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CM पोर्टल पर सड़क ‘पूर्ण’, जमीन पर गड्ढों का साम्राज्य…

CM पोर्टल पर सड़क ‘पूर्ण’, जमीन पर गड्ढों का साम्राज्य…
Jun 16, 2026, 07:17 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी : सारनाथ क्षेत्र स्थित नंदन नगर कॉलोनी के लोगों में नगर निगम के खिलाफ नाराजगी बढ़ती जा रही है. वजह है कॉलोनी की करीब 180 मीटर लंबी सड़क, जिसे खोदकर महीनों से अधूरा छोड़ दिया गया है. हैरानी की बात यह है कि जिस सड़क पर लोग रोजाना धूल, कीचड़ और गड्ढों से जूझ रहे हैं, उसे मुख्यमंत्री पोर्टल पर “निर्माण कार्य पूर्ण” दिखा दिया गया है.


स्थानीय लोगों के अनुसार, नंदन नगर मोहल्ला चंद्रा तिराहे से बलुआ मार्ग के पास स्थित है, जहां सड़क की हालत लंबे समय से खराब बनी हुई है. क्षेत्रवासियों का कहना है कि सड़क निर्माण की मांग को लेकर नगर निगम से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक कई बार शिकायत की गई, लेकिन अब तक समस्या जस की तस बनी हुई है.


जानकारी के मुताबिक, नंदन नगर कॉलोनी में खराब सड़क और जल निकासी की समस्या को देखते हुए नगर निगम द्वारा लगभग 9 लाख 99 हजार रुपये की लागत से सड़क और नाली निर्माण की मंजूरी दी गई थी. वर्ष 2024 में कॉलोनी में लगभग 100 मीटर सड़क सीसी के रूप में बनाई भी गई, लेकिन बाद में पेयजल पाइपलाइन डालने के लिए सड़क को खोद दिया गया और दोबारा निर्माण नहीं कराया गया.


स्थानीय निवासी सियाराम सिंह का कहना है कि सड़क वर्षों से खराब पड़ी है और बजट जारी होने के बाद भी निर्माण शुरू नहीं हुआ. वहीं अशोक कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि बारिश के समय हालात और खराब हो जाते हैं तथा सीवर सफाई भी नियमित नहीं होती. बुजुर्गों और बच्चों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है.


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इस मामले में नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि पेयजल और गैस पाइपलाइन बिछाने का कार्य पूरा होने के बाद ही सड़क का निर्माण कराया जाएगा. फिलहाल क्षेत्रवासी जांच कर जल्द सड़क निर्माण शुरू कराने की मांग कर रहे हैं.

