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श्रीकाशी विश्‍वनाथ धाम से दशाश्‍वमेध घाट तक बनेगा पाथवे, श्रद्धालुओं को मिलेगी राहत...

श्रीकाशी विश्‍वनाथ धाम से दशाश्‍वमेध घाट तक बनेगा पाथवे, श्रद्धालुओं को मिलेगी राहत...
Jun 16, 2026, 07:41 AM
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Posted By Diksha Mishra


वाराणसी : बाबा दरबार तक पहुंचने की डगर आसान होगी. काशी में श्रद्धालुओं और पर्यटकों को जल्द ही विश्वनाथ धाम से दशाश्वमेध घाट तक आवागमन में बड़ी सुविधा मिलने वाली है. दर्शन-पूजन के बाद श्रद्धालु गंगा के मनोहारी दृश्य का आनंद लेते हुए सीधे दशाश्वमेध घाट तक पहुंच सकेंगे. इसके लिए गंगा घाट पाथवे (सैरगाह कनेक्टिविटी) निर्माण परियोजना पर कार्य शुरू हो गया है. उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) की ओर से विश्वनाथ धाम से ललिता घाट, मीर घाट, त्रिपुरा भैरवी घाट, मान मंदिर महल और राजेंद्र प्रसाद घाट होते हुए दशाश्वमेध घाट तक तीन मीटर चौड़ा पाथवे बनाया जा रहा है. परियोजना पर 6.16 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. पाथवे के दोनों ओर सुरक्षा के लिए रेलिंग भी लगाई जाएगी.


ढाई करोड़ की पहली किस्‍त जारी


शासन ने परियोजना को मंजूरी देते हुए प्रथम किस्त के रूप में 2.50 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं. निर्माण कार्य का दायित्व सक्षम इंटरप्राइजेज को सौंपा गया है. ठेकेदार द्वारा दशाश्वमेध घाट और ललिता घाट दोनों ओर से निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है. वर्तमान में घाटों की कई सीढ़ियां अधिक ऊंची होने के कारण बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को आवाजाही में कठिनाई का सामना करना पड़ता है. साथ ही कई घाटों के बीच सीधा संपर्क न होने से श्रद्धालुओं को लंबा रास्ता तय करना पड़ता है. नई कनेक्टिविटी बनने के बाद विश्वनाथ धाम और दशाश्वमेध घाट के बीच की दूरी मात्र 10 से 15 मिनट में तय की जा सकेगी.


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गौरतलब है कि पिछले वर्ष वाराणसी दौरे पर आए केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के सचिव ने गंगा घाटों के सुंदरीकरण और आपसी संपर्क बढ़ाने का सुझाव दिया था. इसके बाद पर्यटन विभाग ने परियोजना की रूपरेखा तैयार की. हाल ही में पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने भी घाटों का निरीक्षण कर निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए थे.

