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सड़क सुरक्षा माह - सड़क दुर्घटनाओं में 18 से 40 वर्ष आयु के युवा चालकों की 98 फीसद मौतें

सड़क सुरक्षा माह - सड़क दुर्घटनाओं में 18 से 40 वर्ष आयु के युवा चालकों की 98 फीसद मौतें
Dec 31, 2025, 07:47 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी : परिवहन विभाग एक जनवरी सुडक सुरक्षा माह मनाने जा रहा है. इसके लिए राज्‍य सरकार की ओर से व्‍यापाक जनजागरूकता अभियान चलाया जाने वाला है. आज हम बात कर रहे हैं वाराणसी जिले की तो यहां सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं हाईवे-रिंग रोड पर हो रही हैं. शहर की सड़कों पर गाड़ी चलाने की तुलना में हाईवे पर गाड़ी चलाने का अलग तजुर्बा होता है. बढ़ी हुई गति, लंबी दूरी, बदलती सड़क की स्थिति और अन्य वाहनों की अलग-अलग शैलियों के साथ, चालक को हाईवे पर गाड़ी चलाने के लिए नियमों से परिचित होना जरूरी है.


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कई प्रकार के वाहन ट्रक, बस, कार, दोपहिया वाहन हाईवे पर एक साथ चलते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में अप्रत्याशित रूप से जानवर या पैदल यात्री आ जाते हैं. जगह-जगह बने कट से अचानक वाहन भी सामने आ जाते हैं. ऐसे में तेज रफ्तार वाहन को रोकना मुश्किल हो जाता है और दुर्घटना होती है. वाराणसी और उसके आसपास से नेशनल हाईवे, रिंग रोड व स्टेट हाईवे गुजरते हैं. नेशनल हाईवे दो से चार लेन की हैं. इस पर तेज रफ्तार में वाहन चलते हैं. स्टेट हाईवे नेशनल हाईवे की तुलना में संकरे हैं. वाराणसी में हरहुआ रिंग रोड पर अक्सर दुर्घटना होती है. यहां सिग्नल सालों से खराब और दुरुस्‍त होते रहते हैं और ट्रैफिक पुलिस रात में मौजूद नहीं रहती है. वाराणसी-बाबतपुर हाइवे पर काजीसराय के पास गड़वा चौराहा दुर्घटना बहुल क्षेत्र बना हुआ है. दुर्घटना रोकने के लिए कोई उपाय नहीं किया गया है.


लिंक और सर्विस रोड भी खतरनाक


वहीं वाराणसी-आजमगढ़ मार्ग पर गोला, झरहीया, तिसौरा, कपीसा बाजारके दुर्घटनाएं हो रही हैं. गोला ग्राम के समीप बने कट पर बीते छह महीने में छह से अधिक लोगों की मौत हो गई हैं. लिंक रोड से अचानक हाईवे पर गाड़ियों के आने से दुर्घटना होती है. तेज गति से गाड़ी वालों को अचानक किसी के आ जाने की आभास नहीं होता है, जबकि एनएचआई द्वारा गांवों, बाजारों, घनी बस्तियों में सर्विस रोड बनाने का प्रविधान भी है. सर्विस रोड नहीं होने से प्रायः बाइक या कार सवार दुर्घटना का शिकार होते रहते हैं.


निर्धारित होती है नेशनल हाईवे पर वाहनों की रफ्तार


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हल्के मोटर वाहन 80-100 किमी-प्रति घंटा


भारी वाहन (ट्रक, बसें) 55-65 किमी-प्रति घंटा


दुपहिया वाहन 50-80 किमी-प्रति घंटा




यातायात नियमों का करें पालन


जब तक ओवरटेकिंग न करनी हो, हमेशा बायीं लेन में चलें.


ओवरटेकिंग के लिए केवल दाहिनी लेन का प्रयोग करें और ओवरटेकिंग के बाद तुरंत बाईं लेन पर वापस आ जाएं.


जिग-जैग ड्राइविंग न करें, बिना संकेत दिए अचानक लेन परिवर्तन से बचें.


जहां तक संभव हो, दाईं ओर से ओवरटेक करें, इसका संकेत भी दें.


दो लेन वाले राजमार्ग पर कभी भी बाईं ओर से ओवरटेक न करें.




इन गलतियों की अनदेखी से होती हैं सड़क दुर्घटनाएं


कई चालक लेन के नियमों की अनदेखी करते हुए अप्रत्याशित रूप से लेन बदलते रहते हैं.