बीएचयू लॉ फैकल्टी की राष्ट्रीय रैंकिंग में बड़ी उपलब्धि, वैल्यू-फॉर-मनी लॉ कॉलेजों में देश में नंबर-1
बीएचयू लॉ फैकल्टी की राष्ट्रीय रैंकिंग में बड़ी उपलब्धि, वैल्यू-फॉर-मनी लॉ कॉलेजों में देश में नंबर-1
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के लॉ फैकल्टी ने वर्ष 2026 की प्रमुख राष्ट्रीय रैंकिंग में शानदार प्रदर्शन करते हुए कानूनी शिक्षा के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान कायम की है। बेस्ट कॉलेज सर्वे 2026 में फैकल्टी ने देश के 10 बेस्ट वैल्यू-फॉर-मनी लॉ कॉलेजों की श्रेणी में पहला स्थान हासिल किया है। फैकल्टी का रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) स्कोर 78.53 रहा। वहीं सभी लॉ संस्थानों की समग्र रैंकिंग में 1428.1 के कंपोजिट स्कोर के साथ इसे देश में 13वां स्थान मिला।फैकल्टी ने द वीक-हंसा रिसर्च सर्वे 2026 में भी देशभर में आठवीं रैंक हासिल की है। इसके अलावा आउटलुक सर्वे 2026 में लॉ फैकल्टी को देश में 11वां स्थान मिला, जबकि IIRF लॉ रैंकिंग 2026 में फैकल्टी देश में 13वें और उत्तर प्रदेश में तीसरे स्थान पर रही। IIRF में फैकल्टी का ओवरऑल इंडेक्स स्कोर 70.84 रहा।सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्ट में भी बीएचयू के योगदान का उल्लेखराष्ट्रीय रैंकिंग के अलावा बीएचयू लॉ फैकल्टी के क्लिनिकल लीगल एजुकेशन और न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने के ऐतिहासिक योगदान को भारत के सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक रिपोर्ट में भी प्रमुखता से रेखांकित किया गया है। सेंटर फॉर रिसर्च एंड प्लानिंग द्वारा अक्टूबर 2024 में प्रकाशित “लीगल एड थ्रू लॉ स्कूल्स: ए रिपोर्ट ऑन वर्किंग ऑफ लीगल एड सेल्स इन इंडिया” में बीएचयू के योगदान का उल्लेख किया गया है।रिपोर्ट के अनुसार, बीएचयू ने 1970 के दशक की शुरुआत में भारत के शुरुआती क्लिनिकल लॉ कोर्स में से एक शुरू किया था। इसके तहत सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में क्लिनिक आधारित कानूनी सहायता, अदालतों का दौरा और अधिवक्ताओं के साथ इंटर्नशिप जैसी व्यवस्थाओं को जोड़ा गया था।रिपोर्ट में बीएचयू के लीगल एड एंड सर्विसेज क्लिनिक की ओर से 2017 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर क्रिमिनल पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) का भी उल्लेख है। इस मामले के बाद उत्तर प्रदेश सरकार को कैदियों की दैनिक मजदूरी बढ़ाने और जेलों में भीड़ कम करने के लिए अतिरिक्त सुधार गृहों के निर्माण की दिशा में कदम उठाने पड़े।ALSO READ : वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ पूजन-अर्चन, पुष्पों और फलों से सजा माँ गंगा का दिव्य स्वरूपआधुनिक सुविधाओं और शोध पर रहेगा जोरलॉ फैकल्टी के प्रमुख एवं डीन प्रो. (डॉ.) प्रदीप कुमार सिंह ने इन उपलब्धियों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि फैकल्टी अपनी समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण, अत्याधुनिक कानूनी शोध, उद्योग और न्यायपालिका के साथ साझेदारी मजबूत करने तथा छात्रों की प्रो-बोनो कानूनी सेवा पहलों को सक्रिय करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।उन्होंने कहा कि शैक्षणिक और विकास के सभी मानकों को बेहतर बनाते हुए फैकल्टी की रैंकिंग में निरंतर सुधार का प्रयास किया जाएगा। साथ ही नैतिक मूल्यों से युक्त और विश्वस्तरीय कानूनी पेशेवर तैयार करने की दिशा में संस्थान को और मजबूत किया जाएगा।


वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ पूजन-अर्चन, पुष्पों और फलों से सजा माँ गंगा का दिव्य स्वरूप
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ पूजन-अर्चन, पुष्पों और फलों से सजा माँ गंगा का दिव्य स्वरूप
वाराणसी : पावन नगरी काशी के दशाश्वमेध घाट पर मंगलवार को गंगोत्री सेवा समिति की ओर से आयोजित भव्य गंगा आरती के दौरान माँ गंगा का विशेष हरियाली एवं झूला श्रृंगार किया गया। इस अवसर पर विधि-विधान से पूजन-अर्चन के बाद माँ गंगा का मनोहारी श्रृंगार किया गया। हरियाली, रंग-बिरंगे पुष्पों, विभिन्न प्रकार के फूलों और फलों से सुसज्जित माँ गंगा का दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा।कार्यक्रम की शुरुआत माँ गंगा के पूजन-अर्चन से हुई। आचार्यों एवं समिति के सदस्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच माँ गंगा का विधिवत पूजन किया गया। गंगाजल, पुष्प, अक्षत, रोली, चंदन, फल एवं अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर माँ गंगा का आह्वान किया गया। इसके बाद धूप-दीप प्रज्वलित कर आरती और स्तुति की गई। श्रद्धालुओं ने भी माँ गंगा के चरणों में पुष्प अर्पित कर सुख-समृद्धि और परिवार के मंगल की कामना की।— फूलों और फलों से हुआ आकर्षक श्रृंगारपूजन के उपरांत माँ गंगा का विशेष हरियाली श्रृंगार किया गया। विभिन्न प्रकार के हरे पत्तों, बेल-पत्र, मौसमी हरियाली और सुगंधित पुष्पों से घाट पर आकर्षक सजावट की गई। इसके साथ ही अनेक प्रकार के फूलों और फलों से माँ गंगा के श्रृंगार को भव्य रूप दिया गया। प्राकृतिक सामग्री से तैयार श्रृंगार ने पूरे आयोजन को विशेष आकर्षण प्रदान किया।— झूला श्रृंगार ने मोहा श्रद्धालुओं का मनहरियाली श्रृंगार के साथ माँ गंगा का झूला श्रृंगार भी किया गया। आकर्षक फूलों और हरियाली से सजे झूले को विशेष रूप से सजाया गया। झूला श्रृंगार के दर्शन के लिए घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। माँ गंगा का मनोहारी स्वरूप देखते ही बन रहा था। श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुष्प अर्पित किए और भक्ति भाव से आरती में सहभागिता की।— गंगा आरती के दौरान गूंजे मंत्र और जयकारेविशेष श्रृंगार के बाद दशाश्वमेध घाट पर भव्य गंगा आरती का आयोजन हुआ। आरती के दौरान शंखनाद, घंटियों और मंत्रोच्चार से पूरा घाट गूंज उठा। दीपों की रोशनी और फूलों से सजे माँ गंगा के स्वरूप ने वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। गंगा आरती के दर्शन के लिए घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।ALSO READ : बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में एड्स जागरूकता अभियान, दिए गए चिकित्‍सकीय परामर्शगंगोत्री सेवा समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि माँ गंगा के प्रति श्रद्धा और आस्था को समर्पित इस विशेष आयोजन का उद्देश्य सनातन परंपराओं एवं धार्मिक संस्कृति को जीवंत बनाए रखने के साथ ही प्रकृति और पर्यावरण के प्रति प्रेम का संदेश देना है। हरियाली एवं प्राकृतिक वस्तुओं से किए गए श्रृंगार के माध्यम से लोगों को प्रकृति के संरक्षण के प्रति जागरूक करने का प्रयास भी किया गया। समिति की ओर से बताया गया कि माँ गंगा भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना की प्रमुख धारा हैं। इसलिए उनकी आराधना के साथ स्वच्छता, हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेना भी प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में  एड्स जागरूकता अभियान, दिए गए चिकित्‍सकीय परामर्श
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में एड्स जागरूकता अभियान, दिए गए चिकित्‍सकीय परामर्श
