Daily Bulletin Tag
AI गार्गी दैनिक बुलेटिन

वाराणसी में बलिदानियों की स्‍मृति में बनेगा म्‍यूरल पार्क, 18 एकड़ में विकसित होंगी पर्यटन सुविधाएँ...

वाराणसी में बलिदानियों की स्‍मृति में बनेगा म्‍यूरल पार्क, 18 एकड़ में विकसित होंगी पर्यटन सुविधाएँ...
Jun 16, 2026, 07:56 AM
|
Posted By Diksha Mishra

वाराणसी : जिले के पिंडरा विकासखंड स्थित करखियांव गांव औद्योगिक क्षेत्र के बाद अब स्वतंत्रता संग्राम पर्यटन सर्किट से भी जुड़ने वाला है. पर्यटन विभाग को इसके लिए 18.26 करोड़ रुपये की प्रस्तावित धनराशि में से पहली किस्त के रूप में आठ करोड़ रुपये जारी किए गए हैं. यहां करीब 18 एकड़ क्षेत्र में म्यूरल पार्क (भित्ति चित्र) बनेगा. इसमें स्वतंत्रता सेनानियों की गौरवगाथा संरक्षित की जाएगी. आधुनिक पर्यटक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी.


26 स्‍तंभ, हर एक पर बलिदानी का प्रतिनिधित्‍व


गांव के 26 बलिदानियों की याद में बनने वाले इस म्यूरल पार्क में उनकी वीरगाथाओं को चित्रों के माध्यम से उकेरा जाएगा. इसके साथ ही 26 स्तंभ भी स्थापित किए जाएंगे. हर स्तंभ एक बलिदानी का प्रतिनिधित्व करेगा. करखियांव गांव का स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान रहा है.

1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर देश की आजादी तक यहां के लोगों ने हर आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.


DDD


सबसे अधिक स्‍वतंत्रता संग्राम सेनानी वाला गांव


स्थानीय इतिहास के अनुसार जिले में सबसे ज्यादा स्वतंत्रता सेनानी इसी गांव से थे. यह गांव 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की एक महत्वपूर्ण घटना का भी गवाह रहा है. इस पर्यटन परियोजना के जरिये इन वीरों के बलिदान और आजादी की लड़ाई के इतिहास को देश-दुनिया तक पहुंचाया जाएगा. पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार पर्यटन को इतिहास, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा से जोड़ने का कार्य कर रही है.


ALSO READ : श्रीकाशी विश्‍वनाथ धाम से दशाश्‍वमेध घाट तक बनेगा पाथवे, श्रद्धालुओं को मिलेगी राहत...


इसी सोच के तहत स्वतंत्रता संग्राम सर्किट के अंतर्गत वाराणसी के करखियांव गांव को विकसित किया जा रहा है. इस गांव में शहीदों और सेनानियों की स्मृतियों को संरक्षित किया जाएगा. इससे नई पीढ़ी को देशभक्ति और बलिदान की प्रेरणा मिलेगी। यह स्थल पर्यटन के साथ-साथ राष्ट्रीय चेतना का भी महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा.