गलत दिशा से ओवरटेक करना, विशेषकर दो लेन वाली सड़कों पर, खतरनाक होता है और अक्सर दुर्घटनाओं का कारण बनता है.

ओवरटेक करते समय पीछे से आने वाली गाड़ी का भी ध्यान रखें


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महत्वपूर्ण संकेत और प्रतीक


गति सीमा संकेत- लाल बार्डर वाला गोलाकार चिह्न जो अधिकतम गति दर्शाता है.

ओवरटेकिंग निषेध- दो कारों वाला गोलाकार चिह्न जिनमें से एक लाल है.

विभाजित राजमार्ग- यह दर्शाता है कि राजमार्ग किसी मध्यिका से विभाजित है या नहीं.


तीव्र मोड़- घुमावदार तीर के साथ चेतावनी त्रिकोण


पैदल यात्री क्रासिंग- पैदल यात्री क्षेत्र या गांव क्रासिंग को दिखाता है


पशु क्रासिंग- आस-पास पशुधन या जंगली जानवरों की चेतावनी


विश्राम क्षेत्र - आगे सेवाओं की उपलब्धता दर्शाने वाले संकेत


टोल प्लाजा: टोल भुगतान के लिए तैयार रहने की चेतावनी




जानें प्रतीक चिह्नों के बारे में


सफेद रेखा- लेन परिवर्तन या ओवरटेकिंग निषिद्ध


टूटी हुई सफेद रेखा- लेन परिवर्तन और ओवरटेकिंग सावधानी के साथ अनुमति


पीली रेखा-आमतौर पर यह दर्शाती है कि दोनों दिशाओं में ओवरटेकिंग नहीं की जा सकती




इन बातों का भी रखें ध्यान


ट्रक अचानक लेन बदल लें या धीमी गति से चलने वाले वाहन गलती से तेज लेन पर आ जाएं तो सावधान रहें .


जिस वाहन के पीछे चल रहे हैं उसके बीच कम से कम दो सेकेंड का अंतर रखें .


वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग न करें .


मुड़ने या लेन बदलने से कम से कम तीन सेकेंड पहले टर्न सिग्नल का प्रयोग करें.


धीमी गति से चलने वाले वाहनों को सुरक्षित और धैर्यपूर्वक ओवरटेक करें.


लंबी यात्रा के दौरान हर दो से तीन घंटे में वाहन से बाहर निकलकर थोड़ी देर आराम करें.


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राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं


40 प्रतिशत से ज़्यादा सड़क दुर्घटनाएं तेज रफ्तार के कारण होती हैं.


30 प्रतिशत दुर्घटनाएं रात में राजमार्गों पर कम रोशनी और चालक की थकान के कारण होती हैं.


15 प्रतिशत दुर्घटनाओं की वजह वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग के कारण होती हैं.


15 प्रतिशत रांग साइड से चलने, पैदल यात्री के अचानक सामने आने व अन्य कारणों से होती हैं.


70 फीसद दुर्घटनाएं मानवीय लापरवाही के कारण


परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने देश और प्रदेश में मार्ग दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों पर चिंता जताई है. उन्‍होंने इसे नियंत्रित करने के लिए नागरिक चेतना के निर्माण पर जोर दिया है. उन्होंने कहा है कि सड़क यातायात के प्रति सामाजिक जागरुकता पैदा करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग एक जनवरी 2026 से सड़क सुरक्षा माह शुरू करने जा रहा है. बताया क‍ि हमारा प्रयास होगा कि शहर से लेकर गांव तक सड़क सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक कर मार्ग दुर्घटनाओं में कमी लाई जाए. मंत्री ने मंगलवार को वाराणसी में सड़क सुरक्षा के निमित्त आयोजित कार्यक्रम में यह बातें कही.

परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने मार्ग दुर्घटनाओं में कमी लाने का सरकार का संकल्प स्पष्ट करते हुए कहा कि कोरोना काल में जितनी मौतें बीमारी से हुईं उससे अधिक मौतें हर साल सड़क दुर्घटना में केवल उत्तर प्रदेश में होती हैं. ऐसी स्थिति यातायात नियमों की अवहेलना के कारण पैदा होती हैं. 70 फीसद दुर्घटनाएं मानवीय लापरवाही के कारण होती हैं. सड़क दुर्घटनाओं में 98 फीसद मौतें 18 से 40 वर्ष आयु के युवा चालकों की होती हैं. ऐसी दुर्घटनाएं न हों इसके लिए उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग व पुलिस की ओर से प्रयास किया जा रहा है, लेकिन यह प्रयास सौ फीसद सफल तभी होगा जब इसमें समाज की भागीदारी बढ़ेगी.

