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भीषण गर्मी से राहत के लिए गंगा में अनूठा अनुष्ठान: राग 'मेघ' से इंद्रदेव को रिझाने की कोशिश...

भीषण गर्मी से राहत के लिए गंगा में अनूठा अनुष्ठान: राग 'मेघ' से इंद्रदेव को रिझाने की कोशिश...
Jun 16, 2026, 08:26 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी : ज्येष्ठ-आषाढ़ की तपती दुपहरी और प्रचंड गर्मी से बेहाल काशीवासियों को राहत दिलाने के लिए काशी में एक बेहद अनूठा अनुष्ठान देखने को मिला. जहां एक ओर काशी के गंगा तटों पर रोज़ाना सुबह-शाम वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-पाठ और पवित्र स्नान का दौर चल रहा है, वहीं दूसरी ओर बारिश के देवता भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए संगीत के सुरों की 'कवायद' शुरू हो गई है. मान्यता है कि जब इंसान की प्रार्थनाओं में सुरों का तालमेल जुड़ जाता है, तो देवता भी पिघल जाते हैं. इसी आस के साथ सुर-सरिता के माध्यम से काशी को झुलसाने वाली गर्मी से निजात दिलाने की प्रार्थना की जा रही है.


गंगा में गूंजी शहनाई, चढ़ाई 'पियरी'


धर्म और अध्‍यात्‍म की नगरी के ऐतिहासिक रीवा घाट पर आज मंगलवार की सुबह एक अद्भुत और अलौकिक दृश्य देखने को मिला. काशी विश्वनाथ मंदिर के शहनाई वादक पंडित महेंद्र प्रसन्ना और उनकी पूरी टीम ने इस विशेष अनुष्ठान का बीड़ा उठाया. गंगा पूजन और वंदन के पश्चात् अनुष्ठान की शुरुआत मां गंगा के विधि-विधान से पूजन-अर्चन के साथ हुई. कलाकारों ने मां गंगा को पारंपरिक 'पियरी' (पीला वस्त्र) अर्पित कर उनका वंदन किया और लोक-कल्याण की कामना की. ​राग 'मेघ' से बादलों को आमंत्रण - वैदिक काल से ही माना जाता रहा है कि शास्त्रीय संगीत के कुछ रागों में प्रकृति को बदलने की शक्ति होती है. इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए पंडित महेंद्र प्रसन्ना ने अपनी शहनाई पर राग मेघ को साधा. शहनाई से निकले इस राग के गंभीर और मधुर स्वरों ने घाट पर मौजूद हर श्रद्धालु को मंत्रमुग्ध कर दिया. ऐसा लगा मानो सुरों के माध्यम से आसमान में उमड़ते-घुमड़ते बादलों को सीधे काशी आने का निमंत्रण दिया जा रहा हो.


​"इंद्र बरसो रे काशी नगरिया..." से हुई पूर्णाहूति


​राग मेघ के शास्त्रीय वादन के बाद, टीम ने क्लासिकल संगीत और पारंपरिक भजनों की झड़ी लगा दी. शहनाई की जादुई धुन पर जब लोक-भावनाओं को समेटे हुए भजन गूंजे, तो घाट का पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा. ​काशी सिर्फ धर्म की ही नहीं, बल्कि संगीत की भी राजधानी है.


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जब-जब काशी पर कोई संकट या प्राकृतिक आपदा (जैसे भीषण गर्मी या सूखा) आती है, तब यहां के कलाकार और विद्वान अपनी कला को ही ईश्वर की आराधना का माध्यम बना लेते हैं. रीवा घाट पर हुआ यह आयोजन इस बात का जीवंत प्रमाण है कि आज भी काशी की रगों में बाबा बिस्मिल्लाह खान की शहनाई और शास्त्रीय परंपराएं जिंदा हैं, जो लोक-कल्याण के लिए हमेशा तत्पर रहती हैं. घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं को पूरी उम्मीद है कि शहनाई की यह पुकार सीधे इंद्रलोक तक पहुंचेगी और जल्द ही काशी कल्याणी पर बादलों की मेहरबानी होगी.

