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काशी में महानाट्य के जरिए सम्राट विक्रमादित्‍य का जीवन चरित्र जीवंत, युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत

काशी में महानाट्य के जरिए सम्राट विक्रमादित्‍य का जीवन चरित्र जीवंत, युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत
Apr 04, 2026, 07:22 AM
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Posted By Preeti Kumari

वाराणसी : बाबा विश्‍वनाथ की नगरी में काशी में महानाट्य के जरिए सम्राट विक्रमादित्‍य का जीवन चरित्र जीवंत हुआ. इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समय बदल चुका है. अब समाज में आक्रांताओं को नहीं, बल्कि सुशासन और न्याय के महान नायकों को स्थान मिल रहा है. उन्‍होंने रणवीर सिंह की फिल्‍म धुरंधर की तारीफ की

और कहा कि युवा पीढ़ी आज राजा विक्रमादित्य जैसे आदर्श व्यक्तित्वों से परिचित हो रही है और काशी इसका साक्षी बन रही है.


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वह भारतीय रेल इंजन कारखाना (बरेका) परिसर में आयोजित ‘सम्राट विक्रमादित्य’ महानाट्य का मप्र के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव के साथ शुभारंभ करने के अवसर पर लोगों को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान डॉक्टर मोहन यादव ने योगी आदित्यनाथ को धर्म पट्टिका और विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की प्रतिकृति भेंट की. योगी ने काशी और उज्जैन की आध्यात्मिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि काशी बाबा विश्वनाथ की पावन धरा है, जबकि उज्जैन महाकाल की नगरी है. जो समय की गति को नहीं समझता, उसे महाकाल स्वयं दंडित करते हैं, जबकि जो समय के अनुरूप स्वयं को ढालता है, उस पर महाकाल की कृपा होती है.


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योगी ने राजा भर्तृहरि और सम्राट विक्रमादित्य की जोड़ी की तुलना इनसे की


योगी ने राजा भर्तृहरि और सम्राट विक्रमादित्य की जोड़ी की तुलना भगवान राम-लक्ष्मण और श्रीकृष्ण-बलदाऊ से की. उन्होंने बताया कि भर्तृहरि ने नाथ संप्रदाय में दीक्षा ली थी. उनकी दीक्षा भूमि भले ही उज्जैन रही हो, लेकिन साधना स्थली काशी के पास स्थित चुनार किला रही है. यह आयोजन केवल एक नाट्य मंचन नहीं, बल्कि भारत की गौरवशाली परंपराओं और महान विभूतियों के प्रति श्रद्धांजलि है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा.


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मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और अयोध्या धाम में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर के निर्माण के बाद से देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालु हर वर्ष काशी और अयोध्या आ रहे हैं. अयोध्या नगरी के पुनरुत्थान में भी महाराज विक्रमादित्य की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. 2000 वर्ष पहले अयोध्या नगरी को खोजने का कार्य सम्राट विक्रमादित्य ने ही किया था. प्रभु श्रीराम के पुत्र लव के बाद सबसे पहले श्रीराम मंदिर भी सम्राट विक्रमादित्य ने बनवाया था. प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सम्राट विक्रमादित्य के प्रयासों को ही आगे बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है.


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मोहन यादव बोले-सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हुए विकास का नया पैमाना गढ़ रहे दोनों प्रदेश


इस अवसर पर एमची के सीएम डा. मोहन यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य भारतीय इतिहास के ऐसे महान शासक थे, जिनकी कीर्ति आज भी जनमानस में जीवंत है. उनका नाम न्याय और पराक्रम का पर्याय है. इस तरह के आयोजन न केवल मनोरंजन करते हैं, बल्कि समाज को शिक्षित भी करते हैं. मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हुए विकास के नए मानक स्थापित कर रहे हैं. दोनों राज्य पर्यटन और संस्कृति के क्षेत्र में मिलकर कार्य कर रहे हैं. उन्होंने बेतवा नदी को जोड़ने की परियोजना का भी उल्लेख किया, जिसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में आगे बढ़ाया जा रहा है.