दालमंडी में फिर गरजा बुलडोजर, भारी सुरक्षा के बीच 12 भवन किए जा रहे ध्‍वस्‍त...
दालमंडी में फिर गरजा बुलडोजर, भारी सुरक्षा के बीच 12 भवन किए जा रहे ध्‍वस्‍त...
वाराणसी : दालमंडी सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत बुधवार सुबह प्रशासन ने एक बार फिर बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण अभियान चलाया. सुबह की पहली किरण के साथ ही प्रशासनिक अमला, नगर निगम और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मौके पर पहुंची और चिन्हित भवनों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी. प्रशासन द्वारा जारी सूची के अनुसार इस चरण में कुल 12 भवनों को ध्वस्त किया गया. इनमें सीके-40/42/85-ए, सीके-40/42/104, सीके-40/69/27, सीके-40/42/86-ए और सीके-40/39/6 सहित अन्य भवन शामिल हैं. इन संपत्तियों के स्वामियों में शाहनाज परवीन, मुबनी हसन, गुलमहक जोहरा, रियाउद्दीन अहमद, अफसरी बेगम, माफ अली असगर, ताहिर हुसैन समेत अन्य लोगों के नाम दर्ज हैं.कार्रवाई के दौरान जेसीबी और बुलडोजरों की मदद से एक-एक कर भवनों को ध्वस्त किया गया. किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरे क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात रहा तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी लगातार अभियान की निगरानी करते रहे. प्रशासन का कहना है कि दालमंडी सड़क चौड़ीकरण परियोजना पूरी होने के बाद काशी विश्वनाथ धाम, गोदौलिया और आसपास के क्षेत्रों तक आवागमन अधिक सुगम होगा.ALSO READ : भीषण गर्मी से राहत के लिए गंगा में अनूठा अनुष्ठान: राग 'मेघ' से इंद्रदेव को रिझाने की कोशिश...इससे श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों और व्यापारिक गतिविधियों को भी सुविधा मिलेगी तथा शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार आएगा. वहीं दूसरी ओर ध्वस्तीकरण से प्रभावित व्यापारियों और परिवारों ने अपनी चिंता भी जताई है. उनका कहना है कि वर्षों पुरानी दुकानें और मकान टूटने से आजीविका और पुनर्वास की समस्या उत्पन्न हो गई है. प्रभावित लोगों ने प्रशासन से उचित मुआवजा और वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है. फिलहाल दालमंडी में ध्वस्तीकरण अभियान जारी है. प्रशासन के अनुसार सड़क चौड़ीकरण योजना के तहत आगामी दिनों में चिन्हित अन्य भवनों पर भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
भीषण गर्मी से राहत के लिए गंगा में अनूठा अनुष्ठान: राग 'मेघ' से इंद्रदेव को रिझाने की कोशिश...
भीषण गर्मी से राहत के लिए गंगा में अनूठा अनुष्ठान: राग 'मेघ' से इंद्रदेव को रिझाने की कोशिश...
वाराणसी : ज्येष्ठ-आषाढ़ की तपती दुपहरी और प्रचंड गर्मी से बेहाल काशीवासियों को राहत दिलाने के लिए काशी में एक बेहद अनूठा अनुष्ठान देखने को मिला. जहां एक ओर काशी के गंगा तटों पर रोज़ाना सुबह-शाम वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-पाठ और पवित्र स्नान का दौर चल रहा है, वहीं दूसरी ओर बारिश के देवता भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए संगीत के सुरों की 'कवायद' शुरू हो गई है. मान्यता है कि जब इंसान की प्रार्थनाओं में सुरों का तालमेल जुड़ जाता है, तो देवता भी पिघल जाते हैं. इसी आस के साथ सुर-सरिता के माध्यम से काशी को झुलसाने वाली गर्मी से निजात दिलाने की प्रार्थना की जा रही है.गंगा में गूंजी शहनाई, चढ़ाई 'पियरी'धर्म और अध्‍यात्‍म की नगरी के ऐतिहासिक रीवा घाट पर आज मंगलवार की सुबह एक अद्भुत और अलौकिक दृश्य देखने को मिला. काशी विश्वनाथ मंदिर के शहनाई वादक पंडित महेंद्र प्रसन्ना और उनकी पूरी टीम ने इस विशेष अनुष्ठान का बीड़ा उठाया. गंगा पूजन और वंदन के पश्चात् अनुष्ठान की शुरुआत मां गंगा के विधि-विधान से पूजन-अर्चन के साथ हुई. कलाकारों ने मां गंगा को पारंपरिक 'पियरी' (पीला वस्त्र) अर्पित कर उनका वंदन किया और लोक-कल्याण की कामना की. ​राग 'मेघ' से बादलों को आमंत्रण - वैदिक काल से ही माना जाता रहा है कि शास्त्रीय संगीत के कुछ रागों में प्रकृति को बदलने की शक्ति होती है. इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए पंडित महेंद्र प्रसन्ना ने अपनी शहनाई पर राग मेघ को साधा. शहनाई से निकले इस राग के गंभीर और मधुर स्वरों ने घाट पर मौजूद हर श्रद्धालु को मंत्रमुग्ध कर दिया. ऐसा लगा मानो सुरों के माध्यम से आसमान में उमड़ते-घुमड़ते बादलों को सीधे काशी आने का निमंत्रण दिया जा रहा हो.