संपूर्णानंद विश्वविद्यालय परिसर से निकली तिरंगा यात्रा, ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष से गूंजा मार्ग
संपूर्णानंद विश्वविद्यालय परिसर से निकली तिरंगा यात्रा, ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष से गूंजा मार्ग
वाराणसी: सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में राष्ट्रभाव, अनुशासन और देशभक्ति की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रतिदिन तिरंगा यात्रा निकाली जा रही है, साहित्य संस्कृति संकायाध्यक्ष एवं मुख्य छात्रावास के चीफ वार्डन प्रो. दिनेश कुमार गर्ग के नेतृत्व में निकाली जा रही यह यात्रा विश्वविद्यालय के मुख्य भवन से शुरू होकर लहुराबीर स्थित अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा तक पहुंच रही है.यात्रा में विश्वविद्यालय के एनसीसी कैडेट्स, एनएसएस स्वयंसेवक और स्काउट-गाइड के विद्यार्थी हाथों में तिरंगा लेकर उत्साह और अनुशासन के साथ शामिल हो रहे हैं। इस दौरान ‘भारत माता की जय’ समेत देशभक्ति के जयघोष से पूरा मार्ग राष्ट्रप्रेम की भावना से गूंज उठता है.प्रो. दिनेश कुमार गर्ग ने कहा कि तिरंगा केवल राष्ट्रध्वज नहीं, बल्कि भारत की अस्मिता, गौरव, एकता और अखंडता का जीवंत प्रतीक है, युवाओं के हाथों में तिरंगा देश के उज्ज्वल भविष्य के प्रति विश्वास जगाता है. उन्होंने कहा कि तिरंगा यात्रा का उद्देश्य विद्यार्थियों में राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध, अनुशासन, त्याग और समर्पण की भावना को मजबूत करना है.उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा तक यात्रा पहुंचाना विद्यार्थियों को स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और राष्ट्रनिष्ठा से जोड़ने का माध्यम है, संस्कृत विश्वविद्यालय केवल शिक्षा और ज्ञान का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, राष्ट्रचेतना और संस्कारों का भी महत्वपूर्ण केंद्र है.ALSO READ: बारावफात की सजावट के दौरान करंट की चपेट में पिता-पुत्र की मौत, वाटर कूलर से करंट लगने पर एक और व्यक्ति ने गंवाई जानतिरंगा यात्रा में डॉ. विजेन्द्र आर्य, डॉ. रविशंकर पाण्डेय, डॉ. नितिन कुमार आर्य समेत विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं. हाथों में लहराता तिरंगा, विद्यार्थियों का अनुशासन और देशभक्ति के उद्घोष यात्रा को विशेष बना रहे हैं.विश्वविद्यालय के अनुसार, यह यात्रा विद्यार्थियों के लिए राष्ट्र के प्रति सम्मान, शहीदों के प्रति कृतज्ञता और भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत के प्रति संकल्प का प्रेरणादायी अभियान बन गई है.
बारावफात की सजावट के दौरान करंट की चपेट में पिता-पुत्र की मौत, वाटर कूलर से करंट लगने पर एक और व्यक्ति ने गंवाई जान
बारावफात की सजावट के दौरान करंट की चपेट में पिता-पुत्र की मौत, वाटर कूलर से करंट लगने पर एक और व्यक्ति ने गंवाई जान
