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सड़क सुरक्षा माह - सड़क दुर्घटनाओं में 18 से 40 वर्ष आयु के युवा चालकों की 98 फीसद मौतें

सड़क सुरक्षा माह - सड़क दुर्घटनाओं में 18 से 40 वर्ष आयु के युवा चालकों की 98 फीसद मौतें
Dec 31, 2025, 07:47 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी : परिवहन विभाग एक जनवरी सुडक सुरक्षा माह मनाने जा रहा है. इसके लिए राज्‍य सरकार की ओर से व्‍यापाक जनजागरूकता अभियान चलाया जाने वाला है. आज हम बात कर रहे हैं वाराणसी जिले की तो यहां सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं हाईवे-रिंग रोड पर हो रही हैं. शहर की सड़कों पर गाड़ी चलाने की तुलना में हाईवे पर गाड़ी चलाने का अलग तजुर्बा होता है. बढ़ी हुई गति, लंबी दूरी, बदलती सड़क की स्थिति और अन्य वाहनों की अलग-अलग शैलियों के साथ, चालक को हाईवे पर गाड़ी चलाने के लिए नियमों से परिचित होना जरूरी है.


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कई प्रकार के वाहन ट्रक, बस, कार, दोपहिया वाहन हाईवे पर एक साथ चलते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में अप्रत्याशित रूप से जानवर या पैदल यात्री आ जाते हैं. जगह-जगह बने कट से अचानक वाहन भी सामने आ जाते हैं. ऐसे में तेज रफ्तार वाहन को रोकना मुश्किल हो जाता है और दुर्घटना होती है. वाराणसी और उसके आसपास से नेशनल हाईवे, रिंग रोड व स्टेट हाईवे गुजरते हैं. नेशनल हाईवे दो से चार लेन की हैं. इस पर तेज रफ्तार में वाहन चलते हैं. स्टेट हाईवे नेशनल हाईवे की तुलना में संकरे हैं. वाराणसी में हरहुआ रिंग रोड पर अक्सर दुर्घटना होती है. यहां सिग्नल सालों से खराब और दुरुस्‍त होते रहते हैं और ट्रैफिक पुलिस रात में मौजूद नहीं रहती है. वाराणसी-बाबतपुर हाइवे पर काजीसराय के पास गड़वा चौराहा दुर्घटना बहुल क्षेत्र बना हुआ है. दुर्घटना रोकने के लिए कोई उपाय नहीं किया गया है.


लिंक और सर्विस रोड भी खतरनाक


वहीं वाराणसी-आजमगढ़ मार्ग पर गोला, झरहीया, तिसौरा, कपीसा बाजारके दुर्घटनाएं हो रही हैं. गोला ग्राम के समीप बने कट पर बीते छह महीने में छह से अधिक लोगों की मौत हो गई हैं. लिंक रोड से अचानक हाईवे पर गाड़ियों के आने से दुर्घटना होती है. तेज गति से गाड़ी वालों को अचानक किसी के आ जाने की आभास नहीं होता है, जबकि एनएचआई द्वारा गांवों, बाजारों, घनी बस्तियों में सर्विस रोड बनाने का प्रविधान भी है. सर्विस रोड नहीं होने से प्रायः बाइक या कार सवार दुर्घटना का शिकार होते रहते हैं.


निर्धारित होती है नेशनल हाईवे पर वाहनों की रफ्तार


KDK

हल्के मोटर वाहन 80-100 किमी-प्रति घंटा


भारी वाहन (ट्रक, बसें) 55-65 किमी-प्रति घंटा


दुपहिया वाहन 50-80 किमी-प्रति घंटा




यातायात नियमों का करें पालन


जब तक ओवरटेकिंग न करनी हो, हमेशा बायीं लेन में चलें.


ओवरटेकिंग के लिए केवल दाहिनी लेन का प्रयोग करें और ओवरटेकिंग के बाद तुरंत बाईं लेन पर वापस आ जाएं.


जिग-जैग ड्राइविंग न करें, बिना संकेत दिए अचानक लेन परिवर्तन से बचें.


जहां तक संभव हो, दाईं ओर से ओवरटेक करें, इसका संकेत भी दें.


दो लेन वाले राजमार्ग पर कभी भी बाईं ओर से ओवरटेक न करें.




