Daily Bulletin Tag
AI गार्गी दैनिक बुलेटिन

वाराणसी के वरिष्‍ठ पत्रकार विजय सिंह जूनियर नहीं रहे, गुरुग्राम के मेदांता हास्पिटल में ली आखिरी सांस

वाराणसी के वरिष्‍ठ पत्रकार विजय सिंह जूनियर नहीं रहे, गुरुग्राम के मेदांता हास्पिटल में ली आखिरी सांस
Dec 29, 2025, 08:36 AM
|
Posted By Gaandiv

वाराणसी - बनारस के वरिष्‍ठ पत्रकार विजय सिंह जूनियर नहीं रहे. सोमवार की सुबह गुरुग्राम के मेदांता हास्पिटल में उन्‍होंने आखिरी सांस ली. एक सप्‍ताह पहले ब्रेन हैमरेज के कारण उन्‍हें वहां भर्ती कराया गया था. उनके निधन की खबर मिलते ही पूर्वांचल के पत्रकारों में शोक की लहर दौड़ गई. वह अपने पीछे पत्‍नी, एक पुत्र और तीन पुत्रियों को छोड़ गए. पत्रकारिता जगत में उनके कुछ तकिया कला को लेकर उन्‍हें हमेश याद रखा जाएगा. पत्रकारों के बीच विजय सिंह जूनियर एक हंसते-हंसाते हुए शख्स थे. वह ऐसे पल भी शब्दों की फुलझड़ी छोड़ सकते थे. जब इसकी जरूरत न हो, अपेक्षा नहीं हो या तब भी जब ऐसा करना आपत्तिजनक तक लग जाए! रोक-टोंक, निषेध, आपत्ति आदि कुछ भी यदि सामने आ जाए तो इसे चुटकी में उड़ाते हुए वह फिर हंस देते. '' छोड़िए यह सब... खुश रहिए और सबको खुश रखिए... आइए, एक-एक कप चाय लड़ा ली जाए! .'' का बाऊजी , का पुराने, का बुढऊ, जल्दी कर, हमरे पास टाइम नहीं हव... किसी को बोलने वाले विजय जल्द ही साथ छोड़ गए.

VNS


गांडीव, काशी वार्ता, दैनिक जागरण में अपनी सेवाएं देने वाले विजय किसी परिचय के मोहताज नहीं थे. क्राइम रिपोर्टिंग में उनके पैनी नजर हमेशा से रही. ऐसा प्यारा इंसान इस तरह अचानक रुखसत हो लेगा, सोचना संभव नहीं था, लेकिन जहां असंभव भी सहज संभव हो, वही तो यह दुनिया है.


पत्रकारिता से नाम में जुड़ा था जूनियर शब्‍द


विजय सिंह के नाम में जूनियर शब्‍द जोडे जाने का भी एक इतिहास है. दरअसल, विजय एक फोटोग्राफर के तौर पर पत्रकारिता में प्रवेश किया था. उस समय एक वरिष्‍ठ फोटोग्राफर विजय सिंह भी मशहूर थे. एक समय दोनों फोटोग्राफर थे इसलिए यह चिन्हीकरण करना पड़ा. बाद में जूनियर रिपोर्टर में प्रमोट हो गए लेकिन लोगों की जुबान ने नाम से यह शब्द नहीं हटने दिया.


ALSO READ: गांजा चिलम छीनने के विवाद में चाकू से की थी युवक की हत्‍या, आरोपी गिरफ्तार