वाराणसी : प्रिज्मैटिक फाउंडेशन के तत्वावधान में आज मंगलवार को पंचायत भवन, सलारपुर, वाराणसी में एड्स जागरूकता एवं निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया. शिविर का मुख्य उद्देश्य क्वीयर और ट्रांसजेंडर समुदाय के नेतृत्व में समाज में एचआईवी एवं एड्स के प्रति जागरूकता बढ़ाना, एचआईवी से जुड़े भ्रम एवं भेदभाव को दूर करना तथा लोगों को निःशुल्क स्वास्थ्य जांच और परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराना रहा. बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आयोजित होने के कारण शिविर में मौसमी बीमारियों तथा बाढ़ के बाद होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की भी जांच एवं चिकित्सकीय परामर्श दिए गए.शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की टीम द्वारा लोगों को एचआईवी/एड्स, यौन संचारित संक्रमण, सर्दी-जुकाम, बुखार तथा अन्य मौसमी बीमारियों के साथ-साथ बाढ़ के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं, दूषित पानी से होने वाले संक्रमण, त्वचा संबंधी समस्याओं और अन्य सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति जागरूक किया गया. इच्छुक लोगों के लिए स्वैच्छिक एवं गोपनीय एचआईवी जांच, सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण तथा चिकित्सकीय परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराई गई.शिविर में उपलब्ध प्रमुख सेवाएं- एचआईवी/एड्स एवं यौन संचारित संक्रमण के संबंध में जागरूकता- निःशुल्क एवं गोपनीय एचआईवी जांच- सामान्य स्वास्थ्य जांच- मौसमी बीमारियों की जांच एवं उपचार संबंधी परामर्श- बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं की जांच एवं चिकित्सकीय मार्गदर्शन- दूषित पानी एवं जलभराव से होने वाले संक्रमणों से बचाव की जानकारी- रक्तचाप एवं वजन की जांच- आंखों की जांच- निःशुल्क दवा का वितरण- स्वास्थ्य संबंधी परामर्श एवं मार्गदर्शन- सुरक्षित व्यवहार एवं एचआईवी से बचाव के उपायों की जानकारी- स्वास्थ्य संबंधी सूचना एवं जागरूकता सामग्री का वितरणशिविर में ट्रांसजेंडर एवं क्वीयर समुदाय, महिलाओं, पुरुषों, युवाओं, किशोर-किशोरियों तथा अन्य समुदायों के लोगों को विशेष रूप से शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया गया. आयोजकों ने कहा कि एचआईवी/एड्स को लेकर समाज में मौजूद डर, भ्रांतियों और भेदभाव को समाप्त करने के लिए जागरूकता और संवेदनशीलता बेहद जरूरी है.शिविर में विशेषज्ञों के रूप में डॉ. संजीव (जनरल फिजिशियन एवं स्वास्थ्य परामर्श एवं मार्गदर्शन), SSPG कबीरचौरा अस्पताल; डॉ. मनीषा राय (परामर्शदाता), सम्पूर्ण सुरक्षा केंद्र, SSPG कबीरचौरा अस्पताल; डॉ. मयंक कुमार (डी.आर. ओ.पी.टी. एवं वरिष्ठ नर्स प्रशिक्षण अधिकारी), माता आनंदमयी अस्पताल; और डॉ. संतोष यादव ने स्वास्थ्य संबंधी परामर्श एवं मार्गदर्शन प्रदान किया. प्रिज्मैटिक फाउंडेशन की ओर से अनामिका ने कहा कि एचआईवी एक वायरस है जो शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करता है. समय पर जांच, चिकित्सकीय सलाह और उचित उपचार के माध्यम से एचआईवी के साथ स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है. इसलिए किसी भी व्यक्ति को एचआईवी को लेकर भय या सामाजिक बहिष्कार का सामना नहीं करना चाहिए.ALSO READ : ससुराल में सपरिवार पहुंचे चंद्रमौलीश्वर, बौद्ध परिपथ पर गूंजा हर-हर महादेवरूमान ने कहा कि एड्स का वर्तमान में पूर्ण इलाज उपलब्ध नहीं है, लेकिन चिकित्सकीय देखरेख, समय पर जांच और उचित उपचार के माध्यम से एचआईवी के साथ लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है. इसलिए जागरूकता, समय पर जांच और सही चिकित्सकीय सलाह बेहद महत्वपूर्ण है. नीति ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है और समाज में किसी भी बीमारी या स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए. “सबके लिए स्वास्थ्य, समान अधिकार और समान सम्मान” की भावना के साथ संस्था आगे भी ऐसे स्वास्थ्य एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करती रहेगी. स्वास्थ्य शिविर में प्रमुख रूप से नैंसी, इकबाल, आदित्य कृष्णा, टैन, दुर्गा, सोनम, तनु, अनु, सैम, रागिनी, छोटी, शिवानी, प्यूष, बनी सहित दर्जनों क्वीयर और ट्रांस समुदाय के लोग और आस पास के गांव से सैकड़ों लोग शामिल रहे.