इन गलतियों की अनदेखी से होती हैं सड़क दुर्घटनाएं


कई चालक लेन के नियमों की अनदेखी करते हुए अप्रत्याशित रूप से लेन बदलते रहते हैं.

गलत दिशा से ओवरटेक करना, विशेषकर दो लेन वाली सड़कों पर, खतरनाक होता है और अक्सर दुर्घटनाओं का कारण बनता है.

ओवरटेक करते समय पीछे से आने वाली गाड़ी का भी ध्यान रखें


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महत्वपूर्ण संकेत और प्रतीक


गति सीमा संकेत- लाल बार्डर वाला गोलाकार चिह्न जो अधिकतम गति दर्शाता है.

ओवरटेकिंग निषेध- दो कारों वाला गोलाकार चिह्न जिनमें से एक लाल है.

विभाजित राजमार्ग- यह दर्शाता है कि राजमार्ग किसी मध्यिका से विभाजित है या नहीं.


तीव्र मोड़- घुमावदार तीर के साथ चेतावनी त्रिकोण


पैदल यात्री क्रासिंग- पैदल यात्री क्षेत्र या गांव क्रासिंग को दिखाता है


पशु क्रासिंग- आस-पास पशुधन या जंगली जानवरों की चेतावनी


विश्राम क्षेत्र - आगे सेवाओं की उपलब्धता दर्शाने वाले संकेत


टोल प्लाजा: टोल भुगतान के लिए तैयार रहने की चेतावनी




जानें प्रतीक चिह्नों के बारे में


सफेद रेखा- लेन परिवर्तन या ओवरटेकिंग निषिद्ध


टूटी हुई सफेद रेखा- लेन परिवर्तन और ओवरटेकिंग सावधानी के साथ अनुमति


पीली रेखा-आमतौर पर यह दर्शाती है कि दोनों दिशाओं में ओवरटेकिंग नहीं की जा सकती




इन बातों का भी रखें ध्यान


ट्रक अचानक लेन बदल लें या धीमी गति से चलने वाले वाहन गलती से तेज लेन पर आ जाएं तो सावधान रहें .


जिस वाहन के पीछे चल रहे हैं उसके बीच कम से कम दो सेकेंड का अंतर रखें .


वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग न करें .


मुड़ने या लेन बदलने से कम से कम तीन सेकेंड पहले टर्न सिग्नल का प्रयोग करें.


धीमी गति से चलने वाले वाहनों को सुरक्षित और धैर्यपूर्वक ओवरटेक करें.


लंबी यात्रा के दौरान हर दो से तीन घंटे में वाहन से बाहर निकलकर थोड़ी देर आराम करें.


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राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं


40 प्रतिशत से ज़्यादा सड़क दुर्घटनाएं तेज रफ्तार के कारण होती हैं.


30 प्रतिशत दुर्घटनाएं रात में राजमार्गों पर कम रोशनी और चालक की थकान के कारण होती हैं.


15 प्रतिशत दुर्घटनाओं की वजह वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग के कारण होती हैं.


15 प्रतिशत रांग साइड से चलने, पैदल यात्री के अचानक सामने आने व अन्य कारणों से होती हैं.


70 फीसद दुर्घटनाएं मानवीय लापरवाही के कारण


परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने देश और प्रदेश में मार्ग दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों पर चिंता जताई है. उन्‍होंने इसे नियंत्रित करने के लिए नागरिक चेतना के निर्माण पर जोर दिया है. उन्होंने कहा है कि सड़क यातायात के प्रति सामाजिक जागरुकता पैदा करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग एक जनवरी 2026 से सड़क सुरक्षा माह शुरू करने जा रहा है. बताया क‍ि हमारा प्रयास होगा कि शहर से लेकर गांव तक सड़क सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक कर मार्ग दुर्घटनाओं में कमी लाई जाए. मंत्री ने मंगलवार को वाराणसी में सड़क सुरक्षा के निमित्त आयोजित कार्यक्रम में यह बातें कही.

परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने मार्ग दुर्घटनाओं में कमी लाने का सरकार का संकल्प स्पष्ट करते हुए कहा कि कोरोना काल में जितनी मौतें बीमारी से हुईं उससे अधिक मौतें हर साल सड़क दुर्घटना में केवल उत्तर प्रदेश में होती हैं. ऐसी स्थिति यातायात नियमों की अवहेलना के कारण पैदा होती हैं. 70 फीसद दुर्घटनाएं मानवीय लापरवाही के कारण होती हैं. सड़क दुर्घटनाओं में 98 फीसद मौतें 18 से 40 वर्ष आयु के युवा चालकों की होती हैं. ऐसी दुर्घटनाएं न हों इसके लिए उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग व पुलिस की ओर से प्रयास किया जा रहा है, लेकिन यह प्रयास सौ फीसद सफल तभी होगा जब इसमें समाज की भागीदारी बढ़ेगी.