बीएचयू अस्पताल बना तालाब, कमर भर पानी, कंधे पर मरीज लेकर पहुंचे ओपीडी व इमरजेंसी
बीएचयू अस्पताल बना तालाब, कमर भर पानी, कंधे पर मरीज लेकर पहुंचे ओपीडी व इमरजेंसी
वाराणसी : काशी में सोमवार रात से शुरू हुई बारिश मंगलवार को भी लगातार जारी रही. बारिश के चलते सड़कें तालाब बन गईं हैं. वहीं रात से सुबह तक हुई बारिश से बीएचयू परिसर में कमर भर पानी भर गया. इस दौरान बीएचयू अस्पताल में इलाज के लिए आए मरीजों व तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ा. लोगों को कमर भर पानी में घुसकर जाना पड़ा. बच्चे व बुजुर्गों को गोद में उठाकर ले जाना पड़ा. उधर, बरेका में पानी भरने के कारण गेट बंद कर दिया गया है. ऐसे में आवागमन बाधित है. सोमवार की देर शाम से हो रही बारिश में बीएचयू अस्पताल में व्यवस्थाएं चरमरा गईं. पूरा अस्पताल तालाब बन गया.मंगलवार को ओपीडी से लेकर इमरजेंसी जाने वाले रास्ते के साथ ही खून जांच काउंटर, पर्ची, दवा काउंटर वाले रास्ते पर एक फीट से ज्यादा पानी भरा रहा. पानी भरने के कारण अस्पताल में स्ट्रेचर, व्हील चेयर तक नहीं जा सका. लोग मरीजों को कंधे पर बिठाकर ओपीडी और इमरजेंसी में पहुंचे. यह पहली बार नहीं है.हर वर्ष बारिश के मौसम में अस्पताल की यही स्थिति देखने को मिलती है. यहां हर दिन यूपी, बिहार, झारखंड आदि जगहों से करीब 6,000 मरीज इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं, वहीं मरीजों की भारी भीड़ के मुकाबले अस्पताल की व्यवस्थाएं नाकाफी नजर आती हैं. लेकिन जलभराव के विकराल रूप को देखते हुए मरीजों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है.ALSO READ : वाराणसी नगर निगम का एक्शन, डेढ़ घंटे में पानी गायब, 11 प्रमुख मार्गों से हटाए गए गिरे पेड़दर्जनों मरीज और उनके तीमारदार परिसर का दृश्य देखकर बिना डॉक्टर को दिखाए ही वापस लौटने पर मजबूर हो गए. जलभराव का सबसे गंभीर असर बाल रोग विभाग पर पडा. छोटे-छोटे बच्चों को लेकर पहुंचे अभिभावक पानी के बीच काफी परेशान नजर आए. नेत्र एवं ईएनटी विभाग में बुजुर्ग मरीजों की संख्या ज्यादा होती है, जिन्हें कमर भर पानी में चलने में भारी जोखिम उठाना पड़ा.
वाराणसी नगर निगम का एक्शन, डेढ़ घंटे में पानी गायब, 11 प्रमुख मार्गों से हटाए गए गिरे पेड़
वाराणसी नगर निगम का एक्शन, डेढ़ घंटे में पानी गायब, 11 प्रमुख मार्गों से हटाए गए गिरे पेड़
​वाराणसी : शहर में रातभर हुई मूसलाधार बारिश और तेज हवाओं के बाद पैदा हुई चुनौतियों से निपटने के लिए नगर निगम पूरी तरह अलर्ट है. बारिश थमते ही महापौर अशोक कुमार तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल खुद धरातल पर उतरे और शहर के विभिन्न स्थानों का दौरा कर महज डेढ़ घंटे के भीतर शहर को जलजमाव से राहत दिलाने के साथ यातायात व्यवस्था बहाल कराई. ​रातभर हुई भारी बारिश के कारण शहर के 11 प्रमुख मार्गों पर पेड़ गिर गए थे, जिससे आवागमन बाधित हुआ. निगम की टीमों ने तत्परता दिखाते हुए सुंदरपुर, सुसवाही, संसदीय कार्यालय के पास, आदमपुर पुलिस चौकी के पास, आदमपुर वार्ड, लक्ष्मी मंदिर (अशोक विहार कॉलोनी) में दो स्थानों पर तथा आशापुर से हवेलियां चौराहा तक तीन स्थानों पर गिरे पेड़ों की कटाई कराकर रास्ते तुरंत क्लियर कराए. सड़कों से लकड़ी उठाने का कार्य भी युद्धस्तर पर पूरा किया जा रहा है.महापौर और नगर आयुक्त ने संभाला मोर्चा​जलजमाव की गंभीरता को देखते हुए महापौर अशोक कुमार तिवारी ने जलकल विभाग के अधिकारियों संग खुद मोर्चे पर कमान संभाली. उन्होंने रविंद्रपुरी समेत विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों का जायजा लिया और अपनी मौजूदगी में जल-निकासी का काम पूरा कराया. इस दौरान जलकल विभाग के महाप्रबंधक अनूप सिंह और अधिशासी अभियंता आगम कटियार समेत तमाम आला अधिकारी मौके पर डटे रहे. निगम की इस त्वरित रणनीति का नतीजा रहा कि बारिश रुकने के एक से डेढ़ घंटे के भीतर अधिकांश क्षेत्रों से पानी पूरी तरह निकल गया.ALSO READ: बीएचयू में फाइन आर्ट्स के छात्रों का धरना, प्रैक्टिकल कॉपियों की दोबारा जांच की मांग​दूसरी ओर, नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने सुबह शहर के सबसे अधिक प्रभावित इलाकों का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण किया. उन्होंने कचहरी से तहसील सदर, गिलट बाजार, नदेसर, अंधरापुल, सिगरा, रथयात्रा, गुरुबाग, भेलूपुर, ब्रॉडवे होटल से लेकर रविंद्रपुरी और बीएचयू गेट तक का दौरा किया.