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योगी को सौंपी विक्रमादित्य वैदिक घड़ी


मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की प्रतिकृति सौंपी. योगी प्राचीन भारतीय समय-ज्ञान और वैदिक गणित पर आधारित करीब 700 किलोग्राम वजनी विक्रमादित्य वैदिक घड़ी को बाबा विश्वनाथ को अर्पित करेंगे. कालगणना के केंद्र रहे महाकाल की नगरी उज्जैन में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की स्थापना के बाद इसे देशभर में स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों में स्थापित किया जा रहा है.


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आज धाम में स्‍थापित होगी वैदिक घड़ी


उज्जैन के बाद श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में शनिवार को वैदिक घड़ी स्थापित की जाएगी. यह घड़ी भारतीय पंचांग और सूर्य की स्थिति के आधार पर समय की गणना करने की पारंपरिक पद्धति को आधुनिक रूप में प्रस्तुत करती है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2024 में इस घड़ी का लोकार्पण किया था. भारतीय काल गणना के लिए वैदिक घड़ी का एप भी तैयार किया जा चुका है. इस एप को 40 भाषाओं में देखा जा सकता है.

संत रविदास की 650वीं जयंती पर समरसता संकल्प अभियान, घाट पर गूंजा 'मन चंगा तो कठौती में गंगा...
संत रविदास की 650वीं जयंती पर समरसता संकल्प अभियान, घाट पर गूंजा 'मन चंगा तो कठौती में गंगा...
संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में गुरु पूर्णिमा से चल रहे राष्ट्रव्यापी 'समरसता संकल्प अभियान' के तहत मंगलवार को संत रविदास घाट पर नमामि गंगे द्वारा 'मन चंगा तो कठौती में गंगा' कार्यक्रम का आयोजन किया गया. हाथों में संत रविदास के संदेश लिखी तख्तियां और कठौती में गंगाजल लेकर उपस्थित लोगों ने सामाजिक समरसता, आंतरिक पवित्रता, सच्चे कर्म और मानवता का संदेश दिया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. उत्तम ओझा ने संत रविदास के विचारों को आज भी समाज के लिए प्रासंगिक बताते हुए उनके समरसता और नैतिक जीवन के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया.वहीं नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक एवं नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेश शुक्ला ने कहा कि 'मन चंगा तो कठौती में गंगा' केवल एक कथन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, सदाचार और समानता का जीवन-दर्शन है. इस अवसर पर पुष्पलता वर्मा, विशाल केसरी, दिनेश कुमार सिंह, सतवंत भारती, रवि निषाद, संजय शर्मा सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे.बता दें कि शिरोमणी गुरु रविदास जी के 650वें जयंती वर्ष पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा 29 जुलाई गुरु पुर्णिमा से लेकर 20 फरवरी माघी पुर्णिमा तक देशभर में विविध आयोजन किए जा रहे हैं. भाजपा देशभर में "संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास सामाजिक समरसता अभियान" चलाएगी. अभियान का उद्देश्य गुरु रविदास के समरसता, कर्मयोग, भक्ति और सामाजिक सद्भाव के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है. अभियान पांच चरणों में संचालित होगा. प्रथम चरण के तहत 29 जुलाई को गुरु रविदास की जन्मस्थली एवं स्मारक पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा जन्मस्थली मंदिर के महंत संत निरंजन दास महाराज सहित अनेक संत एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहेंगे.इससे पहले 28 जुलाई को देशभर से आने वाले कार्यकर्ताओं की टोलियां गुरु रविदास स्मारक स्थल पर पवित्र मिट्टी का पूजन कर 131 कलश तैयार करेंगी. इसके बाद स्मारक स्थल से गुरु रविदास जन्मस्थली मंदिर तक विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी, जहां सभी कलशों का विधिवत पूजन होगा.
गुरु पूर्णिमा से पहले शंकराचार्य की चरण पादुका का पूजन, काशीवासियों से किया गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान.
गुरु पूर्णिमा से पहले शंकराचार्य की चरण पादुका का पूजन, काशीवासियों से किया गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान.