काशी विद्यापीठ दीक्षांत : देशभक्ति गान पर राज्‍यपाल भावुक, जंतर मंतर आंदोलन को लेकर कही ये बात...
काशी विद्यापीठ दीक्षांत : देशभक्ति गान पर राज्‍यपाल भावुक, जंतर मंतर आंदोलन को लेकर कही ये बात...
वाराणसी : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का 48वां दीक्षांत समारोह मंगलवार को सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में गरिमामय वातावरण में हुआ. समारोह का शुभारंभ उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया. इस अवसर पर कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों का स्वागत किया. इस अवसर पर प्राथमिक विद्यालयों से आए बच्चों का देशभक्ति गीत सुनने के बाद राज्‍यपाल भावुक हो गईं. उन्‍होंने जंतर मंतर पर हुए आंदोलन को गलत बताते हुए कहा कि नेतृत्वकर्ता सही होना चाहिए. राज्‍यपाल ने कहा कि आपने देखा अभी जंतर मंतर पर आप जैसे ही लोग थे क्या क्या कह रहे थे. आज इन बच्चों ने मेरी आंखें खोल दी. जंतर-मंतर पर जो हुआ, यह हमारे संस्कार नहीं हैं. हमें देश के नेतृत्वकर्ता के रूप में होना चाहिए और उसी की जरूरत है.राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 53 मेधावियों को 82 पदक दिए. इसके अलावा विवि और महाविद्यालयों के 63184 विद्यार्थियों को उपाधियां भी दी गईं. इस दौरान मेधावियों के चेहरे पर खुशी झलक रही थी. देवी हैंडलूम, तेलंगाना के संस्थापक वाई श्रीधर राव को उनके समाज में किए गए बेहतर सेवा कार्य के लिए मानद डीलिट की उपाधि प्रदान की गई. समारोह का ऑनलाइन प्रसारण विद्यापीठ की वेबसाइट से किया गया. इस वर्ष का दीक्षांत समारोह "विगत एक दशक में भारत की उपलब्धियां : विकसित भारत 2047 की आधारशिला" विषय पर आयोजित किया गया. समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने की जबकि मुख्य अतिथि कैप्टन बी.के. त्यागी, सीएमडी, शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, मुंबई रहे. कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय तथा राज्य मंत्री रजनी तिवारी भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं. पदक पाने वाले मेधावियों ने जमकर सेल्फीबाजी की.महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्‍यागी ने मुख्य अतिथि एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल तथा कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल का स्वागत करते हुए कहा कि यह आयोजन विश्वविद्यालय के लिए ऐतिहासिक अवसर है. कहा कि इस वर्ष के दीक्षांत समारोह का विषय "एक दशक में भारत की उपलब्धियां : विकसित भारत-2047 की आधारशिला" है, जो विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में उच्च शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका और उसकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है.कहा कि महात्मा गांधी की प्रेरणा से 105 वर्ष पूर्व स्थापित यह ऐतिहासिक विश्वविद्यालय शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के अपने उद्देश्य के प्रति निरंतर प्रतिबद्ध है. कुलाधिपति के मार्गदर्शन और नेतृत्व से विश्वविद्यालय को लगातार नई दिशा और प्रेरणा मिलती रही है व उनके अध्यक्षीय आशीर्वचनों से विद्यार्थियों व विश्वविद्यालय परिवार को आगे बढ़ने की नई ऊर्जा प्राप्त होगी. काशी विद्यापीठ में नए पाठ्यक्रमों, शोध और डिजिटल कुलपति ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, शोध, डिजिटल और अवसंरचनात्मक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्थान ने बीते वर्षों में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में एमए इन हिंदू स्टडीज जैसे नवीन पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं. वहीं, शोध विकास संस्थान के माध्यम से एप्लाइड एआई एवं शोध विकास से जुड़े पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) आधारित अध्ययन को विशेष रूप से शामिल किया गया है.कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय के समग्र पोर्टल के विभिन्न मॉड्यूल लागू किए जा चुके हैं. इससे प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा, छात्र सेवाओं और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता एवं दक्षता बढ़ी है. साथ ही प्रशासन और शिक्षण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की गई है. उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता के तहत परिसर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किया गया है. काशी विद्यापीठ उत्तर प्रदेश का एकमात्र विश्वविद्यालय है, जहां मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की गई है. इस केंद्र के माध्यम से शिक्षकों के क्षमता संवर्धन के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय में नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सेमिनार, कार्यशालाएं, शोध परियोजनाएं और नवाचार प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं. छात्रावासों के उन्नयन, परिसर विकास और वित्तीय अनुशासन के माध्यम से विश्वविद्यालय आत्मनिर्भरता की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है.वाराणसी : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का 48वां दीक्षांत समारोह मंगलवार को सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में गरिमामय वातावरण में हुआ. समारोह का शुभारंभ उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया. इस अवसर पर कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों का स्वागत किया. इस अवसर पर प्राथमिक विद्यालयों से आए बच्चों का देशभक्ति गीत सुनने के बाद राज्‍यपाल भावुक हो गईं. उन्‍होंने जंतर मंतर पर हुए आंदोलन को गलत बताते हुए कहा कि नेतृत्वकर्ता सही होना चाहिए. राज्‍यपाल ने कहा कि आपने देखा अभी जंतर मंतर पर आप जैसे ही लोग थे क्या क्या कह रहे थे. आज इन बच्चों ने मेरी आंखें खोल दी. जंतर-मंतर पर जो हुआ, यह हमारे संस्कार नहीं हैं. हमें देश के नेतृत्वकर्ता के रूप में होना चाहिए और उसी की जरूरत है.राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 53 मेधावियों को 82 पदक दिए. इसके अलावा विवि और महाविद्यालयों के 63184 विद्यार्थियों को उपाधियां भी दी गईं. इस दौरान मेधावियों के चेहरे पर खुशी झलक रही थी. देवी हैंडलूम, तेलंगाना के संस्थापक वाई श्रीधर राव को उनके समाज में किए गए बेहतर सेवा कार्य के लिए मानद डीलिट की उपाधि प्रदान की गई. समारोह का ऑनलाइन प्रसारण विद्यापीठ की वेबसाइट से किया गया. इस वर्ष का दीक्षांत समारोह "विगत एक दशक में भारत की उपलब्धियां : विकसित भारत 2047 की आधारशिला" विषय पर आयोजित किया गया. समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने की जबकि मुख्य अतिथि कैप्टन बी.के. त्यागी, सीएमडी, शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, मुंबई रहे. कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय तथा राज्य मंत्री रजनी तिवारी भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं. पदक पाने वाले मेधावियों ने जमकर सेल्फीबाजी की.महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्‍यागी ने मुख्य अतिथि एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल तथा कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल का स्वागत करते हुए कहा कि यह आयोजन विश्वविद्यालय के लिए ऐतिहासिक अवसर है. कहा कि इस वर्ष के दीक्षांत समारोह का विषय "एक दशक में भारत की उपलब्धियां : विकसित भारत-2047 की आधारशिला" है, जो विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में उच्च शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका और उसकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है.