शादी समारोह में रुचि वीरा-एसटी हसन में फिर दिखी तल्खी, होने लगी चर्चा

समाजवादी पार्टी में लोकसभा चुनाव 2024 के समय सांसद रूचि वीरा व पूर्व सांसद डा. एसटी हसन के बीच शुरू हुई रार थमने का नाम ही नहीं ले रही है. समय के साथ टिकट का घाव और भी गहरा होता जा रहा है. टिकट की ये सियासी जंग पूर्व सांसद की बेटी की शादी की दावत के बहाने एक बार फिर से सतह पर आ खड़ी है. इतना ही नहीं सपा के भीतर चल रही गुटबाजी भी अब खुलकर सामने आने लगा है. जी हां, सपा नेता कामिल मंसूरी ने सांसद के आवास के सामने पोस्टर लगाकर इस तकरार में घी डालने का काम कर दिया है.

लोकसभा चुनाव में नामांकन के बाद अचानक से टिकट कटने का जो झटका पूर्व सांसद एसटी. हसन को लगा था, उसका दर्द आज भी पार्टी के भीतर महसूस की जा सकती है. उसी सियासी चोट का असर ये माना जा रहा है कि बेटी की शादी जैसे निजी कार्यक्रम में भी राजनीतिक संदेश छिपा हुआ नजर आने लगा है. वहीं एसटी हसन ने कहा, “मैंने तो शादी में सभी पार्टियों के नेताओं को बुलाया था. रुचि वीरा तो हमारी पार्टी की ही सांसद हैं और मेरे लिए छोटी बहन जैसी हैं. उनको कार्ड क्यों नहीं भेजूंगा?"

दावत में भाजपा विधायकों को बुलाने पर सवाल
बता दें, सियासत की ये लड़ाई का असर शादी कार्यक्रम में साफ दिखा, जहां सांसद रुचि वीरा को आमंत्रित न किया जाना, जबकि भाजपा के दो विधायकों को बुलाया जाना, जो सपा खेमे में कई सवाल खड़े कर गया. हालांकि पूर्व सांसद कार्ड “मिस” होने की बात कर इस रवैये से पलड़ा झाड़ते नजर आ रहे हैं. जबकि, सांसद खेमे का कहना है कि पूर्व सांसद का निजी कार्यक्रम होने के नाते उन्हें शादी की निमत्रंण नहीं दिया गया इस बात का पहाड़ बनाने की कोई जरूरत नहीं है.
ऐसे सोचने वाली बात ये है कि भाजपा के विधायकों को बुलाने का आखिरकार क्या संकेत है, ऐसे में तो यह अब ये चर्चा होने लगी है कि उन्होंने लोकसभा चुनाव में सपा का साथ नहीं दिया और कुंदरकी उपचुनाव में भाजपा की मदद करने में जरा भी हिचकिचाएं नहीं. ये बड़ी बात है. यहीं कारण है कि सांसद खेमे के लोग इसे महज एक इत्तेफाक मानने को तैयार नहीं है.

सियासी मंच बनी बेटी की शादी की दावत
हैरानी इस बात की है कि, पूर्व सांसद की बेटी की शादी की दावत सामाजिक कार्यक्रम से ज्यादा सियासी मंच बन गया, क्योंकि इस समारोह में फोकस रहा तो सिर्फ इस बात पर कि किस नेता की मौजूदगी रही, कौन नदारद रहा, कौन किससे गले मिला और कौन दूरी बनाकर निकला, हर दृश्य को राजनीतिक चश्मे से देखा जा रहा है. कुंदरकी के पूर्व विधायक हाजी मुहम्मद रिजवान को भी दावत में न बुलाए जाने को लेकर भी चर्चाएं हैं. कहा यह जा रहा है कि शादी में बुलाने वालों की सूची महज मेहमानों की नहीं, बल्कि गुटों की थी. लोकसभा चुनाव के दौरान सांसद रूचि वीरा के बेहद करीबी माने जाने वाले एक बड़े नेता का अचानक किनारा कर लेना भी सपा की गुटबाजी व अंदरूनी टकराव की कड़ी माना जा रहा है.