वाराणसी : गुरु पूर्णिमा से पूर्व काशी के श्रद्धालुओं ने सोमवार को शंकराचार्य घाट स्थित श्रीविद्यामठ में ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की चरण पादुका का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजन किया। इस अवसर पर शंकराचार्य ने काशीवासियों और देशभर के श्रद्धालुओं से गुरु पूर्णिमा पर गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान किया।बताया गया कि इस वर्ष शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती गुरु पूर्णिमा के अवसर पर काशी में उपस्थित नहीं रहेंगे। वे छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले स्थित सपाद लक्षेश्वर धाम में चातुर्मास्य व्रत एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करेंगे। इसी कारण श्रद्धालुओं ने गुरु पूर्णिमा से पहले ही उनकी चरण पादुका के पूजन की अनुमति मांगी थी, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।पूजन के दौरान श्रद्धालुओं ने गौमाता की रक्षा के लिए 81 दिवसीय 'गविष्ठी यात्रा' पूर्ण करने पर शंकराचार्य का अभिनंदन भी किया। अपने संदेश में शंकराचार्य ने कहा कि गौमाता सनातन धर्म की आस्था का केंद्र हैं और शास्त्रों के अनुसार 33 कोटि देवी-देवताओं का निवास उनमें माना गया है। उन्होंने कहा कि हर सनातनी को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गौरक्षा का संकल्प लेकर इस अभियान से जुड़ना चाहिए।शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि चातुर्मास के दौरान सपाद लक्षेश्वर धाम में विभिन्न आध्यात्मिक अनुष्ठान आयोजित होंगे। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा क्षेत्रों के प्रतिनिधियों की तीन दिवसीय कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी, जिसमें उन्हें गौरक्षा आंदोलन और शंकराचार्य की गौरक्षा नीति को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।ALSO READ: बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.उन्होंने बताया कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मंगलवार, 28 जुलाई को काशी से छत्तीसगढ़ के लिए प्रस्थान करेंगे।कार्यक्रम में साध्वी पूर्णांबा दीदी, ब्रह्मचारी परमात्मानंद, स्वामी निधिरव्यानंद, गिरीश चंद्र तिवारी, अविनाश मिश्रा, रवि त्रिवेदी, रमेश उपाध्याय, अभय शंकर तिवारी, विमल तिवारी, हजारी कीर्ति शुक्ला, मनीष पाण्डेय, मयंक दोषी, शाश्वत मिश्रा, लता पाण्डेय, मंजरी पाण्डेय, चांदनी चौबे, नीलम दुबे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.
बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में पर्यावरण संरक्षण और हरित परिसर के विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार को 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत केंद्रीय कार्यालय परिसर में विशेष पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। अभियान का शुभारंभ कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी और कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने केंद्रीय कार्यालय के सामने नीलमोहर का पौधा लगाकर किया।अभियान के तहत विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न स्थानों पर कुल 111 पौधों का रोपण किया गया। इनमें 100 रक्तमंजरी और 11 नीलमोहर के पौधे शामिल हैं। खास बात यह रही कि बीएचयू परिसर में पहली बार नीलमोहर के पौधे लगाए गए हैं। आकर्षक नीले-बैंगनी फूलों वाला नीलमोहर (जैकारैंडा मिमोसिफोलिया) अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इन पौधों के रोपण से परिसर की जैव विविधता समृद्ध होगी और हरित वातावरण को बढ़ावा मिलेगा।ALSO READ: सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश देता है। वहीं, रक्तमंजरी के पौधे भी परिसर की हरित आभा और सौंदर्य को और आकर्षक बनाएंगे।पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन उद्यान विशेषज्ञ इकाई के आचार्य प्रभारी प्रो. सरफराज आलम के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर प्रो. अनुराग दवे, प्रो. राकेश कुमार सिंह, डॉ. संजीव सर्राफ, अश्विनी देशवाल, भरत पांडे सहित उद्यान इकाई एवं केंद्रीय कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।