कहा कि महात्मा गांधी की प्रेरणा से 105 वर्ष पूर्व स्थापित यह ऐतिहासिक विश्वविद्यालय शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के अपने उद्देश्य के प्रति निरंतर प्रतिबद्ध है. कुलाधिपति के मार्गदर्शन और नेतृत्व से विश्वविद्यालय को लगातार नई दिशा और प्रेरणा मिलती रही है व उनके अध्यक्षीय आशीर्वचनों से विद्यार्थियों व विश्वविद्यालय परिवार को आगे बढ़ने की नई ऊर्जा प्राप्त होगी. काशी विद्यापीठ में नए पाठ्यक्रमों, शोध और डिजिटल कुलपति ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, शोध, डिजिटल और अवसंरचनात्मक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्थान ने बीते वर्षों में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में एमए इन हिंदू स्टडीज जैसे नवीन पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं. वहीं, शोध विकास संस्थान के माध्यम से एप्लाइड एआई एवं शोध विकास से जुड़े पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) आधारित अध्ययन को विशेष रूप से शामिल किया गया है.ALSO READ:वाराणसी में महिलाएं चला रही थीं फर्जी मैट्रिमोनियल रैकेट, 10 गिरफ्तारकुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय के समग्र पोर्टल के विभिन्न मॉड्यूल लागू किए जा चुके हैं. इससे प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा, छात्र सेवाओं और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता एवं दक्षता बढ़ी है. साथ ही प्रशासन और शिक्षण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की गई है. उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता के तहत परिसर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किया गया है. काशी विद्यापीठ उत्तर प्रदेश का एकमात्र विश्वविद्यालय है, जहां मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की गई है. इस केंद्र के माध्यम से शिक्षकों के क्षमता संवर्धन के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय में नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सेमिनार, कार्यशालाएं, शोध परियोजनाएं और नवाचार प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं. छात्रावासों के उन्नयन, परिसर विकास और वित्तीय अनुशासन के माध्यम से विश्वविद्यालय आत्मनिर्भरता की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है.
वाराणसी में महिलाएं चला रही थीं फर्जी मैट्रिमोनियल रैकेट, 10 गिरफ्तार
वाराणसी में महिलाएं चला रही थीं फर्जी मैट्रिमोनियल रैकेट, 10 गिरफ्तार
वाराणसी : ऑपरेशन "साइबर वज्र" के तहत वाराणसी पुलिस ने कैंट क्षेत्र में मैट्रिमोनियल ब्यूरो की आड़ में साइबर ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड किया. रैकेट संचालिका समेत 10 महिलाओं को गिरफ्तार कर 27 मोबाइल समेत कई दस्तावेज बरामद किए गए. पुलिस के अनुसार, गिरोह ने कई लोगों से करीब ₹10 लाख की ठगी की है. कैंट पुलिस और साइबर सेल को सोमवार शाम संयुक्त कार्रवाई में यह सफलता मिली.फर्जी मैट्रिमोनियल ब्यूरो चलाकर शादी कराने के नाम पर लोगों से ठगी करने चाले गिरोह का संचालन अर्दली बाजार स्थित विंध्यवासिनी नगर कॉलोनी के एक फ्लैट से किया जा रहा था.पुलिस के अनुसार, गिरोह की मास्टरमाइंड रागिनी देवी अखबारों में आकर्षक वैवाहिक विज्ञापन प्रकाशित कराती थी. विज्ञापन देखकर संपर्क करने वाले लोगों से 'लाइफटाइम सब्सक्रिप्शन' के नाम पर सदस्यता शुल्क लिया जाता था. इसके बाद वाट्सएप पर युवक-युवतियों की प्रोफाइल भेजी जाती थी, लेकिन वास्तविक परिवारों का संपर्क कभी उपलब्ध नहीं कराया जाता था.50 से अधिक शिकायतों के बाद हुई कार्रवाईइस मामले में पुलिस और साइबर थाने को दर्जनों शिकायतें मिली थीं. शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि पैसे जमा कराने के बावजूद न तो रिश्ता कराया गया और न ही उनकी रकम लौटाई गई. लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर साइबर सेल ने तकनीकी जांच शुरू की.डीसीपी नीतू कादयान ने बताया कि प्रतिबिंब पोर्टल और एनसीआरपी पोर्टल पर दो संदिग्ध मोबाइल नंबरों के खिलाफ लगातार शिकायतें दर्ज हो रही थीं. जांच में सामने आया कि इन्हीं नंबरों के जरिए लोगों से संपर्क कर ठगी की जा रही थी. देश के विभिन्‍न राज्‍यों से भी शिकायतें मिल रही थीं.