बारिश रुकते ही शहर के हालात हुए सामान्यकई स्थानों पर नगर आयुक्त ने स्वयं खड़े होकर गली-पिट्स व नालियों में जमा कचरे और सिल्ट को साफ कराया. ​निरीक्षण के बाद नगर आयुक्त ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि फोन या अन्य माध्यम से प्राप्त जलभराव की शिकायतों का तत्काल निस्तारण किया जाए. अधिकारी स्वयं मौके पर पहुंचकर समस्या के मूल कारण का चिन्हांकन करें और त्वरित जल-निकासी सुनिश्चित कराएं. नगर निगम की टीमें सभी संवेदनशील बिंदुओं पर लगातार निगरानी रख रही हैं. स्थानीय निवासियों ने निगम प्रशासन और महापौर के इस त्वरित एक्शन की जमकर सराहना की है.
बीएचयू में फाइन आर्ट्स के छात्रों का धरना, प्रैक्टिकल कॉपियों की दोबारा जांच की मांग
बीएचयू में फाइन आर्ट्स के छात्रों का धरना, प्रैक्टिकल कॉपियों की दोबारा जांच की मांग
वाराणसी : बीएचयू के केंद्रीय कार्यालय के बाहर मंगलवार को बीएफए के छात्र-छात्राओं ने विभिन्‍न मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया. हाथों में बैनर-पोस्टर लेकर पहुंचे विद्यार्थियों ने प्रायोगिक परीक्षा में कथित अनियमितता का आरोप लगाते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की. छात्रों की मुख्य मांग है कि बीएफए प्रैक्टिकल की कॉपियों की दोबारा जांच कराई जाए और मूल्यांकन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए. प्रदर्शन की सूचना पर प्राक्टोरियल बोर्ड की टीम भी मौके पर पहुंची.प्रदर्शन कर रहे छात्राें ने कहा कि प्रैक्टिकल परीक्षा में विद्यार्थियों को उनकी अपेक्षा के विपरीत बेहद कम अंक दिए गए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि 400 अंकों के प्रैक्टिकल में कई छात्रों को 100, 200 या उसके आसपास अंक मिले हैं. छात्रों का कहना है कि पिछले वर्ष जिन विद्यार्थियों को उनके कार्य के आधार पर अच्छे अंक मिले थे, इस वर्ष उन्हीं के अंकों में काफी गिरावट आई है. छात्रा नसी चंद ने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले वर्ष उनके प्रैक्टिकल में 350 अंक आए थे, जबकि इस बार 215 अंक दिए गए. उन्होंने सवाल उठाया कि एक साल की मेहनत और पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष किए गए कार्य के बावजूद अंकों में इतनी बड़ी गिरावट किस आधार पर हुई.एक अन्य छात्र ने बताया कि पिछले वर्ष उसे 365 अंक मिले थे, जबकि इस बार करीब 240 अंक दिए गए. छात्रों ने कहा कि उनके पास पिछले और इस वर्ष के बनाए गए आर्टवर्क मौजूद हैं. प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों ने अपने काम भी दिखाए और दावा किया कि मूल्यांकन के बाद मिले अंकों को देखकर उन्हें पूरी प्रक्रिया पर संदेह हो रहा है.ALSO READ : वाराणसी में मौतों का मंगलवार : बारिश के दौरान हादसों में दंपती समेत पांच की मौत, करंट और जर्जर दीवार बनी वजहतीन प्रमुख मांगें रखींछात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं. पहली, सभी प्रैक्टिकल कॉपियों की दोबारा जांच कराई जाए. दूसरी, जब तक री-चेकिंग पूरी नहीं होती, तब तक फीस भुगतान की प्रक्रिया रोकी जाए. तीसरी, 400 अंकों के प्रैक्टिकल में मूल्यांकन और अंक देने का स्पष्ट आधार विद्यार्थियों के सामने रखा जाए. छात्रों का कहना है कि उन्हें यह जानकारी मिलनी चाहिए कि किस आधार पर अंक काटे गए और अलग-अलग विद्यार्थियों के कार्य का मूल्यांकन किस पैमाने से किया गया.