इन सरकारी अस्पतालों का हाल-बेहाल, मरीजों को नहीं मिल रही दवाइयां
इन सरकारी अस्पतालों का हाल-बेहाल, मरीजों को नहीं मिल रही दवाइयां
These government hospitals are in a bad state, patients are not getting medicines.Varanasi News: सरकारी अस्पताल अक्सर गरीबों का सहारा होता है, मगर जब यहां से भी इन्हें मायूसी मिलती है तो काफी सोचने वाली है. जी हां, एक ऐसा नजारा जो उत्तर-प्रदेश के वाराणसी जिले के सरकारी अस्पतालों में इलाज मुफ्त मिल तो रहा है, लेकिन मरीजों और उनके तीमारदारों को कॉटन बैंडेज, सर्जिकल ब्लेड और यहां तक कि टांका लगाने वाला धागा तक अस्पताल के बाहर स्थित निजी दुकानों से खरीदना पड़ रहा है. ये स्थिति ऐसे समय पर देखने को मिल रही है जब वाराणसी को बीएचयू समेत जिले के 17 अस्पतालों में सुविधाओं पर करोड़ों रुपये खर्च करने के लिए आए दिन 62.19 करोड़ के बजट में 5.56 करोड़ रुपये तक मरीजों के नाम पर खर्च नहीं कर पाता है. हालांकि, बीएचयू समेत कई अस्पतालों में यह समस्या आम है, फिर भी अपनी हरकतों से बाज ना आने वाला ये स्वास्थ्य विभाग पर्याप्त मरीजों को सुविधाएं उपलब्ध होने का झूठा दावा खुलेआम करता है. जो बड़े ही शर्म की बात है.अस्पताल के बजाय बाहर से खरीदनी पड़ रही दवाएं वहीं, कई गंभीर सर्जरी के मामलों में तो सर्जिकल किट और एनेस्थीसिया की दवाएं भी बाहर से मंगाना अब एक सामान्य प्रक्रिया बन गई है, बीएचयू, मंडलीय, जिला अस्पताल समेत कई सीएचसी-पीएचसी में यह स्थिति है, स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि मरीजों को सभी सुविधाएं अस्पताल में उपलब्ध कराई जा रही हैं. बावजूद इसके मरीजों को सुविधाओं के लिए निजी मेडिकल स्टोर पर पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं. जिला स्वास्थ्य समिति की फरवरी 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में अस्पतालों में सुविधाओं पर खर्च करने के लिए आए 62.19 करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया था, लेकिन प्रसव के दौरान बाहर से विक्रिल 2-0 (सीसीएन 2317), विक्रिल 1 नं. (2347), विक्रिल (2437), प्रोलीन 0 नं. के सूचर बाहर से ज्यादतर मंगाए जाते हैं.Also Read: प्रताड़ना से तंग आकर बुजुर्ग ने की आत्महत्या की कोशिश, मददगार बने समाजसेवी अमन कबीरबता दें, सलारपुर के रहने वाले गोपाल ने अपनी पत्नी को प्रसव के लिए बीएचयू एमसीएच विंग में भर्ती कराया था, चिकित्सकों ने ऑपरेशन से 30 मिनट पहले उन्हें सादे पर्चे पर कुछ सामान लिखकर लाने को कहा, तभी गोपाल ने तत्काल अस्पताल के बाहर स्थित मेडिकल स्टोर से 4870 रुपये का सामान खरीदा, इसमें दो ऑपरेशन में प्रयोग होने वाले टांके, तीन इंजेक्शन और एक कॉटन का बड़ा पैकेट शामिल था.सर्जिकल सामानों का नहीं कोई निश्चित दामबताया जा रहा है कि, सर्जिकल सामानों का कोई निश्चित दाम नहीं हाते है. कॉटन, बैंडेज एमआरपी के अलावा अलग-अलग दरों पर भी बाजार में बिकते हैं, जिसकी जितनी पहुंच, उसे उतना ही सस्ता सामान मिल रहा है. उदाहरण के लिए 200 ग्राम के कॉटन की एमआरपी 150 से 180 रुपये के बीच होती है, वहीं इसकी बिक्री 80-150 रुपये के बीच होती है. उसी प्रकार सर्जिकल ब्लेड अलग-अलग नंबर और साइज के अनुसार 10 से 35 रुपये में बिक रहे हैं. अस्पतालों में सभी दवाएं और जरूरी सामान उपलब्ध कराए गए हैं, बहुत कम मामलों में कुछ दवाएं ऐसी होती हैं, जिन्हें बाहर से लिखा जाता है. उन दवाओं को भी अस्पतालों में उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है.https://www.youtube.com/watch?v=cXbiN13VBxk
प्रताड़ना से तंग आकर बुजुर्ग ने की आत्महत्या की कोशिश, मददगार बने समाजसेवी अमन कबीर
प्रताड़ना से तंग आकर बुजुर्ग ने की आत्महत्या की कोशिश, मददगार बने समाजसेवी अमन कबीर