वाट्सएप के जरिए चलता था पूरा खेलपुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य खुद को मैट्रिमोनियल ब्यूरो का प्रतिनिधि बताकर वाट्सएप पर प्रोफाइल भेजते थे. इसके बाद परिवार का संपर्क देने के नाम पर सदस्यता शुल्क जमा कराया जाता था. एक महिला शिकायतकर्ता से चार किस्तों में ₹7,000 और दूसरे से ₹3,500 वसूले गए, लेकिन किसी को भी वास्तविक वैवाहिक संपर्क नहीं दिया गया.सोमवार को साइबर सेल और कैंट थाना पुलिस ने विंध्यवासिनी नगर कॉलोनी स्थित कार्यालय पर छापा मारा. वहां तीन कमरों में 10 महिलाएं मोबाइल फोन और कीपैड फोन के जरिए लोगों से बातचीत करती मिलीं. तलाशी के दौरान पुलिस ने 27 मोबाइल फोन, एक एसर टैबलेट, चार बिल वाउचर, दो रजिस्टर, किरायानामा, उद्यम पंजीकरण से जुड़े दस्तावेज, मैट्रिमोनियल रजिस्ट्रेशन फॉर्म, तीन क्यूआर कोड, एक पेमेंट साउंड बॉक्स, तीन चेकबुक, एक पासबुक और पांच डेबिट कार्ड बरामद किए. पूछताछ में रागिनी देवी ने स्वीकार किया कि अखबारों में विज्ञापन देकर लोगों को सदस्यता के लिए प्रेरित किया जाता था. पुलिस के अनुसार, साइबर शिकायतों के चलते कुछ बैंक खाते फ्रीज होने के बाद गिरोह ने अन्य बैंक खातों और अलग-अलग क्यूआर कोड के जरिए भी पैसे वसूलने शुरू कर दिए थे.ALSO READ:वाराणसी रिंग रोड फेज 2 पर अज्ञात वाहन में पीछे से टकराया ट्रक, चालक की मौत...गिरफ्तार सभी महिलाए कैंट, शिवपुर, लालपुर, और कैंट थाना क्षेत्र की निवासी बताई गई और उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 3(5), 319(2), 318(4), 336(3) और 340(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस बरामद मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कर रही है, ताकि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और देशभर में इस तरह की साइबर ठगी के मामलों का भी खुलासा किया जा सके.
वाराणसी रिंग रोड फेज 2 पर अज्ञात वाहन में पीछे से टकराया ट्रक, चालक की मौत...
वाराणसी रिंग रोड फेज 2 पर अज्ञात वाहन में पीछे से टकराया ट्रक, चालक की मौत...
वाराणसी : जंसा थाना क्षेत्र में रिंग रोड फेज 2 पर सजोई गांव के पास मंगलवार की सुबह भीषण सड़क हादसा हो गया. तेज रफ्तार ट्रक किसी अज्ञात वाहन में पीछे से टकरा गया, जिससे चालक की मौत हो गई. ट्रक का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया. मशक्‍कत के बाद केबिन में फंसे चालक को बाहर निकाला गया. इस दौरान कुछ देर तक यातायात भी प्रभावित रहा. पुलिस शव कब्‍जे में लेकर अग्रिम कार्रवाई में जुट गई.घटना की सूचना राहगीरों ने जंसा पुलिस को दी. सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और काफी प्रयास के बाद चालक के शव को केबिन से बाहर निकाला. हादसे के समय ट्रक में कोई खलासी मौजूद नहीं था. प्रारंभिक अनुमान है कि चालक को झपकी आने के कारण यह दुर्घटना हुई होगी, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है.जंसा थाना प्रभारी सत्यजीत सिंह ने बताया कि ट्रक के पंजीकरण नंबर के आधार पर मृत चालक की पहचान बरेली निवासी मुनीष गंगवार (पुत्र मुरारी लाल गंगवार) के रूप में हुई है. मुनीष गंगवार करहुआ, थाना सीबीगंज, जनपद बरेली के निवासी थे. कराने का प्रयास किया जा रहा है. शव को कब्जे में लेकर आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है. साथ ही दुर्घटना में शामिल अज्ञात वाहन की भी तलाश की जा रही है. घटना के बाद कुछ देर तक रिंग रोड पर यातायात प्रभावित रहा, जिसे पुलिस ने सामान्य किया. पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है.ALSO READ:संत रविदास की 650वीं जयंती पर समरसता संकल्प अभियान, घाट पर गूंजा 'मन चंगा तो कठौती में गंगा...इस हादसे के बाद स्थानीय निवासियों ने सड़क पर तेज रफ्तार वाहनों की बढ़ती संख्या और लापरवाह ड्राइविंग के प्रति चिंता व्यक्त की है. सड़क दुर्घटनाएं अक्सर गंभीर परिणाम लेकर आती हैं, और यह घटना भी इस बात का प्रमाण है कि सड़क पर सतर्कता और सावधानी बरतना कितना आवश्यक है. पुलिस ने सभी वाहन चालकों से अपील की है कि वे सड़क पर नियमों का पालन करें और सुरक्षित ड्राइविंग को प्राथमिकता दें.