होली की रात चाट विक्रेता ने फांसी लगाकर दे दी जान, परिजनों में पसरा मातम
होली की रात चाट विक्रेता ने फांसी लगाकर दे दी जान, परिजनों में पसरा मातम
वाराणसी: मिर्जामुराद थाना क्षेत्र में कछवां रोड चौराहे के पास होली के त्योहार पर बुधवार की रात चाट विक्रेता संदीप मोदनवाल (36) ने फांसी के फंदे पर लटक कर जान दे दी. सूचना के बाद थाना प्रभारी प्रमोद पांडेय, कछवांरोड़ चौकी प्रभारी रामचन्द्र यादव और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची. शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के साथ पुलिस अग्रिम कार्रवाई में जुट गई है. आत्‍महत्‍या का कारण स्पष्ट नही हो सका है. हालांकि चर्चा है कि दुकानदार कई दिनों से तनाव में था. मृतक को एक पुत्र यश (13) और एक पुत्री परी (8) है.मिर्जामुराद थानांतर्गत कछवांरोड (ठटरा) गांव निवासी श्यामलाल मोदनवाल का इकलौता पुत्र रहा संदीप मोदनवाल ठेले पर चाट-गोलगप्पा की दुकान लगाता रहा. ससुराल से पत्नी को साथ लेकर वापस लौटने के बाद मित्रो से मिलकर रात में वह घर आया. पत्नी और बच्चों संग कमरे में सोया. इसके बाद रात में वह किसी कारण वश कमरे से सटे किचन में जाकर कुर्सी पर खड़ा होकर पंखे की कुंडी के सहारे गमछा से गले में फांसी का फंदा लगाकर लटक गया.यह भी पढ़ें: ई हौ रजा बनारस- काशी की होली में झूमे विदेशी मेहमान, महादेव के जयकारों से गूंजा शहरपीड़ित परिजनों ने बयां की अपनी आपबीतीपत्नी अंजली सुबह उठी और किचन में गई तो पति के शव को फांसी के फंदे पर लटकता देख सन्न रह गयी. स्वजन आनन-फानन में उसे नीचे उतारे किन्तु तब तक उसकी मौत हो चुकी थी. परिवार में कोहराम मच गया।स्वजन रोते-विलखते रहे।दुकानदारों की भीड़ जुट गई थी.पुल से कूदकर युवक ने दी जानवाराणसी के लंका थाना क्षेत्र के विश्वसुंदरी पुल से देवड़ी जमानियां गाजीपुर निवासी शिवम सिंह (21) गंगा में कूद गया. राहगीरों की सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने जल पुलिस और एनडीआरएफ की मदद से खोजबीन की, लेकिन कुछ पता नहीं चला. इस बीच मंगलवार को खोजबीन के दौरान जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीम ने शव बरामद किया और पोस्टमार्टम के लिए भेजवाया. थाना प्रभारी राजकुमार शर्मा ने बताया कि परिजनों से घटना के बारे में जानकारी ली गई.
ई हौ रजा बनारस- काशी की होली में झूमे विदेशी मेहमान, महादेव के जयकारों से गूंजा शहर
ई हौ रजा बनारस- काशी की होली में झूमे विदेशी मेहमान, महादेव के जयकारों से गूंजा शहर
वाराणसी: रंगों और उल्‍लास के पर्व होली पर महादेव की नगरी काशी में पूरब और पश्चिम का अद्भुत समन्‍वय देखने को मिला. अनोखी संस्कृति और मस्ती भरे अंदाज में शहर की गलियों और घाटों पर जहां स्थानीय लोग रंग-गुलाल में सराबोर दिखे, वहीं विदेशी पर्यटक भी बनारस की होली के रंग में पूरी तरह रंगे नजर आए. गोदौलिया, दशाश्वमेध और आसपास के क्षेत्रों में होली के दौरान विदेशी मेहमानों ने भोजपुरी गीतों और ढोल-नगाड़ों की धुन पर जमकर नृत्य किया। “ई बनारस हौ रजा…” और “लगावेलू जब लिपिस्टिक…” जैसे लोकप्रिय भोजपुरी गीतों पर जब माहौल बना, तो विदेशी पर्यटक भी खुद को थिरकने से रोक नहीं सके.