Tired of harassment, elderly man attempts suicide, social worker Aman Kabir helps himवाराणसी: एक मार्मिक घटना सामने आई है, जहां बिहार के रोहतास जिले का एक वृद्ध व्यक्ति प्रताड़ना से तंग आकर काशी पहुंच गया. बताया जा रहा है कि एक अकेला युवक उसे लगातार परेशान और प्रताड़ित करता था, जिससे वह मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुका था. लगातार हो रही इस प्रताड़ना से परेशान होकर वृद्ध ने अपना घर छोड़ दिया और काशी आ गया, यहां आकर भी वह गहरे तनाव में था और जिंदगी से निराश होकर आत्महत्या करने का मन बना चुका था.बुजुर्ग के सहारे बने ये समाजसेवी इसी दौरान समाजसेवी कार्यकर्ता अमन कबीर की नजर उस पर पड़ी, उन्होंने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए वृद्ध को रोका और उससे बातचीत कर उसकी स्थिति को समझा. अमन कबीर ने धैर्यपूर्वक उसे समझाया और उसका हौसला बढ़ाया, जिसके बाद वृद्ध ने आत्महत्या का इरादा छोड़ दिया. इसके बाद अमन कबीर उस वृद्ध को काशी कुष्ठ सेवा संघ के वृद्ध आश्रम लेकर गए, जहां फिलहाल वह रह रहा है.Also Read: विश्वनाथ मंदिर में मंगला आरती की शुरू नई व्यवस्था, 90 दिनों तक बाबा के नहीं होंगे दर्शनबुजुर्ग को मिला आश्रम का सहारा आश्रम में उसे रहने और खाने की सुविधा के साथ-साथ देखभाल भी मिल रही है, जिससे अब वह सुरक्षित माहौल में अपना जीवन बिता रहा है. यह घटना न सिर्फ मानवता की मिसाल है, बल्कि यह भी दिखाती है कि सही समय पर की गई मदद किसी की जिंदगी बचा सकती है, समाजसेवी अमन कबीर जैसे लोग आज के समय में उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण हैं, जो किसी न किसी कारण से जीवन से निराश हो जाते हैं.https://www.youtube.com/watch?v=cXbiN13VBxk
विश्वनाथ मंदिर में मंगला आरती की शुरू नई व्यवस्था, 90 दिनों तक बाबा के नहीं होंगे दर्शन
विश्वनाथ मंदिर में मंगला आरती की शुरू नई व्यवस्था, 90 दिनों तक बाबा के नहीं होंगे दर्शन
New arrangements for Mangala Aarti begin at Vishwanath Temple; Baba will not be seen for 90 daysVaranasi News: वाराणसी का काशी विश्वनाथ मंदिर को लेकर लोगों की भक्ती और आस्था गजब की है, ये मंदिर अपनी संस्कृति और भव्य सुंदरती के लिए बड़ा ही लोकप्रिय हैं. भोल की नगरी में बसा ये विशाल मंदिर की अद्भुत परंपरा है. कहते है महादेव के इस मंदिर में माथा टेकने से उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है. इसी मंदिर में मंगला आरती के दर्शन को लेकर नई व्यवस्था लागू कर दी गई है. जी हां, अब कोई भी भक्त एक बार मंगला आरती का दर्शन करने के बाद 90 दिन तक दोबारा बुकिंग नहीं कर सकेगा. इस तरह का निर्णय लेने के पीछे मंदिर प्रशासन का यह उद्देश्य है कि, मंदिर व्यवस्थाओं को पूरी तरह से पारदर्शी बनाने और ज्यादा से ज्यादा श्रद्धालुओं को दर्शन देने का अवसर देने के लिए यह कदम उठाया गया है.जानें मंदिर परिसर ने क्यों लिया ये निर्णयजानकारी के मुताबिक, विश्वनाथ मंदिर में मंगला आरती दर्शन करने के लिए लागू हुई नई व्यवस्था में एक आधार नंबर दिया जाएगा, जिसमें टिकट बुक करने के बाद 90 दिन तक दोबारा बुकिंग नहीं होगी, टिकट संख्या 200-300 से बढ़ाकर 700-800 कर दी गई है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी, दलालों पर रोक लगेगी और अधिक श्रद्धालुओं को अवसर मिलेगा, मतलब साफ है कि, इस आधार नंबर की मदद से अब कोई भी दुबारा से मंगला आरती का दर्शन नहीं कर सकेगा. जिससे दूसरे श्रद्धालुओं को भी आरती का दर्शन करने का मौका मिल सकेगा.बिना दर्शन घर नहीं लौटेंगे श्रद्धालुदरअसल, इस फैसले से पहले मंगला आरती के टिकटों की बुकिंग में अनियमितताओं की शिकायतें मिलती रही हैं, एक ही आधार नंबर से कई बार टिकट बुक कर लिए जाते थे, जिससे आम श्रद्धालुओं को टिकट नहीं मिल पाता था और उन्हें निराश होकर वापस अपने घर लौटना पड़ जाता था. इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए अब एक आधार नंबर से एक बार टिकट बुक होने के बाद अगली बुकिंग तीन महीने बाद ही संभव होगी.Also Read: इस सेंट्रल जेल में ई-ऑफिस व्यवस्था लागू, अब रिहाई करना हुआ आसान