सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के नाम उपलब्धि, NAAC के तृतीय चक्र में मिला ‘ए’ ग्रेड

वाराणसी - सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद् (NAAC) के तृतीय चक्र के मूल्यांकन में 3.09 सीजीपीए (CGPA) के साथ ‘ए’ ग्रेड प्राप्त कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. यह सफलता विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता, अनुसन्धान परक दृष्टिकोण, प्राशासनिक पारदर्शिता और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति समर्पण का परिणाम है. इस अवसर पर सम्पूर्ण विश्वविद्यालय परिवार ने कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उनके विशेष कार्याधिकारी सुधीर एम बोबडे, डा. पंकज एल जानी तथा अशोक देसाई के प्रति हार्दिक कृतज्ञता और आभार व्यक्त किया. विश्वविद्यालय समुदाय ने माना कि महामहिम कुलाधिपति के सतत मार्गदर्शन और प्रेरणा ने इस उपलब्धि की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाई है.

संस्कृत शिक्षा को मिली नई ऊँचाई
कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने इस अवसर पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि सम्पूर्ण विश्वविद्यालय परिवार के सामूहिक परिश्रम, अनुशासन, समर्पण और गुणवत्तापूर्ण कार्यसंस्कृति का परिणाम है. उन्होंने कहा कि यह न केवल सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा का प्रमाण है, बल्कि संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में काशी और उत्तर प्रदेश की गौरवशाली परम्परा को भी नई ऊँचाई प्रदान करती है.
कुलपति ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक और प्राशासनिक दोनों ही स्तरों पर नवाचार, पारदर्शिता और गुणवत्ता के मानकों को निरन्तर सुदृढ़ किया है. NAAC द्वारा प्रदत्त यह ‘ए’ ग्रेड इस बात का प्रमाण है कि विश्वविद्यालय न केवल पारम्परिक शिक्षा के संरक्षण में अग्रणी है, बल्कि आधुनिक गुणवत्ता-मूलक शिक्षा प्रणाली को भी आत्मसात कर रहा है.
ऐतिहासिक सफलता को बताया सामूहिक प्रयासों का परिणाम
NAAC पीयर टीम द्वारा विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कार्यक्रमों, अनुसन्धान गतिविधियों, छात्र कल्याण योजनाओं, प्राशासनिक प्रक्रियाओं, डिजिटल नवाचारों एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्रों का व्यापक मूल्यांकन किया गया. मूल्यांकन में विश्वविद्यालय की संरक्षणपरक भूमिका, शुद्ध प्राशासनिक व्यवस्था, अनुसन्धान कार्यों की गुणवत्ता और संस्कृत भाषा-संवर्धन के प्रति समर्पण को विशेष रूप से सराहा गया.
विश्वविद्यालय के सभी आचार्यों, अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों, पुरातन छात्रों एवं शुभचिन्तकों ने इस ऐतिहासिक सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि यह उपलब्धि सम्पूर्ण विश्वविद्यालय परिवार के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है.
कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने यह भी कहा कि हमारा संकल्प है कि आने वाले वर्षों में विश्वविद्यालय न केवल भारतीय परम्परा और संस्कृति के संरक्षण में, बल्कि वैश्विक स्तर पर संस्कृत ज्ञान-विज्ञान के प्रसार में भी नई दिशा प्रदान करेगा.
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