प्रतियोगिता की प्रमुख विशेषता रहा.


7 सितंबर से शुरू हुआ था ‘अन्विति’ का सफर


‘अन्विति हिंदी सप्ताह’ की शुरुआत 7 सितंबर को ‘काव्य सरिता’ से हुई थी। इसके बाद 8 सितंबर को ‘कथा सृजन’, 9 सितंबर को वाद-विवाद प्रतियोगिता और 10 सितंबर को ‘ज्ञान प्रभा’ प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को हिंदी में कविता, कहानी, तर्क-वितर्क और वैज्ञानिक विषयों को अभिव्यक्त करने का मंच मिला।



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15 सितंबर को संजय मिश्रा के साथ हिंदी दिवस समारोह


‘अन्विति’ हिंदी सप्ताह का समापन अब 15 सितंबर को हिंदी दिवस समारोह के साथ होगा। समारोह का आयोजन महामना हॉल, सेमिनार कॉम्प्लेक्स, विज्ञान संकाय में दोपहर 2:45 बजे किया जाएगा। कार्यक्रम में प्रख्यात अभिनेता संजय मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।


इस अवसर पर ‘अचिंत्य’ पत्रिका की नई कड़ी ‘क्षितिज से परे’ का विमोचन भी प्रस्तावित है। समारोह के साथ ही ‘अन्विति’ के तहत आयोजित विभिन्न साहित्यिक, बौद्धिक और रचनात्मक गतिविधियों का समापन होगा।

स्वीटजरलैंड के नागरिक का १० लाख का खोया कैमरा मिला
स्वीटजरलैंड के नागरिक का १० लाख का खोया कैमरा मिला
वाराणसी : स्विट्जरलैंड से वाराणसी घूमने आए जोनस बेंजामिन ईहले नामक व्यक्ति द्वारा भारत में फोटोग्राफी करने के लिए काफी अच्छी गुणवत्ता का Leica कंपनी का लगभग 10 लाख रुपए कीमत का कैमरा लेकर आए थे, जिसको वह घाट के पास रखकर कही भूल गए तथा अपने स्तर से काफी खोजने का काफी प्रयास किए किंतु असफल रहे. जिसके पश्चात उनके द्वारा घटना की सूचना दशाश्वमेध चौकी पर जाकर चौकी प्रभारी दशाश्वमेध अनुज मणि तिवारी को दिया, जिसके पश्चात पुलिस द्वारा तत्परता करते हुए सीसीटीवी कैमरा व अन्य माध्यमों से महज 2 घंटे के अंदर कैमरा खोज कर जोनस बेंजामिन ईहले को सुपुर्द किया गया। पुलिस की इतनी तत्परता से कार्यवाही करते हुए अपने काफी महंगे कैमरे को वापस पाकर जोनस बेंजामिन द्वारा वाराणसी पुलिस का अपने शब्दों में कृतज्ञता व्यक्त किया गया। पुलिस टीम में चौकी प्रभारी दशाश्वमेध अनुज मणि तिवारी, उप निरीक्षक शिव स्वरूप पाण्डेय, का. देवेंद्र प्रताप सिंह, भूपेंद्र सिंह, संजय यादव व संजीव कुमार शामिल थे।ALSO READ : प्रो. राजनाथ बने डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद के सदस्य
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वाराणसी: सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष एवं पुस्तकालयाध्यक्ष प्रो. राजनाथ को लखनऊ स्थित डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद का सदस्य नामित किया गया है।उत्तर प्रदेश राज्यपाल सचिवालय की ओर से 30 सितंबर 2026 को जारी आदेश के तहत डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय अधिनियम, 2009 की धारा 14(1)(छ) के अंतर्गत यह नामांकन किया गया है। उनका कार्यकाल पत्र जारी होने की तिथि से दो वर्ष अथवा अग्रिम आदेश तक, जो भी पहले हो, निर्धारित किया गया है।प्रो. राजनाथ वर्तमान में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष के साथ पुस्तकालयाध्यक्ष का दायित्व भी संभाल रहे हैं। विश्वविद्यालय परिवार ने उनके नामांकन पर प्रसन्नता जताते हुए उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं। कुलानुशासक प्रो. जितेन्द्र कुमार, प्रो. महेन्द्र पाण्डेय, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग समेत विश्वविद्यालय परिवार ने उनके उज्ज्वल कार्यकाल की कामना की।ALSO READ: बीएचयू के दक्षिणी परिसर में APACON-2026 का शुभारंभ, सतत पशुधन उत्पादन पर वैज्ञानिक मंथन
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वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय के राजीव गांधी दक्षिणी परिसर में पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन APACON-2026 का सोमवार को शुभारंभ हुआ। सम्मेलन का विषय ‘सतत पशुधन उत्पादकता की दिशा में पशु शरीर क्रिया विज्ञान के उभरते प्रतिमान : विकसित भारत की ओर’ रखा गया है। दक्षिणी परिसर में पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय की ओर से यह पहला राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन है।उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय ने आधारभूत संरचना और संकाय से जुड़ी चुनौतियों को लगातार दूर करते हुए प्रगति की है। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलन वैज्ञानिकों और युवा शोधकर्ताओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और संवाद का मंच उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने वैज्ञानिक संस्थानों के बीच सहयोग, संयुक्त शोध परियोजनाओं, उद्योगों के साथ साझेदारी, नवाचार, पेटेंट और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर जोर दिया।विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय पशु जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (NIAB), हैदराबाद के निदेशक डॉ. रवि कुमार गंधम ने पशुओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता और ताप सहनशीलता जैसे शारीरिक लक्षणों के आनुवंशिक और बाह्य स्तर पर समग्र अध्ययन की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि प्रयोगशालाओं में हो रहे शोध को किसानों के लिए उपयोगी समाधानों में बदलना वैज्ञानिकों की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने मीथेन उत्सर्जन को मापने और उसका डेटाबेस तैयार करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी।राजीव गांधी दक्षिणी परिसर के आचार्य प्रभारी प्रो. बी. एम. एन. कुमार ने कहा कि सतत पशुधन उत्पादन में पशु चिकित्सा शरीर क्रिया विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका है। वहीं कृषि विज्ञान संकाय के संकाय प्रमुख प्रो. सतीश कुमार सिंह ने सटीक पोषण और वास्तविक समय स्वास्थ्य निगरानी को पशुधन स्वास्थ्य सुधार तथा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी के लिए महत्वपूर्ण बताया।APA के अध्यक्ष डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने पशुधन उत्पादकता, स्वास्थ्य, कल्याण और जलवायु-सहिष्णुता में पशु शरीर क्रिया विज्ञान की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। APA के महासचिव एवं ICAR-भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. विकास चंद्र ने APA 2025 के विभिन्न पुरस्कारों के विजेताओं की घोषणा की।सम्मेलन के पहले दिन पशुधन प्रजनन, प्रजनन जैव प्रौद्योगिकी, तनाव शरीर क्रिया विज्ञान, ताप तनाव निगरानी, जलवायु-सहिष्णुता, जीनोम इंजीनियरिंग, क्रायोसंरक्षण, पुनर्योजी चिकित्सा और सतत पशुधन उत्पादन जैसे विषयों पर वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए। इसमें युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को वरिष्ठ वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों से संवाद का अवसर मिला।सम्मेलन में जर्मनी के लाइबनिज इंस्टीट्यूट फॉर एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग एंड बायोइकोनॉमी (ATB), पॉट्सडैम की डॉ. गुंडुला हॉफमैन ने ऑनलाइन माध्यम से बीज वक्तव्य दिया। इसके अलावा डॉ. बी. एस. प्रकाश और अमेरिका के डॉ. आशीष रंजन ने भी व्याख्यान दिए।इस अवसर पर Compendium of Abstracts – APACON-2026, Compendium of Lead Papers – APACON-2026 तथा Fundamentals of Livestock and Poultry Management पुस्तकों का विमोचन किया गया।सम्मेलन के दौरान APA Lifetime Achievement Award-2025 प्रो. बी. एस. प्रकाश को प्रदान किया गया। APA Fellow Awards डॉ. आशीष मिश्रा और डॉ. बी. रामबाबू नाइक को, जबकि APA Best Teacher Awards डॉ. सोहन वीर सिंह, डॉ. निशांत कुमार और डॉ. राकेश कुमार सिंह को दिए गए। इसके अलावा APA Best Girl Student Award, APA Best PhD Thesis Award, Prof. A. K. Pal Best MVSc Thesis Award और APA Best Research Paper Award भी प्रदान किए गए।ALSO READ : वाराणसी में मंत्री के क्षेत्र में लकड़ी का पुल बना आवागमन का सहारा, जलभराव से जीना दुष्‍करपशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय के संकाय प्रमुख प्रो. अमित राज गुप्ता ने स्वागत संबोधन में कहा कि पशुधन उत्पादन के भविष्य के लिए मौलिक शरीर क्रिया विज्ञान को जीनोमिक्स, जैव प्रौद्योगिकी, सहायक प्रजनन तकनीक, सटीक पशुधन पालन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा विज्ञान जैसी आधुनिक तकनीकों से जोड़ना जरूरी है। आयोजन सचिव डॉ. मनीष कुमार ने सम्मेलन की आगामी गतिविधियों की जानकारी दी। उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. उत्कर्ष कुमार त्रिपाठी ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. तुलसीरामन पी. ने किया।पहले दिन का समापन वैज्ञानिक चर्चाओं, शोध प्रस्तुतियों और विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों के बीच संवाद के साथ हुआ। सम्मेलन में देश-विदेश के विशेषज्ञों और युवा शोधकर्ताओं की भागीदारी से सतत पशुधन उत्पादन तथा विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर नए शोध और तकनीकी सहयोग की संभावनाओं पर मंथन हुआ।