सपा प्रमुख पर टिप्पणी के विरोध में मंत्री के पोस्टर पर फूटा गुस्सा, जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन...

वाराणसी : यूपी के स्टांप, न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल द्वारा समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर कथित विवादित टिप्पणी के विरोध में गुरुवार को वाराणसी में समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया. जिला मुख्यालय के सामने हुए प्रदर्शन के दौरान मंत्री के पोस्टर पर जूते-चप्पल बरसाए गए. बड़ी संख्या में शामिल सपाइयों ने मंत्री को तत्काल बर्खास्त करने की मांग उठाई गई. उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि एक संवैधानिक पद पर बैठे मंत्री द्वारा इस तरह की भाषा का प्रयोग लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है. प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मंत्री रविन्द्र जायसवाल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.
प्रदर्शन में मौजूद सपा के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) आशुतोष सिन्हा ने कहा कि मंत्री का कथित बयान बेहद आपत्तिजनक है और इससे प्रदेश की राजनीतिक गरिमा को ठेस पहुंची है. उन्होंने कहा कि यदि सरकार ऐसे बयानों पर कार्रवाई नहीं करती है तो यह उसकी मंशा को भी दर्शाता है. उन्होंने मांग की कि मंत्री को तत्काल मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया जाए और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए. सपा नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस मामले में जल्द कार्रवाई नहीं की तो पार्टी पूरे प्रदेश में आंदोलन को और तेज करेगी.
बता दें कि कि मंत्री रविन्द्र जायसवाल के एक कथित वायरल वीडियो को लेकर पहले ही राजनीतिक विवाद खड़ा हो चुका है. इस मामले में आज़ाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर भी राज्यपाल से कार्रवाई की मांग कर चुके हैं. वहीं, मंत्री की ओर से इस विवाद पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
also read:वाराणसी में एक चोर के पकडे जाने पर खुली चोरी की कई घटनाएं, नकदी और जेवर बरामद...
यह है विवाद
स्टांप, न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल ने बुधवार को निबंधन कार्यालय के उद्घाटन के बाद मीडिया से बातचीत में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहते कब्रिस्तानों की चारदीवारी का निर्माण कराया गया, लेकिन श्मशानों के विकास के लिए कोई धनराशि उपलब्ध नहीं कराई गई. उन्होंने यह भी दावा किया कि उस समय वे विधायक थे और श्मशानों की चारदीवारी की मांग उठाई थी, लेकिन इसके लिए धनराशि नहीं दी गई.
इसी दौरान मीडिया से बातचीत में उनकी जुबान फिसल गई और उन्होंने अखिलेश यादव का जिक्र करते हुए आपत्तिजनक शब्द 'ससुरा' का प्रयोग किया. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव 'लुंगी और जालीदार टोपी पहनने वालों' की वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं. राज्यमंत्री के इस बयान के बाद राजनीति में हलचल मच गई है.