बनारसी अंदाज में होली का उत्सवस्थानीय युवाओं और पर्यटकों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं. “हर-हर महादेव” के जयकारों के बीच पूरा माहौल उत्साह और उमंग से भर गया. काशी की परंपरागत होली का रंग ऐसा था कि देश-विदेश से आए लोग भी इस उत्सव का हिस्सा बनते दिखे. वाराणसी की होली अपने अनूठे अंदाज और खुले दिल के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है. यहां पहुंचे विदेशी पर्यटक भी इस सांस्कृतिक उत्सव से बेहद प्रभावित नजर आए. कई पर्यटकों ने रंगों के साथ नृत्य करते हुए इस अनुभव को यादगार बताया और इसे अपनी यात्रा का सबसे खास पल बताया. शहर की यही खासियत है कि यहां आने वाला हर व्यक्ति, चाहे वह देश का हो या विदेश का, इस रंगोत्सव का हिस्सा बन जाता है और बनारसी अंदाज में झूम उठता है.काशी विश्वनाथ धाम में बिखरी फूलों की खुशबूकाशी विश्वनाथ धाम में भक्तों ने भक्ति और उल्लास के साथ फूलों की होली खेली. मंदिर परिसर में गुलाब, गेंदा और विभिन्न सुगंधित फूलों की वर्षा के बीच श्रद्धालु रंगों की जगह फूलों से होली खेलते नजर आए. हर-हर महादेव के जयकारों के साथ पूरा धाम भक्तिरस और उत्साह से सराबोर हो उठा. काशी विश्वनाथ धाम में आयोजित इस विशेष आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे. फूलों की होली के दौरान भक्तों ने एक-दूसरे पर फूलों की पंखुड़ियां उड़ाकर और बाबा विश्वनाथ के जयकारे लगाकर होली का उत्सव मनाया.वातावरण में भक्ति, संगीत और उत्सव का अनूठा संगम देखने को मिला. फूलों की होली काशी की प्राचीन धार्मिक परंपराओं का हिस्सा मानी जाती है. इस आयोजन के माध्यम से भक्त भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था और श्रद्धा व्यक्त करते हैं. मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और धार्मिक वातावरण के बीच श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक इस पर्व का आनंद लिया.
होली ऑफर ने कईयों को बनाया कंगाल, बैंक खाते से गायब हुए रकम
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वाराणसी: साइबर ठगों ने कमिश्‍नरेट पुलिस के तीन जोन में आफर का झांसा देकर 25 लोगों को शिकार बनाया. होली पर ऑनलाइन खरीदारी के दौरान स्पेशल ऑफर के चक्कर में किसी ने 10 हजार तो किसी ने 25 हजार रुपये गंवा दिए. लिंक पर क्लिक कर और सस्ते ऑफर जैसे टास्क पूरा करने में बैंक खाते खाली हो गए. एक हफ्ते में काशी, वरुणा और गोमती जोन के थानों के साइबर हेल्पडेस्क पर ऐसी शिकायतें पहुंची हैं. सबसे अधिक काशी और वरुणा जोन के थानों में शिकायतें आईं। शिवपुर के राहुल द्विवेदी ने रविवार को ऑनलाइन जूता लेना चाहा.इस बीच, ब्रांडेड कंपनी के जूते की खरीदारी से संबंधित एक ओटीपी आया और वह शेयर करते ही खाते से 24954 रुपये कट गए. किसी बंगलूरू के बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर हुए हैं. पीड़ित ने तुरंत ऑनलाइन पोर्टल और शिवपुर थाने के साइबर हेल्प डेस्क पर तहरीर दी है. लंका के रहने वाले और एलआईसी के एजेंट गणेश पांडेय के मोबाइल पर अनजान नंबर से कॉल आई. धमकी दी कि बेटे ने गलत वीडियो देखा है. इस बीच धमकाकर तीन बार में खाते से 11 हजार रुपये कट गए. पीडित ने तुरंत 1930 पर उन्होंने शिकायत दर्ज कराई.साइबर हेल्प डेस्क में शिकायत दर्जलंका थाने के साइबर हेल्प डेस्क में भी मंगलवार को शिकायत दर्ज कराई. साइबर सेल मामले की जांच कर रही है. फूलपुर थाना क्षेत्र के रहने वाले अश्विन सिंह ने साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई कि बेटे ने ऑनलाइन शॉपिंग की. इस बीच लिंक पर गलत क्लिक किया कि तभी खाते से 16786 रुपये कट गए. एसीपी साइबर विदुष सक्सेना ने बताया कि जांच की जा रही है.