वाराणसी: सिगरा थाना क्षेत्र के लल्लापुरा स्थित काजीपुर खुर्द में मंगलवार सुबह बारावफात की सजावट के दौरान दर्दनाक हादसा हो गया। करंट की चपेट में आने से पिता-पुत्र की मौत हो गई. वहीं, चेतगंज निवासी करीब 55 वर्षीय त्रिलोकी मोदनवाल की भी वाटर कूलर से करंट लगने के कारण मौत हो गई, एक ही दिन में करंट से तीन लोगों की मौत की घटनाओं से इलाके में हड़कंप मच गया.जानकारी के अनुसार, काजीपुर खुर्द निवासी सलीमुद्दीन उर्फ पप्पू (45) पुत्र रफीकुद्दीन अपने करीब 17 वर्षीय बेटे अनस के साथ घर के सामने बारावफात पर्व को लेकर सजावट कर रहे थे, मंगलवार सुबह करीब 8 बजे सजावट के दौरान अनस करंट की चपेट में आ गया.बेटे को बचाने के प्रयास में उसके पिता सलीमुद्दीन भी करंट की चपेट में आ गए, हादसे में दोनों की मौत हो गई. घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास के लोग भी जुट गए.घटना की सूचना मिलते ही सिगरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक विधिक कार्रवाई शुरू की. पुलिस के अनुसार, मौके पर शांति व्यवस्था कायम है. पिता-पुत्र की मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है.ALSO READ: हुकुलगंज में ट्रांसफार्मर में जोरदार ब्लास्ट, गर्म तेल के छींटों से मची अफरा-तफरीवहीं, चेतगंज निवासी करीब 55 वर्षीय मोदनवाल भी करंट की चपेट में आ गए. बताया जा रहा है कि उन्हें वाटर कूलर में उतरे करंट का झटका लगा था. हादसे में उनकी भी मौत हो गई, पुलिस ने इस मामले में भी आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है, लगातार सामने आई करंट लगने की इन घटनाओं से इलाके में लोगों के बीच शोक का माहौल है.
हुकुलगंज में ट्रांसफार्मर में जोरदार ब्लास्ट, गर्म तेल के छींटों से मची अफरा-तफरी
हुकुलगंज में ट्रांसफार्मर में जोरदार ब्लास्ट, गर्म तेल के छींटों से मची अफरा-तफरी
वाराणसी: लालपुर थाना क्षेत्र में मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब हुकुलगंज ताड़ीखाना तिराहे पर अर्बन हाट के पास लगे ट्रांसफार्मर में अचानक जोरदार ब्लास्ट हो गया, धमाका इतना तेज था कि आसपास मौजूद लोगों में दहशत फैल गई. ट्रांसफार्मर से निकले गर्म तेल के छींटे पास में ठेला लगाने वाले लोगों के ऊपर भी जा गिरे.प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इलाके में सामान्य रूप से लोग अपने काम में जुटे थे, इसी दौरान अचानक ट्रांसफार्मर में तेज आवाज के साथ विस्फोट हुआ. ब्लास्ट के बाद ट्रांसफार्मर से गर्म तेल बाहर निकलने लगा और आसपास फैल गया. गर्म तेल के छींटे ठेला लगाने वाले लोगों तक पहुंचने से मौके पर कुछ देर के लिए भगदड़ जैसी स्थिति बन गई.अचानक हुए धमाके के बाद आसपास मौजूद लोग सुरक्षित स्थान की ओर भागने लगे। स्थानीय लोगों ने तत्काल घटना की सूचना संबंधित बिजली विभाग को दी. इसके बाद मौके पर स्थिति को संभालने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई.फिलहाल घटना में किसी के घायल होने की सूचना सामने नहीं आई है. हालांकि, जिस स्थान पर ट्रांसफार्मर लगा है, वहां आसपास ठेले और लोगों की आवाजाही रहती है, ऐसे में ब्लास्ट के कारण बड़ा हादसा भी हो सकता था.ALSO READ: वाराणसी में होटल बुकिंग कैंसिल कराना पड़ा महंगा, फर्जी कस्टमर केयर ने पर्यटक से लाखों ठगेस्थानीय लोगों ने बिजली विभाग से ट्रांसफार्मर की जांच कराने और खराबी को जल्द ठीक कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.