​"इंद्र बरसो रे काशी नगरिया..." से हुई पूर्णाहूति​राग मेघ के शास्त्रीय वादन के बाद, टीम ने क्लासिकल संगीत और पारंपरिक भजनों की झड़ी लगा दी. शहनाई की जादुई धुन पर जब लोक-भावनाओं को समेटे हुए भजन गूंजे, तो घाट का पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा. ​काशी सिर्फ धर्म की ही नहीं, बल्कि संगीत की भी राजधानी है.ALSO READ : वाराणसी में बलिदानियों की स्‍मृति में बनेगा म्‍यूरल पार्क, 18 एकड़ में विकसित होंगी पर्यटन सुविधाएँ...जब-जब काशी पर कोई संकट या प्राकृतिक आपदा (जैसे भीषण गर्मी या सूखा) आती है, तब यहां के कलाकार और विद्वान अपनी कला को ही ईश्वर की आराधना का माध्यम बना लेते हैं. रीवा घाट पर हुआ यह आयोजन इस बात का जीवंत प्रमाण है कि आज भी काशी की रगों में बाबा बिस्मिल्लाह खान की शहनाई और शास्त्रीय परंपराएं जिंदा हैं, जो लोक-कल्याण के लिए हमेशा तत्पर रहती हैं. घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं को पूरी उम्मीद है कि शहनाई की यह पुकार सीधे इंद्रलोक तक पहुंचेगी और जल्द ही काशी कल्याणी पर बादलों की मेहरबानी होगी.
वाराणसी में बलिदानियों की स्‍मृति में बनेगा म्‍यूरल पार्क, 18 एकड़ में विकसित होंगी पर्यटन सुविधाएँ...
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वाराणसी : जिले के पिंडरा विकासखंड स्थित करखियांव गांव औद्योगिक क्षेत्र के बाद अब स्वतंत्रता संग्राम पर्यटन सर्किट से भी जुड़ने वाला है. पर्यटन विभाग को इसके लिए 18.26 करोड़ रुपये की प्रस्तावित धनराशि में से पहली किस्त के रूप में आठ करोड़ रुपये जारी किए गए हैं. यहां करीब 18 एकड़ क्षेत्र में म्यूरल पार्क (भित्ति चित्र) बनेगा. इसमें स्वतंत्रता सेनानियों की गौरवगाथा संरक्षित की जाएगी. आधुनिक पर्यटक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी.26 स्‍तंभ, हर एक पर बलिदानी का प्रतिनिधित्‍वगांव के 26 बलिदानियों की याद में बनने वाले इस म्यूरल पार्क में उनकी वीरगाथाओं को चित्रों के माध्यम से उकेरा जाएगा. इसके साथ ही 26 स्तंभ भी स्थापित किए जाएंगे. हर स्तंभ एक बलिदानी का प्रतिनिधित्व करेगा. करखियांव गांव का स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान रहा है.1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर देश की आजादी तक यहां के लोगों ने हर आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.सबसे अधिक स्‍वतंत्रता संग्राम सेनानी वाला गांवस्थानीय इतिहास के अनुसार जिले में सबसे ज्यादा स्वतंत्रता सेनानी इसी गांव से थे. यह गांव 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की एक महत्वपूर्ण घटना का भी गवाह रहा है. इस पर्यटन परियोजना के जरिये इन वीरों के बलिदान और आजादी की लड़ाई के इतिहास को देश-दुनिया तक पहुंचाया जाएगा. पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार पर्यटन को इतिहास, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा से जोड़ने का कार्य कर रही है.ALSO READ : श्रीकाशी विश्‍वनाथ धाम से दशाश्‍वमेध घाट तक बनेगा पाथवे, श्रद्धालुओं को मिलेगी राहत...इसी सोच के तहत स्वतंत्रता संग्राम सर्किट के अंतर्गत वाराणसी के करखियांव गांव को विकसित किया जा रहा है. इस गांव में शहीदों और सेनानियों की स्मृतियों को संरक्षित किया जाएगा. इससे नई पीढ़ी को देशभक्ति और बलिदान की प्रेरणा मिलेगी। यह स्थल पर्यटन के साथ-साथ राष्ट्रीय चेतना का भी महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा.