संस्कृति और विज्ञान के समन्वय से बनेगा सशक्त भारत: अभिभावक संगोष्ठी

वाराणसी : भारतीय शिक्षा बोर्ड के तत्वावधान में अभिभावक संगोष्ठी का आयोजन सुभाष इंटर कॉलेज, चौबेपुर-वाराणसी के मैदान में संपन्न हुआ. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बोर्ड के चेयरमैन डॉ. एन. पी. सिंह रहे, जबकि अध्यक्षता बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्राणीशास्त्र विभाग के डीएनए वैज्ञानिक प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने की.

बदलते समय के अनुरूप शिक्षा सुधार की आवश्यकता
संगोष्ठी में वक्ताओं ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर चिंतन प्रस्तुत करते हुए कहा कि आज की पीढ़ी मोबाइल के अत्यधिक उपयोग में अपना अमूल्य समय व्यतीत कर रही है. राष्ट्र और समाज से जुड़े विषयों पर सोचने के लिए समय निकालना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि आने वाली शताब्दी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का युग है, ऐसे में यदि शिक्षा प्रणाली में समयानुकूल परिवर्तन नहीं किए गए तो भारत वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ सकता है.
वक्ताओं ने 1835 में लागू शिक्षा व्यवस्था के मूल ढांचे में अपेक्षित परिवर्तन न होने की ओर संकेत करते हुए कहा कि शिक्षा केवल परीक्षा-केन्द्रित न होकर विचार-केन्द्रित और कौशल-आधारित होनी चाहिए. बोर्ड ने विद्यार्थियों के समग्र विकास और स्किल डेवलपमेंट पर विशेष बल देने का संकल्प दोहराया.
संस्कृति और मूल्यों से जुड़ाव पर चिंता
संगोष्ठी में यह भी चिंता व्यक्त की गई कि आधुनिक प्रभावों के कारण नई पीढ़ी अपने पारंपरिक त्योहारों और सांस्कृतिक मूल्यों से दूर होती जा रही है. वक्ताओं ने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी प्राचीन संस्कृति और वैचारिक परंपरा में निहित है.
भारतीय चिंतन परंपरा का उल्लेख करते हुए बताया गया कि यहाँ उत्तर थोपे नहीं जाते, बल्कि स्वयं खोजने की प्रेरणा दी जाती है. गुरु वशिष्ठ द्वारा श्रीराम को दिए गए उपदेश का उदाहरण देते हुए कहा गया कि अवसादग्रस्त व्यक्ति न स्वयं का, न परिवार का और न ही राष्ट्र का कल्याण कर सकता है.
वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा
विज्ञान शिक्षा के क्षेत्र में जानकारी दी गई कि देश के लगभग 60 वैज्ञानिकों द्वारा तैयार पाठ्यक्रम को एच. सी. वर्मा के मार्गदर्शन में विकसित किया गया है. उल्लेखनीय है कि वे ‘Concepts of Physics’ के लेखक हैं. इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तार्किक चिंतन विकसित करना है.
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विभिन्न विद्यालयों की सहभागिता
कार्यक्रम का संयोजन बृजमोहन (समन्वयक, भारतीय शिक्षा बोर्ड–यू.पी. पूर्व) एवं मनु श्री (समन्वयक, वाराणसी एवं मिर्जापुर मंडल) के नेतृत्व में किया गया. आयोजन में इलीट इंग्लिश स्कूल, वी लर्न अकैडमी, के एल इंग्लिश स्कूल, श्वेता कॉन्वेंट स्कूल तथा मान्यता की प्रक्रिया में शामिल सनशाइन पब्लिक स्कूल, सीटीएमएस स्कूल और आरएनवीएम कॉन्वेंट स्कूल की सक्रिय सहभागिता रही.
समग्र विकास पर बल
अंत में बोर्ड ने स्पष्ट किया कि भारतीय शिक्षा बोर्ड का उद्देश्य केवल शैक्षणिक उपलब्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिकता, कौशल, सांस्कृतिक जागरूकता और सकारात्मक सोच का समग्र विकास करना है.


